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  "type": "article",
  "title": "छत्तीसगढ़ के 2015 कोरर नक्सली हमला मामले में बड़ा फैसला, 25 लाख के इनामी प्रभाकर राव और पत्नी राजे कांगे को 7 साल की जेल",
  "summary": "छत्तीसगढ़ की विशेष अदालत ने वर्ष 2015 में पुलिस दल पर हुए जानलेवा हमले के मामले में शीर्ष नक्सली प्रभाकर राव, उसकी पत्नी राजे कांगे समेत 5 लोगों को दोषी ठहराते हुए 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नौ वर्ष पूर्व सुरक्षाबलों पर अंजाम दिए गए भीषण नक्सली हमले के मामले में अदालत की ओर से ऐतिहासिक निर्णय सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम और अनुसूचित अपराधों की विशेष न्यायाधीश विभा पाण्डेय की अदालत ने मामले की पूरी सुनवाई के बाद प्रतिबंधित वामपंथी उग्रवादी संगठन के उच्चस्तरीय कैडर प्रभाकर राव और उसकी पत्नी राजे कांगे सहित पांच अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने पेश किए गए सबूतों, गवाहों के बयानों और पुलिस की केस डायरी की गहराई से समीक्षा करने के उपरांत यह सजा मुकर्रर की है।\n\nविशेष अदालत का फैसला और धाराओं के तहत सजा\nअदालत के फैसले के अनुसार, मुख्य आरोपी प्रभाकर राव और उसकी पत्नी राजे कांगे को भारतीय दंड संहिता की बलवे से जुड़ी धारा 147 के अंतर्गत 2-2 वर्ष के कारावास की सजा दी गई है। इसके साथ ही, विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम (UAPA) की धारा 38(2) एवं 39(2) के तहत दोनों दोषियों को 7-7 वर्ष के सश्रम कठोर कारावास से दंडित किया गया है। कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच सुनाए गए इस फैसले में अन्य तीन सह-आरोपियों की संलिप्तता को भी प्रमाणित पाया गया और उन्हें भी न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा सुनाई गई।\n\nबस्तर के जंगलों में चार दशकों का खौफनाक इतिहास\nसजा पाने वाला यह नक्सली दंपति बस्तर संभाग के दुर्गम और घने जंगलों में पिछले 40 वर्षों से उग्रवादी गतिविधियों का संचालन कर रहा था। पुलिस की आधिकारिक फाइलों के मुताबिक, स्पेशल जोनल कमेटी मेंबर (SZDCM) के पद पर सक्रिय प्रभाकर राव के खिलाफ अकेले कांकेर जिले के विभिन्न थानों में गंभीर अपराध दर्ज थे। उसके नाम पर हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, बारूदी सुरंग के जरिए ब्लास्ट और लूटपाट जैसी 64 आपराधिक वारदातें दर्ज पाई गई हैं। छत्तीसगढ़ शासन ने प्रभाकर राव की गिरफ्तारी के लिए 25 लाख रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित कर रखा था।\n\nवहीं दूसरी तरफ, उसकी पत्नी और डिविजनल कमेटी मेंबर (DVCM) राजे कांगे भी संगठन के भीतर बेहद प्रभावी भूमिका में थी। राजे कांगे के खिलाफ सुरक्षाबलों पर हमलों और आपराधिक गतिविधियों से जुड़े कुल 36 संगीन मामले पंजीकृत थे। राज्य सरकार ने उसकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने और उसकी सूचना देने पर 8 लाख रुपये का इनाम रखा था। इस तरह इस नक्सली दंपति पर कुल मिलाकर 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो उनके उग्रवादी तंत्र के प्रभाव और खतरे की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।\n\nसाल 2015 के कोरर जंगल हमले की पूरी कहानी\nयह मामला वर्ष 2015 का है, जब कांकेर जिले का कोरर थाना क्षेत्र सघन वनों और दुर्गम पहाड़ियों से घिरा होने के कारण उग्रवादियों का प्रमुख गढ़ माना जाता था। उस समय स्थानीय जिला पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों की एक संयुक्त टुकड़ी क्षेत्र में नियमित गश्त और तलाशी अभियान के उद्देश्य से कोरर के जंगलों की ओर रवाना हुई थी। हालांकि, पहले से घात लगाकर बैठे उग्रवादियों को सुरक्षाबलों की इस हलचल की भनक मिल चुकी थी। प्रभाकर राव और राजे कांगे ने अपने सशस्त्र दस्ते के साथ मिलकर पहाड़ियों और घने पेड़ों की ओट में रणनीति तैयार कर रखी थी।\n\nजैसे ही सुरक्षाबलों का गश्ती दल उग्रवादियों द्वारा चिह्नित संवेदनशील इलाके में प्रवेश कर गया, नक्सलियों ने बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमलावरों ने जवानों को निशाना बनाते हुए IED के माध्यम से विस्फोट करने का भी प्रयास किया ताकि सुरक्षा बलों को भारी नुकसान पहुँचाया जा सके।