बिलासपुर में शिक्षक भर्ती परीक्षा टलने पर अभ्यर्थियों का फूटा गुस्सा, गांधी चौक पर निकाला कैंडल मार्च छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा ऐन वक्त पर स्थगित होने के विरोध में अभ्यर्थियों ने बिलासपुर के गांधी चौक पर कैंडल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ में शिक्षक और सहायक शिक्षक पदों की प्रतियोगी परीक्षा अचानक टलने के बाद प्रतियोगी छात्रों का धैर्य जवाब दे गया है। इस अप्रत्याशित स्थगन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं ने बिलासपुर के गांधी चौक पर इकट्ठा होकर विरोध दर्ज कराया। संयुक्त छात्र मोर्चा के आह्वान पर आयोजित इस शांतिपूर्ण कैंडल मार्च में शामिल अभ्यर्थियों ने हाथों में मोमबत्तियां थाम रखी थीं और वे प्रशासनिक लेटलतीफी के साथ-साथ आरक्षण रोस्टर से जुड़े कानूनी विवादों को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब परीक्षा में महज दो दिन शेष रह गए थे, तब प्रक्रिया पर रोक लगाने का फैसला आने से उन हजारों युवाओं के अरमानों पर पानी फिर गया है जो वर्षों से दिन-रात एक करके किताबों में जुटे थे। तैयारी के वर्षों और आर्थिक बोझ की दास्तान विरोध प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे पिछले 2-5 वर्षों से शिक्षक भर्ती और अन्य सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं की अनवरत तैयारी में लगे हैं। राज्य के सुदूर जिलों और ग्रामीण इलाकों से आकर बिलासपुर जैसे बड़े केंद्र में किराए के कमरों तथा लाइब्रेरी की सीटों पर बैठकर पढ़ाई करना किसी भी सामान्य छात्र के लिए आर्थिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन होता है। अचानक परीक्षा टलने से न केवल उनके अनमोल वर्षों की मेहनत और समय पर पानी फिरा है, बल्कि उनके सीमित पारिवारिक बजट पर भी गहरा आघात पहुंचा है। महिला प्रतिभागियों ने भी अपनी व्यथा सामने रखते हुए कहा कि शादीशुदा जिंदगी और परिवारों से मीलों दूर रहकर नौकरी की उम्मीद बांधना पहले ही समाज में एक बड़ा संघर्ष है, लेकिन अब अनिश्चितता के इस नए भंवर ने उनके पूरे भविष्य को संकट में डाल दिया है। इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अभ्यर्थियों ने प्रशासन से भर्ती प्रक्रिया की उलझनों को शीघ्र दूर करने, पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और नई समय-सारणी घोषित करने की जोरदार मांग उठाई। अदालती आदेश और आरक्षण के कानूनी पेंच उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन 11 अक्टूबर 2026 को तय किया गया था, जबकि शिक्षक संवर्ग की भर्ती परीक्षा के लिए 25 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित थी। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया के आरक्षण नियमों को लेकर उपजे विवाद के चलते हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पूरी परीक्षा पर रोक लगा दी। इस कानूनी विवाद का मूल केंद्र भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों को मिलने वाला आरक्षण और विशेष रूप से पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को आरक्षण का विधिवत लाभ उपलब्ध कराने से संबंधित मसला है। न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश के तुरंत बाद प्रशासनिक स्तर पर परीक्षा को स्थगित करने का कदम उठाया गया। प्रदर्शनकारी युवाओं का मुख्य आरोप यह है कि परीक्षा से ठीक अड़तालीस घंटे पहले ऐसा आदेश जारी होना सिस्टम की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है। युवाओं का कहना है कि विज्ञापन जारी करने और आवेदन मंगाने से पहले ही आरक्षण के नियमों, रोस्टर और तमाम कानूनी बिंदुओं की सूक्ष्म जांच सुनिश्चित कर ली जानी चाहिए थी ताकि अंतिम घड़ी में छात्रों को इस मानसिक प्रताड़ना से न गुजरना पड़े। प्रशासनिक खामियों पर उठते गंभीर सवाल कैंडल मार्च में शामिल अभ्यर्थी इम्तियाज ने इस पूरी प्रक्रिया पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाएं कोई नियमित वार्षिक प्रक्रिया नहीं हैं, बल्कि यह अवसर कई-कई वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आता है। ऐसे महत्वपूर्ण मौकों पर अधिकारियों और चयन आयोग की यह प्राथमिक जिम्मेदारी बनती थी कि वे विज्ञापन जारी करते समय आरक्षण रोस्टर की वैधता की गहन पड़ताल करते। इम्तियाज ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब पूरी चयन प्रक्रिया की कानूनी और प्रशासनिक जिम्मेदारी सक्षम अधिकारियों के कंधों पर होती है, तो ऐसी बुनियादी कमियों को पहले ही क्यों नहीं