# बस्तर में पुनर्वास नीति से बदली राह, 10वीं पास कर अब नर्स बनने की तैयारी में जुटीं गीता नुरोटे

> छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटीं गीता नुरोटे समेत छह लोगों ने ओपन स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास की है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/bastar-men-punarvasa-niti-se-badali-raha-10vin-pasa-kara-aba-narsa-banane-ki-taiyari-men-jutin-geeta-nurote-41747 · **Language:** Hindi
**Tags:** छत्तीसगढ़, बस्तर, गीता नुरोटे, पुनर्वास नीति, ओपन स्कूल, 10वीं परीक्षा, नर्सिंग शिक्षा

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में पुनर्वास नीति के जरिए मुख्यधारा में लौटे लोगों की जिंदगी में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे कौशल विकास और शैक्षणिक कार्यक्रमों के तहत छह पुनर्वासित माओवादियों ने 10वीं कक्षा की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर ली है। इनमें तीन अभ्यर्थी अकेले बस्तर जिले से ताल्लुक रखते हैं। राज्य सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और पढ़ाई की इच्छा रखने वालों को पूरा सहयोग देना है। इसी व्यवस्था के जरिए ओपन स्कूल प्रणाली से परीक्षा दिलाकर उन्हें औपचारिक शिक्षा से दोबारा जोड़ा गया है।

## जंगल की बैठकों से संगठन में शामिल होने तक का सफर
सफलता हासिल करने वालों में शामिल गीता नुरोटे ने अपनी पुरानी जिंदगी और बदलाव की कहानी साझा की है। गीता पूर्व में माओवादी संगठन के भीतर डीवीसी पद पर सक्रिय थीं और वहां डॉक्टर के रूप में जिम्मेदारी संभालती थीं। उनका पैतृक गांव घने जंगली इलाके में स्थित है, जहां संगठन के सदस्यों का लगातार आना-जाना लगा रहता था और नियमित रूप से बैठकें आयोजित की जाती थीं।

इन चौपालों और बैठकों में प्रायः गरीब तबके के हक और अधिकार छिनने, जमीन अधिग्रहण के विवादों तथा महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों जैसे विषयों पर चर्चा होती थी। बचपन से ही ऐसे मुद्दों को सुनते रहने और कम उम्र में ही कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी का सामना करने की वजह से गीता ने माओवादी संगठन की राह चुनी थी।

## हथियार के साथ भी नहीं छूटा किताबों का साथ
संगठन में सक्रियता के दौरान गीता इंसास बंदूक लेकर चलती थीं, लेकिन इसके बावजूद उनका किताबों के प्रति आकर्षण कभी कम नहीं हुआ। वह संगठन में शामिल होने से पहले भी 10वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही थीं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में संगठन के भीतर रहते हुए भी अध्ययन जारी रखा और आत्मसमर्पण करने के बाद भी इस शैक्षणिक सफर को टूटने नहीं दिया।

मुख्यधारा में लौटने के बाद गीता ने प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष 10वीं की परीक्षा में बैठने की अपनी इच्छा जताई, जिसे प्रशासन ने मंजूरी दे दी। इस तैयारी के दौरान आत्मसमर्पण कर चुके चैतू दादा ने उनकी पढ़ाई में अहम मार्गदर्शन किया। चैतू दादा ने पूर्व में संगठन में रहते हुए शिक्षक के तौर पर पढ़ाने का कार्य किया था। गीता ने मराठी माध्यम से अपनी शुरुआती शिक्षा प्राप्त की थी, इसलिए उन्हें हिंदी विषय समझने में थोड़ी कठिनाई आई, जबकि गृह विज्ञान विषय उनके लिए काफी सरल रहा।

## 12वीं के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने का लक्ष्य
10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद गीता के हौसले बुलंद हैं और उनका शैक्षणिक सफर यहीं रुकने वाला नहीं है। उनका अगला कदम 12वीं की पढ़ाई पूरी करना और उसके बाद नर्सिंग का औपचारिक प्रशिक्षण प्राप्त करना है। संगठन में पहले से मेडिकल कार्य का अनुभव रखने वाली गीता अब नर्सिंग की डिग्री लेकर औपचारिक रूप से समाज और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहती हैं।

## इसका आप पर असर
यह पहल दर्शाती है कि पुनर्वास नीतियां मुख्यधारा में लौटने वाले व्यक्तियों को औपचारिक शिक्षा और रोजगार के नए अवसर दे रही हैं।

