# छहगढ़ की माटी का कमाल, मल्हार की महिला किसान दिव्या देवी वर्मा को मिला राष्ट्रीय सम्मान

> बिलासपुर जिले के मल्हार की रहने वाली महिला किसान दिव्या देवी वर्मा को जैविक खेती में उत्कृष्ट योगदान के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सम्मानित किया गया है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/chhattisgarh-ki-maati-ka-kamal-malhar-ki-mahila-kisan-divya-devi-verma-ko-mila-rashtriya-samman-48685 · **Language:** Hindi
**Tags:** जैविक खेती, दिव्या देवी वर्मा, मल्हार बिलासपुर, राष्ट्रीय महिला किसान दिवस, छत्तीसगढ़ न्यूज़, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, नारी शक्ति

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले नगर पंचायत मल्हार की प्रगतिशील महिला किसान दिव्या देवी वर्मा ने अपनी कड़ी मेहनत और जैविक खेती के बलबूते पर पूरे प्रदेश का नाम राष्ट्रीय पटल पर रोशन किया है। रासायनिक उर्वरकों और हानिकारक कीटनाशकों पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म करते हुए प्राकृतिक तौर-तरीकों से खेती करने वाली दिव्या देवी को राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के मौके पर केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की तरफ से राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। यह भव्य कार्यक्रम देश की राजधानी नई दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित डॉ. बीआर अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित किया गया था, जिसका मुख्य विषय ‘नारी शक्ति से कृषि समृद्धि’ नाम से एक राष्ट्रीय सम्मेलन था। सबसे खास बात यह रही कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य से इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए एकमात्र महिला किसान प्रतिनिधि के रूप में उनका ही चयन किया गया था, जो प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

## जैविक खेती और उन्नत पद्धतियों का सफल प्रयोग
दिव्या देवी वर्मा अपने खेतों में धान समेत विभिन्न प्रकार की फसलों की पूरी तरह जैविक खेती करती हैं। वे रासायनिक उत्पादों का उपयोग करने के बजाय खुद ही अपने फार्म पर वेस्ट डीकंपोजर, जीवामृत, वर्मी कंपोस्ट और जैविक कीट नियंत्रण के लिए तमाम तरह के प्रभावी घोल तैयार करती हैं। कृषि के हर चरण में उनकी सक्रिय भागीदारी रहती है, जिनमें पौधों को खुद तैयार करने से लेकर उनकी कटिंग, बडिंग और ग्राफ्टिंग जैसे जटिल कृषि कार्य शामिल हैं। उनके पति जदुनंदन प्रसाद वर्मा खेती के हर काम में उनका सहयोग करते हैं और उनका पूरा मार्गदर्शन भी करते हैं, लेकिन कृषि की सफलता का पूरा श्रेय वे अपनी पत्नी दिव्या देवी को ही देते हैं। दिव्या का दृढ़ विश्वास है कि किसान भाई रासायनिक खेती का विकल्प चुनकर न केवल अपनी मिट्टी की सेहत और उर्वरता को लंबे समय तक सुधार सकते हैं, बल्कि आम जनता को भी पूरी तरह स्वस्थ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा सकते हैं। उनकी यह प्रेरणादायक उपलब्धि ग्रामीण अंचल की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तीकरण की एक जीवंत मिसाल बन चुकी है।

## नई दिल्ली में मिला छत्तीसगढ़ को गौरव
बिलासपुर जिले के मल्हार की मूल निवासी दिव्या देवी वर्मा डीजे वर्मा जैविक कृषि फार्म का संचालन करती हैं और उसी से जुड़ी हुई हैं। राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में उन्हें जैविक खेती के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट एवं सराहनीय कार्यों के वास्ते सम्मानित किया गया। नई दिल्ली के इस राष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें मुख्य अतिथि द्वारा स्मृति-चिह्न, औपचारिक प्रशस्ति पत्र और पारंपरिक अंगवस्त्र भेंट करके सम्मानित किया गया। इस बड़ी उपलब्धि के सामने आने के बाद से ही मल्हार के साथ-साथ पूरे बिलासपुर जिले और संपूर्ण छत्तीसगढ़ में हर्षोल्लास और उत्सव का माहौल बना हुआ है, और हर कोई उनकी इस सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है।

