# छत्तीसगढ़ में संगठन को साधने पहुंचीं स्मृति ईरानी, कामकाज सुधारने के सख्त निर्देश के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कद बढ़ा

> छत्तीसगढ़ भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी के दो दिवसीय दौरे में पुराने कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनी गईं और मंत्रियों को कामकाज का ढर्रा सुधारने के निर्देश दिए गए। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की साफ छवि और मजबूत होकर सामने आई।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/chhattisgarh-mein-sangathan-ko-sadhne-pahunchin-smriti-irani-kamkaj-sudharne-ke-sakht-nirdesh-ke-beech-mukhyamantri-vishnu-deo-sai-52294 · **Language:** Hindi
**Tags:** स्मृति ईरानी, विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ भाजपा, रायपुर, छत्तीसगढ़ राजनीति, संगठन बैठक

रायपुर में छत्तीसगढ़ भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी का दो दिवसीय संगठनात्मक दौरा कई अहम राजनीतिक संदेश देकर संपन्न हो गया। इस पहले प्रवास के दौरान उन्होंने संगठन स्तर पर कड़ा रुख अख्तियार किया। पार्टी कार्यालय में बैनर और पोस्टर लगाने पर पहले से ही रोक लागू थी, लेकिन प्रभारी ने कार्यालय पहुंचते ही वहां जुटी गैरजरूरी भीड़ को तुरंत बाहर कर दिया और केवल जरूरी पदाधिकारियों को ही भीतर रोका। आम तौर पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के दौरे के समय बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाकर शक्ति प्रदर्शन की परंपरा रही है, मगर इस बार भीड़ को बाहर भेजने से कई बड़े नेताओं के चेहरों पर मायूसी दिखाई दी, जबकि आम कार्यकर्ताओं ने इस पहल का स्वागत किया।

## पुराने कार्यकर्ताओं की सुनवाई और शिकायतों का दौर
दो दिनों के इस संगठनात्मक प्रवास के पहले दिन पूर्व जनप्रतिनिधियों, मीडिया पदाधिकारियों और पूर्व पदाधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक पूरे दौरे की सबसे निर्णायक कड़ी साबित हुई। इस बैठक के दौरान पूर्व जनप्रतिनिधियों ने अपने मन की बात खुलकर सामने रखी। नेताओं ने सत्ता में बैठे मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई और कई शिकायतें दर्ज कराईं। असंतुष्ट नेताओं ने प्रभारी के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं, जिससे उन्हें अपनी बात शीर्ष स्तर तक पहुंचने की राहत मिली। स्मृति ईरानी ने उपस्थित नेताओं के सभी बिंदुओं को बाकायदा दर्ज किया और आवश्यक कदम उठाने का भरोसा दिया।

## सत्ता पक्ष के साथ बैठक और मंत्रियों को हिदायत
दौरे के दूसरे दिन सत्ताधारी पक्ष से जुड़े सांसदों, विधायकों और मंत्रियों के साथ एक साझा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रदेश प्रभारी ने मंत्रियों को कड़े अंदाज में कार्यशैली सुधारने की नसीहत दी। बैठक में खास तौर पर तीन से चार मंत्रियों को अपनी सक्रियता बढ़ाने को कहा गया, साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों से निर्धारित समयसीमा में काम पूरा कराने का निर्देश दिया गया। निगम और मंडल के अध्यक्षों को भी आम कार्यकर्ताओं से लगातार संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए गए। विधायकों को विशेष परामर्श दिया गया कि वे सहभोज और व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए पुराने कार्यकर्ताओं और पूर्व पदाधिकारियों से संपर्क बढ़ाएं।

## संगठनात्मक असर और मुख्यमंत्री की स्थिति
कार्यकर्ताओं के दृष्टिकोण से यह दौरा काफी सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से उपेक्षित महसूस कर रहे लोगों की बात सीधे नेतृत्व तक पहुंची और उनकी समस्याओं को सरकार तक ले जाने की राह बनी। मंत्रियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बावजूद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की व्यक्तिगत छवि पूरी तरह बेदाग रही। इन बैठकों के निष्कर्ष के बाद मुख्यमंत्री का नेतृत्व और अधिक मजबूत होकर उभरा है। चूंकि प्रदेश प्रभारी के रूप में यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा थी, इसलिए इसके तात्कालिक बड़े नतीजों का आकलन करना जल्दबाजी हो सकता है। राज्य में मंत्रिमंडल में बदलाव की चर्चाओं के बीच आगामी कुछ महीनों में ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन निर्देशों का जमीनी असर कितना हुआ है।

