# छत्तीसगढ़ में बारिश के मौसम में टमाटर की खेती से पाएं भारी उपज, नर्सरी तैयार करने और स्टेकिंग की जानें सही विधि

> मानसून के दौरान टमाटर की खेती किसानों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार उन्नत किस्मों के चयन, उचित नर्सरी प्रबंधन और स्टेकिंग तकनीक को अपनाकर प्रति एकड़ 25 टन तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-08-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/chhattisgarh-men-barisha-ke-mausama-men-tamatara-ki-kheti-se-paen-bhari-upaja-narsari-taiyara-karane-aura-stekinga-ki-janen-sahi-v-16403 · **Language:** Hindi
**Tags:** टमाटर की खेती, कृषि विज्ञान केंद्र बालोद, डॉ बलदेव अग्रवाल, नर्सरी प्रबंधन, छत्तीसगढ़ कृषि, मानसून खेती टिप्स, साहो टमाटर

मानसून का सीजन सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए कमाई के बेहतरीन अवसर लेकर आता है। इस दौरान टमाटर की फसल उगाने से बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना काफी अधिक रहती है, जिससे किसानों को तगड़ा मुनाफा हो सकता है। हालांकि, अत्यधिक बारिश और नमी के कारण फसलों में कीट-पतंगों और विभिन्न प्रकार के रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में यदि शुरुआती स्तर पर पौधों की देखभाल और वैज्ञानिक तकनीकों का ध्यान न रखा जाए, तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। सही रणनीति, उन्नत किस्मों के चुनाव और बेहतर नर्सरी प्रबंधन के बल पर बारिश के मौसम में भी टमाटर की शानदार पैदावार ली जा सकती है।

## छत्तीसगढ़ के मौसम के लिए उपयुक्त उन्नत किस्में
कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. बलदेव अग्रवाल का कहना है कि टमाटर की खेती शुरू करने से पहले सबसे अहम कदम अपनी क्षेत्र की जलवायु के अनुकूल सही बीज का चयन करना होता है। छत्तीसगढ़ के मौसम और मिट्टी की स्थितियों को देखते हुए साहो किस्म को खेती के लिए बहुत उपयुक्त माना गया है। यह किस्म न केवल बेहतर उत्पादन देती है, बल्कि इसमें कीटों और बीमारियों का प्रकोप भी काफी कम देखने को मिलता है। साहो के अलावा किसान लक्ष्मी 5005 और अविनाश-2 जैसी अन्य उच्च पैदावार वाली किस्मों का भी चुनाव कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त बाजार में विभिन्न विश्वसनीय कंपनियों के कई अन्य उन्नत बीज भी उपलब्ध हैं, जिन्हें किसान अपनी आवश्यकतानुसार चुन सकते हैं।

## नर्सरी की तैयारी और जल निकासी की सही व्यवस्था
टमाटर की स्वस्थ फसल प्राप्त करने के लिए नर्सरी का सही प्रबंधन सबसे पहली शर्त है। डॉ. बलदेव अग्रवाल के अनुसार, नर्सरी तैयार करने के लिए खेत के ऐसे हिस्से को चुनना चाहिए जो आसपास की जमीन से थोड़ा ऊंचा हो ताकि बारिश का पानी वहां जमा न हो सके। साथ ही, उस स्थान पर पेड़ों या ऊंची संरचनाओं की वजह से लगातार छाया नहीं बननी चाहिए। पर्याप्त धूप और जल निकासी की उत्तम व्यवस्था होने से शुरुआती अवस्था में पौधों को सड़ने और अन्य समस्याओं से बचाया जा सकता है। नर्सरी में क्यारी यानी बेड की चौड़ाई लगभग एक मीटर रखनी चाहिए, जबकि लंबाई आवश्यकता और जगह के अनुसार तय की जा सकती है।

## बीज बुआई की वैज्ञानिक तकनीक और सुरक्षा उपाय
आजकल हाइब्रिड और उन्नत किस्मों के बीज काफी महंगे आते हैं, इसलिए बुआई के दौरान बीजों की बर्बादी रोकना जरूरी होता है। क्यारी तैयार करने के बाद उसमें सीधी लाइनें खींचकर एक-एक बीज को तय दूरी पर लगाना चाहिए। बीजों को मिट्टी में दबाने के बाद उनके ऊपर सूखी रेत की एक हल्की परत बिछानी चाहिए। इसके बाद ड्रेंचिंग विधि से हल्का पानी देना चाहिए और क्यारी को पुआल से ढककर मल्चिंग करनी चाहिए। जैसे ही बीज अंकुरित होकर बाहर निकलने लगें, पुआल को तुरंत हटा देना चाहिए। शुरुआती सुरक्षा के तौर पर बायोस्टिन का ड्रेंचिंग और तय समयांतराल पर छिड़काव करना बेहद असरदार रहता है।