## वेस्ट डीकंपोजर और जीवामृत से तैयार होती है खाद
अपने कृषि अनुभवों को साझा करते हुए दिव्या देवी वर्मा ने बताया कि वह अपने खेतों में पूरी तरह से जैविक पद्धति अपनाती हैं। उनके खेतों में धान के अलावा कई अन्य तरह की प्रमुख फसलों का भी बंपर उत्पादन किया जाता है। इन फसलों को उगाने के लिए वह किसी भी बाहरी रासायनिक खाद की जगह वेस्ट डीकंपोजर, जीवामृत, वर्मी कंपोस्ट और ट्राइकोडर्मा जैसे प्राकृतिक जैविक साधनों का खुलकर इस्तेमाल करती हैं। अपनी फसलों को पूरी तरह स्वस्थ रखने और हानिकारक कीटों को नियंत्रित करने के लिए दशपर्णी अर्क जैसे विशेष जैविक घोल भी उन्हीं के द्वारा खेत पर ही तैयार किए जाते हैं। उनका हमेशा से यही प्रयास रहता है कि खेती में बाहरी और महंगे रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता को न्यूनतम किया जाए तथा खेत और आसपास उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

## बीज से लेकर ग्राफ्टिंग तक खुद संभालती हैं कमान
जदुनंदन प्रसाद वर्मा ने जानकारी दी कि वह अपनी पत्नी को खेती-किसानी के कामों में पूरा सहयोग और आवश्यक मार्गदर्शन देते हैं, परंतु कृषि में आने वाली असली मेहनत और उनकी अटूट लगन का पूरा श्रेय केवल दिव्या देवी को जाता है। खेत में नन्हे पौधे तैयार करने से लेकर उनका रोपण करना, कीटनाशकों का छिड़काव करना, कटिंग, बडिंग और ग्राफ्टिंग जैसे तमाम तकनीकी काम वे अपने हाथों से खुद करती हैं। एक स्वस्थ मदर प्लांट से कई नए पौधे तैयार करके उनका उपयोग खेती के विस्तार में किया जाता है। उनके अनुसार, दिव्या देवी खेती के किसी भी चरण में पीछे नहीं हटतीं और हर प्रक्रिया में सक्रिय रहकर लगातार नए-नए प्रयोग करती हैं ताकि जैविक कृषि को और अधिक उन्नत बनाया जा सके।

## पैरा जलाने के बजाय करती हैं मल्चिंग
जदुनंदन प्रसाद वर्मा ने आगे बताया कि फसल कटाई के बाद खेतों में पीछे छूट जाने वाले पैरा या पुआल को आग के हवाले करने के बजाय वे उसे बड़े करीने से एकत्र करते हैं और फिर जमीन पर बिछा देते हैं। कृषि की इस अनूठी प्रक्रिया को पैरा मल्चिंग या आच्छादन के नाम से जाना जाता है। इस प्रक्रिया को अपनाने से मिट्टी के भीतर कीमती नमी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है और साथ ही मिट्टी की समग्र सेहत में भी जोरदार सुधार होता है। खेतों में पैरा जलाने से उत्पन्न होने वाले भयंकर प्रदूषण और उससे मिट्टी को होने वाले भारी नुकसान से भी पूरी तरह बचा जा सकता है। दिव्या देवी अपने इलाके की अन्य महिलाओं और साथी किसानों को भी यह प्रेरित करती हैं कि वे कभी भी फसल अवशेषों को न जलाएं बल्कि खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए उनका सही उपयोग करें।

## दुर्लभ फसलों के उत्पादन पर भी चल रहे हैं प्रयोग
डीजे वर्मा जैविक कृषि फार्म में पारंपरिक फसलों के उत्पादन के साथ-साथ कई दुर्लभ पौधों और अनोखी फसलों के परीक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस आधुनिक जैविक फार्म के भीतर मियाजाकी आम और हरिमन-99 सेब जैसी बेहद दुर्लभ किस्मों को भी पूरी तरह जैविक तरीकों से उगाने के सफल प्रयास किए गए हैं। खुद ही अपने स्तर पर पौधे तैयार करने और स्थानीय साधनों का बुद्धिमत्ता से इस्तेमाल करने की उनकी यह अनूठी पहल कृषि क्षेत्र को और अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और मील का पत्थर साबित हो रही है।

## रसायन छोड़ें और जैविक खेती अपनाएं
यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करने के बाद दिव्या देवी वर्मा ने देश भर की अन्य महिला किसानों से भी खुले तौर पर यह अपील की है कि वे आधुनिक रासायनिक खेती छोड़कर जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाएं। उनका कहना है कि किसान भाई-बहन यदि चाहें तो धीरे-धीरे अपनी रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर टिकी निर्भरता को पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं और प्रकृति के बीच से मिलने वाले साधनों से ही अपनी खेती को अधिक उन्नत बना सकते हैं। जैविक खेती करने से न केवल हमारी मिट्टी की मूल गुणवत्ता हमेशा सुरक्षित बनी रहती है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा होती है और आम जनमानस को भी बहुत बेहतर एवं पौष्टिक खाद्य उत्पाद खाने को मिलते हैं। उनका साफ संदेश है कि महिलाएं भी अब खेती-किसानी के मोर्चे पर आगे आकर पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकती हैं और अपनी सच्ची मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बना सकती हैं।

