# छत्तीसगढ़ में नए ईवी चार्जिंग सेंटर के लिए 30 मीटर चौड़ी सड़क अनिवार्य, हाईवे पर हर 25 किमी पर होगी सुविधा

> छत्तीसगढ़ सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग और सर्विस सेंटरों के लिए नए भूमि विकास नियम जारी किए हैं, जिसके तहत अब 30 मीटर राइट ऑफ वे वाली सड़कों पर ही नए सेंटर खोलने की मंजूरी मिलेगी।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/chhattisgarh-men-nae-ev-charjinga-sentara-ke-lie-30-mitara-chauri-saraka-anivarya-haive-para-hara-25-kimi-para-hogi-suvidha-40022 · **Language:** Hindi
**Tags:** छत्तीसगढ़, इलेक्ट्रिक वाहन, चार्जिंग स्टेशन, रायपुर, आवास एवं पर्यावरण विभाग, राइट ऑफ वे

छत्तीसगढ़ में वायु प्रदूषण की रोकथाम और पेट्रोल तथा डीजल पर निर्भरता घटाने के उद्देश्य से इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। सड़कों पर लगातार बढ़ती गाड़ियों के साथ सुगम यातायात और सार्वजनिक सुरक्षा को बनाए रखना भी प्रशासन के सामने एक बड़ा विषय बन चुका है। इसी संतुलन को साधने के लिए राज्य सरकार ने चार्जिंग ढांचे के विस्तार से जुड़ा एक नया विनियामक ढांचा तैयार किया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, अब राज्य में नए ईवी चार्जिंग और सर्विस सेंटर स्थापित करने के लिए पहुंच मार्ग की न्यूनतम चौड़ाई का कड़ा पैमाना लागू कर दिया गया है।

## शहरी इलाकों में 30 मीटर राइट ऑफ वे की अनिवार्य शर्त
नए भूमि विकास नियमों के तहत स्पष्ट किया गया है कि जिस सड़क से किसी नए चार्जिंग एवं सर्विस सेंटर में वाहनों का प्रवेश होगा, उस सड़क का राइट ऑफ वे कम से कम 30 मीटर होना अनिवार्य है। इसका सीधा मतलब यह है कि शहरों के भीतर स्थित 12 मीटर, 18 मीटर या 24 मीटर राइट ऑफ वे वाली सड़कों पर अब नए व्यावसायिक चार्जिंग या सर्विस सेंटर खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। राइट ऑफ वे का आशय उस चौड़ाई से है जिसे शासन द्वारा आधिकारिक तौर पर सड़क के लिए स्वीकृत किया गया है, भले ही मौके पर वह सड़क निर्माण या अतिक्रमण के कारण अभी कम चौड़ी दिखाई देती हो।

सड़क चौड़ाई के इस कड़े नियम का सबसे गहरा प्रभाव घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों पर पड़ना तय माना जा रहा है। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, रायगढ़ और धमतरी जैसे बड़े शहरों के अंदरूनी हिस्सों में ज्यादातर सड़कें 30 मीटर से कम राइट ऑफ वे की श्रेणी में आती हैं। ऐसे में यदि किसी संचालक या निवेशक के पास शहर के भीतर खाली जमीन उपलब्ध भी होगी, तब भी सड़क के इस मानक को पूरा न कर पाने के कारण नया चार्जिंग अथवा सर्विस सेंटर खोलने की मंजूरी अटक जाएगी। शहरी चालकों को अपने वाहनों की चार्जिंग के लिए मुख्य अथवा बाहरी चौड़ी सड़कों का रुख करना पड़ सकता है।

## चार्जिंग परिसर और प्लॉट के आकार के नए मानक
आवास एवं पर्यावरण विभाग के संशोधन में ईवी चार्जिंग और सर्विस सेंटर को भूमि उपयोग के एक अलग वर्ग के रूप में शामिल किया गया है। इसके साथ ही परिसर के अंदर वाहनों की आवाजाही, सुरक्षा और तकनीकी जरूरतों के हिसाब से न्यूनतम स्थान का प्रावधान भी तय हुआ है। सामान्य सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार करने के लिए न्यूनतम 13.5 गुणा 5.5 मीटर जगह होना आवश्यक होगा। वहीं दूसरी ओर, लंबी दूरी के आवागमन और भारी व्यावसायिक वाहनों के लिए बनाए जाने वाले फास्ट चार्जिंग स्टेशनों के लिए कम से कम 15 गुणा 7 मीटर का स्थान निर्धारित किया गया है।

