# बस्तर में गेंदे के फूलों से चमकी किसान की किस्मत, त्योहारी सीजन में ₹80 किलो मिल रहा भाव

> बस्तर के किसान पुरुषोत्तम पटेल ने आधे एकड़ में गेंदे के फूल उगाकर त्योहारों के मौके पर मजबूत कमाई की राह तैयार की है, जहां थोक भाव 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/bastar-men-gende-ke-phulon-se-chamaki-kisana-ki-kismata-tyohari-sijana-men-80-kilo-mila-raha-bhava-38451 · **Language:** Hindi
**Tags:** बस्तर, गेंदा की खेती, किसान, बागवानी, दशहरा, कृषि मुनाफा, फूल बाजार

त्योहारी सीजन की शुरुआत होते ही फूलों की मांग तेजी से बढ़ने लगती है, और इसी मौके को बस्तर के एक प्रगतिशील किसान ने अपनी बेहतर आमदनी का जरिया बना लिया है। किसान पुरुषोत्तम पटेल ने लगभग आधे एकड़ रकबे में गेंदे की व्यावसायिक खेती की है। उनकी इस कोशिश से लगभग डेढ़ लाख रुपये की कुल आमदनी होने का अनुमान है। कम लागत और सीमित देखरेख में तैयार होने वाली यह बागवानी फसल इलाके के किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनकर सामने आई है।

## खेत की तैयारी और रोपाई का सही तरीका
गेंदे की सफल पैदावार के लिए खेत की बुनियादी तैयारी बेहद अहम भूमिका निभाती है। किसान पुरुषोत्तम पटेल के अनुसार, सबसे पहले खेत की दो से तीन बार अच्छी तरह जुताई की जाती है और फिर मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए रोटावेटर चलाया जाता है। इसके उपरांत सुनियोजित तरीके से क्यारियां यानी बेड तैयार की जाती हैं और नर्सरी से पौधे लाकर रोपे जाते हैं। पौधों के समुचित विकास और धूप हवा के सही आवागमन के लिए एक बेड से दूसरे बेड की दूरी 4 फीट तय की जाती है, जबकि कतार में पौधे से पौधे के बीच 2 फीट का अंतर रखा जाता है। रोपाई के महज एक से डेढ़ महीने के भीतर पौधों में फूल खिलने लगते हैं, और यह पैदावार लगातार लगभग छह महीने तक चलती रहती है।

## लागत, पोषण प्रबंधन और मुनाफे का गणित
आधे एकड़ क्षेत्र में गेंदे की खेती पर करीब 50 हजार रुपये की कुल लागत आती है। पोषण प्रबंधन के लिए मिट्टी में देसी गोबर खाद के साथ-साथ सुपर फास्फेट और डीएपी का संतुलित इस्तेमाल किया जाता है। फसल के नियमित रखरखाव और बेहतर गुणवत्ता वाले फूलों के लिए 19:19:19 और 12:61:0 जैसे घुलनशील फर्टिलाइजर का छिड़काव किया जाना जरूरी होता है। इस योजनाबद्ध देखरेख के बाद करीब डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी होने की पूरी संभावना बनती है, जिससे लागत काटकर किसान को शुद्ध लाभ मिल जाता है।

## त्योहारी मांग और फसल सुरक्षा के उपाय
बस्तर क्षेत्र में फूलों की खपत का दायरा काफी बड़ा है। पूजा-पाठ और दशहरा जैसे बड़े पर्वों के चलते इन दिनों गेंदे के फूलों की मांग चरम पर पहुंच चुकी है, जिसके चलते थोक मंडियों में फूल 80 रुपये प्रति किलो के स्तर पर बिक रहे हैं। हालांकि गेंदे की फसल में सामान्य तौर पर बीमारियों का प्रकोप कम देखा जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में ब्लाइट जैसी फफूंदजनित बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। कीटों और अन्य रोगों से सुरक्षा के लिए समय पर कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करना पड़ता है। अपनी आय को अधिक सुरक्षित और विविध बनाने के लिए किसान ने इसी खेत में टमाटर और मिर्च की फसलें भी लगा रखी हैं।

## इसका आप पर असर
त्योहारी सीजन में फूलों की मांग बढ़ने से किसानों को वैकल्पिक फसलों में सीधे लाभ कमाने का मौका मिलता है, जबकि खरीदारों को थोक भाव का रुझान समझने में मदद मिलती है।

