# बिलासपुर में शारदीय नवरात्रि पर सजे अनोखे पंडाल, कहीं पेंसिल से गढ़ी प्रतिमा तो कहीं दिखा श्रीकृष्ण का विराट स्वरूप

> छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में दुर्गा उत्सव के दौरान विभिन्न समितियों ने स्टेशनरी सामग्री की कलाकृति, नेपाल बाढ़ आपदा के सेवा दृश्य और पौराणिक प्रसंगों पर आधारित भव्य पंडाल सजाए हैं.

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/bilaspur-men-sharadiya-navaratri-para-saje-anokhe-pndala-kahin-pensila-se-garhi-pratima-to-kahin-dikha-krishna-virat-swaroop-48748 · **Language:** Hindi
**Tags:** बिलासपुर, दुर्गा पूजा, शारदीय नवरात्रि, दुर्गा पंडाल, छत्तीसगढ़, मसनगंज, तेलीपारा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर देवी उपासना का अभूतपूर्व उल्लास देखने को मिल रहा है. शहर के विभिन्न मोहल्लों और चौराहों पर स्थापित दुर्गा उत्सव समितियों ने इस बार धार्मिक परंपराओं के साथ अनूठी रचनात्मकता का अद्भुत संगम पेश किया है. किसी पंडाल में स्कूली स्टेशनरी और पेंसिलों के सहारे देवी प्रतिमा और तोरण द्वार गढ़े गए हैं, तो कहीं महाभारत काल के उस दृश्य को जीवंत किया गया है जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन के समक्ष अपना अलौकिक विराट रूप प्रकट किया था. कुछ स्थलों पर सफेद और लाल वस्त्रों में मां दुर्गा की भव्य छवि श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही है, वहीं कुछ पंडालों में प्राकृतिक विभीषिका के बीच मानव सेवा और करुणा का मार्मिक संदेश दिया जा रहा है.

## मसनगंज में स्टेशनरी सामग्री और पेंसिलों से रची गई अनूठी कलाकृति
बिलासपुर के मसनगंज इलाके में इस वर्ष का दुर्गा पंडाल श्रद्धालुओं और कला प्रेमियों के बीच जबरदस्त चर्चा का केंद्र बना हुआ है. इस पंडाल की विशेषता यह है कि आयोजकों ने पारंपरिक निर्माण सामग्रियों से हटकर स्टेशनरी की वस्तुओं और पेंसिलों का बेहद सुरुचिपूर्ण उपयोग किया है. इन पेंसिलों और लेखन सामग्रियों को व्यवस्थित ढंग से जोड़कर न केवल पूरा पंडाल निर्मित किया गया है, बल्कि मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा को भी इसी विशिष्ट शैली में तैयार किया गया है. पंडाल के हर कोने में झलcolumnsकती इस बारीक कारीगरी को निहारने और माता के अनोखे रूप के दर्शन करने के लिए नगर के कोने-कोने से भारी संख्या में श्रद्धालु मसनगंज पहुंच रहे हैं.

## शिव टॉकीज चौक: नेपाल आपदा और बाढ़ पीड़ितों की रक्षा का प्रेरक दृश्य
शिव वाहिनी दुर्गा उत्सव समिति ने शिव टॉकीज चौक पर स्थापित अपने पंडाल में पूजा-अर्चना के साथ एक गहरा सामाजिक संदेश समाहित किया है. समिति ने हाल के दौर में नेपाल में आई भयानक प्राकृतिक आपदा और विनाशकारी बाढ़ की परिस्थितियों को अपनी मुख्य विषयवस्तु बनाया है. पंडाल के आंतरिक भाग में तैयार किए गए सजीव दृश्यों में दिखाया गया है कि कैसे बाढ़ के उफनते पानी और भीषण संकट में फंसे असहाय लोगों की रक्षा स्वयं मां दुर्गा कर रही हैं. आपदा के थपेड़ों से घिरे नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने का यह दृश्य हर दर्शनार्थी को झकझोरता है और यह याद दिलाता है कि विपदा के समय पीड़ित मानवता की सेवा ही ईश्वर की सबसे बड़ी आराधना है.