दुरुस्त किया जाता। छात्रों का यह भी कहना है कि बार-बार कानूनी पेंचों में भर्तियों के फंसने और परीक्षाओं के टलने के कारण ही युवाओं को मजबूरी में अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर उतरना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और सभी विवादों का समयबद्ध समाधान निकाला जाए। घटते पदों की संख्या और समयबद्ध कार्यक्रम की दरकार प्रदर्शनकारियों में मौजूद अभ्यर्थी प्रकाश वर्मा ने शासन के भर्ती दृष्टिकोण पर सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में युवाओं के बीच लगभग 57000 पदों पर वृहद स्तर पर भर्ती किए जाने की चर्चा जोरों पर थी, जिसके बाद उम्मीदें घटकर 33000 और फिर 16000 पदों पर सिमट गईं। लेकिन अब जब वास्तविक प्रक्रिया सामने आई, तो यह भर्ती महज 5000 पदों तक सीमित होती दिखाई दे रही है। प्रकाश वर्मा ने कहा कि शिक्षक बनने का सपना संजोए बैठे बेरोजगार युवा लंबे समय से एक निष्पक्ष और बड़ी भर्ती का इंतजार कर रहे थे। एडमिट कार्ड जारी होने के बाद परीक्षा के एकदम मुहाने पर स्थगन का आदेश जारी होने से छात्रों का मनोबल टूट गया है। उन्होंने मांग की कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर अपनी नीति और मंशा स्पष्ट करे तथा चयन प्रक्रिया को तय समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए एक पक्का कैलेंडर जारी करे। तैयार प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और दोबारा परीक्षा का सवाल कैंडल मार्च के दौरान प्रकाश वर्मा और उनके साथी प्रदर्शनकारियों ने पूर्व में मुद्रित हो चुके प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और गोपनीयता का गंभीर मुद्दा भी उठाया। छात्रों का कहना है कि चूंकि परीक्षाएं 11 अक्टूबर और 25 अक्टूबर को होनी थीं, इसलिए उनके प्रश्नपत्र काफी पहले ही छपकर तैयार हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में परीक्षा टलने के बाद उन प्रश्नपत्रों की गोपनीयता को लेकर छात्रों के मन में गहरा संदेह पैदा हो गया है। अभ्यर्थियों की मांग है कि इन पुराने प्रश्नपत्रों को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक करते हुए नष्ट किया जाए, ताकि अगली बार जब भी परीक्षा आयोजित हो, वह पूरी तरह नए प्रश्नपत्रों के साथ संपन्न कराई जा सके। प्रदर्शन में शामिल महिला अभ्यर्थियों ने भी इस मांग का समर्थन किया और कहा कि वे नहीं चाहतीं कि भविष्य में परीक्षा होने पर पेपर की गोपनीयता को लेकर किसी नए विवाद का जन्म हो। हालांकि अभ्यर्थियों ने यह साफ किया कि यह केवल उनकी प्रशासनिक आशंका और एहतियाती मांग है, इसे किसी प्रकार से पेपर लीक होने की पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए। अनिश्चित भविष्य और आत्मानंद स्कूलों के नियम एक अन्य अभ्यर्थी अजय साहू ने अपनी स्थिति बयां करते हुए बताया कि वे पिछले चार-पांच वर्षों से पीएससी की तैयारी के साथ-साथ शिक्षक भर्ती की परीक्षाओं में अपना भाग्य आजमाने के लिए मेहनत कर रहे थे। इस स्थगन ने उनके पूरे शैक्षणिक और व्यक्तिगत जीवन की योजनाओं को पटरी से उतार दिया है। अजय साहू का मानना है कि यदि इस परीक्षा का आयोजन दिसंबर 2026 से पहले नहीं कराया गया, तो अभ्यर्थियों को अनिश्चितकाल तक भर्ती के लिए भटकना पड़ सकता है। इसके साथ ही उन्होंने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में होने वाली भर्तियों को लेकर भी अपनी बात रखी और मांग की कि इन स्कूलों में हिंदी माध्यम के योग्य अभ्यर्थियों को भी आवेदन की पात्रता मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी नियम इस तरह के होने चाहिए जिससे किसी भी भाषा माध्यम के प्रतिभाशाली अभ्यर्थी को अवसर से वंचित न रहना पड़े। महिला अभ्यर्थियों का मानसिक और पारिवारिक तनाव गांधी चौक पर मोमबत्ती लेकर खड़ी महिला अभ्यर्थी सीता साहू ने अपने दिल का दर्द बयां करते हुए बताया कि परीक्षा टलने की खबर जैसे ही आई, वे मानसिक रूप से टूट गईं। सीता साहू पिछले दो से तीन वर्षों से इस भर्ती की तैयारी कर रही हैं और पिछले आठ महीनों से अपने परिवार, ससुराल और पति से दूर बिलासपुर में एक छोटे से किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अब लगातार टलती परीक्षाओं के कारण उनके परिवार और ससुराल की ओर से वापस घर लौटने का भारी दबाव बन रहा है। शहर में रहकर पढ़ाई, खाने-पीने और कमरे का किराया वहन करना आर्थिक रूप से असहनीय होता जा रहा है। रोजगार न मिलने और भर्ती लटकने से उनके सामने जीवन की दिशा ही धुंधली पड़ गई है। वहीं अभ्यर्थी किरण