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  "type": "article",
  "title": "धान की खेती में पानी का सही प्रबंधन, इस तरीके से मजबूत होंगी फसल की जड़ें",
  "summary": "छत्तीसगढ़ में कृषि विशेषज्ञों ने धान के खेतों में लगातार पानी भरकर रखने के बजाय बीच-बीच में खेत को सुखाने की सलाह दी है। इससे मिट्टी में ऑक्सीजन का संचार बढ़ता है और जड़ें मजबूत होती हैं।",
  "content": "छत्तीसगढ़ राज्य को पारंपरिक रूप से धान का कटोरा माना जाता है, जहां के किसान बड़े पैमाने पर धान की खेती करते हैं। हालांकि, हाल ही में कृषि विशेषज्ञों ने खेतों में लगातार पानी भरा रहने की प्रथा को लेकर किसानों को आगाह किया है। जानकारों का कहना है कि खेत में हर समय पानी का जमा रहना मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इससे जमीन के भीतर ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है, जिसका सीधा असर फसल के कुल उत्पादन और सेहत पर पड़ता है। कृषि विशेषज्ञ संजय यादव ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि धान के पौधों को नमी और पानी की आवश्यकता जरूर होती है, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि खेत को हमेशा तालाब बनाकर रखा जाए। उनके अनुसार, बेहतर पैदावार के लिए यह जरूरी है कि बीच-बीच में खेत से पानी की निकासी हो और जल स्तर कम किया जाए।\n\n \n\nमिट्टी में ऑक्सीजन का प्रवाह है जरूरी\n जब खेत में कुछ समय के लिए पानी नहीं रहता है, तो मिट्टी की ऊपरी परत सूखती है और उसमें ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो मिट्टी के अंदर कई ऐसे सूक्ष्म जीव और बैक्टीरिया मौजूद होते हैं जो फसलों के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। इन लाभदायक जीवों को जीवित रहने और सक्रिय रहने के लिए ऑक्सीजन की सख्त जरूरत होती है। जब खेत में निरंतर पानी भरा रहता है, तो ये सूक्ष्म जीव दम तोड़ने लगते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है।\n\n \n\nजड़ों के विकास और कल्ले फूटने में मदद\n धान के पौधों की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, फसल उतनी ही उन्नत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जड़ों के समुचित विकास के लिए भी खेत में लगातार जलभराव से बचना चाहिए। एक बार खेत में पानी रोकने के बाद उसे कुछ दिनों तक सूखने देना चाहिए, जिससे पौधों की जड़ें गहराई तक फैलती हैं और मजबूती हासिल करती हैं। इसके अलावा, खेत में नमी और सूखे का यह संतुलन धान के पौधों में अधिक कल्ले निकलने में भी मददगार साबित होता है। इससे पूरा पौधा स्वस्थ और हरा-भरा रहता है।\n\n \n\nसिंचाई का सही चक्र और किसानों के लिए सलाह\n विशेषज्ञों की ओर से किसानों को यह व्यावहारिक सलाह दी गई है कि खेत से पानी हटाने के बाद कम से कम दो से पांच दिन तक वहां लगातार पानी जमा न होने दें। हालांकि, पानी और सूखे के बीच का यह अंतराल हर जगह एक समान नहीं हो सकता है, क्योंकि यह पूरी तरह से मिट्टी के प्रकार, स्थानीय मौसम और फसल की मौजूदा अवस्था पर निर्भर करता है। इस अवधि के बाद आवश्यकतानुसार दोबारा सिंचाई की जा सकती है। इस वैज्ञानिक तरीके को अपनाने से मिट्टी के भीतर हवा का आवागमन सुचारू बना रहता है और पौधों की जड़ें स्वस्थ रूप से विकसित होती हैं।\n\nइसका आप पर असर\nधान की खेती करने वाले किसानों के लिए जल प्रबंधन का यह तरीका फसल की लागत घटाने और पैदावार बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।\n\n• भारत में: धान उगाने वाले सभी राज्यों के किसानों को पारंपरिक लगातार जलभराव से हटकर बीच-बीच में खेत सुखाने की इस तकनीक को अपनाना चाहिए। इससे रासायनिक खादों का बेहतर उपयोग होता है और अनावश्यक सिंचाई खर्च से राहत मिलती है।\n• छत्तीसगढ़ में: धान के कटोरे के रूप में पहचाने जाने वाले इस राज्य के किसानों को अपनी पैदावार क्षमता को और अधिक सुधारने का सीधा अवसर मिलेगा। सही समय पर पानी रोकने से जड़ें मजबूत होंगी और तेज हवाओं या बारिश में फसल के गिरने का खतरा कम होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. धान के खेत में लगातार पानी क्यों नहीं भरना चाहिए?\nलगातार पानी भरे रहने से मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और फसल के उत्पादन पर बुरा असर पड़ता है।\n\n2. खेत को बीच में सुखाने से क्या फायदा होता है?\nखेत सूखने से मिट्टी में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है और लाभदायक सूक्ष्म जीवों को पनपने में मदद मिलती है।\n\n3. जड़ों के विकास के लिए कौन सा तरीका सही है?\nपानी रोकने के बाद कुछ दिनों के लिए खेत को सूखने देना जड़ों के विकास में मदद करता है।\n\n4. पानी हटाने के बाद खेत को कितने दिन सूखा रखना चाहिए?\nकिसानों को सलाह दी जाती है कि पानी रोकने के बाद 2 से 5 दिन तक लगातार पानी जमा न होने दें।",
  "url": "https://trendkia.com/chhattisgarh/dhana-ki-kheti-men-pani-ka-sahi-prabndhana-isa-tarike-se-majabuta-hongi-phasala-ki-jaren-25550",
  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-09-01",
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    "धान की खेती",
    "कृषि सलाह",
    "फसल प्रबंधन",
    "सिंचाई के तरीके",
    "संजय यादव",
    "छत्तीसगढ़ कृषि"
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  "site": "TrendKia"
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