\n\nजवानों की जवाबी कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया\nअचानक हुए इस जानलेवा हमले के बावजूद, गश्ती दल में शामिल जवानों ने अदम्य साहस का परिचय दिया। बिना समय गंवाए जवानों ने अपनी-अपनी पोजीशन संभाली और नक्सलियों पर ताबड़तोड़ जवाबी फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों की ओर से मिले इस मुंहतोड़ जवाब से नक्सली घबरा गए। जब प्रभाकर राव और राजे कांगे को अहसास हुआ कि जवानों का पलड़ा भारी पड़ रहा है, तो वे अपने बाकी साथियों के साथ पहाड़ियों, घने जंगलों और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।\n\nइस मुठभेड़ के तुरंत बाद कोरर थाने में नामजद उग्रवादियों के विरुद्ध हत्या के प्रयास, बलवा, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और UAPA की विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने विस्तृत विवेचना के बाद अदालत में पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए, जिसकी परिणति 9 साल के लंबे इंतजार के बाद ऐतिहासिक दोषसिद्धि और सजा के रूप में सामने आई है।\n\nइसका आप पर असर\nयह निर्णय छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कानून के शासन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।\n\n• भारत में: शीर्ष नक्सली कैडरों की दोषसिद्धि से देश भर में सक्रिय उग्रवादी संगठनों को कड़ा संदेश मिलता है। इससे सुरक्षाबलों का मनोबल बढ़ेगा और नक्सल विरोधी अभियानों में तेजी आएगी।\n• छत्तीसगढ़ में: कांकेर और बस्तर संभाग के स्थानीय निवासियों को दशकों पुराने उग्रवादी खौफ से राहत मिलेगी। कोरर और आसपास के इलाकों में विकास कार्यों तथा बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में तेजी आने की संभावना है।\n• सुरक्षा बलों के लिए: न्यायपालिका से समय पर सजा मिलने से फील्ड में तैनात पुलिस और अर्धसैनिक बलों का विश्वास मजबूत होता है। इससे लाल आतंक से प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।\n• आपराधिक न्याय प्रणाली: 9 साल पुराने जटिल मामले में मिली यह सफलता दर्शाती है कि फॉरेंसिक साक्ष्यों और केस डायरी के मजबूत आधार पर नक्सलियों को अदालत में सजा दिलाई जा सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह फैसला वर्ष 2015 में सुरक्षाबलों की टीम पर घात लगाकर किए गए हमले और उसके बाद चली 9 साल लंबी न्याय प्रक्रिया के बाद आया है।\n\n• 2015 का सुनियोजित हमला: कांकेर के कोरर जंगलों में गश्त पर निकली संयुक्त पुलिस पार्टी पर प्रभाकर राव और उसकी पत्नी ने अंधाधुंध फायरिंग की थी और आईईडी ब्लास्ट की कोशिश की थी।\n• 40 साल की आपराधिक पृष्ठभूमि: आरोपी दंपत्ति पर 64 और 36 गंभीर मामले दर्ज थे तथा उन पर कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जिससे वे मुख्य वांछित नक्सली बने हुए थे।\n• अदालत में साक्ष्यों की प्रस्तुति: विशेष अदालत ने एनआईए एक्ट के तहत पुलिस द्वारा पेश गवाहों, बयानों और केस डायरी का गहन अध्ययन किया, जिसके आधार पर दोषसिद्धि संभव हो सकी।\n• सख्त धाराओं में दोषसिद्धि: यूएपीए (UAPA) की धारा 38(2) व 39(2) तथा आईपीसी की धारा 147 के तहत अपराध प्रमाणित होने पर 7-7 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कोरर नक्सली हमला मामला क्या है?\nयह मामला साल 2015 का है जब छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के कोरर जंगल में सुरक्षाबलों की गश्ती टीम पर नक्सलियों ने घात लगाकर जानलेवा हमला किया था।\n\n2. अदालत ने मुख्य आरोपियों को क्या सजा सुनाई है?\nविशेष अदालत ने शीर्ष नक्सली प्रभाकर राव और उसकी पत्नी राजे कांगे को UAPA और बलवे की धाराओं के तहत 7-7 साल के सश्रम कठोर कारावास की सजा दी है।\n\n3. दोषी नक्सली दंपत्ति पर कितना इनाम घोषित था?\nप्रभाकर राव पर 25 लाख रुपये और उसकी पत्नी राजे कांगे पर 8 लाख रुपये यानी कुल 33 लाख रुपये का इनाम घोषित था।\n\n4. प्रभाकर राव के खिलाफ कुल कितने आपराधिक मामले दर्ज थे?\nपुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रभाकर राव के खिलाफ अकेले कांकेर जिले में हत्या, डकैती और बारूदी विस्फोट जैसे 64 गंभीर मामले दर्ज थे।\n\n5. यह फैसला किस अदालत द्वारा सुनाया गया है?\nयह फैसला एनआईए एक्ट एवं अनुसूचित अपराध की विशेष न्यायाधीश विभा पाण्डेय की अदालत द्वारा 9 साल की सुनवाई के बाद सुनाया गया।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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    "कांकेर नक्सली हमला",
    "प्रभाकर राव",
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    "छत्तीसगढ़ अदालत फैसला",
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