# बिलासपुर के शूटर शशांक मसीह को शहीद पंकज विक्रम सम्मान, छत्तीसगढ़ में चमका नाम

> छत्तीसगढ़ के राज्य खेल अलंकरण समारोह में बिलासपुर के पिस्टल शूटर शशांक मसीह को शहीद पंकज विक्रम सम्मान से नवाजा गया है। वे अपनी कड़ी मेहनत और अनुशासन के दम पर अब ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतने का सपना देख रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/bilaspur-ke-shooter-shashank-masih-ko-shaheed-pankaj-vikram-samman-27361 · **Language:** Hindi
**Tags:** शशांक मसीह, बिलासपुर शूटिंग, शहीद पंकज विक्रम सम्मान, छत्तीसगढ़ खेल, पिस्टल शूटर, राज्य खेल अलंकरण

छत्तीसगढ़ के खेल जगत में बिलासपुर जिले का नाम एक बार फिर रोशन हुआ है। राज्य खेल अलंकरण सम्मान समारोह के दौरान बिलासपुर के प्रतिभाशाली पिस्टल शूटर शशांक मसीह को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए प्रतिष्ठित शहीद पंकज विक्रम सम्मान से सम्मानित किया गया है। इस बड़ी उपलब्धि के मिलने से न सिर्फ उनके परिवार और करीबियों में बल्कि पूरे बिलासपुर शहर और खेल प्रेमियों के बीच जश्न और गर्व का माहौल बना हुआ है। इस सम्मान के मिलने पर शशांक ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि शासन द्वारा खिलाड़ियों का सम्मान करने के साथ-साथ उन्हें पुरस्कार राशि प्रदान किया जाना एक सराहनीय कदम है। उनका मानना है कि इस तरह की आर्थिक और नैतिक सहायता मिलने से खिलाड़ियों को अपनी आगे की ट्रेनिंग जारी रखने और बड़ी प्रतियोगिताओं की तैयारी करने में बहुत बड़ी मदद मिलती है।

## कड़ी मेहनत और सख्त दिनचर्या
अपनी सफलता के पीछे की कहानी साझा करते हुए शशांक मसीह ने बताया कि पिस्टल शूटिंग जैसे चुनौतीपूर्ण खेल में केवल शारीरिक श्रम से काम नहीं चलता, बल्कि इसके लिए मानसिक रूप से मजबूत होना और अत्यधिक एकाग्रता रखना भी उतना ही अनिवार्य है। उनकी रोजाना की दिनचर्या सुबह तड़के करीब पांच बजे से ही शुरू हो जाती है। दिन की शुरुआत योग, मेडिटेशन और मानसिक संतुलन साधने वाली क्रियाओं के साथ होती है, जिसके बाद सुबह करीब सात बजे से उनका शूटिंग अभ्यास आरंभ हो जाता है। वे सुबह के सत्र में लगभग दो से ढाई घंटे तक लगातार पसीना बहाते हैं और शाम के वक्त भी करीब एक से डेढ़ घंटे तक कड़ा अभ्यास करते हैं। शशांक का स्पष्ट मानना है कि इस खेल में शरीर और मस्तिष्क दोनों का तालमेल बेहद अहम होता है। निशाना साधते वक्त अपनी एकाग्रता को टूटने न देना और हर परिस्थिति में मानसिक संतुलन बनाए रखना ही एक साधारण खिलाड़ी और एक विजेता के बीच का सबसे बड़ा फर्क तय करता है।

## प्रशिक्षण और प्रदर्शन को लगातार सुधारने की ललक
राज्य स्तर के इस प्रतिष्ठित खेल अलंकरण से सम्मानित होने के बावजूद शशांक की संतुष्टि की कोई सीमा नहीं है, उनका मानना है कि उनका मौजूदा प्रयास अभी मंजिल पाने के लिए पर्याप्त नहीं है। वे अपनी ट्रेनिंग के स्तर को लगातार और अधिक उन्नत बनाने के लिए पूरी शिद्दत से काम कर रहे हैं। अपनी शारीरिक और मानसिक फिटनेस को बेहतर बनाए रखने के साथ-साथ वे अपने खानपान यानी डाइट प्लान, सोने के समय और कुल ट्रेनिंग के घंटों में भी सकारात्मक सुधार लाने का प्रयास कर रहे हैं। शशांक का कहना है कि जितनी अधिक अनुशासित और उच्च कोटि की ट्रेनिंग होगी, भविष्य में उतने ही बड़े मंचों और ऊंचे स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। उनका एकमात्र वर्तमान लक्ष्य अपने खेल के स्तर को लगातार निखारना और अपने प्रदर्शन को पहले से अधिक बेहतर बनाना है।

