# बस्तर के किसान सुखदास मौर्य की अनोखी तकनीक, पचास दिन में तैयार होती है फूल गोभी

> बस्तर के प्रगतिशील किसान सुखदास मौर्य फूल गोभी की खेती से कम समय में शानदार मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी इस उन्नत तकनीक से फसल मात्र पचास दिन में तैयार होकर बाजार में बिकने के लिए पहुंच जाती है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/bastara-ke-kisana-sukhdas-maurya-ki-anokhi-takanika-pachasa-dina-men-taiyara-hoti-hai-phula-gobhi-32727 · **Language:** Hindi
**Tags:** बस्तर किसान, फूल गोभी की खेती, सुखदास मौर्य, कृषि तकनीक, सब्जी की खेती, छत्तीसगढ़ खेती

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में खेती किसानी की एक नई तस्वीर सामने आ रही है, जहां स्थानीय किसान आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर बंपर कमाई कर रहे हैं। बस्तर क्षेत्र के रहने वाले किसान सुखदास मौर्य इन दिनों फूल गोभी की खेती के जरिए अन्य किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल पेश कर रहे हैं। बाजार में फूल गोभी की मांग हमेशा ही काफी ज्यादा बनी रहती है, जिसका सीधा फायदा मेहनतकश किसानों को मिलता है। सुखदास मौर्य पिछले चार साल से लगातार इस फसल को उगा रहे हैं और उनका अनुभव बताता है कि सही देखरेख से यह फसल बहुत कम दिनों में मालामाल बना सकती है। वर्तमान समय में बाजार के अंदर फूल गोभी का थोक और खुदरा भाव चालीस से पचास रुपये प्रति किलो तक चल रहा है, जिससे खेती की लागत आसानी से निकल आती है और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।

## कम लागत और शानदार कमाई का गणित
सुखदास मौर्य के तजुर्बे के अनुसार फूल गोभी की खेती एक ऐसा सौदा है जिसमें लागत बहुत कम आती है लेकिन रिटर्न काफी शानदार मिलता है। यदि कोई किसान एक एकड़ जमीन पर इसकी ढंग से खेती करता है, तो वह आसानी से लगभग डेढ़ लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकता है। हालांकि कृषि बाजार के उतार-चढ़ाव और सब्जियों के भाव ऊपर-नीचे होने से कुल कमाई पर थोड़ा बहुत असर जरूर पड़ सकता है। अगर वित्तीय गणित को समझें तो आधे एकड़ के भूखंड में फूल गोभी की फसल उगाने के लिए कुल खर्च लगभग तीस हजार रुपये के आसपास बैठता है। इसके मुकाबले इस आधे एकड़ से ही एक से डेढ़ लाख रुपये तक की शानदार आमदनी हो जाती है, जो किसी भी पारंपरिक फसल के मुकाबले काफी ज्यादा है।

## खेती की पूरी प्रक्रिया और खेत की तैयारी
सफल पैदावार के लिए जमीन की तैयारी से लेकर रोपाई तक का पूरा चक्र बहुत मायने रखता है। सुखदास मौर्य खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए सबसे पहले दो से तीन बार गहरी जुताई करवाते हैं, जिसके बाद खेत में रोटावेटर चलाया जाता है। इसके पश्चात मिट्टी को व्यवस्थित करके बेड तैयार किए जाते हैं और पहले से तैयार की गई स्वस्थ नर्सरी के छोटे-छोटे पौधे उन पर रोपे जाते हैं। पौधों के सही विकास के लिए उनके बीच की दूरी का खास ध्यान रखना पड़ता है, और इस प्रक्रिया में पौधों के बीच लगभग डेढ़ फीट की दूरी रखी जाती है। मिट्टी को पोषण देने के लिए गोबर की खाद के साथ-साथ डीएपी, यूरिया, पोटाश और सुपर फास्फोरस जैसी जरूरी खादों का संतुलित इस्तेमाल किया जाता है।