## इसका आप पर असर
इस संगठनात्मक समीक्षा बैठक से छत्तीसगढ़ में सत्ता और संगठन के बीच तालमेल तथा शासकीय कार्यों की गति पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।

- **छत्तीसगढ़ में:** मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों को तय समय पर काम पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इससे सरकारी दफ्तरों में आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं से जुड़े रुके हुए कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
- **पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए:** जनप्रतिनिधियों को पुराने कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें और भोज आयोजित करने को कहा गया है। इससे जमीनी कार्यकर्ताओं की समस्याएं सीधे सत्ता तक पहुंचेंगी और उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
- **मंत्रिमंडल की स्थिति पर:** तीन से चार मंत्रियों को अपनी सक्रियता बढ़ाने की सख्त हिदायत मिली है। राज्य में मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच मंत्रियों के कामकाज पर संगठन की कड़ी नजर रहेगी।
- **प्रशासनिक व्यवस्था पर:** निगम और मंडल अध्यक्षों को फील्ड में सक्रिय रहकर जनता व कार्यकर्ताओं से जुड़ने को कहा गया है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी में सुधार देखने को मिल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह संगठनात्मक दौरा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर उठ रही शिकायतों के समाधान के लिए किया गया।

- **कार्यकर्ताओं का असंतोष:** पार्टी के कई पूर्व पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में मंत्रियों और अधिकारियों के रवैये को लेकर नाराजगी थी। इस दूरी को पाटने के लिए प्रदेश प्रभारी ने सीधे असंतुष्ट नेताओं की समस्याएं सुनीं।
- **मंत्रियों की ढिलाई:** प्रशासन पर पकड़ ढीली होने और समय पर काम न होने की शिकायतों के चलते मंत्रियों को कामकाज का ढर्रा सुधारने की जरूरत महसूस हुई। इसी कारण तीन से चार मंत्रियों को विशेष रूप से सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए।
- **प्रभारी के रूप में पहली समीक्षा:** राज्य में नई जिम्मेदारी संभालने के बाद संगठनात्मक प्राथमिकताओं को स्पष्ट करना आवश्यक था। गैरजरूरी भीड़ हटाकर केवल कामकाजी बैठकों पर ध्यान केंद्रित करने की नई कार्यसंस्कृति स्थापित की गई।

## सवाल-जवाब

### 1. स्मृति ईरानी का छत्तीसगढ़ दौरा कितने दिनों का था?
स्मृति ईरानी का यह संगठनात्मक दौरा दो दिनों का था।

### 2. पार्टी कार्यालय पहुंचने पर प्रदेश प्रभारी ने पहला बड़ा कदम क्या उठाया?
उन्होंने कार्यालय में जुटी अनावश्यक भीड़ को बाहर भेज दिया और केवल आवश्यक नेताओं को ही भीतर रहने दिया।

### 3. दौरे के पहले दिन किन लोगों के साथ बैठक आयोजित की गई?
पहले दिन पूर्व जनप्रतिनिधियों, मीडिया पदाधिकारियों और पूर्व पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक हुई।

### 4. बैठक में नेताओं ने किनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं?
नेताओं ने सरकार के मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों के कामकाज के खिलाफ शिकायतें रखीं।

### 5. दूसरे दिन की बैठक में मंत्रियों और विधायकों को क्या निर्देश दिए गए?
मंत्रियों को कामकाज का ढर्रा सुधारने, समय पर काम कराने और विधायकों को पुराने कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने की सलाह दी गई।

### 6. शिकायतों के बावजूद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की स्थिति पर क्या असर पड़ा?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की छवि पूरी तरह बेदाग रही और वे इन बैठकों के बाद राजनीतिक रूप से और मजबूत बनकर उभरे।

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