# बिलासपुर में साल में सिर्फ एक दिन खुलता है यह 160 साल पुराना मंदिर, दशहरे पर उमड़ी भारी भीड़

> छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में स्थित 160 साल पुराने सीताराम हनुमान मंदिर के पट साल में केवल विजयादशमी के दिन खुलते हैं। यहां भगवान के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहता है और सोशल मीडिया के जरिए भी लोग इस अनोखी परंपरा से जुड़ रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/bilasapura-men-sala-men-sirpha-eka-dina-khulata-hai-yaha-160-sala-purana-mndira-dashahare-para-umari-bhari-bhira-49695 · **Language:** Hindi
**Tags:** बिलासपुर, सीताराम हनुमान मंदिर, दशहरा, विजयादशमी, छत्तीसगढ़, हटरी चौक, धार्मिक परंपरा

बिलासपुर के जूना बिलासपुर स्थित हटरी चौक पर एक ऐसा अनूठा प्राचीन मंदिर है जिसके कपाट पूरे साल में केवल एक ही बार खोले जाते हैं। विजयादशमी यानी दशहरे के पावन पर्व पर सीताराम हनुमान मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिएकिए जाते हैं। इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल का इतिहास लगभग 160 साल पुराना है, और साल में महज एक दिन ही दर्शन का दुर्लभ अवसर मिलने के कारण यहां सुबह से ही भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ता है। तय कार्यक्रम के अनुसार इस बार मंदिर के पट सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक दर्शन के लिए खुले रखे गए हैं, ताकि दूर-दूर से आने वाले सभी भक्त सुगमता से भगवान के दर्शन कर सकें।

## नीम की जड़ों से प्रगट होने की प्राचीन मान्यता
इस मंदिर की स्थापना और इतिहास को लेकर क्षेत्र में गहरी मान्यताएं प्रचलित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार जिस जगह पर आज भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और बजरंगबली की भव्य प्रतिमाएं विराजमान हैं, वहां कभी एक विशाल नीम का पेड़ हुआ करता था। वक्त के साथ जब वह पेड़ सूखकर गिर गया, तब उसकी जड़ों से भगवान की ये दिव्य प्रतिमाएं प्रकट होने की बात सामने आई। इसके बाद उन प्रतिमाओं को पूरी श्रद्धा के साथ स्थापित किया गया और विधि-विधान से मंदिर का निर्माण कर प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न की गई। तब से लेकर आज तक पांडेय परिवार ही इस मंदिर की व्यवस्था और संचालन की जिम्मेदारी संभालता आ रहा है।

## मनोकामना पूर्ति का प्रमुख केंद्र
इस पवित्र स्थल को लेकर श्रद्धालुओं के मन में अगाध आस्था और विश्वास बसा हुआ है। ऐसी मान्यता है कि दशहरे के दिन जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी के दर्शन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि इसे क्षेत्र में मनोकामना पूर्ति मंदिर के रूप में भी जाना जाता है। कोई अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना लेकर यहां पहुंचता है, तो कोई अपनी कोई विशेष मन्नत पूरी होने की प्रार्थना करता है। वंदना यादव नामक एक श्रद्धालु ने बताया कि वह कई वर्षों से इस मंदिर की भव्यता और परंपरा के बारे में सुनती आ रही थीं, लेकिन इस बार उन्हें पहली बार साक्षात दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्हें अत्यंत शांति और प्रसन्नता का अनुभव हुआ।

## सोशल मीडिया रील्स का बढ़ता प्रभाव
आज के दौर में इस मंदिर की अनूठी परंपरा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से भी यह व्यापक रूप से चर्चा का केंद्र बन गई है। रूपेंद्र यादव नाम के एक अन्य श्रद्धालु ने साझा किया कि उन्होंने इस मंदिर के बारे में सोशल मीडिया पर एक रील देखी थी। उस वीडियो में दशहरे के दिन मंदिर खुलने और मनोकामनाएं पूर्ण होने की बात कही गई थी, जिसे देखकर उनकी जिज्ञासा जागी और वह खुद भगवान के दर्शन करने के लिए यहां पहुंच गए। इस प्रकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हो रही चर्चाओं के कारण नए और युवा श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में इस प्राचीन परंपरा से जुड़ रहे हैं।