## तिफरा में जय मां काली समिति: तपस्या में लीन ऋषि स्वरूप देवी-देवता
तिफरा क्षेत्र में जय मां काली दुर्गा उत्सव समिति इस वर्ष मां भगवती की स्थापना का अपना 10वां वर्ष मना रही है. पिछले एक दशक से पूजा का आयोजन कर रही इस समिति ने पंडाल के भीतर ध्यान और साधना का अलौकिक परिवेश रचा है. यहां मुख्य देवी प्रतिमा के साथ अन्य सभी देवी-देवताओं को प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों की भांति कठोर तपस्या और समाधि की मुद्रा में दर्शाया गया है. इस आध्यात्मिक प्रस्तुति में सनातन साधना परंपरा, मौन और गहन तप का भाव सहज ही प्रकट होता है. शांत और दिव्य वातावरण के साथ इन विशेष प्रतिमाओं के दर्शन के लिए तिफरा में दिन-रात श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है.

## तेलीपारा में चंद्रशेखर आजाद समिति का 50वां वर्ष: करोड़ों की भव्यता
बिलासपुर के तेलीपारा में चंद्रशेखर आजाद दुर्गा उत्सव समिति की ओर से आयोजित उत्सव अपनी स्वर्ण जयंती यानी 50वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है. आधी सदी से निरंतर जारी इस गौरवशाली परंपरा के उपलक्ष्य में समिति ने बेहद भव्य और नयनाभिराम पंडाल का निर्माण कराया है. इस विशाल पंडाल को तैयार करने में करोड़ों रुपये की अनुमानित लागत आई है. पंडाल का बाह्य और आंतरिक स्थापत्य अपनी विशालता और भव्य रोशनी से पूरे इलाके को जगमग कर रहा है. पांच दशकों से चली आ रही इस धार्मिक निष्ठा को नमन करने और स्वर्ण जयंती वर्ष में माता के दर्शन पाने के लिए हजारों की तादाद में भक्त कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं.

## उदाई चौक पर आसमानी आभा और लाल परिधान में जय संतोषी मां पंडाल
उदाई चौक पर जय संतोषी मां दुर्गा उत्सव समिति ने रंगों और आस्था के मनोहारी तालमेल से भक्तों का दिल जीत लिया है. यहां पंडाल की आंतरिक सजावट में आसमानी नीले रंग का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है, जिससे पूरे परिसर में एक शांत और दिव्य वातावरण का आभास होता है. इस आसमानी पृष्ठभूमि के बीच मां दुर्गा को चटख लाल रंग के परिधानों और आकर्षक आभूषणों से सुसज्जित किया गया है. माता रानी के साथ विराजमान अन्य सहवर्ती देवी-देवताओं के विग्रहों को भी बड़ी नफासत से अलंकृत किया गया है, जिससे यह पूरा स्थल भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है.

## जूना बिलासपुर किलावार्ड: 58वें वर्ष में महाभारत का विराट और रौद्र स्वरूप
जूना बिलासपुर के किलावार्ड में सार्वजनिक उत्सव समिति के दुर्गा पूजा आयोजन का इस वर्ष 58वां गौरवशाली वर्ष है. करीब छह दशकों की लंबी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार समिति ने कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक महाभारत प्रसंग को पंडाल का रूप दिया है. पंडाल में उस क्षण को जीवंत किया गया है जब रणभूमि में संशयग्रस्त अर्जुन को भगवान श्रीकृष्ण ने अपना सर्वव्यापी विराट और रौद्र रूप दिखाया था. उसी पौराणिक कथा के अनुरूप पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण की अत्यंत विशालकाय और तेजस्वी प्रतिमा स्थापित की गई है. पौराणिक गाथा की यह भव्य और सजीव प्रस्तुति श्रद्धालुओं को रोमांचित कर रही है.

