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  "type": "article",
  "title": "बस्तर में गोलियों की गूंज शांत होने के बाद अब सुरक्षा कैंपों में संवर रही आदिवासी छात्रों की पढ़ाई",
  "summary": "नारायणपुर के भटपाल में करीब 15 साल पहले बने सुरक्षा कैंप को अब आदिवासी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल में बदल दिया गया है, जहां 153 छात्र रहकर शिक्षा हासिल कर रहे हैं।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में कभी बंदूकों की आवाज और नक्सली अभियानों के लिए पहचानी जाने वाली एक इमारत अब शिक्षा की नई मिसाल बन गई है। नारायणपुर जिले के भटपाल में करीब 15 साल पहले स्थापित किए गए सुरक्षा बलों के कैंप को अब आदिवासी छात्रों के आवासीय परिसर के तौर पर तब्दील कर दिया गया है। अगस्त के महीने से इस परिसर में अर्धसैनिक बलों के जवानों की जगह सुदूर और नक्सल प्रभावित गांवों से आए छात्र रहकर अपने भविष्य को तराश रहे हैं। वर्तमान समय में भटपाल के इस परिसर में दो अलग-अलग हॉस्टल संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें एक प्री-मैट्रिक और दूसरा पोस्ट-मैट्रिक स्तर का है। दोनों ही छात्रावासों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के लड़के रहकर अपनी स्कूली और उच्च स्तर की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।\n\nदूर-दराज के विद्यार्थियों को मिला सुरक्षित ठिकाना\nप्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस पहल का मुख्य उद्देश्य संवेदनशील और दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से आने वाले आदिवासी युवाओं को पढ़ाई के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल उपलब्ध कराना है। नारायणपुर की कलेक्टर नम्रता जैन के अनुसार भटपाल क्षेत्र में लड़कों के लिए इससे पहले कोई पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल उपलब्ध नहीं था। ऐसी स्थिति में सुदूर गांवों से आने वाले छात्रों के सामने उच्च स्तर की स्कूली शिक्षा जारी रखने के साथ ही रहने की एक गंभीर चुनौती हमेशा बनी रहती थी। पहली बार पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल की व्यवस्था होने से इन विद्यार्थियों को ठहरने की पुख्ता जगह मिली है, जिससे उन्हें आगे की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रखने और नए अवसर तलाशने में सहूलियत मिल रही है। हाल ही में कलेक्टर ने खुद इस छात्रावास की रसोई का जायजा लिया और छात्रों को परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता की पड़ताल भी की।\n\nक्षमता से अधिक पहुंचे छात्र, कुरुशनार में छात्राओं के लिए बनेगा नया परिसर\nभटपाल परिसर में इस समय 150 से अधिक छात्र रहकर तालीम हासिल कर रहे हैं। यहां संचालित प्री-मैट्रिक हॉस्टल में कक्षा छह से दसवीं तक के छात्र रहते हैं, जिसकी स्वीकृत क्षमता 100 विद्यार्थियों की है लेकिन फिलहाल वहां 114 छात्र रह रहे हैं। इसी तरह 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए बने पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल की कुल क्षमता 50 छात्रों की है, जहां इस समय 39 छात्र निवास कर रहे हैं। ग्रामीण इलाकों के छात्रों और उनके परिवारों से मिले सकारात्मक रुझान को देखते हुए प्रशासन अब अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे केंद्र तैयार करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है।\n\nइसी कड़ी में अगला छात्रावास कुरुशनार में स्थापित किया जा रहा है, जो नारायणपुर की ओर से अबूझमाड़ या स्थानीय बोली में माड़ का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह नया केंद्र विशेष तौर पर छात्राओं के लिए तैयार हो रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में इस इलाके में एक आवासीय विद्यालय का निर्माण कराया गया था, जिस दौरान माओवादियों ने कुछ शर्तें थोपी थीं। उन शर्तों में स्कूल पर पक्की छत और ऊंची चारदीवारी न बनाने की पाबंदी शामिल थी, ताकि सुरक्षा बल भविष्य में वहां अपना कैंप स्थापित न कर सकें। अब क्षेत्र में नक्सली गतिविधियों में आई गिरावट के बाद वहां मौजूद पुराने सुरक्षा कैंप को छात्राओं के हॉस्टल में ढाला जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य जल्द ही पूरा होने की उम्मीद है।