इन नए दिशानिर्देशों के तहत चार्जिंग परिसरों में केवल वाहन खड़े कर प्लग लगाने तक व्यवस्था सीमित नहीं रहेगी। संचालक चाहें तो इन्हीं परिसरों में बैटरी स्वैपिंग और बैटरी फिटिंग की सुविधाएं भी जोड़ सकेंगे। प्लॉट का आकार तय करते समय इन अतिरिक्त तकनीकी सुविधाओं और वाहनों के मुड़ने के स्थान को भी ध्यान में रखना होगा, ताकि मुख्य सड़क पर गाड़ियों की कतार लगने से जाम की स्थिति न बने।

## हाईवे पर दूरी का फॉर्मूला और हाई-पावर लिक्विड-कूल्ड तकनीक
राजमार्गों पर सफर करने वाले इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को बीच रास्ते में बैटरी खत्म होने की चिंता से बचाने के लिए दूरी का एक स्पष्ट खाका तैयार किया गया है। नए नियमों के अंतर्गत हाईवे और प्रमुख मार्गों के दोनों किनारों पर प्रत्येक 25 किलोमीटर की दूरी पर पब्लिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा, भारी वाहनों और लंबी दूरी के व्यावसायिक वाहनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए हर 100 किलोमीटर के अंतर पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

भारी वाहनों के तीव्र संचालन के लिए विशेष रूप से फ्लूइड कूल्ड बैटरी चार्जिंग स्टेशनों का उपयोग किया जाएगा। यह एक उच्च क्षमता वाली फास्ट चार्जिंग तकनीक है, जिसमें भारी क्षमता पर चार्जिंग के दौरान बैटरियों और उपकरणों में पैदा होने वाली अत्यधिक गर्मी को नियंत्रित करने के लिए लिक्विड-कूल्ड सिस्टम काम करता है। इस तरह के प्रत्येक केंद्र पर कम से कम 100-100 किलोवाट क्षमता के दो फास्ट चार्जर लगाना अनिवार्य किया गया है, ताकि बड़े वाहनों को कम समय में सुरक्षित रूप से चार्ज किया जा सके।

## निजी पार्किंग और मौजूदा सेंटरों की स्थिति
नए नियमों के बाद आम उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि घरेलू या निजी चार्जिंग पर इसका क्या असर होगा। आधिकारिक प्रावधानों के अनुसार, यह 30 मीटर राइट ऑफ वे की बाध्यता पूरी तरह से सार्वजनिक और व्यावसायिक चार्जिंग तथा सर्विस सेंटरों के लिए है। किसी भी व्यक्ति द्वारा अपने निजी मकान, दफ्तर, आवासीय अपार्टमेंट या अन्य इमारतों की पार्किंग में केवल व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए लगाए जाने वाले चार्जर पर यह रोक लागू नहीं होगी। लोग अपनी निजी पार्किंग में वाहन चार्ज करने के लिए पहले की तरह स्वतंत्र रहेंगे।

इसके साथ ही, जो चार्जिंग और सर्विस सेंटर इन नए नियमों के आने से पहले से संचालित हो रहे हैं, उन पर इन शर्तों का स्वतः लागू होना एक अलग कानूनी विषय है। पूर्व में स्थापित ऐसे केंद्रों का भविष्य उनकी मूल स्वीकृति और जिस समय उन्हें मंजूरी दी गई थी, उस दौरान लागू शर्तों की समीक्षा के आधार पर ही तय किया जाएगा।

## इसका आप पर असर
छत्तीसगढ़ में नए नियमों से शहरों के अंदरूनी इलाकों में नए चार्जिंग स्टेशन खोलना सीमित हो जाएगा, जिससे वाहन चालकों को चार्जिंग के लिए मुख्य मार्गों का रुख करना होगा।