## हटरी चौक और शांति लॉज गली में सफेद परिधान और सिंहवाहिनी माता
हटरी चौक पर एकता दुर्गा उत्सव समिति इस वर्ष अपनी स्थापना का 49वां साल मना रही है. इस बार समिति ने मां दुर्गा को संपूर्ण श्वेत वस्त्रों में अलंकृत कर अत्यंत शांत और सौम्य स्वरूप प्रदान किया है. सफेद परिधानों में माता की मनोहारी छवि और पंडाल का सादगीपूर्ण सौंदर्य भक्तों को सहज ही अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. वहीं दूसरी ओर, जूना बिलासपुर के शांति लॉज वाली गली में सजे पंडाल में मां भगवती अपने तेजस्वी सिंह पर सवार होकर भक्तों को दर्शन दे रही हैं. सिंहवाहिनी के इस पराक्रमी रूप को देखने के लिए गली में सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है और संपूर्ण परिवेश मां के जयकारों से गुंजायमान है.

## पुराने बस स्टैंड तेलीपारा में श्रीकृष्ण लीला और योगमाया का स्वरूप
तेलीपारा स्थित पुराने बस स्टैंड के पास स्थापित पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और पौराणिक आख्यानों से प्रेरित अनूठी झांकी सजाई गई है. यहां आदिशक्ति मां दुर्गा को योगमाया के अलौकिक स्वरूप में प्रतिष्ठापित किया गया है. वैष्णव और शाक्त परंपरा के इस दुर्लभ और विहंगम समन्वय को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. माता के इस योगमाया रूप की आभा और पंडाल की साज-सज्जा पूरे शहर में गहन श्रद्धा और कौतूहल का विषय बनी हुई है.

## इसका आप पर असर
बिलासपुर शहर और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए इन विशिष्ट पंडालों के कारण दर्शन और आवागमन से जुड़े महत्वपूर्ण व्यावहारिक बदलाव आए हैं.

- **बिलासपुर में:** शहर के प्रमुख चौराहों जैसे मसनगंज, तेलीपारा, हटरी चौक और शिव टॉकीज मार्ग पर नवरात्रि के दौरान भारी भीड़ जुटने से शाम के समय यातायात में बदलाव रहेगा. इन इलाकों से गुजरने वाले दैनिक यात्रियों और श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलना होगा और निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही उपयोग करना चाहिए.
- **छत्तीसगढ़ में:** राज्य भर से कला और धार्मिक पर्यटन में रुचि रखने वाले लोग बिलासपुर के इन अनूठे पंडालों को देखने आ सकते हैं. सप्ताहांत और महाअष्टमी या महानवमी के दिनों में रेल और सड़क परिवहन पर भीड़ का दबाव बढ़ सकता है, इसलिए परिवार सहित आने वाले दर्शनार्थियों को अपनी यात्रा पूर्व नियोजित कर लेनी चाहिए.
- **कला और सामाजिक प्रेरणा:** आम नागरिकों और छात्र-छात्राओं के लिए मसनगंज की स्टेशनरी कलाकृति और शिव टॉकीज का बाढ़ बचाव दृश्य रचनात्मकता और आपदा प्रबंधन की सीख देते हैं. लोग अपने घरों और स्थानीय आयोजनों में दैनिक उपयोग की वस्तुओं के रचनात्मक इस्तेमाल और संकट के समय निस्वार्थ मदद की प्रेरणा ले सकते हैं.
- **सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था:** करोड़ों की लागत वाले तेलीपारा और 58 वर्ष पुराने किलावार्ड जैसे प्रमुख पंडालों में कतारबद्ध दर्शन के कड़े प्रबंध किए गए हैं. बुजुर्गों और बच्चों के साथ जाने वाले परिवारों को सुरक्षा स्वयंसेवकों के निर्देशों का पालन करना चाहिए ताकि भीड़भाड़ में किसी असुविधा से बचा जा सके.

## ऐसा क्यों हुआ
बिलासपुर में इस वर्ष दुर्गा उत्सव समितियों द्वारा ऐसे विविधतापूर्ण पंडाल तैयार करने के पीछे पारंपरिक उत्सवों को समसामयिक विषयों और अनूठी कलात्मकता से जोड़ने की सोच रही है.

