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  "type": "article",
  "title": "बिलासपुर की सड़कों पर उतरे सैकड़ों प्रतियोगी छात्र, डिप्टी सीएम अरुण साव के आवास पर बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था",
  "summary": "छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में भर्ती परीक्षाओं में लेटलतीफी, मूल्यांकन विवाद और पदों की कमी को लेकर युवाओं ने विशाल मार्च निकाला। आंदोलन के चलते प्रशासन ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव के घर की सुरक्षा कड़ी कर दी।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का असंतोष शुक्रवार, 16 अक्टूबर को सड़कों पर खुलकर सामने आ गया। गांधी चौक से लेकर नेहरू चौक तक युवाओं का एक बड़ा जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिसमें CGPSC, पुलिस SI भर्ती, सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती के प्रतिभागी एकजुट होकर शामिल हुए। भर्ती प्रक्रियाओं में हो रही लगातार देरी, परीक्षाओं का बार-बार स्थगन और कॉपियों के मूल्यांकन में सामने आई विसंगतियों को लेकर छात्रों ने शासन के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। युवाओं का साफ कहना है कि वर्षों तक कड़ी मेहनत और तपस्या करने के बावजूद उन्हें केवल अनिश्चित भविष्य और निराशा हाथ लग रही है। इस व्यापक आक्रोश और विशाल विरोध मार्च को देखते हुए स्थानीय प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया और सुरक्षा के मद्देनजर डिप्टी सीएम अरुण साव के आवास पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया।\n\nगांधी चौक से नेहरू चौक तक गूंजे युवाओं के नारे\nबिलासपुर की प्रमुख सड़कों पर आयोजित इस महा रैली में हजारों की तादाद में छात्र-छात्राएं हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां लिए पहुंचे। गांधी चौक से शुरू हुआ यह विशाल मार्च शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए नेहरू चौक पर समाप्त हुआ। रास्ते भर युवा भर्ती प्रक्रियाओं को समयबद्ध करने और स्थगित परीक्षाओं को अविलंब आयोजित कराने की मांग को लेकर नारेबाजी करते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकारी तंत्र की सुस्ती के कारण प्रदेश के लाखों योग्य युवाओं का बहुमूल्य समय बर्बाद हो रहा है। वे केवल अपनी जायज मांगों को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं।\n\nCGPSC मुख्य परीक्षा मूल्यांकन में गड़बड़ी और 187 अभ्यर्थियों का विवाद\nप्रदर्शनकारी छात्रों के गुस्से का एक प्रमुख कारण CGPSC मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में सामने आई कथित विसंगतियां हैं। आंदोलन में शामिल अभ्यर्थियों ने दावा किया कि सूचना का अधिकार यानी RTI के जरिए जब उत्तर पुस्तिकाएं निकलवाई गईं, तो कई जगह अंकों के आवंटन और जांच में गंभीर खामियां देखने को मिलीं। अभ्यर्थियों ने 187 उम्मीदवारों से जुड़े इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई। उनका कहना है कि सभी संबंधित अभ्यर्थियों को उनकी जांची गई उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाएं और मूल्यांकन की पूरी कार्यप्रणाली में सौ फीसदी पारदर्शिता स्थापित की जाए, ताकि किसी भी होनहार अभ्यर्थी का हक न मारा जाए।\n\nसाल 2019 के बाद से व्याख्याता भर्ती का इंतजार कर रहे विज्ञान वर्ग के छात्र\nइस महा रैली में विज्ञान संकाय से पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं ने भी अपनी उपेक्षा को लेकर कड़ा ऐतराज जताया। स्कूल शिक्षा विभाग में व्याख्याता भर्ती के अवसरों से वंचित अभ्यर्थियों ने बताया कि वर्ष 2019 के बाद से अब तक विज्ञान विषय के लिए कोई नई भर्ती नहीं निकाली गई है। बायोलॉजी, मैथ्स और कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों के योग्य अभ्यर्थी पिछले कई सालों से लगातार नई भर्ती की राह देख रहे हैं। छात्रों ने शासन से मांग की कि इन सभी संबंधित विषयों में तत्काल नई भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए, क्योंकि भर्ती न आने के कारण कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा समाप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है और उनका करियर दांव पर लगा है।\n\nबार-बार पेपर टलने से मानसिक अवसाद, प्रतियोगी प्रज्ञाकांत ने पूछे तीखे सवाल\nरैली का हिस्सा बने प्रतियोगी छात्र प्रज्ञाकांत ने परीक्षाओं के लगातार स्थगित होने से युवाओं पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक दबाव को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक अभ्यर्थी जब महीनों रात-दिन एक करके किसी परीक्षा की तैयारी करता है और ऐन वक्त पर पेपर रद्द या स्थगित हो जाता है, तो उसका पूरा मनोबल टूट जाता है। इसके बाद जब वह अगली परीक्षा की तैयारी शुरू करता है, तो वहां भी वही अनिश्चितता बनी रहती है। प्रज्ञाकांत ने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर शासन युवाओं को स्पष्ट और पारदर्शी जवाब क्यों नहीं दे रहा है, जिससे उन्हें पता चल सके कि उनका भविष्य किस दिशा में जा रहा है।