छत्तीसगढ़ के मरवाही में 52 हाथियों के दल ने दी दस्तक, लहलहाती धान की फसल को पहुंचा रहे नुकसान छत्तीसगढ़ के पेंड्रा स्थित मरवाही वनमंडल में 52 हाथियों का बड़ा दल पहुंचने से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। धान की फसल को हो रहे नुकसान को लेकर वन विभाग और हाथी मित्र दल लगातार गश्त कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के पेंड्रा इलाके के मरवाही वनमंडल में हाथियों के एक विशाल दल के पहुंचने से स्थानीय ग्रामीणों और किसानों की नींद उड़ गई है। कटघोरा वनमंडल के पसान क्षेत्र में लगभग 20 दिन बिताने के बाद यह झुंड अब मरवाही के मटियाडांड और भटियार क्षेत्र में दाखिल हो गया है। इस बड़े दल के खेतों तक पहुंचने से वहां पकने की कगार पर खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंच रहा है। हाथियों के इस झुंड में कई छोटे शावक भी शामिल हैं, जिन्हें देखते हुए सुरक्षा और एहतियात के तौर पर वन विभाग और स्थानीय हाथी मित्र दल पूरी तरह मुस्तैद होकर निगरानी कर रहे हैं, साथ ही आसपास के गांवों में लोगों को लगातार सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। 35 से 40 नहीं, गिनती में निकले कुल 52 हाथी प्रारंभिक सूचनाओं में इस बात का अनुमान लगाया गया था कि हाथियों के इस झुंड में 35 से 40 सदस्य हो सकते हैं। हालांकि, वन विभाग द्वारा की गई आधिकारिक गणना और पुख्ता निगरानी के बाद इस दल में कुल 52 हाथियों के मौजूद होने की पुष्टि हुई है। हाथियों का यह भारी-भरकम दल क्षेत्र में अलग-अलग हिस्सों में बिखरा हुआ है और लगातार आगे बढ़ रहा है। विभाग की विशेष टीमें इनकी हर एक गतिविधि पर पैनी नजर रखे हुए हैं, ताकि समय रहते इनकी आवाजाही की दिशा का पता लगाया जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तुरंत कदम उठाए जा सकें। किसानों की चिंताएं बढ़ीं, धान की फसल पर खतरा इस समय मरवाही क्षेत्र के खेतों में किसानों की मेहनत की फसल लहलहा रही है। ऐसे समय में हाथियों के खेतों तक पहुंच जाने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई हैं। हाथियों का यह झुंड सीधे खेतों के भीतर उतरकर धान को अपना निवाला बना रहा है, जिससे खड़ी फसल बड़े पैमाने पर बर्बाद हो रही है। किसानों का मानना है कि यदि हाथियों की यह आवाजाही इसी प्रकार बिना रुके जारी रही, तो उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर सकता है और फसल का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। ग्रामीणों के सामने इस वक्त सबसे बड़ी दुविधा अपनी गाढ़ी कमाई और फसल को बचाने के साथ-साथ इन वन्यजीवों से एक सुरक्षित दूरी बनाए रखने की है। छोटे शावकों की मौजूदगी से बढ़ी सतर्कता वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हाथियों के इस विशाल दल के साथ कई बेहद छोटे-छोटे बच्चे भी चल रहे हैं। शावकों के साथ सफर कर रहे हाथियों का यह झुंड अपनी सुरक्षा को लेकर अधिक संवेदनशील हो सकता है, इसलिए वन कर्मियों द्वारा इनकी हरकतों पर बेहद खास नजर रखी जा रही है। ऐसे हालातों में ग्रामीणों के लिए हाथियों के ज्यादा करीब जाना या उन्हें खुद से भगाने का प्रयास करना जानलेवा साबित हो सकता है। विभाग का मुख्य उद्देश्य यही सुनिश्चित करना है कि किसी भी परिस्थिति में वन्यजीवों और इंसानों का आमना-सामना न हो। प्रशासन और हाथी मित्र दल पूरी तरह अलर्ट इलाके में हाथियों