## डैंपिंग ऑफ बीमारी से बचाव और देखभाल
नर्सरी अवस्था में टमाटर के छोटे पौधों को डैंपिंग ऑफ नामक जानलेवा बीमारी से बचाना सबसे बड़ी चुनौती होता है। इस बीमारी का असर इतना खतरनाक होता है कि रात तक स्वस्थ दिखने वाले पौधे सुबह तक तने के पास से गलकर गिर जाते हैं और पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इसलिए विशेषज्ञों की सलाह है कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने का इंतजार करने के बजाय शुरुआत से ही निरोधात्मक उपाय अपनाने चाहिए। सही देखभाल मिलने पर नर्सरी लगभग 20 से 22 दिन के भीतर मुख्य खेत में रोपाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है। स्वस्थ पौधों को खेत में लगाने के बाद पर्याप्त खाद, संतुलित पोषण और समय पर सिंचाई देने से पौधों का तेजी से विकास होता है।

## रोपाई के बाद स्टेकिंग तकनीक और संभावित पैदावार
मुख्य खेत में रोपाई करने के लगभग तीन महीने बाद टमाटर के पौधों में फल लगने शुरू हो जाते हैं। जब पौधों पर फल भारी मात्रा में आने लगते हैं, तो उनका वजन सहन न कर पाने के कारण पौधे जमीन पर गिरने लगते हैं। इससे बचाव के लिए स्टेकिंग तकनीक का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। स्टेकिंग के तहत बांस के खंभों, लकड़ी की डंडियों, तारों और रस्सियों के सहारे पौधों को सीधा बांधकर ऊपर की ओर सहारा दिया जाता है। इस प्रक्रिया से फल सीधे मिट्टी या पानी के संपर्क में नहीं आते, जिससे उनके सड़ने या खराब होने की संभावना खत्म हो जाती है। साथ ही फसल की देखभाल और फलों की तुड़ाई भी आसान हो जाती है। उन्नत प्रबंधन के जरिए किसान प्रति एकड़ 25 क्विंटल से लेकर 25 टन तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता, मौसम और किसान की मेहनत पर निर्भर करता है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** बारिश के सीजन में सब्जियों की खेती करने वाले किसान वैज्ञानिक नर्सरी प्रबंधन और स्टेकिंग तकनीक से अपनी फसल को गलने से बचाकर उच्च मुनाफा कमा सकते हैं।
- **छत्तीसगढ़ में:** स्थानीय मौसम के अनुकूल साहो, लक्ष्मी 5005 और अविनाश-2 जैसी किस्मों का चयन करके किसान प्रति एकड़ 25 टन तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. छत्तीसगढ़ के मौसम में बारिश के दौरान टमाटर की कौन सी किस्में सबसे बेहतर मानी जाती हैं?
कृषि विशेषज्ञ डॉ. बलदेव अग्रवाल के अनुसार साहो किस्म छत्तीसगढ़ की जलवायु के लिए बहुत उपयुक्त है। इसके अलावा किसान लक्ष्मी 5005 और अविनाश-2 जैसी उन्नत किस्मों का भी चयन कर सकते हैं।

### 2. टमाटर की नर्सरी तैयार होने में कितना समय लगता है?
उचित देखरेख और सही प्रबंधन करने पर टमाटर की नर्सरी लगभग 20 से 22 दिन में मुख्य खेत में रोपाई के लिए तैयार हो जाती है।

### 3. टमाटर की नर्सरी में डैंपिंग ऑफ बीमारी क्या है और इससे कैसे बचें?
डैंपिंग ऑफ बीमारी में रात तक स्वस्थ दिखने वाले पौधे सुबह तक गिरकर नष्ट हो जाते हैं। इससे बचाव के लिए नर्सरी की शुरुआत से ही जल निकासी का ध्यान रखें और बायोस्टिन की ड्रेंचिंग तथा स्प्रे करें।

### 4. टमाटर की खेती में स्टेकिंग तकनीक क्या है और यह क्यों जरूरी है?
स्टेकिंग में बांस, डंडियों, तार और रस्सी की मदद से पौधों को सीधा सहारा दिया जाता है। इससे फल जमीन और नमी के संपर्क में आकर खराब नहीं होते तथा फसल तुड़ाई आसान हो जाती है।

### 5. टमाटर के पौधे में रोपाई के कितने दिन बाद फल आने शुरू होते हैं?
मुख्य खेत में पौधों की रोपाई करने के लगभग तीन महीने बाद टमाटर में फल आना शुरू हो जाता है।

### 6. बारिश के मौसम में टमाटर की खेती से प्रति एकड़ कितनी पैदावार हो सकती है?
वैज्ञानिक प्रबंधन, सही किस्म, मिट्टी और मौसम के अनुसार प्रति एकड़ लगभग 25 क्विंटल से लेकर 25 टन तक टमाटर का उत्पादन संभव है।

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