## युवाओं के लिए सफलता के कड़े मंत्र
खेल के मैदान में संघर्ष कर रहे नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरणा देते हुए शशांक ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि जीवन में किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए अटूट मेहनत और धैर्य का होना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने सलाह दी है कि खिलाड़ियों को कभी भी अपने लक्ष्य छोटे नहीं रखने चाहिए और यदि कभी शुरुआती दौर में असफलता का सामना करना पड़े, तो अपना क्षेत्र बदलने के बजाय और अधिक दृढ़ता के साथ प्रयास करते रहना चाहिए। उनका मानना है कि एक या दो बार में मनमुताबिक सफलता न मिलने का यह कतई मतलब नहीं होता कि व्यक्ति असफल हो गया है। निरंतर प्रयास और लगन के रास्ते पर चलने वाले को एक न एक दिन सफलता अवश्य मिलती है।

## ओलंपिक में देश के लिए मेडल जीतने का बड़ा सपना
शशांक मसीह की महत्वाकांक्षाएं अब केवल राज्य या राष्ट्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और दुनिया के सबसे बड़े खेल महाकुंभ यानी ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने की प्रबल इच्छा रखते हैं। उनका ultimate लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राज्य के लिए भी पदक जीतकर तिरंगा लहराना है। शशांक का कहना है कि राज्य खेल अलंकरण सम्मान उनके लिए बेहद गर्व और आनंद का क्षण जरूर है, लेकिन यह उनके सफर की मंजिल नहीं बल्कि आगे की लंबी यात्रा के लिए एक नई ऊर्जा और प्रेरणा है। आने वाले समय में वे और अधिक कठिन परिश्रम कर अपने खेल के स्तर को वैश्विक पटल पर ले जाने की पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं। पिस्टल शूटिंग की दुनिया में शशांक मसीह की यह सफलता बिलासपुर के उन तमाम युवाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा बन चुकी है जो खेल की दुनिया में अपना सुनहरा भविष्य बनाने की ख्वाहिश रखते हैं। कड़े अभ्यास, अनुशासन और ऊंचे लक्ष्यों के सहारे शशांक अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने के पथ पर आगे बढ़ रहे हैं।

## इसका आप पर असर
यह सम्मान उन तमाम स्थानीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने खेल को आगे बढ़ा रहे हैं।

- **भारत में:** खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले युवा एथलीटों को सरकारी सम्मान और पुरस्कार राशि मिलने से उनकी बुनियादी ट्रेनिंग का खर्च उठाने में मदद मिलती है। इससे देश भर के छोटे शहरों के खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ता है और वे राष्ट्रीय मंच पर बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होते हैं।
- **बिलासपुर में:** स्थानीय स्तर पर शशांक मसीह को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलने से बिलासपुर के युवाओं और खेल अकादमियों से जुड़े खिलाड़ियों में उत्साह की लहर दौड़ गई है। इससे जिले में शूटिंग और अन्य खेलों के प्रति अभिभावकों का नजरिया बदलेगा और अधिक बच्चे पेशेवर खेलों में अपना करियर बनाने के लिए आगे आएंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. शशांक मसीह को कौन सा प्रतिष्ठित सम्मान मिला है?
शशांक मसीह को छत्तीसगढ़ के राज्य खेल अलंकरण समारोह में शहीद पंकज विक्रम सम्मान से सम्मानित किया गया है।

### 2. शशांक मसीह किस खेल से जुड़े हुए हैं?
शशांक मसीह पिस्टल शूटिंग खेल से जुड़े हुए हैं।

### 3. शशांक मसीह का संबंध किस जिले से है?
शशांक मसीह का संबंध छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से है।

### 4. शशांक मसीह की रोजाना की ट्रेनिंग कितने घंटे चलती है?
शशांक सुबह करीब ढाई घंटे और शाम को डेढ़ घंटे तक शूटिंग का अभ्यास करते हैं।

### 5. शशांक मसीह का अगला बड़ा सपना क्या है?
शशांक का अगला बड़ा सपना अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है।

## प्रेरणा और सबक
शशांक मसीह की यह सफलता युवा खिलाड़ियों को यह सिखाती है कि अनुशासन और अटूट धैर्य के बल पर कैसे बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।

- **बड़ा सपना देखें:** खिलाड़ियों को कभी भी अपने लक्ष्य छोटे नहीं रखने चाहिए और हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करने की सोच रखनी चाहिए।
- **मानसिक एकाग्रता जरूरी:** केवल शारीरिक श्रम ही काफी नहीं है, बल्कि मानसिक संतुलन और फोकस खेल में सफलता का मुख्य आधार बनता है।
- **असफलता से न घबराएं:** शुरुआती असफलताओं के बाद अपना रास्ता बदलने के बजाय लगातार प्रयास करते रहना ही विजेता की असली पहचान है।

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