मौर्या ने भी अपनी परेशानी साझा करते हुए इसी तरह के भावनात्मक और आर्थिक दबाव की बात कही। इसका आप पर असर शिक्षक भर्ती परीक्षा स्थगित होने से हजारों अभ्यर्थियों की परीक्षा योजनाएं, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक परिस्थितियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। • भारत में: विभिन्न राज्यों में प्रतियोगी परीक्षाओं के अंतिम समय में टलने से देश भर के बेरोजगार युवाओं के बीच चयन प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता को लेकर असंतोष बढ़ता है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती परीक्षाओं की मांग लगातार मुखर हो रही है। • बिलासपुर और छत्तीसगढ़ में: दूरदराज के क्षेत्रों से बिलासपुर आकर किराए के कमरों में पढ़ाई कर रहे अभ्यर्थियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। परीक्षा की नई तिथि घोषित न होने तक छात्रों को कमरे का किराया, भोजन और अन्य खर्च वहन करने में भारी कठिनाई होगी। • महिला अभ्यर्थियों पर प्रभाव: परिवार और ससुराल से दूर रहकर तैयारी कर रही महिला अभ्यर्थियों पर घर लौटने का पारिवारिक दबाव बढ़ रहा है। अनिश्चितता के कारण कई युवतियों के लिए आगे की पढ़ाई और तैयारी जारी रखना कठिन हो सकता है। • प्रश्नपत्रों की सुरक्षा: पूर्व में मुद्रित हो चुके प्रश्नपत्रों को नष्ट कर नए पेपर तैयार करने की मांग से आगामी परीक्षा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने का दबाव रहेगा। अभ्यर्थियों का आग्रह है कि नई परीक्षा पूर्ण निष्पक्षता और गोपनीयता के साथ कराई जाए। ऐसा क्यों हुआ सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा पर रोक हाईकोर्ट के कानूनी निर्देश और भर्ती नियमों में दिव्यांग आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों के कारण लगी है। • सीधा कारण: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की विसंगतियों को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए परीक्षा आयोजन पर स्थगन आदेश जारी किया। इस अदालती निर्देश के अनुपालन में प्रशासनिक स्तर पर परीक्षा को तुरंत टालना पड़ा। • आरक्षण रोस्टर विवाद: इस कानूनी टकराव का मुख्य कारण भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों, विशेष रूप से पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए आरक्षण प्रावधानों का समुचित निर्धारण न होना बताया गया है। नियमों में स्पष्टता के अभाव के चलते मामला अदालत की चौखट तक पहुंचा। • प्रशासनिक चूक: अभ्यर्थियों का आरोप है कि चयन एजेंसियों ने विज्ञापन जारी करने से पहले रोस्टर और कानूनी प्रावधानों की समय रहते जांच नहीं की। यदि यह पड़ताल पहले पूरी हो जाती, तो परीक्षा से केवल दो दिन पहले यह संकट खड़ा नहीं होता। सवाल-जवाब 1. बिलासपुर के गांधी चौक पर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन क्यों किया? छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती परीक्षा ऐन वक्त पर स्थगित होने तथा आरक्षण विवाद के विरोध में अभ्यर्थियों ने कैंडल मार्च निकाला। 2. शिक्षक और सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षाएं किन तारीखों को आयोजित होनी थीं? सहायक शिक्षक परीक्षा 11 अक्टूबर 2026 को और शिक्षक भर्ती परीक्षा 25 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जानी प्रस्तावित थी। 3. परीक्षा पर रोक किस संस्था के आदेश के बाद लगाई गई? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के आदेश के बाद भर्ती परीक्षाओं पर रोक लगाई गई। 4. भर्ती परीक्षा को लेकर मुख्य विवाद क्या है? विवाद भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों और विशेष रूप से पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के आरक्षण प्रावधानों से संबंधित है। 5. अभ्यर्थियों ने पुराने प्रश्नपत्रों को लेकर क्या मांग रखी है? अभ्यर्थियों ने गोपनीयता की आशंका जताते हुए मांग की है कि पुराने प्रश्नपत्र सार्वजनिक कर नष्ट किए जाएं और नई परीक्षा नए पेपर से कराई जाए। 6. आत्मानंद स्कूलों को लेकर प्रदर्शनकारी अजय साहू ने क्या मांग उठाई? उन्होंने मांग उठाई कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों में भर्ती के लिए हिंदी माध्यम के पात्र अभ्यर्थियों को भी अवसर दिया जाना चाहिए। https://trendkia.com/chhattisgarh/bilaspur-men-shikshaka-bharti-pariksha-talane-para-abhyarthiyon-ka-phuta-gussa-gandhi-chowk-para-nikala-kaindala-marcha-46560 TrendKia — Har trend, sabse pehle.