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  "type": "article",
  "title": "मेवों और चाशनी के मेल से ऐसे बनाएं छत्तीसगढ़ी पाग खुरमी रोटी, जानें पूरा तरीका",
  "summary": "सूजी, गेहूं के आटे और भुने हुए मेवों के मिश्रण से तैयार होने वाली छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पाग खुरमी रोटी स्वाद में बेहद लाजवाब होती है। चाशनी की मीठी परत वाली इस खास डिश को घर पर आसानी से बनाया जा सकता है।",
  "content": "बिलासपुर की समृद्ध रसोई परंपरा में पारंपरिक पकवानों का अपना एक अलग महत्व है। छत्तीसगढ़ के खानपान में स्थानीय संस्कृति, पौष्टिकता और बनाने की विशिष्ट पाक कला का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इसी पारंपरिक विरासत का एक अत्यंत स्वादिष्ट और लोकप्रिय हिस्सा है पाग खुरमी रोटी। यह मीठा पकवान अपने खास स्वाद और मेवों के भरपूर मिश्रण की वजह से बहुत चाव से खाया जाता है। इसे तैयार करने में काजू, बादाम, किशमिश, तिल और मूंगफली के दानों का विशेष रूप से उपयोग होता है। इन सभी सामग्रियों को पहले घी में अच्छी तरह भूनकर तैयार किया जाता है, जिससे न केवल पकवान का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है बल्कि इसकी भीनी-भीनी खुशबू भी पूरे घर में फैल जाती है। सूजी, गेहूं का आटा, शुद्ध घी, सूखे मेवों और शक्कर की मीठी चाशनी से तैयार होने वाली यह खुरमी बाहर से खस्ता और अंदर से मेवों की स्वादिष्ट भरावन से भरपूर होती है।\n\nमेवों को भूनने और भरावन तैयार करने की विधि\nपाग खुरमी रोटी को पारंपरिक रूप से बनाने की शुरुआत सूखे मेवों की खास तैयारी से होती है। सबसे पहले एक बर्तन या कड़ाही में थोड़ा घी गर्म किया जाता है। इसके बाद काजू, बादाम, किशमिश, तिल और मूंगफली के दानों को घी में डालकर धीमी आंच पर अच्छी तरह से भूना जाता है। भूनने की यह प्रक्रिया सूखे मेवों के कच्चेपन को खत्म कर उनमें सोंधापन भर देती है। जब ये सभी चीजें भुनकर हल्की सुनहरी और कुरकुरी हो जाती हैं, तब इन्हें आंच से उतार लिया जाता है। ठंडा होने के बाद इन सभी भुने हुए मेवों को एक ग्राइंडर में डाला जाता है और बारीक पीसकर पाउडर जैसा मिश्रण तैयार कर लिया जाता है। इस पिसे हुए मिश्रण को एक अलग साफ बर्तन में निकाल कर रख लिया जाता है, जिसका इस्तेमाल बाद में खुरमी के भीतर भरावन के तौर पर किया जाता है।\n\nसूजी और गेहूं के आटे की भुनाई\nभरावन तैयार हो जाने के बाद मुख्य आधार बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसके लिए कड़ाही में घी डालकर अच्छी तरह गर्म किया जाता है। गर्म घी में सूजी और गेहूं का आटा डालकर धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूना जाता है। जब आटा और सूजी भुनकर अच्छी खुशबू देने लगें और उनका रंग हल्का बादामी हो जाए, तब इसमें पहले से तैयार किया गया सूखे मेवों का पिसा हुआ मिश्रण मिला दिया जाता है। सभी सामग्रियों को कलछी की मदद से बहुत अच्छी तरह मिलाया जाता है ताकि मेवे और भुना हुआ आटा एकसार हो जाएं। मिश्रण अच्छी तरह तैयार हो जाने के बाद इसे लगभग 10 से 15 मिनट के लिए ढककर छोड़ दिया जाता है। इस अवधि में आटा और मेवों का यह मेल अच्छी तरह व्यवस्थित होकर सेट हो जाता है।