- **छत्तीसगढ़ में:** बड़े शहरों के भीतरी इलाकों में 30 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर नए व्यावसायिक चार्जिंग स्टेशन नहीं खुल पाएंगे। इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को फास्ट चार्जिंग के लिए मुख्य सड़कों, बाईपास या हाईवे पर जाना पड़ सकता है।
- **रायपुर और प्रमुख शहरों में:** रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग की संकरी कॉलोनियों में खाली जमीन होने के बाद भी नए स्टेशन नहीं बनेंगे। स्थानीय वाहन चालकों को सार्वजनिक चार्जिंग के लिए अपनी यात्रा की योजना पहले से बनानी होगी।
- **निजी वाहन मालिकों के लिए:** घर, ऑफिस या अपार्टमेंट की निजी पार्किंग में चार्जिंग पॉइंट लगाने पर कोई नई पाबंदी नहीं है। व्यक्तिगत उपयोग के लिए लोग अपनी सुविधा के अनुसार बिना 30 मीटर के नियम के चार्जर स्थापित कर सकते हैं।
- **हाईवे यात्रियों के लिए:** राजमार्गों पर हर 25 किलोमीटर पर स्टेशन बनने से लंबी दूरी के सफर में बैटरी खत्म होने की चिंता कम होगी। भारी वाहनों को भी प्रत्येक 100 किलोमीटर पर 100 किलोवाट क्षमता वाले दो लिक्विड-कूल्ड चार्जर मिल सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
शहरी क्षेत्रों में बढ़ती इलेक्ट्रिक गाड़ियों की वजह से सड़कों पर लगने वाले जाम को रोकने और उच्च क्षमता वाली चार्जिंग के दौरान अग्नि एवं सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।

- **सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन:** चार्जिंग के लिए कतार में खड़े होने वाले वाहनों से संकरी सड़कों पर जाम लगने का खतरा रहता है। 30 मीटर राइट ऑफ वे तय करने से मुख्य मार्गों पर यातायात सुचारू बना रहेगा।
- **हाई-वोल्टेज उपकरणों के लिए स्थान:** फास्ट चार्जिंग, बैटरी स्वैपिंग और लिक्विड-कूल्ड सिस्टम जैसी भारी तकनीकी इकाइयों को सुरक्षित संचालन के लिए चौड़ी जगह की जरूरत होती है। संकीर्ण बस्तियों में ऐसे उच्च क्षमता वाले बिजली उपकरणों से खतरे की संभावना कम करने के लिए यह मानक तय हुआ है।
- **राजमार्गों पर नेटवर्क का विस्तार:** अंतर-शहरी आवागमन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने दूरदराज के रास्तों पर एक तय अंतराल पर इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की योजना बनाई है। इसी कारण हाईवे पर 25 किमी और 100 किमी का निश्चित ग्रिड तैयार किया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. छत्तीसगढ़ में नए ईवी चार्जिंग और सर्विस सेंटर के लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई कितनी तय की गई है?
नए नियमों के अनुसार जिस सड़क से सेंटर में प्रवेश होगा, उसका राइट ऑफ वे कम से कम 30 मीटर होना अनिवार्य है।

### 2. क्या शहर की 12, 18 या 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर नया चार्जिंग स्टेशन खुल सकता है?
नहीं, 12, 18 या 24 मीटर राइट ऑफ वे वाली सड़कों पर अब नए व्यावसायिक चार्जिंग और सर्विस सेंटर को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

### 3. सार्वजनिक और भारी वाहनों के चार्जिंग स्टेशन के लिए न्यूनतम कितनी जगह चाहिए?
सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन के लिए 13.5 गुणा 5.5 मीटर और भारी वाहनों के फास्ट चार्जिंग सेंटर के लिए 15 गुणा 7 मीटर जगह निर्धारित है।

### 4. राजमार्गों पर चार्जिंग स्टेशन कितनी दूरी पर स्थापित किए जाएंगे?
हाईवे के दोनों ओर हर 25 किलोमीटर पर पब्लिक चार्जिंग स्टेशन और भारी वाहनों के लिए हर 100 किलोमीटर पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन बनेंगे।

### 5. क्या घर या दफ्तर की पार्किंग में पर्सनल चार्जर लगाने पर भी यह नियम लागू होगा?
नहीं, मकान, अपार्टमेंट या दफ्तर की निजी पार्किंग में व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए लगाए जाने वाले चार्जर पर यह नियम लागू नहीं होता।

### 6. फ्लूइड कूल्ड बैटरी चार्जिंग सेंटर की क्या विशेषता है?
इसमें चार्जिंग के दौरान पैदा होने वाली गर्मी नियंत्रित करने के लिए लिक्विड-कूलिंग तकनीक होती है और कम से कम 100-100 किलोवाट के दो फास्ट चार्जर होते हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._