- **भारत में:** हिंसा छोड़कर मुख्यधारा अपनाने वाले नागरिकों के लिए शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण का यह एक व्यवहार्य राष्ट्रीय मॉडल साबित हो रहा है। ऐसे सकारात्मक परिणाम अन्य राज्यों में भी पुनर्वास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को बल देते हैं।
- **छत्तीसगढ़ में:** बस्तर और आसपास के जिलों में आत्मसमर्पण करने वाले लोग ओपन स्कूल के जरिए बिना उम्र की बाधा के बोर्ड परीक्षा दे सकते हैं। स्थानीय युवा सरकारी पुनर्वास केंद्रों पर संपर्क कर कौशल विकास और शैक्षणिक सहायता का लाभ उठा सकते हैं।
- **शिक्षा के इच्छुक लोगों के लिए:** ओपन स्कूल व्यवस्था उन सभी व्यक्तियों को दोबारा पढ़ाई शुरू करने का लचीला मंच देती है जिनकी स्कूली शिक्षा बीच में छूट गई थी। अभ्यर्थी अपनी क्षेत्रीय भाषा की पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर पसंदीदा विषयों का चयन कर सकते हैं।
- **स्वास्थ्य क्षेत्र में भविष्य:** 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद पूर्व कैडर नर्सिंग जैसे पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के पात्र बन सकते हैं। इससे उन्हें समाज में सम्मानजनक आजीविका और सेवा का वास्तविक जरिया मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह सफलता राज्य की पुनर्वास नीति और शिक्षा प्राप्त करने की व्यक्तिगत लगन के तालमेल से संभव हुई है। प्रशासन ने आत्मसमर्पण करने वाले लोगों के लिए केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक और कौशल विकास के अवसर भी सुनिश्चित किए हैं।

- **पुनर्वास नीति का विस्तार:** प्रशासन ने कैडरों को केवल वित्तीय या सुरक्षा सहायता तक सीमित रखने के बजाय ओपन स्कूल के माध्यम से बोर्ड परीक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई। इससे प्रतिभागियों को औपचारिक शैक्षणिक योग्यता प्राप्त करने का सीधा रास्ता मिला।
- **व्यक्तिगत अध्ययन की निरंतरता:** गीता नुरोटे ने संगठन में सक्रिय रहने और हथियारबंद होने के दौरान भी अपनी पढ़ाई पूरी तरह नहीं छोड़ी थी। मुख्यधारा में लौटने के तुरंत बाद उन्होंने अधिकारियों से परीक्षा में शामिल होने का अनुरोध किया।
- **आंतरिक मेंटरशिप और सहायता:** संगठन में पूर्व में शिक्षक रहे चैतू दादा ने गीता को पाठ्यक्रम की तैयारी में शैक्षणिक मार्गदर्शन प्रदान किया। इस आपसी सहयोग से मराठी पृष्ठभूमि की होने के बावजूद उन्हें बोर्ड परीक्षा पास करने में मदद मिली।

## सवाल-जवाब

### 1. बस्तर संभाग में कितने पुनर्वासित माओवादियों ने 10वीं की परीक्षा पास की है?
बस्तर संभाग में कुल छह पुनर्वासित माओवादियों ने 10वीं की परीक्षा पास की है, जिनमें से तीन बस्तर जिले के हैं।

### 2. गीता नुरोटे संगठन में किस पद पर थीं और क्या काम करती थीं?
गीता नुरोटे माओवादी संगठन में डीवीसी पद पर थीं और वहां डॉक्टर के रूप में कार्य करती थीं।

### 3. गीता नुरोटे संगठन में कौन सा हथियार रखती थीं?
गीता नुरोटे संगठन में इंसास बंदूक रखती थीं।

### 4. परीक्षा की तैयारी में गीता की मदद किसने की?
परीक्षा की तैयारी में आत्मसमर्पण कर चुके चैतू दादा ने उनकी मदद की, जिन्होंने संगठन में शिक्षक के रूप में पढ़ाया था।

### 5. गीता नुरोटे का आगे क्या करने का लक्ष्य है?
वह 10वीं के बाद 12वीं और फिर नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करके लोगों की सेवा करना चाहती हैं।

## प्रेरणा और सबक
कठिन परिस्थितियों और भटकाव के बाद भी शिक्षा के दम पर एक नया और सम्मानजनक जीवन शुरू किया जा सकता है।

- **सीख:** परिस्थितियां चाहे जितनी प्रतिकूल हों, सीखने की इच्छा को कभी समाप्त नहीं होने देना चाहिए। गीता ने जंगल में हथियारबंद रहते हुए भी किताबों का साथ नहीं छोड़ा।
- **लक्ष्य निर्धारण:** अतीत की गलतियों या कठिनाइयों से उबरकर भविष्य के लिए स्पष्ट ध्येय बनाना जरूरी है। गीता ने 10वीं के बाद 12वीं और फिर नर्सिंग के जरिए समाज सेवा का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया।
- **मार्गदर्शन की शक्ति:** कठिन विषयों की तैयारी के लिए सही मेंटर का सहयोग लेना अत्यंत मददगार होता है। चैतू दादा के मार्गदर्शन ने भाषा संबंधी चुनौतियों के बावजूद गीता को सफलता दिलाई।

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