- **विषयगत नवीनता की पहल:** हर वर्ष श्रद्धालुओं के सामने कुछ नया पेश करने की होड़ के तहत मसनगंज समिति ने स्टेशनरी जैसी अप्रत्याशित सामग्री का चयन किया. आयोजक नई पीढ़ी के दर्शकों को आकर्षित करने के लिए पारंपरिक मूर्तिकला की सीमाओं को विस्तार देना चाहते थे.
- **समसामयिक मानवीय संवेदनशीलता:** शिव वाहिनी समिति ने हाल ही में नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक विभीषिका के दर्द को रेखांकित करने का निर्णय लिया. इसका प्राथमिक उद्देश्य उत्सव की खुशियों के बीच दर्शकों को संकटग्रस्त लोगों के प्रति मानवीय कर्तव्य और सेवा भावना की याद दिलाना था.
- **ऐतिहासिक और पौराणिक जुड़ाव:** किलावार्ड में 58 वर्षों और हटरी चौक में 49 वर्षों की निरंतर परंपरा को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए महाभारत के विराट स्वरूप और शास्त्रीय योगमाया संदर्भों को चुना गया. ये समितियां अपनी दशकों पुरानी प्रतिष्ठा के अनुरूप सनातन धर्म के दार्शनिक पक्षों को भव्य रूप में प्रस्तुत करना चाहती थीं.
- **स्वर्ण जयंती की उपलब्धि:** तेलीपारा की चंद्रशेखर आजाद समिति का यह 50वां वर्ष था, जिसे मील का पत्थर मानते हुए भव्य पैमाने और करोड़ों रुपये के बजट के साथ आयोजित किया गया. पांच दशकों के सफर को ऐतिहासिक बनाने के लिए विशेष साज-सज्जा और बड़े पैमाने पर कारीगरी पर जोर दिया गया.

## सवाल-जवाब

### 1. बिलासपुर के मसनगंज में सजे पंडाल की मुख्य विशेषता क्या है?
मसनगंज के पंडाल और मां दुर्गा की प्रतिमा को पेंसिलों तथा विभिन्न स्टेशनरी सामग्रियों का अत्यंत कलात्मक उपयोग करके तैयार किया गया है.

### 2. शिव टॉकीज चौक स्थित पंडाल में क्या सामाजिक संदेश दिया गया है?
वहां नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा और बाढ़ के दृश्य दर्शाए गए हैं, जिसमें मां दुर्गा को संकट में फंसे लोगों की जान बचाते और सुरक्षित निकालते दिखाया गया है.

### 3. तेलीपारा की चंद्रशेखर आजाद दुर्गा उत्सव समिति इस वर्ष कौन सा वर्ष मना रही है?
चंद्रशेखर आजाद दुर्गा उत्सव समिति इस वर्ष अपना 50वां वर्ष मना रही है, जिसका पंडाल करोड़ों रुपये की लागत और भव्य सजावट के लिए जाना जा रहा है.

### 4. जूना बिलासपुर के किलावार्ड में किस पौराणिक प्रसंग को दर्शाया गया है?
किलावार्ड में अपने 58वें वर्ष के अवसर पर महाभारत के उस प्रसंग को दर्शाया गया है जहां भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को अपना विराट और रौद्र स्वरूप दिखाते हैं.

### 5. तिफरा के जय मां काली दुर्गा उत्सव समिति के पंडाल में देवी-देवताओं का स्वरूप कैसा है?
तिफरा के पंडाल में मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं को प्राचीन ऋषि-मुनियों की तरह ध्यान और तपस्या में लीन मुद्रा में दर्शाया गया है.

### 6. हटरी चौक और तेलीपारा पुराने बस स्टैंड पर माता के किन स्वरूपों के दर्शन हो रहे हैं?
हटरी चौक पर मां दुर्गा सफेद परिधानों में सुशोभित हैं, जबकि पुराने बस स्टैंड पर उन्हें श्रीकृष्ण लीला से जुड़े योगमाया स्वरूप में दर्शाया गया है.

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