दिव्यांग आरक्षण विवाद में फंसी छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती, बिलासपुर अदालत ने लिखित परीक्षा रोकी दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के कोटे में विसंगतियों को लेकर दायर याचिका पर बिलासपुर उच्च न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए राज्य की शिक्षक भर्ती परीक्षा के आयोजन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। प्रदेश में सहायक शिक्षक और शिक्षक पदों पर नियुक्ति की उम्मीद संजोए बैठे हजारों उम्मीदवारों को अदालती आदेश के बाद थोड़ा इंतजार करना होगा। बिलासपुर स्थित उच्च न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया के तहत आयोजित होने वाली लिखित परीक्षाओं पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश कृष्णराम महापात्र की अगुवाई वाली खंडपीठ ने यह फैसला भर्ती नियमों में दृष्टिहीन अभ्यर्थियों के आरक्षण प्रावधानों को लेकर दाखिल याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सुनाया। आरक्षण रोस्टर पर उठे कानूनी सवाल विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब प्रशासन ने दोनों श्रेणियों के पदों के लिए औपचारिक अधिसूचना जारी की। विज्ञापन जारी होते ही विभिन्न श्रेणियों के निर्धारण पर आपत्तियां दर्ज कराई जाने लगीं। पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि तय नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप उन्हें उचित प्रतिनिधित्व प्रदान नहीं किया गया है। याचिकाकर्ताओं के पक्ष को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रूंगटा ने दलील दी कि वर्तमान विज्ञापन में निर्धारित किया गया रोस्टर दिव्यांग वर्ग के विधिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन करता है। उन्होंने बेंच को अवगत कराया कि यह व्यवस्था मौजूदा विधायी प्रावधानों के अनुरूप तैयार नहीं की गई है, जिससे संबंधित वर्ग के अवसर सीमित हो रहे हैं। इन तर्कों की गंभीरता को स्वीकार करते हुए पीठ ने निर्धारित लिखित परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्देश दिया और शासन को नोटिस जारी कर विस्तृत हलफनामा पेश करने को कहा। परीक्षा कार्यक्रम और पदों का विवरण इस पूरी चयन प्रक्रिया के तहत कुल 2,292 रिक्तियों को भरा जाना तय किया गया था। प्रशासनिक ढांचे के अनुसार इन पदों को दो अलग-अलग वर्गों में विभाजित किया गया था, जिसमें ई-संवर्ग के अंतर्गत 795 स्थान तथा टी-संवर्ग के तहत 1497 स्थान निर्धारित थे। पूर्व में निर्धारित समय-सारणी के मुताबिक सहायक शिक्षकों के चयन हेतु लिखित परीक्षा 11 अक्टूबर को होनी थी, जबकि शिक्षकों के पदों के लिए 25 अक्टूबर की तिथि नियत की गई थी। न्यायिक हस्तक्षेप के कारण अब यह संपूर्ण कार्यक्रम प्रभावित हो गया है। प्रशासनिक प्रतिक्रिया अदालती रुख सामने आने के पश्चात नीतिगत स्तर पर हलचल बढ़ गई है। मामले के संदर्भ में छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री अरुण साव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राज्य सरकार अदालत के समक्ष अपना पक्ष और जवाब प्रस्तुत करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका द्वारा उठाए गए बिंदुओं का परीक्षण कर नियमानुसार विस्तृत उत्तर प्रस्तुत किया जाएगा। इसका आप पर असर लिखित परीक्षा पर न्यायिक स्थगन लगने से हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों की तैयारी और चयन प्रक्रिया अनिश्चितकाल के लिए अटक गई है। • छत्तीसगढ़ में: परीक्षा केंद्रों और प्रवेश पत्रों की तैयारियों में जुटे 2,292 पदों के अभ्यर्थियों का परीक्षा कार्यक्रम स्थगित हो गया है। 