चार दिन की मूसलाधार बरसात से उफनी इंद्रावती नदी, बस्तर के 65 शिविरों में पहुंचे 9,200 से अधिक विस्थापित बस्तर में इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से तटवर्ती गांवों और जगदलपुर के रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है, जिससे फसलें नष्ट हो गईं और 9,200 से अधिक लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं. बस्तर अंचल में लगातार चार दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण इंद्रावती नदी विकराल रूप धारण कर चुकी है, जिससे समूचे इलाके में गंभीर बाढ़ के हालात बन गए हैं. हालांकि बीते तीन दिनों से बारिश का सिलसिला थमा हुआ है और नदी का जलस्तर भी धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन बाढ़ के पीछे छूटी तबाही ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं. जिला मुख्यालय जगदलपुर के आसपास के रिहायशी इलाकों सहित इंद्रावती के तट पर बसे दर्जनों गांवों में घरों के भीतर तक बाढ़ का पानी समा गया, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. जिले भर में 65 राहत शिविर, हजारों विस्थापित बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पूरे बस्तर जिले में अब तक कुल 65 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए 9,200 से अधिक प्रभावित नागरिकों को ठहराया गया है. जलमग्न बस्तियों से निकाले गए परिवारों का घरेलू सामान पानी में डूबकर पूरी तरह नष्ट हो चुका है, जिससे ग्रामीणों को भारी आर्थिक और भौतिक क्षति उठानी पड़ी है. बस्तर के शहरी इलाकों में भी हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं, जहां कई बस्तियों के मकानों में कमर तक पानी भरा हुआ देखा गया, जबकि निचले इलाकों में बने कुछ मकान पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं. बड़े चकवा में मकान ढहे और धान की फसल तबाह नदी किनारे स्थित बड़े चकवा गांव में बाढ़ का असर काफी गंभीर रहा है, जहां करीब 35 से 45 मकान सीधे तौर पर पानी की चपेट में आ गए हैं. ग्राम चकवा के उपसरपंच के अनुसार, इनमें से लगभग 7 से 8 मकान पानी के तेज बहाव और सीलन से पूरी तरह जमींदोज हो चुके हैं. गांव में बनाए गए राहत शिविर में वर्तमान में लगभग 150 परिवारों के सदस्य शरण लिए हुए हैं, जिनका राशन, घरेलू वस्तुएं, धान और अन्य जरूरी सामान पानी में बह गया है. स्थानीय निवासी बुधु बघेल ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि दो वर्ष पूर्व ही उन्होंने अपने मकान का निर्माण कराया था, जो अब पूरी तरह पानी में समा चुका है. वे घर के भीतर से अपना सामान तक बाहर नहीं निकाल सके और खेतों में बोई गई धान की फसल भी जलमग्न होकर चौपट हो गई. वहीं ग्रामीण खगेश्वर बहते ने बताया कि बाढ़ के पानी के दबाव से उनका मकान ढह गया. वे केवल कुछ कपड़े और बेहद जरूरी चीजें ही बचा पाए, जबकि तीन से चार एकड़ भूमि पर की गई उनकी खेती और घर में रखा अनाज पूरी तरह पानी में बर्बाद हो गया. किसानों पर गहराया गंभीर आर्थिक संकट इंद्रावती नदी के उफान और तेज बहाव ने तटवर्ती क्षेत्रों में बने कई कच्चे और पक्के निर्माणों को गंभीर नुकसान पहुंचाया है. सबसे बड़ा संकट उन किसानों पर आन पड़ा है जिन्होंने कर्ज लेकर इस सीजन में बुवाई की थी. खेतों में कई फीट पानी भर जाने से उनकी खड़ी फसलें डूब चुकी हैं और घरों में रखा जमा अनाज भी भीगकर नष्ट हो गया है. जलस्तर घटने के बावजूद अपने टूटे घरों और तबाह खेतों को देखकर ग्रामीणों के सामने आजीविका और पुनर्वास का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. इसका आप पर असर बाढ़ के बाद विस्थापित परिवारों के सामने आवास, राशन और आजीविका की तत्काल भरपाई