\n\nचाशनी मिलाना और खुरमी को आकार देना\nसेट होने के लिए रखे गए मिश्रण के बाद मिठास जोड़ने का काम शुरू होता है। इसके लिए एक अलग बर्तन में शक्कर और पानी को मिलाकर एक तार जैसी उपयुक्त शक्कर की चाशनी पकाई जाती है। चाशनी जब पककर तैयार हो जाती है, तो उसे सूजी, गेहूं के आटे और मेवों वाले मिश्रण में धीरे-धीरे डाला जाता है। चाशनी को मिश्रण में पूरी तरह मिलाकर हाथों से अच्छी तरह फेंटा जाता है, जिससे आटा एक चिकने और नरम गूंथे हुए रूप में बदल जाता है। इसके बाद इस मिश्रण की छोटी-छोटी लोइयां तोड़ी जाती हैं। लोई को हाथ में लेकर गोल पेड़े का आकार दिया जाता है और फिर बीच में गड्ढा बनाकर तैयार सूखे मेवों का मिश्रण भरा जाता है। किनारों को सावधानी से मोड़ते हुए इसे बंद किया जाता है और दबाकर पाग खुरमी रोटी का सुंदर पारंपरिक गोल आकार दिया जाता है।\n\nधीमी आंच पर तलने का काम\nसभी रोटियों को लोई से भरकर तय आकार देने के बाद उन्हें एक साफ थाली में अलग रख लिया जाता है। इसके बाद तलने की तैयारी की जाती है। एक बड़ी कड़ाही में तेल डालकर गर्म होने के लिए चढ़ाया जाता है। जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाता है, तो आंच को तुरंत धीमा कर दिया जाता है। पाग खुरमी रोटियों को एक-एक करके गर्म तेल में डाला जाता है और धीमी आंच पर बहुत धैर्य के साथ पकाया जाता है। धीमी आंच पर तलने से यह पकवान अंदर तक अच्छी तरह पक जाता है और कच्चा रहने का कोई जोखिम नहीं रहता। धीरे-धीरे तलते हुए जब खुरमी बाहर से सुनहरी, कुरकुरी और आकर्षक दिखने लगे, तब इसे तेल से बाहर निकाल लिया जाता है।\n\nचाशनी की मीठी परत चढ़ाने की अंतिम प्रक्रिया\nतली हुई खुरमी को अंतिम रूप देने के लिए एक बार फिर से शक्कर की ताजा चाशनी बनाई जाती है। तेल से छनकर निकली गरमागरम पाग खुरमी रोटियों को सीधे इस नई शक्कर की चाशनी में डुबोया जाता है। चाशनी में डालने से रोटियों के ऊपरी हिस्से पर शक्कर की एक पतली, चमकदार और मीठी परत चढ़ जाती है। कुछ देर चाशनी सोखने के बाद इन्हें बाहर निकाल लिया जाता है। इस तरह छत्तीसगढ़ की यह पारंपरिक, समृद्ध और पौष्टिक पाग खुरमी रोटी पूरी तरह बनकर तैयार हो जाती है। घी, सूजी, गेहूं के आटे और भुने हुए मेवों से बनी यह रोटी राज्य की खानपान संस्कृति की समृद्ध मिठास को दर्शाती है।\n\nइसका आप पर असर\nपारंपरिक क्षेत्रीय व्यंजनों को घर पर बनाने से स्थानीय स्वाद के साथ-साथ त्योहारों और खास मौकों पर पौष्टिक मिठाइयों के विकल्प मिलते हैं।\n\n• भारत में: देश भर के खाने के शौकीन बिना किसी महंगे हलवाई के घर में शुद्ध घी और सूखे मेवों से भरपूर पारंपरिक छत्तीसगढ़ी मिठाई का आनंद ले सकते हैं। इस रेसिपी के जरिए बाजार में मिलने वाली मिलावटी मिठाइयों से बचकर परिवार के लिए सेहतमंद और स्वादिष्ट पकवान बनाया जा सकता है।\n• बिलासपुर में: स्थानीय निवासियों और पारंपरिक रसोइयों के लिए यह रेसिपी सांस्कृतिक पाक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त जरिया है। तीज-त्योहारों के अवसर पर घर की रसोइयों में यह खास खुरमी बनाकर पारंपरिक उत्सवों की मिठास को जीवंत रखा जा सकता है।