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  "type": "article",
  "title": "बस्तर में फिर मंडराया बाढ़ का संकट, उड़ीसा के खातिगुड़ा डैम से पानी छोड़े जाने के बाद जगदलपुर में अलर्ट",
  "summary": "उड़ीसा के खातिगुड़ा बांध का एक गेट खोले जाने के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर 3 से 4 फीट तक बढ़ने की आशंका है। जगदलपुर नगर निगम ने नदी किनारे बसे 10 वार्डों को सतर्क करते हुए राहत शिविरों में शिफ्ट करने का काम शुरू किया है।",
  "content": "बस्तर संभाग में हालिया बाढ़ की मार झेल रहे नागरिकों की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने वाली हैं। इंद्रावती नदी का जलस्तर घटने के बजाय अचानक तेज उछाल मारने की कगार पर पहुंच गया है। पड़ोसी राज्य उड़ीसा के प्रशासन द्वारा खातिगुड़ा डैम का एक गेट खोल दिया गया है, जिससे भारी मात्रा में पानी इंद्रावती नदी में आगे बढ़ रहा है। यह जल प्रवाह देर रात लगभग 2 बजे तक जगदलपुर शहर के दायरे में प्रवेश करने का अनुमान लगाया गया है। इसके बाद जलस्तर में 3 से 4 फीट, यानी करीब 1 से 1.5 मीटर तक की सीधी बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। जो परिवार पिछली आपदा से उबरने का प्रयास कर रहे थे, उनके सामने अब जलभराव का नया संकट खड़ा हो गया है।\n\nतटीय इलाकों में जहरीले जीवों का खतरा, सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील\nजलस्तर में इस संभावित उछाल को देखते हुए जगदलपुर के मेयर संजय पांडे ने नदी किनारे रहने वाले नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने का आह्वान किया है। उन्होंने विशेष रूप से स्पष्ट किया कि इंद्रावती नदी के किनारे बसे 10 वार्डों के निवासियों को पूरी रात निगरानी में रहना होगा। मेयर ने आगाह किया कि अंधेरे में अचानक नदी का दायरा फैलने से बस्तियों में सांप, बिच्छू और अन्य विषैले कीटों के प्रवेश करने का बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। ऐसे में किसी भी नागरिक को अपने घरों में रुककर जोखिम नहीं उठाना चाहिए। प्रशासन ने अपील की है कि प्रभावित लोग रात गहराने से पहले ही अपने सगे-संबंधियों के घरों की ओर रुख करें अथवा नगर निगम द्वारा तैयार किए गए राहत शिविरों में पनाह लें।\n\nप्रशासन की मुस्तैदी और बस्तियों की निकासी\nडैम से पानी छोड़े जाने की सूचना की पुष्टि होते ही स्थानीय नगर निगम प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया। मेयर संजय पांडे ने शहर के तमाम पार्षदों को तत्काल सतर्क रहने के निर्देश जारी किए। इस आपात स्थिति में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के निर्वाचित जनप्रतिनिधि आपसी मतभेद भुलाकर बस्तियों में उतर आए हैं और आम जनता को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कराने में मदद कर रहे हैं।\n\nबाढ़ के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जाने वाले गोका पाल और डगा घाट जैसे तटीय इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। इन क्षेत्रों में लाउडस्पीकर और मुनादी के जरिए लोगों को खतरे से आगाह किया जा रहा है और बस्तियां खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नगर निगम ने विस्थापित परिवारों के ठहरने के लिए राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं का प्रबंध सुनिश्चित किया जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nखातिगुड़ा बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण जगदलपुर और आसपास के नदी तटीय इलाकों में रात के समय बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।\n\n• जगदलपुर में: इंद्रावती किनारे स्थित 10 वार्डों के निवासियों को जलभराव से पूर्व तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचना होगा। निचले इलाकों के नागरिकों को गोका पाल और डगा घाट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से हटकर नगर निगम के राहत शिविरों का रुख करना चाहिए।\n• सुरक्षा और स्वास्थ्य: जलस्तर 3 से 4 फीट तक बढ़ने से घरों में सांप और बिच्छू घुसने का जोखिम बढ़ गया है। नागरिक रात में अनावश्यक आवाजाही से बचें और टॉर्च व प्राथमिक उपचार का प्रबंध रखें।\n• जनप्रतिनिधियों का दायित्व: दोनों प्रमुख दलों के पार्षद राहत कार्य में सक्रिय होकर लोगों को स्थानांतरित करवा रहे हैं। राहत शिविरों में भोजन, पेयजल और सोने की बुनियादी व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।\n• संपर्क और आवागमन: नदी तटीय मार्गों और घाटों पर जलभराव के चलते रात 2 बजे के बाद आवागमन अवरुद्ध हो सकता है। देर रात नदी की ओर जाने वाले रास्तों पर जाने से पूरी तरह परहेज करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nउड़ीसा में खातिगुड़ा बांध का गेट खोले जाने के बाद इंद्रावती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की स्थिति उत्पन्न हुई है, जिसके चलते निचली बस्तियों पर डूब का खतरा मंडरा रहा है।\n\n• सीधा कारण: उड़ीसा प्रशासन द्वारा खातिगुड़ा डैम का एक गेट खोला गया, जिससे नदी में पानी का बहाव तेजी से बढ़ गया। इस गेट से निकला पानी सीधे जगदलपुर की ओर अग्रसर हुआ है।\n• समय और प्रवाह: छोड़े गए पानी को जगदलपुर तक पहुंचने में समय लगता है और अनुमान के मुताबिक यह देर रात करीब 2 बजे पहुंचेगा। इसके कारण रात के वक्त 3 से 4 फीट यानी 1 से 1.5 मीटर तक पानी बढ़ सकता है।\n• मौजूदा स्थिति: बस्तर का इलाका पहले से ही हालिया बाढ़ के प्रभावों से पूरी तरह उबर नहीं पाया था। पहले से भरे जलस्रोतों के कारण अतिरिक्त पानी आते ही जलस्तर में तेजी से उछाल आ रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. खातिगुड़ा डैम से छोड़ा गया पानी जगदलपुर कब तक पहुंचेगा?\nप्रशासन के आकलन के अनुसार खातिगुड़ा डैम का पानी आज देर रात लगभग 2 बजे तक जगदलपुर पहुंचेगा।\n\n2. इंद्रावती नदी का जलस्तर कितना बढ़ने का अनुमान है?\nइंद्रावती नदी के जलस्तर में 3 से 4 फीट, यानी लगभग 1 से 1.5 मीटर तक की बढ़ोतरी होने की आशंका जताई गई है।\n\n3. बाढ़ के खतरे से जगदलपुर के कौन से इलाके सबसे अधिक प्रभावित हैं?\nनदी किनारे बसे 10 वार्डों के अलावा विशेष रूप से गोका पाल और डगा घाट जैसे तटीय क्षेत्रों में खतरे की आशंका सबसे अधिक है।\n\n4. मेयर संजय पांडे ने नागरिकों को क्या सलाह दी है?\nमेयर ने नागरिकों को रात में सतर्क रहने, सांप-बिच्छू के खतरे से बचने और रिश्तेदारों के घर या राहत शिविरों में जाने की सलाह दी है।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-09-29",
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