की चुनौती खड़ी हो गई है. • भारत में: प्राकृतिक आपदाओं से खरीफ फसलों के प्रभावित होने से क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला और कृषि ऋण पुनर्वास नीतियों पर दबाव बढ़ता है. प्रभावित किसानों को राहत राशि और बीमा दावों की त्वरित उपलब्धता आवश्यक हो जाती है. • बस्तर में: जिले के 9,200 से अधिक विस्थापित नागरिकों को तत्काल भोजन, सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है. मकान ढहने और 35 से 45 घरों के क्षतिग्रस्त होने से चकवा जैसे गांवों के लोगों को लंबे समय तक पुनर्वास की आवश्यकता होगी. • किसानों के लिए: कर्ज लेकर बोई गई तीन से चार एकड़ तक की धान की फसलें डूब जाने से छोटे काश्तकारों पर भारी कर्ज संकट मंडरा रहा है. किसानों को दोबारा आर्थिक सहारा पाने के लिए फसल क्षति के त्वरित सरकारी सर्वेक्षण की दरकार होगी. • दैनिक जीवन पर: शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के घरों में कमर तक पानी भरने से घरेलू सामान बर्बाद हुआ है. पानी घटने के बाद जलजनित बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए सैनिटेशन अभियान जरूरी होगा. ऐसा क्यों हुआ लगातार चार दिनों तक हुई भारी मानसूनी वर्षा ने इंद्रावती नदी के जलग्रहण क्षेत्र को पानी से लबालब कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर उठ गया. • अत्यधिक वर्षा: बस्तर जिले में चार दिनों की अनवरत बारिश ने जल प्रवाह को अचानक बढ़ा दिया. इसी अत्यधिक पानी के कारण इंद्रावती नदी अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर रिहायशी क्षेत्रों में फैल गई. • नदी का उफान और तेज बहाव: नदी के जलस्तर में तेज वृद्धि के साथ बहाव इतना तीव्र था कि तटवर्ती कच्चे और पक्के दोनों प्रकार के मकान संरचनात्मक रूप से टिक नहीं सके. पानी का दबाव बढ़ने से बड़े चकवा में कई घर ढह गए. • निचले इलाकों की भौगोलिक स्थिति: जगदलपुर के नजदीकी उपनगरीय क्षेत्र और नदी तट पर बसे गांव ढलान पर स्थित हैं. जल निकासी अवरुद्ध होने और लगातार जलभराव से घरों के अंदर कमर तक पानी भर गया. • वर्तमान स्थिति और सुधार: पिछले तीन दिनों से बारिश पूरी तरह बंद है, जिसके चलते नदी का जलस्तर अब धीरे-धीरे नीचे उतर रहा है. राहत और बचाव दल शिविरों में नागरिकों की देखभाल में जुटे हैं. सवाल-जवाब 1. बस्तर में बाढ़ का मुख्य कारण क्या था? बस्तर जिले में लगातार चार दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश के चलते इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ गया, जिससे भीषण बाढ़ आई. 2. वर्तमान में मौसम और बाढ़ की क्या स्थिति है? बीते तीन दिनों से बारिश बंद है और इंद्रावती नदी में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा है. 3. जिले में कितने राहत शिविर बनाए गए हैं और कितने लोग वहां हैं? प्रशासन ने पूरे जिले में कुल 65 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जिनमें 9,200 से अधिक प्रभावित लोग ठहरे हुए हैं. 4. बड़े चकवा गांव में बाढ़ से कितना नुकसान हुआ? बड़े चकवा में लगभग 35 से 45 घर प्रभावित हुए, जिनमें से 7 से 8 मकान पूरी तरह ढह गए और लगभग 150 परिवार राहत शिविर में रह रहे हैं. 5. बाढ़ से किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा है? कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन उनकी धान की फसल और घर में रखा अनाज पानी में डूब जाने से वे भारी आर्थिक संकट में आ गए हैं. https://trendkia.com/chhattisgarh/chara-dina-ki-musaladhara-barasata-se-uphani-indravati-river-bastar-ke-65-shiviron-men-pahunche-9-200-se-adhika-visthapita-40070 TrendKia — Har trend, sabse pehle.