## इसका आप पर असर
यह खबर छत्तीसगढ़ के किसानों और ग्रामीण महिलाओं के लिए विशेष प्रेरणा और व्यावहारिक महत्व रखती है।

- **भारत में:** देश भर के किसानों को यह सीख मिलती है कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके जैविक खेती अपनाने से लागत घटाई जा सकती है। इससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और उपभोक्ताओं को सेहतमंद भोजन मिल पाता है।
- **बिलासपुर में:** मल्हार और आसपास के स्थानीय किसानों को अपने खेतों में वेस्ट डीकंपोजर और जीवामृत जैसी तकनीकों को आजमाने की प्रेरणा मिलती है। इससे ग्रामीण महिलाओं को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और सरकारी मंचों पर पहचान बनाने का अवसर मिल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह सफलता पारंपरिक रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों से बचने और प्राकृतिक संसाधनों के सही उपयोग के प्रयासों का परिणाम है।

- **जैविक पद्धतियों का प्रसार:** रासायनिक खादों से मिट्टी की सेहत बिगड़ने के कारण प्राकृतिक विकल्पों जैसे वेस्ट डीकंपोजर और जीवामृत का उपयोग बढ़ा है।
- **महिला सशक्तीकरण की पहल:** केंद्र सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए यह राष्ट्रीय मंच प्रदान किया गया।
- **सरकारी योजनाओं का प्रभाव:** कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा ग्रामीण स्तर पर नवाचार करने वाले किसानों को सम्मानित करने की नीति के तहत यह चयन हुआ।

## सवाल-जवाब

### 1. दिव्या देवी वर्मा को यह राष्ट्रीय सम्मान किस अवसर पर मिला?
उन्हें राष्ट्रीय महिला किसान दिवस के अवसर पर यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।

### 2. यह राष्ट्रीय सम्मेलन कहाँ आयोजित किया गया था?
यह राष्ट्रीय सम्मेलन नई दिल्ली के डॉ. बीआर अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित हुआ था।

### 3. दिव्या देवी वर्मा किस जिले की रहने वाली हैं?
वह छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के नगर पंचायत मल्हार की रहने वाली हैं।

### 4. उन्हें किस क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया?
उन्हें जैविक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है।

### 5. इस सम्मान के लिए छत्तीसगढ़ से कितने लोगों का चयन हुआ था?
पूरे छत्तीसगढ़ से इस सम्मान के लिए उनका एकमात्र महिला किसान प्रतिनिधि के रूप में चयन हुआ था।

### 6. वे खेत में जैविक खाद तैयार करने के लिए किन चीजों का उपयोग करती हैं?
वह वेस्ट डीकंपोजर, जीवामृत, वर्मी कंपोस्ट और ट्राइकोडर्मा जैसे जैविक साधनों का उपयोग करती हैं।

### 7. फसल कटाई के बाद वे खेत में बचे पैरा का क्या करती हैं?
वह पैरा जलाने के बजाय उसे एकत्र कर जमीन पर बिछा देती हैं जिसे पैरा मल्चिंग कहा जाता है।

## प्रेरणा और सबक
दिव्या देवी वर्मा की यह सफलता कृषि क्षेत्र में आगे बढ़ने की चाह रखने वाले हर व्यक्ति के लिए एक मजबूत प्रेरणास्त्रोत है।

- **संकल्प और कड़ी मेहनत:** पारंपरिक तरीकों से हटकर खुद नवाचार करने से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की जा सकती है।
- **संसाधनों का सदुपयोग:** खेत में उपलब्ध प्राकृतिक चीजों जैसे वेस्ट डीकंपोजर और पैरा मल्चिंग का उपयोग कर लागत कम की जा सकती है।
- **पर्यावरण संरक्षण:** रासायनिक कीटनाशकों को छोड़कर जैविक खेती अपनाने से मिट्टी की सेहत और पर्यावरण दोनों की रक्षा होती है।
- **महिला आत्मनिर्भरता:** महिलाएं कृषि के हर तकनीकी काम में माहिर बनकर खुद को आत्मनिर्भर साबित कर सकती हैं।

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