- **बस्तर में:** स्थानीय फूल उत्पादकों को दशहरा और पूजा के समय 80 रुपये प्रति किलो का थोक भाव मिल रहा है। त्योहारी मांग का फायदा उठाने के लिए किसान अपनी तुड़ाई सीधे स्थानीय थोक बाजार में ले जा सकते हैं।
- **किसानों के लिए:** आधे एकड़ में 50 हजार रुपये की लागत लगाकर करीब डेढ़ लाख रुपये तक का सकल राजस्व हासिल किया जा सकता है। कम रकबे वाले किसान पारंपरिक फसलों के साथ गेंदा, मिर्च और टमाटर की मिली-जुली खेती अपना सकते हैं।
- **उपभोक्ताओं के लिए:** थोक बाजार में तेजी के चलते खुदरा बाजारों में पूजा और सजावट के फूलों के दाम चढ़े रह सकते हैं। खरीदार त्योहार से पहले सामूहिक या सीधे थोक स्तर पर खरीदारी कर लागत घटा सकते हैं।
- **फसल प्रबंधन में:** बारिश के दिनों में ब्लाइट रोग से बचाव के लिए नियमित फफूंदनाशक और 19:19:19 जैसे पोषक तत्वों का छिड़काव जरूरी होता है। मौसम में नमी बढ़ते ही किसान पौधों की सघन निगरानी शुरू करें ताकि नुकसान न हो।

## ऐसा क्यों हुआ
यह आर्थिक लाभ मुख्य रूप से त्योहारों के दौरान फूलों की बढ़ी हुई स्थानीय मांग और किसान की योजनाबद्ध वैज्ञानिक रोपाई पद्धति की वजह से संभव हुआ है।

- **त्योहारी मांग में उछाल:** दशहरा और धार्मिक पूजा आयोजनों के कारण बाजार में सजावट और पूजन के लिए गेंदे के फूलों की मांग अचानक कई गुना बढ़ गई है। इसी आपूर्ति और मांग के अंतर ने थोक बाजार में कीमतों को 80 रुपये प्रति किलो तक पहुंचा दिया।
- **वैज्ञानिक दूरी और खेत प्रबंधन:** रोटावेटर चलाकर बेड बनाना और 4 फीट गुणा 2 फीट की दूरी पर रोपाई करना पौधों को भरपूर फैलाव देता है। इस व्यवस्थित तकनीक के कारण रोपाई के 1 से 1.5 महीने बाद ही स्वस्थ फूल खिलने लगे जो छह महीने तक पैदावार देंगे।
- **संतुलित पोषण का इस्तेमाल:** गोबर की खाद, डीएपी और सुपर फास्फेट के साथ 19:19:19 और 12:61:0 के छिड़काव ने फसल को मजबूत बनाया। सही पोषण से पौधों में रोगों का प्रकोप कम रहा और लागत 50 हजार रुपये तक नियंत्रित रही।

## सवाल-जवाब

### 1. बस्तर में गेंदे की खेती कर रहे किसान का क्या नाम है?
गेंदे की खेती से मुनाफा कमाने वाले बस्तर के किसान का नाम पुरुषोत्तम पटेल है।

### 2. किसान ने कितने रकबे में गेंदे की फसल लगाई है?
किसान पुरुषोत्तम पटेल ने लगभग आधे एकड़ जमीन पर गेंदे की फसल लगाई है।

### 3. गेंदे की इस खेती पर कितनी लागत आई है और कितनी आमदनी की उम्मीद है?
इस फसल पर लगभग 50 हजार रुपये का खर्च आया है, जबकि इससे करीब डेढ़ लाख रुपये की आमदनी होने का अनुमान है।

### 4. थोक बाजार में गेंदे का फूल किस भाव पर बिक रहा है?
त्योहारी मांग के कारण थोक बाजार में गेंदे का फूल 80 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है।

### 5. गेंदे के पौधों की रोपाई किस दूरी पर की जाती है?
खेत में एक बेड से दूसरे बेड की दूरी 4 फीट और पौधे से पौधे के बीच की दूरी 2 फीट रखी जाती है।

### 6. गेंदे में फूल कब से आने शुरू होते हैं और यह फसल कितने समय तक चलती है?
रोपाई के एक से डेढ़ महीने बाद फूल खिलना शुरू हो जाते हैं और यह फसल लगभग छह महीने तक चलती है।

### 7. बरसात के मौसम में गेंदे की फसल में किस बीमारी का खतरा अधिक रहता है?
बारिश के दिनों में गेंदे की फसल में ब्लाइट रोग का प्रकोप अधिक देखने को मिलता है, जिसके लिए दवाइयों का छिड़काव किया जाता है।

### 8. किसान ने गेंदे के अलावा अपने खेत में कौन-सी अन्य फसलें लगाई हैं?
गेंदे के साथ-साथ किसान ने अपने खेत में टमाटर और मिर्च की भी खेती की है।

## प्रेरणा और सबक
किसान पुरुषोत्तम पटेल की यह पहल साबित करती है कि सीमित जमीन पर भी सूझबूझ और बाजार की समझ के साथ खेती करके बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।

- **बाजार के अवसरों की पहचान:** त्योहारों के समय जिस चीज की मांग सबसे ज्यादा होती है, उसकी समय पर खेती करके किसान अपनी आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं।
- **फसल विविधीकरण का महत्व:** केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय किसान ने गेंदे के साथ मिर्च और टमाटर भी लगाए, जिससे जोखिम कम होता है।
- **कम लागत में कुशल तकनीक:** मात्र आधे एकड़ में संतुलित खाद और सही दूरी अपनाकर 50 हजार रुपये की लागत से डेढ़ लाख रुपये की संभावित आय का मॉडल तैयार किया गया।

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