\n\nपारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक दबाव झेल रहीं महिला अभ्यर्थी\nइस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल महिला अभ्यर्थियों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे किस तरह दोहरे दबाव में तैयारी कर रही हैं। लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया अटकी रहने के कारण उन पर परिवार की जिम्मेदारियां संभालने और शादी करने का भारी सामाजिक दबाव बनाया जा रहा है। महिला प्रतिभागियों का कहना था कि वे कड़ी मेहनत के दम पर सरकारी शिक्षक या प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना संजोए हुए हैं, लेकिन समय पर परीक्षाएं और नियुक्तियां न होने से उनकी उम्मीदें टूट रही हैं। अनिश्चितता के इस दौर में उनके सामने अपने सपनों को जिंदा रखना हर दिन एक नई चुनौती बनता जा रहा है।\n\nडिप्टी सीएम अरुण साव के आवास पर पहरा सख्त, ठोस पहल की दरकार\nयुवाओं के इस व्यापक आक्रोश और विशाल मार्च के मद्देनजर प्रशासन ने किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए डिप्टी सीएम अरुण साव के आवास की सुरक्षा व्यवस्था काफी बढ़ा दी। आवास के आसपास बैरिकेडिंग और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर दी गई। आंदोलनकारी युवाओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार को युवाओं के इस जायज दर्द और चिंताओं को संवेदनशीलता के साथ सुनना चाहिए। छात्रों ने मांग की कि भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता लाई जाए, सभी अटकी परीक्षाओं का निश्चित कैलेंडर जारी कर समय पर आयोजन हो और छात्रों की सभी शिकायतों का त्वरित एवं ठोस समाधान निकाला जाए।\n\nइसका आप पर असर\nबिलासपुर में आयोजित इस बड़े आंदोलन से राज्य भर के लाखों प्रतियोगी अभ्यर्थियों और आम नागरिकों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।\n\n• परीक्षा कैलेंडर: राज्य सरकार पर भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शी समय-सारणी जारी करने का भारी दबाव बनेगा। इससे अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे लाखों उम्मीदवारों को आगामी परीक्षाओं की निश्चित तिथियां मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।\n• पारदर्शिता की मांग: उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में आरटीआई के खुलासों से चयन प्रक्रिया में सुधार की मांग तेज होगी। इससे भविष्य की मुख्य परीक्षाओं में डिजिटल मूल्यांकन या कार्बन कॉपी व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।\n• बिलासपुर में: नेहरू चौक और गांधी चौक जैसे प्रमुख क्षेत्रों में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। आम शहरवासियों को आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्गों की जानकारी रखनी चाहिए।\n• विज्ञान संकाय: वर्ष 2019 से रुकी व्याख्याता भर्ती को लेकर विभाग पर अधिसूचना जारी करने का दबाव बढ़ेगा। इससे लंबे समय से राह देख रहे गणित और जीव विज्ञान के स्नातकों के लिए रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह बड़ा आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में अनवरत देरी, मूल्यांकन में सामने आई कथित गड़बड़ियों और लंबे समय से रिक्त पदों पर नई विज्ञप्ति जारी न होने की वजह से भड़का है।\n\n• मूल्यांकन में विसंगति: सीजीपीएससी मुख्य परीक्षा के अभ्यर्थियों द्वारा आरटीआई से प्राप्त कॉपियों में अंकों के आवंटन में गंभीर असमानताएं पाई गईं। इसी कारण 187 अभ्यर्थियों से जुड़े प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग ने तूल पकड़ लिया।\n• भर्तियों का स्थगन: पुलिस उप निरीक्षक और शिक्षक भर्ती जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के बार-बार टलने से छात्रों का सब्र टूट गया। लगातार स्थगन के कारण वर्षों से तैयारी कर रहे युवाओं के सामने उम्र सीमा और आर्थिक तंगी का संकट खड़ा हो गया।\n• वर्ष 2019 के बाद रिक्तियों का अभाव: शिक्षा विभाग में गणित, जीव विज्ञान और वाणिज्य जैसे विज्ञान संकायों में पिछले कई वर्षों से नई व्याख्याता भर्ती नहीं निकाली गई। अवसरों के अभाव ने इन विषयों के योग्य युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए विवश किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बिलासपुर में अभ्यर्थियों ने महा रैली कब और कहां निकाली?\nयह महा रैली शुक्रवार, 16 अक्टूबर को गांधी चौक से नेहरू चौक के बीच निकाली गई।\n\n2. रैली में किन प्रमुख परीक्षाओं के अभ्यर्थी शामिल हुए?\nइसमें CGPSC, पुलिस SI भर्ती तथा सहायक शिक्षक एवं शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी शामिल हुए।\n\n3. CGPSC मुख्य परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों की क्या प्रमुख मांग है?\nअभ्यर्थियों ने 187 उम्मीदवारों से जुड़े मामले की जांच, जांची गई उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने और मूल्यांकन में पारदर्शिता की मांग की है।\n\n4. विज्ञान विषय के अभ्यर्थियों की मुख्य शिकायत क्या है?\nउनका कहना है कि 2019 के बाद से व्याख्याता पद के लिए विज्ञान, मैथ्स और कॉमर्स विषयों में कोई नई भर्ती नहीं निकाली गई है।\n\n5. प्रदर्शन के चलते किस राजनेता के आवास की सुरक्षा बढ़ाई गई?\nछात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने डिप्टी सीएम अरुण साव के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-10-16",
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