की भारी मौजूदगी को भांपते हुए वन विभाग का पूरा मैदानी अमला और स्थानीय हाथी मित्र दल जमीन पर मुस्तैद हो गया है। गांवों में मुनादी करवाई जा रही है ताकि लोग भूलकर भी जंगल की तरफ न जाएं और हाथियों से पर्याप्त दूरी बनाकर रखें। वन विभाग का लगातार यही प्रयास है कि इंसानों और हाथियों के बीच टकराव की किसी भी नौबत को टाला जा सके। फिलहाल 52 हाथियों के इस बड़े जत्थे की मौजूदगी के चलते पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है और उनकी हर एक हरकत पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसका आप पर असर मरवाही क्षेत्र के किसानों को हाथियों द्वारा धान की फसल को पहुंचाए जा रहे नुकसान से भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है। • छत्तीसगढ़ में: ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों और लोगों को वन विभाग द्वारा जारी की जा रही चेतावनियों का पूरी तरह पालन करना चाहिए। जंगलों की तरफ जाने से बचने और सुरक्षा नियमों का पालन करने से किसी भी अनहोनी या जनहानि को टाला जा सकता है। • मरवाही और पेंड्रा में: स्थानीय किसानों की पकने के करीब पहुंच चुकी धान की फसल को बचाने के लिए प्रशासन और वन विभाग द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। मटियाडांड और भटियार के आसपास रहने वाले किसानों को अपनी फसल और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी होगी। ऐसा क्यों हुआ हाथियों के इस बड़े दल का मरवाही क्षेत्र में पहुंचना उनके पारंपरिक गलियारों और मौसमी भोजन की तलाश से जुड़ा हुआ है। कटघोरा वनमंडल के पसान क्षेत्र में लगभग 20 दिन बिताने के बाद यह दल भोजन और पानी की उपलब्धता के कारण आगे बढ़ा है। • प्राकृतिक आवाजाही: हाथियों का यह झुंड अपने पारंपरिक माइग्रेशन रूट और भोजन की तलाश में लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर移動 करता रहता है। • फसल का आकर्षण: इस समय खेतों में लहलहाती धान की पकी हुई फसल हाथियों को आसानी से आकर्षित करती है, जिससे वे जंगलों से निकलकर खेतों का रुख करते हैं। • सुरक्षा और शावक: दल में छोटे शावकों की मौजूदगी के कारण यह झुंड अपनी गति धीमी रखता है और सुरक्षा की दृष्टि से एक बड़े क्षेत्र में फैलकर चलता है। सवाल-जवाब 1. मरवाही वनमंडल में कितने हाथियों का दल पहुंचा है? मरवाही वनमंडल में कुल 52 हाथियों का एक बड़ा दल पहुंचा है। 2. हाथियों का यह दल मरवाही आने से पहले कहां था? यह दल मरवाही आने से पहले कटघोरा वनमंडल के पसान क्षेत्र में लगभग 20 दिनों तक मौजूद था। 3. हाथियों का यह झुंड मुख्य रूप से किस चीज को नुकसान पहुंचा रहा है? हाथियों का यह झुंड खेतों में लहलहाती धान की फसल को अपना आहार बनाकर नुकसान पहुंचा रहा है। 4. हाथियों की संख्या को लेकर पहले क्या अनुमान था? शुरुआत में इस दल में 35 से 40 हाथियों के होने का अनुमान लगाया गया था, जो बाद में गणना के बाद 52 पुष्टि हुए। 5. वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए हैं? वन विभाग का मैदानी अमला और हाथी मित्र दल लगातार निगरानी कर रहे हैं और मुनादी के जरिए ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। https://trendkia.com/chhattisgarh/chhattisgarh-ke-marwahi-men-52-hathiyon-ke-dala-ne-di-dastaka-lahalahati-dhana-ki-phasala-ko-pahuncha-rahe-nukasana-50647 TrendKia — Har trend, sabse pehle.