\n• रसोई बजट पर: गेहूं के आटे, सूजी और घर में उपलब्ध सूखे मेवों का इस्तेमाल करने से यह रेसिपी काफी किफायती साबित होती है। बाजार के महंगे उपहार पैक की जगह घर पर बनी यह खुरमी अपनों को भेंट करने के लिए एक शानदार विकल्प है।\n• स्वास्थ्य और पोषण: काजू, बादाम, तिल और मूंगफली के उपयोग से शरीर को स्वस्थ फैट्स, प्रोटीन और ऊर्जा मिलती है। घर पर तैयार होने के कारण इसमें इस्तेमाल होने वाले घी और तेल की गुणवत्ता पूरी तरह नियंत्रित रहती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nछत्तीसगढ़ी पाग खुरमी रोटी का खास स्वाद और बनावट इसके पारंपरिक पकाने के तरीके और सटीक अनुपात पर निर्भर करती है। सामग्री के सही मेल और तलने की गति से ही यह पकवान अपना प्रामाणिक रूप लेता है।\n\n• धीमी आंच पर तलने की वजह: खुरमी की लोई में अंदर तक सूखे मेवों की भरावन होती है और बाहरी परत मोटी होती है। यदि इसे तेज आंच पर तला जाए तो बाहर से यह तुरंत जल जाएगी और अंदर का आटा कच्चा रह जाएगा, इसलिए इसे धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकाया जाता है।\n• दो बार चाशनी का उपयोग: पहली बार चाशनी को आटे और मेवों के मिश्रण को बांधकर गूंथने के लिए मिलाया जाता है, जबकि दूसरी बार तली हुई खुरमी पर बाहरी चमकदार मीठी परत चढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह दोहरा तरीका इसे अंदर से नरम और बाहर से खस्ता मिठास देता है।\n• सामग्रियों का पारंपरिक संतुलन: तिल, मूंगफली और सूखे मेवों को घी में भूनने से उनके प्राकृतिक तेल बाहर आते हैं, जो खुरमी को लंबे समय तक ताजा बनाए रखने में मदद करते हैं। सूजी की उपस्थिति बाहरी हिस्से को जरूरी कुरकुरापन प्रदान करती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पाग खुरमी रोटी किस राज्य का पारंपरिक व्यंजन है?\nपाग खुरमी रोटी छत्तीसगढ़ का एक पारंपरिक और लोकप्रिय मीठा व्यंजन है, जिसे बिलासपुर समेत पूरे राज्य में खास मौकों पर बनाया जाता है।\n\n2. इस रोटी को बनाने में कौन-से मेवों का इस्तेमाल किया जाता है?\nइसे बनाने के लिए काजू, बादाम, किशमिश, तिल और मूंगफली के दानों को घी में भूनकर इस्तेमाल किया जाता है।\n\n3. सूजी और आटे के मिश्रण को भूनने के बाद कितनी देर रखना चाहिए?\nसूजी, गेहूं के आटे और पिसे हुए मेवों के मिश्रण को अच्छी तरह मिलाकर लगभग 10 से 15 मिनट के लिए सेट होने के लिए रख देना चाहिए।\n\n4. पाग खुरमी रोटी को धीमी आंच पर क्यों तला जाता है?\nधीमी आंच पर तलने से खुरमी अंदर तक अच्छी तरह से पक जाती है और बाहर से सुनहरी व कुरकुरी बनती है।\n\n5. रोटी को तलने के बाद चाशनी में क्यों डुबोया जाता है?\nतलने के बाद खुरमी को दोबारा चाशनी में इसलिए डाला जाता है ताकि उसके ऊपर शक्कर की एक मीठी और चमकदार परत चढ़ सके।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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    "पाग खुरमी रोटी",
    "छत्तीसगढ़ी व्यंजन",
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