# बस्तर में हाईटेक खेती का कमाल, करेला उगाकर तगड़ा मुनाफा कमा रहे जगदीप नागवंशी

> छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में धान की पारंपरिक खेती से इतर किसान अब सब्जियों के जरिए अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं। जगदीप नागवंशी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर करेले की खेती से शानदार कमाई कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/bastara-men-haiteka-kheti-ka-kamala-karela-ugakara-tagara-munapha-kama-rahe-jagdipa-nagvanshi-32410 · **Language:** Hindi
**Tags:** बस्तर खेती, करेले की खेती, हाईटेक कृषि, छत्तीसगढ़ किसान, सब्जी उत्पादन, ड्रिप सिंचाई

बस्तर क्षेत्र में कृषि का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और किसान पारंपरकि फसलों से आगे बढ़कर सब्जी उत्पादन की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं। इसी क्रम में एक स्थानीय किसान हाईटेक कृषि पद्धतियों को अपनाकर करेले की फसल से बढ़िया मुनाफा अर्जित कर रहे हैं। कम लागत और उच्च रिटर्न की संभावनाओं के चलते इस नकदी फसल का चलन तेजी से बढ़ रहा है और किसान आधुनिक तरीकों से खेती को अधिक लाभदायक बना रहे हैं।

## चालीस डिसमिल जमीन पर खेती
बस्तर के रहने वाले जगदीप नागवंशी पिछले तीन साल से लगातार चालीस डिसमिल जमीन पर करेले की खेती कर रहे हैं। उन्होंने फसल चक्र और इसकी अवधि के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि करेले की फसल कुल पांच से छह महीने तक चलती है और रोपाई के महज दो महीने के भीतर ही फल देना शुरू कर देती है। इस बार के सीजन में उन्हें लगभग ढाई टन तक कुल उत्पादन होने की पूरी उम्मीद है।

## आधुनिक तकनीक और खेत की तैयारी
सफलतापूर्वक फसल तैयार करने के लिए खेत की जुताई और उसकी बनावट पर विशेष ध्यान दिया गया है। जगदीप नागवंशी ने खेत की तीन से चार बार अच्छी तरह जुताई करवाई और उसके बाद क्यारियां या बेड तैयार किए। दो बेड के बीच की दूरी साढ़े चार फीट रखी गई है जबकि एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच की दूरी तीस मीटर निर्धारित की गई है। इस पूरी खेती में आधुनिक तकनीकों जैसे मल्चिंग शीट और ड्रिप सिंचाई प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है जिससे पानी और संसाधनों की बचत होती है।

## उर्वरक प्रबंधन और कीट नियंत्रण
फसल की शुरुआती अवस्था में पोषण के लिए बेसल खुराक के रूप में गोबर की खाद का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद जमीन की उर्वरता और पौधों के विकास को ध्यान में रखते हुए डीएपी, यूरिया, पोटाश, जिंक, फटेरा और सुपर फास्फोरेस्ट जैसे उर्वरकों का उपयोग किया गया है। करेले की फसल में अक्सर रस चूसक इल्ली का प्रकोप होने का खतरा रहता है, जिससे बचाव के लिए समय-समय पर उचित दवाइयों का छिड़काव किया जाता है ताकि फसल सुरक्षित रहे।

## लागत, नुकसान और कुल मुनाफा
इस पूरी खेती में कुल मिलाकर लगभग चालीस हजार रुपये का खर्च आया है। इस बार बारिश के मौसम की वजह से कुछ फसल को नुकसान भी उठाना पड़ा है, इसके बावजूद उन्हें इस सीजन में एक लाख रुपये तक के शुद्ध मुनाफे की पुरजोर उम्मीद है। पौधों को बेहतर तरीके से फैलने और बढ़ने के लिए खेतों में खूंटे गाड़कर रस्सियां बांधी जाती हैं ताकि लताएं ऊपर चढ़ सकें।

## इसका आप पर असर
यह खबर कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों और पारंपरिक धान की खेती से हटकर नकदी फसलों की ओर रुख करने वाले किसानों के लिए काफी उपयोगी है।

- **भारत में:** देश भर के किसानों को कम जमीन और सीमित लागत में आधुनिक तकनीकों जैसे मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई का उपयोग करके अपनी आय बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है।
- **छत्तीसगढ़ में:** बस्तर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसानों को उच्च मूल्य वाली सब्जी फसलों को अपनाकर मौसम की अनिश्चितता के बीच भी बेहतर मुनाफा कमाने का व्यावहारिक मार्ग दिखाई देता है।

## ऐसा क्यों हुआ
धान की पारंपरिक खेती की तुलना में सब्जियों की खेती कम समय में अधिक वित्तीय रिटर्न देती है, विशेषकर जब आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए।

- **कम अवधि और त्वरित रिटर्न:** करेले जैसी फसलें रोपाई के महज दो महीने के भीतर फल देना शुरू कर देती हैं, जिससे किसानों को अन्य लंबी अवधि की फसलों की तुलना में जल्दी नकदी प्राप्त होती है।
- **आधुनिक संसाधनों का उपयोग:** मल्चिंग शीट और ड्रिप सिंचाई जैसी पद्धतियां अपनाने से पानी की खपत नियंत्रित होती है और खरपतवारों की समस्या कम होती है, जिससे फसल का उत्पादन बेहतर होता है।
- **उत्पादकता बढ़ाने वाले पोषक तत्व:** बेसल खाद के साथ डीएपी, यूरिया और पोटाश जैसे संतुलित उर्वरकों का वैज्ञानिक उपयोग पौधों के विकास को तेज करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. जगदीप नागवंशी कितने समय से करेले की खेती कर रहे हैं?
जगदीप नागवंशी पिछले तीन साल से करेले की खेती कर रहे हैं।

### 2. वे कितनी जमीन पर करेले की फसल उगा रहे हैं?
वे चालीस डिसमिल जमीन पर करेले की खेती कर रहे हैं।

### 3. करेले की फसल रोपाई के कितने दिन बाद फल देना शुरू करती है?
करेले की फसल रोपाई के दो महीने बाद फल देना शुरू कर देती है।

### 4. इस फसल में कुल कितना खर्च आया है?
इस फसल में लगभग चालीस हजार रुपये का खर्च आया है।

### 5. इस सीजन में कितने मुनाफे की उम्मीद है?
बरसात के कारण कुछ नुकसान के बावजूद उन्हें एक लाख रुपये तक के मुनाफे की उम्मीद है।

## प्रेरणा और सबक
बस्तर के एक साधारण किसान द्वारा आधुनिक तरीकों से खेती कर मुनाफा कमाने की यह यात्रा अन्य अन्नदाताओं के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

- **नवाचार अपनाएं:** पारंपरिक खेती के साथ-साथ ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने से पैदावार बेहतर होती है।
- **विविधीकरण जरूरी:** केवल एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय सब्जियों जैसी नकदी फसलों की खेती करने से वित्तीय जोखिम कम होता है।
- **लागत प्रबंधन:** उर्वरकों और संसाधनों का सही प्रबंधन करके सीमित पूंजी में भी बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है।

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