\n\nमाओवादी प्रभाव घटने के साथ 100 करोड़ रुपये से संवर रहा क्षेत्र\nभटपाल के इन हॉस्टलों में कोहकामेटा, मैडमनार, ओरछा, नेलवाड़, छोटे डोंगर, कोरेन्डा, चिमडी, रेमावंड और बेनूर जैसे दर्जनों गांवों के बच्चे रहकर अध्ययन कर रहे हैं। अबूझमाड़ का यह इलाका लंबे समय तक माओवादी गतिविधियों का केंद्र रहा था। बीते दो वर्षों के दौरान इस पूरे अंचल में सुरक्षा अभियानों के तहत 100 से अधिक माओवादी मारे गए हैं और बड़ी संख्या में कैडरों ने आत्मसमर्पण का रास्ता चुना है। हिंसा में आई इस कमी के बीच प्रशासन बस्तर के माड़ और जगारगुंडा जैसे इलाकों को आधुनिक शिक्षा के बड़े केंद्रों के रूप में विकसित कर रहा है। इस बदलाव को रफ्तार देने के लिए इस साल की शुरुआत में दोनों क्षेत्रों के चहुंमुखी विकास हेतु 100 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। सुरक्षा बलों के मोर्चे का शिक्षा के हॉस्टल में बदलना इसी जमीनी बदलाव की गवाही दे रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nबस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा कैंपों को आवासीय छात्रावासों में बदलने से स्थानीय जनजातीय परिवारों और विद्यार्थियों को सीधे तौर पर सुरक्षित शिक्षा का लाभ मिल रहा है।\n\n• भारत में: वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के इस पुनरुपयोग से देश भर में सुरक्षा और शिक्षा के संतुलन का एक मजबूत मॉडल तैयार हो रहा है। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में मुख्यधारा की सामाजिक योजनाओं की पहुंच आसान हो रही है।\n• बस्तर और नारायणपुर में: स्थानीय आदिवासी छात्रों को अब उच्च स्कूली पढ़ाई के लिए दूर शहरों में भटकने या पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी नहीं रहेगी। भटपाल और कुरुशनार जैसे केंद्रों से कोहकामेटा और ओरछा जैसे दर्जनों गांवों के 150 से अधिक छात्रों को मुफ्त और सुरक्षित आवास मिल चुका है।\n• आदिवासी बालिकाओं के लिए: कुरुशनार में तैयार हो रहे नए हॉस्टल से अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार पर लड़कियों को पहली बार आधुनिक आवासीय सुविधा मिलेगी। इससे क्षेत्र में बालिकाओं के ड्रॉपआउट रेट में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।\n• शिक्षा के विस्तार में: स्वीकृत 100 करोड़ रुपये के बजट के जरिए बस्तर के माड़ और जगारगुंडा जैसे इलाकों में आधुनिक शिक्षण संसाधन विकसित किए जा रहे हैं। इससे इन सुदूर क्षेत्रों के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं और बेहतर करियर के समान अवसर मिलेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह बदलाव बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और जमीनी स्तर पर माओवादी प्रभाव में आई भारी गिरावट के चलते संभव हुआ है। जब उग्रवाद का दबाव घटा, तो प्रशासन ने इन पुराने मोर्चों को जनकल्याणकारी उपयोग में लाने की पहल की।\n\n• माओवादी प्रभाव में कमी: बीते दो वर्षों में इस क्षेत्र के भीतर 100 से अधिक माओवादी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए हैं और कई अन्य ने आत्मसमर्पण किया है। इस रणनीतिक बढ़त की वजह से सुरक्षा चौकियों को खाली कर नागरिक सुविधाओं में बदलना संभव हो सका।\n• छात्रों के आवासीय संकट का समाधान: भटपाल क्षेत्र में कक्षा 10 से ऊपर के लड़कों के लिए कोई छात्रावास नहीं था, जिसके चलते दूरदराज के छात्र पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर थे। प्रशासन ने इसी खाली पड़े 15 साल पुराने ढांचे का तुरंत इस्तेमाल कर इस समस्या का हल निकाला।\n• सरकारी पुनर्वास नीति और बजट: साल की शुरुआत में माड़ और जगारगुंडा क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। इस योजना के तहत हिंसा प्रभावित इलाकों को स्थायी रूप से शिक्षा और विकास के केंद्रों में बदला जा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नारायणपुर के भटपाल में सुरक्षा कैंप को किसमें बदला गया है?\nभटपाल में 15 साल पहले बने सुरक्षा कैंप को आदिवासी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक हॉस्टल में बदल दिया गया है।\n\n2. वर्तमान में भटपाल हॉस्टल में कुल कितने छात्र रह रहे हैं?\nवर्तमान में वहां कुल 153 छात्र रह रहे हैं, जिनमें प्री-मैट्रिक विंग में 114 और पोस्ट-मैट्रिक विंग में 39 छात्र शामिल हैं।\n\n3. छात्राओं के लिए नया हॉस्टल कहां तैयार किया जा रहा है?\nछात्राओं के लिए नया हॉस्टल अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार पर स्थित कुरुशनार में एक पुराने सुरक्षा कैंप को बदलकर तैयार किया जा रहा है।\n\n4. 2011 में कुरुशनार के स्कूल निर्माण को लेकर माओवादियों ने क्या शर्तें रखी थीं?\nमाओवादियों ने स्कूल की पक्की छत और ऊंची बाउंड्री वॉल न बनाने की शर्त रखी थी ताकि सुरक्षा बल वहां अपना कैंप न बना सकें।\n\n5. माड़ और जगारगुंडा के विकास के लिए कितना बजट मंजूर किया गया है?\nइस साल की शुरुआत में दोनों क्षेत्रों के विकास और उन्हें शिक्षा केंद्र बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया था।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-10-06",
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