## कीट प्रबंधन और फसल की कटाई
फूल गोभी की फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आमतौर पर बहुत गंभीर बीमारियों का प्रकोप नहीं देखा जाता है, फिर भी पौधों के पत्तों में कीट लगने का एक सामान्य जोखिम हमेशा बना रहता है। इस खतरे से निपटने के लिए समय-समय पर उचित कीटनाशकों का छिड़काव करना बेहद जरूरी होता है, जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है और पैदावार बेहतरीन होती है। रोपाई के ठीक पैंतालीस से पचास दिन बाद ही फूल गोभी के पौधे पूरी तरह विकसित होकर बाजार में बेचने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाते हैं। कम अवधि में तैयार होने वाली यह फसल बस्तर के किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का एक नया और मजबूत जरिया साबित हो रही है।

## इसका आप पर असर
बस्तर के किसानों और ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए यह खेती एक मजबूत और तेज आय का साधन बन सकती है।

- **भारत में:** देश भर के छोटे किसान कम अवधि वाली सब्जियों की खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं और बाजार की मांग का समय पर फायदा उठा सकते हैं।
- **बस्तर में:** बस्तर क्षेत्र के स्थानीय किसान फूल गोभी जैसी फसलों को अपनाकर केवल पचास दिनों के भीतर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं।
- **लागत और मुनाफा:** आधे एकड़ में मात्र तीस हजार रुपये खर्च करके एक से डेढ़ लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है।
- **बाजार मूल्य:** वर्तमान में चालीस से पचास रुपये प्रति किलो का भाव मिलने से किसानों को उनकी मेहनत का पूरा दाम मिल रहा है।
- **फसल प्रबंधन:** सही समय पर जुताई, बेड तैयार करने और कीटनाशकों के छिड़काव से फसल को कीटों के जोखिम से बचाया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
फूल गोभी की खेती की सफलता इसके कम जीवन चक्र और उच्च बाजार मांग पर टिकी हुई है।

- **कम जीवन चक्र:** इस फसल का मात्र पचास दिन में तैयार हो जाना किसानों को साल में कई बार फसल चक्र दोहराने का मौका देता है।
- **स्थिर बाजार मांग:** रसोईघरों और बाजारों में फूल गोभी की लगातार मांग बनी रहने के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने में अधिक परेशानी नहीं होती है।
- **मिट्टी का पोषण:** गोबर की खाद और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग से पौधों को शुरुआती दौर में जरूरी पोषण मिल जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. फूल गोभी की फसल कितने दिनों में तैयार हो जाती है?
फूल गोभी की फसल लगभग पैंतालीस से पचास दिन के भीतर बाजार में बेचने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।

### 2. फूल गोभी की खेती में प्रति एकड़ कितना मुनाफा हो सकता है?
एक एकड़ जमीन पर फूल गोभी की खेती करने से लगभग डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।

### 3. आधे एकड़ में खेती करने पर कितना खर्च आता है?
आधे एकड़ में फूल गोभी की फसल लगाने पर लगभग तीस हजार रुपये की लागत आती है।

### 4. बाजार में फूल गोभी का वर्तमान भाव क्या चल रहा है?
बाजार में फूल गोभी की कीमत चालीस से पचास रुपये प्रति किलो के बीच चल रही है।

### 5. खेती की शुरुआत में खेत की तैयारी कैसे की जाती है?
किसान सबसे पहले खेत की दो-तीन बार जुताई करवाते हैं, रोटावेटर चलाते हैं और फिर बेड बनाकर पौधे रोपते हैं।

## प्रेरणा और सबक
सक्सेसफुल किसानी और नवाचार के रास्ते पर चलने वाले किसानों के लिए यह कहानी कई सबक देती है।

- **कम समय में बड़ा परिणाम:** पारंपरिक फसलों के बजाय कम अवधि की नकदी फसलें अपनाकर किसान तेजी से आर्थिक तरक्की कर सकते हैं।
- **लागत नियंत्रण:** सीमित भूमि और कम लागत में सही प्रबंधन के जरिए बड़े पैमाने पर मुनाफा कमाया जा सकता है।
- **नियमित देखरेख:** फसल की समय पर जुताई, उचित दूरी और कीट नियंत्रण पर ध्यान देकर नुकसान के जोखिम को न्यूनतम किया जा सकता है।

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