बिलासपुर में इको फ्रेंडली पटाखों की धूम, बच्चों के लिए बाजार में आए नए और अनोखे आइटम बिलासपुर के पटाखा बाजारों में दीपावली को लेकर जबरदस्त रौनक दिख रही है, जहां इस बार पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन पटाखों और बच्चों के लिए खास मेटल गन की भारी मांग है। बिलासपुर शहर में दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही पटाखा बाजारों में खरीदारों का तांता लग गया है। इस बार की बिक्री में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके चलते बाजारों में इको फ्रेंडली यानी ग्रीन पटाखों की मांग में खासा इजाफा देखने को मिल रहा है। स्थानीय विक्रेता भी प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से केवल ऐसे उत्पादों को तरजीह दे रहे हैं जिनसे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे। इसके साथ ही बाल वर्ग को रिझाने के लिए इस साल बाजार में पारंपरिक आइटम से हटकर कई नए और आधुनिक उत्पाद उतारे गए हैं जो लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। बच्चों के लिए बाजार में पहुंचे फैंसी और अनोखे उत्पाद छोटे खरीदारों की पसंद को सर्वोपरि रखते हुए इस बार बाजार में कई तरह की अनूठी वैरायटी उपलब्ध कराई गई हैं। पारंपरिक विकल्पों जैसे पॉप, अनार, चकरी और फुलझड़ी के अलावा मयूर, शेर, सांप गोली और छलांग लगाने वाले जंपिंग फ्रॉग जैसे आइटम बच्चों को बेहद लुभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य नए डिजाइन के उत्पाद भी दुकानों की शोभा बढ़ा रहे हैं जो बाल वर्ग में खासे लोकप्रिय हो रहे हैं। पटाखा व्यापारी संघ के कोषाध्यक्ष आशीष नामदेव का कहना है कि इस सीजन में बच्चों की पसंद का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि वे त्योहार का पूरा आनंद उठा सकें। ग्रीन पटाखों की बिक्री पर व्यापारियों का विशेष जोर बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए इस साल बिलासपुर के पटाखा बाजारों में हरित पटाखों की बिक्री पर जोर दिया जा रहा है। व्यापारी संघ के प्रतिनिधियों का मानना है कि उत्सव के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। हालांकि जानकारों का यह भी मानना है कि ये उत्पाद पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त नहीं होते हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल करते समय पर्याप्त सतर्कता बरतना आवश्यक है। इसके बावजूद पारंपरिक विकल्पों की तुलना में इनसे पर्यावरण को होने वाली क्षति को कम करने में मदद मिलती है। आकर्षण का केंद्र बनी छह सौ रुपये वाली मेटल गन इस बार बच्चों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा का विषय धातु से बनी एक खास गन है जो बाजार में बिक रही है। इस मजबूत मेटल बॉडी वाली गन की कीमत लगभग 600 रुपये तय की गई है और इसका प्रीमियम लुक इसे अन्य प्लास्टिक खिलौनों से बिल्कुल अलग और टिकाऊ बनाता है। इसके अलावा बाजार में कई अन्य प्लास्टिक मॉडल भी मौजूद हैं जिनमें छोटी मिसाइलें लोड करके चलाने की सुविधा दी गई है जो बच्चों को रोमांच से भर देती है। संगीत बिखेरते पटाखे और रंग-बिरंगे रॉकेट युवाओं और बच्चों के मनोरंजन के लिए इस बार बाजार में संगीतमय पटाखे और रंगीन रोशनी बिखेरने वाले रॉकेट भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। नीले, गुलाबी और नारंगी रंगों के साथ चिंगारी छोड़ने वाले पटाखे रात के आसमान को बेहद खूबसूरत बना देते हैं। रिवर व्यू के पास सजी सैकड़ों दुकानों पर सुबह से ही खरीदारों की भारी भीड़ जुटने लगी है जो अपने परिवार के साथ पहुंचकर जमकर खरीदारी कर रहे हैं। प्रशासन और व्यापारियों ने भी अपील की है कि त्योहार मनाते समय पूरी सावधानी बरती जाए और बच्चों को बड़ों की निगरानी में ही आतिशबाजी करने दी जाए। इसका आप पर असर त्योहार के इस सीजन में बिलासपुर के स्थानीय बाजारों में खरीदारी का पैटर्न बदल रहा है जिससे ग्राहकों और दुकानदारों दोनों पर सीधा असर पड़ रहा है। • बिलासपुर में: खरीदारों को ग्रीन पटाखों और फैंसी आइटम्स के लिए थोड़ा अधिक बजट रखना पड़ सकता है क्योंकि इनकी मांग बाजार में अधिक है। स्थानीय परिवारों को भीड़भाड़ वाले रिवर व्यू बाजार में खरीदारी करते समय सुरक्षा और बच्चों की निगरानी का विशेष ध्यान रखना होगा। • भारत में: देश भर के शहरी बाजारों में पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ने से आने वाले वर्षों में पारंपरिक आतिशबाजी के निर्माण और विपणन के तरीकों में स्थाई बदलाव आ सकता है। नागरिकों को त्योहारी सीजन के दौरान वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा। ऐसा क्यों हुआ बिलासपुर के पटाखा बाजारों में इस बार ग्रीन पटाखों की मांग बढ़ने और नए उत्पादों के आने के पीछे कई मुख्य कारण और व्यापारिक रुझान काम कर रहे हैं। • प्रदूषण को लेकर बढ़ती जागरूकता: पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती चिंता के कारण स्थानीय व्यापारियों ने कम प्रदूषण फैलाने वाले उत्पादों को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है। • बच्चों की पसंद में बदलाव: आधुनिक समय में बाल वर्ग की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए निर्माताओं ने मेटल गन और म्यूजिक क्रैकर जैसे नए और आकर्षक विकल्प बाजार में उतारे हैं। • व्यापारिक तैयारियां: त्योहार के सीजन में ग्राहकों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने के लिए पटाखा संघ ने विभिन्न प्रकार के फैंसी आइटम्स का स्टॉक पहले ही जुटा लिया था। सवाल-जवाब 1. बिलासपुर में मुख्य पटाखा बाजार कहाँ सजा हुआ है? बिलासपुर के रिवर व्यू इलाके में पटाखों की सैकड़ों दुकानें सजाई गई हैं। 2. इस बार बाजार में किस प्रकार के पटाखों की मांग सबसे अधिक है? इस बार बाजार में इको फ्रेंडली यानी ग्रीन पटाखों की मांग सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। 3. बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी मेटल गन की कीमत कितनी है? लोहे की बॉडी वाली इस खास मेटल गन की कीमत लगभग 600 रुपये है। 4. बच्चों को लुभाने के लिए बाजार में कौन-से नए आइटम उपलब्ध हैं? बाजार में जंपिंग फ्रॉग, म्यूजिक क्रैकर, मयूर, शेर और रंग-बिरंगे रॉकेट जैसे आइटम बच्चों के लिए उपलब्ध हैं। 5. पटाखा व्यापारी संघ के कोषाध्यक्ष का क्या नाम है? पटाखा व्यापारी संघ के कोषाध्यक्ष का नाम आशीष नामदेव है। https://trendkia.com/chhattisgarh/bilaspur-sees-high-demand-for-eco-friendly-crackers-and-novelty-items-this-diwali-57230 TrendKia — Har trend, sabse pehle.