## भक्तों की अटूट आस्था और परंपरा का निर्वहन
मंदिर के दर्शन करके बाहर आए विनोद कुमार देवांग ने बताया कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और हर साल दशहरा पर्व पर ही मंदिर के पट आम जनता के लिए खोले जाते हैं। इस बार सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक की समय-सीमा तय की गई है, जिसके भीतर सभी लोग कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं और भगवान के चरणों में अपनी अर्जी लगाते हैं। उन्होंने भी अपनी मनोकामना भगवान के समक्ष रखी है और उसके पूर्ण होने की पूरी उम्मीद जताई है। विजयादशमी का यह पा पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होने के साथ-साथ बिलासपुर की समृद्ध धार्मिक संस्कृति और लोगों की अटूट निष्ठा का भी जीवंत प्रमाण प्रस्तुत करता है।

## इसका आप पर असर
इस अनोखी धार्मिक परंपरा का स्थानीय निवासियों और दर्शनार्थियों पर सीधा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि साल में केवल एक दिन कपाट खुलने के कारण प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

- **छत्तीसगढ़ में:** राज्यभर से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश पाने के लिए लंबी कतारों में कई घंटे इंतजार करना पड़ता है।
- **बिलासपुर में:** हटरी चौक और आसपास के इलाकों में भारी भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है और विशेष सुरक्षा इंतजाम करने पड़ते हैं।
- **दर्शनार्थियों के लिए:** सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक का सीमित समय होने के कारण हर आने वाले भक्त को तय समय के भीतर ही अपनी दर्शन प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
- **आस्था और पर्यटन:** सोशल मीडिया पर रील्स वायरल होने के बाद से दूर-दराज के नए पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
- **प्रशासनिक तैयारी:** मंदिर के सुचारू संचालन और सुरक्षा के लिए स्थानीय प्रशासन और प्रबंधकों को हर साल विशेष प्रबंध करने होते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
इस मंदिर के साल में केवल एक दिन खुलने और इतनी गहरी आस्था से जुड़े होने के पीछे सदियों पुरानी ऐतिहासिक मान्यताएं और स्थानीय परंपराएं काम करती हैं।

- **ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:** मंदिर के स्थान पर कभी एक बड़ा नीम का पेड़ हुआ करता था जिसके सूखकर गिरने पर उसकी जड़ों से भगवान की प्रतिमाएं प्रकट होने की स्थानीय मान्यता है।
- **पारंपरिक नियम:** स्थापना काल से ही मंदिर के कपाट केवल विजयादशमी के पावन पर्व पर ही खोलने की परंपरा चली आ रही है जिसका कड़ाई से पालन किया जाता है।
- **प्रबंधकीय व्यवस्था:** शुरुआत से ही पांडेय परिवार इस ऐतिहासिक मंदिर का संचालन करता आ रहा है और वे ही इस एक दिवसीय दर्शन की व्यवस्था संभालते हैं।
- **डिजिटल प्रचार:** हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर मंदिर से जुड़ी रील्स और वीडियो वायरल होने के कारण लोगों में इसके प्रति जिज्ञासा और आकर्षण तेजी से बढ़ा है।

## सवाल-जवाब

### 1. सीताराम हनुमान मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के जूना बिलासपुर स्थित हटरी चौक पर स्थित है।

### 2. यह मंदिर साल में कितनी बार खुलता है?
यह मंदिर साल में केवल एक बार विजयादशमी यानी दशहरे के दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलता है।

### 3. इस मंदिर का इतिहास कितना पुराना है?
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का इतिहास लगभग 160 साल पुराना है।

### 4. इस साल दर्शन के लिए मंदिर कितने घंटे खुला रहा?
इस साल मंदिर के पट सुबह 7 बजे से शाम 4 बजे तक दर्शन के लिए खुले रखे गए थे।

### 5. मंदिर के संचालन की जिम्मेदारी किसके पास है?
इस मंदिर का संचालन और प्रबंधन लंबे समय से पांडेय परिवार द्वारा किया जा रहा है।

### 6. इस मंदिर को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है?
श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के कारण इसे मनोकामना पूर्ति मंदिर भी कहा जाता है।

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