बस्तर में उफनाई इंद्रावती नदी, जलमग्न हुईं धान की फसलें और किसानों की बढ़ी चिंताएं बस्तर में लगातार बारिश और ओडिशा के बांध से पानी छोड़े जाने के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे किसानों की धान की फसलें डूब गई हैं और उन पर कर्ज चुकाने का संकट मंडरा रहा है। बस्तर में पिछले चार दिनों से लगातार हो रही भारी बारिश के चलते इंद्रावती नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। नदी का पानी खेतों में भर जाने की वजह से बड़े पैमाने पर किसानों की धान की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब ओडिशा के कालाहांडी स्थित बांध के गेट खोल दिए गए, जिससे नदी का जलस्तर घटने के बजाय और अधिक ऊपर उठ गया और अन्नदाताओं की मुश्किलें बढ़ गईं। जलभराव से फसलों को भारी नुकसान की आशंका क्षेत्र में चार दिनों की मूसलाधार बारिश के बाद इंद्रावती नदी का पानी कृषि भूमि के भीतर तक घुस आया। बारिश थमने के बावजूद ओडिशा के बांध से पानी छोड़े जाने के कारण नदी का जलस्तर फिर से बढ़ गया। किसानों के खेतों में पिछले दो से तीन दिनों से पानी लगातार जमा हुआ है, जिससे फसलों के सड़ने और खराब होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। कर्ज के बोझ तले दबे किसानों का हाल नदी के पानी में डूबी फसलों के कारण कई किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं जिन्होंने बैंकों और लैम्प्स से कर्ज लेकर खेती की थी। फसल बर्बाद होने की आशंका से उन्हें कर्ज चुकाने की फिक्र सता रही है। किसानों का मानना है कि यदि खेतों से पानी निकलने में एक-दो दिन की और देरी हुई, तो उनकी महीनों की मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। कुछ अन्नदाताओं का तो यह भी कहना है कि उनकी पूरी फसल पहले ही नष्ट हो चुकी है। किसानों ने बयां किया अपना दर्द स्थानीय किसानों ने अपने नुकसान की दास्तान साझा करते हुए हालात बयां किए हैं। किसान चैत सिंह कश्यप ने बताया कि उन्होंने लगभग पांच एकड़ जमीन पर रोपा धान की बुवाई की थी, जो अब पूरी तरह इंद्रावती नदी के पानी में डूब चुका है। इस खेती को करने के लिए उन्होंने बैंक से करीब एक लाख रुपये का कर्ज उठाया था। इसी तरह घाटकवाली गांव के किसान जयराम की करीब साढ़े तीन एकड़ धान की फसल पानी के सैलाब में समा गई है। उन्होंने धान की खेती में लगभग एक लाख रुपये का कुल खर्च किया था, जिसमें से करीब 45 हजार रुपये लैम्प्स से कर्ज के रूप में लिए गए थे। एक अन्य किसान सुनील कुमार नाग ने बताया कि उन्होंने करीब दो लाख रुपये का कर्ज लेकर धान की रोपाई और खाद का इंतजाम किया था, लेकिन अब उनके खेत का आधा हिस्सा जलमग्न हो चुका है। आवागमन और संपर्क व्यवस्था प्रभावित फसलों की बर्बादी के अलावा इस लगातार बारिश और भयंकर जलभराव के कारण क्षेत्र के कई रास्ते भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। पानी भरने की वजह से कई गांवों का सड़क संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों के लोगों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसका आप पर असर बस्तर क्षेत्र में इंद्रावती नदी के उफान और जलभराव से स्थानीय किसानों की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है, जिससे कर्ज चुकाने का संकट खड़ा हो गया है। • बस्तर में: किसानों की धान की फसलें पानी में डूबने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और बैंक तथा लैम्प्स का कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है। • आवागमन में बाधा: कई गांवों का जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट जाने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। • फसल बर्बादी का खतरा: खेतों में दो से तीन दिन से पानी भरा रहने के कारण यदि जल निकासी जल्द नहीं हुई तो पूरी उपज नष्ट हो सकती है। • वित्तीय संकट: रोपा धान और खाद के लिए एक से दो लाख रुपये तक का कर्ज लेने वाले किसान कर्ज के जाल में फंसने की कगार पर पहुंच गए हैं। • क्षेत्रीय प्रभाव: लगातार बारिश और जलभराव से स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आवश्यक आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था भी बाधित हुई है। ऐसा क्यों हुआ बस्तर में आई इस प्राकृतिक आपदा का मुख्य कारण पिछले चार दिनों से लगातार होने वाली भारी बारिश और पड़ोसी राज्य ओडिशा के बांध से पानी छोड़ा जाना है। • भारी मानसूनी बारिश: क्षेत्र में पिछले चार दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर उठ गया। • बांध के गेट खुलना: ओडिशा के कालाहांडी स्थित बांध के गेट खोले जाने के बाद नदी में पानी का प्रवाह और अधिक बढ़ गया। • खेतों में जलभराव: नदी का पानी उफनकर सीधे कृषि भूमि में घुस गया और जल निकासी की व्यवस्था न होने के कारण खेतों में दो-तीन दिन से पानी जमा है। सवाल-जवाब 1. इंद्रावती नदी का जलस्तर क्यों बढ़ा है? बस्तर में पिछले चार दिनों से लगातार हो रही बारिश और ओडिशा के कालाहांडी में बने बांध के गेट खोले जाने के कारण इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ा है। 2. किसानों की कौन सी फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है? नदी का पानी खेतों में घुसने से किसानों की धान की फसलें बड़े पैमाने पर जलमग्न और बर्बाद हुई हैं। 3. किसानों ने खेती के लिए कितना कर्ज लिया था? चैत सिंह कश्यप ने एक लाख, जयराम ने 45 हजार (लैम्प्स से) और सुनील कुमार नाग ने करीब दो लाख रुपये का कर्ज लिया था। 4. कितने दिनों से खेतों में पानी भरा हुआ है? किसानों के खेतों में पिछले दो से तीन दिनों से लगातार पानी भरा हुआ है। 5. इस स्थिति का यातायात पर क्या प्रभाव पड़ा है? लगातार बारिश और जलभराव के कारण कई गांवों का जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क टूट गया है। https://trendkia.com/chhattisgarh/bastara-men-uphanai-indravati-nadi-jalamagna-huin-dhana-ki-phasalen-aura-kisanon-ki-barhi-chintaen-38956 TrendKia — Har trend, sabse pehle.