11 अक्टूबर और 25 अक्टूबर को होने वाली दोनों परीक्षाओं के लिए उम्मीदवारों को अदालत के अगले फैसले का इंतजार करना होगा। • दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए: दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को नियमानुसार उचित आरक्षण कोटा मिलने की उम्मीद बंधी है। रोस्टर में आवश्यक संशोधन होने पर इस वर्ग के लिए पदों का बंटवारा अधिक पारदर्शी हो सकेगा। • प्रशासनिक तैयारी: शिक्षा विभाग को अदालत के समक्ष आरक्षण रोस्टर का कानूनी औचित्य साबित करना होगा। जवाब संतोषजनक न होने की स्थिति में भर्ती विज्ञापन में नए सिरे से बदलाव करने पड़ सकते हैं। • नियुक्ति की समय-सीमा: स्कूलों में नए शिक्षकों की तैनाती की प्रक्रिया तय समय से पिछड़ जाएगी। चयन प्रक्रिया लंबी खिंचने से स्कूलों में रिक्त पदों को भरने में और वक्त लगेगा। ऐसा क्यों हुआ यह कानूनी गतिरोध भर्ती विज्ञापन में दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के आरक्षण कोटे और रोस्टर नियमों के कथित उल्लंघन के कारण उत्पन्न हुआ है। • प्रत्यक्ष कारण: पूर्णतः दृष्टिबाधित उम्मीदवारों ने भर्ती रोस्टर में नियमानुसार तय कोटा न मिलने का आरोप लगाते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि यह विज्ञापन दिव्यांग वर्ग के कानूनी अधिकारों का हनन करता है। • प्रशासनिक त्रुटि के आरोप: 2,292 पदों के विज्ञापन में ई-संवर्ग और टी-संवर्ग के पदों के बंटवारे के दौरान आरक्षण नियमों के सही अनुपालन पर सवाल उठाए गए। इससे प्रभावित अभ्यर्थियों को अदालत से हस्तक्षेप की मांग करनी पड़ी। • आगामी प्रक्रिया: उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने लिखित परीक्षाओं पर रोक लगाकर शासन से विस्तृत जवाब तलब किया है। अब राज्य सरकार के औपचारिक जवाब और आगामी अदालती सुनवाई के बाद ही भर्ती का भविष्य तय होगा। सवाल-जवाब 1. बिलासपुर उच्च न्यायालय ने किस भर्ती परीक्षा पर रोक लगाई है? अदालत ने राज्य में होने वाली शिक्षक और सहायक शिक्षक पदों की भर्ती परीक्षा के आयोजन पर रोक लगाई है। 2. इस भर्ती के तहत कुल कितने पदों पर चयन होना था? इस प्रक्रिया के माध्यम से कुल 2,292 रिक्त पदों पर सीधी भर्ती की जानी थी। 3. ई-संवर्ग और टी-संवर्ग के तहत कितने-कितने पद विज्ञापित किए गए थे? ई-संवर्ग के अंतर्गत 795 पद और टी-संवर्ग के तहत 1497 पद निर्धारित किए गए थे। 4. लिखित परीक्षा की मूल तिथियां क्या निर्धारित थीं? सहायक शिक्षक पद के लिए परीक्षा 11 अक्टूबर को और शिक्षक पद के लिए 25 अक्टूबर को आयोजित होनी थी। 5. भर्ती प्रक्रिया को अदालत में चुनौती क्यों दी गई? पूर्णतः दृष्टिबाधित उम्मीदवारों ने भर्ती विज्ञापन में नियमों के अनुकूल आरक्षण रोस्टर न दिए जाने का आरोप लगाकर चुनौती दी। 6. मामले पर उप-मुख्यमंत्री अरुण साव ने क्या प्रतिक्रिया दी? उप-मुख्यमंत्री ने बताया कि उच्च न्यायालय ने संज्ञान लिया है और राज्य सरकार अदालत के समक्ष अपना पक्ष और जवाब प्रस्तुत करेगी। https://trendkia.com/chhattisgarh/divyanga-arakshana-vivada-men-phnsi-chhattisgarh-shikshaka-bharti-bilaspur-adalata-ne-likhita-pariksha-roki-45619 TrendKia — Har trend, sabse pehle.