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  "title": "दीपावली 2026: अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में बास्केटबॉल खिलाड़ियों ने सजाया कोर्ट, रंगोली और दीयों से अनूठी सजावट",
  "summary": "अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में बास्केटबॉल खिलाड़ियों ने दीपावली के पावन पर्व पर अनूठी परंपरा निभाते हुए खेल मैदान को रंगोली और दीयों से सजाया है। साल 2013 से चली आ रही इस परंपरा में खिलाड़ी मैदान को अपना घर मानकर उत्साह के साथ जश्न मनाते हैं।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर स्थित गांधी स्टेडियम के बास्केटबॉल ग्राउंड में दीपावली के पावन पर्व पर एक अनूठी तस्वीर देखने को मिली है। बास्केटबॉल संघ परिवार से जुड़े खिलाड़ियों ने खेल भावना और आपसी एकता का परिचय देते हुए अपने खेल मैदान को बेहद आकर्षक रंगोली से सजाया है। कोर्ट पर बनाई गई इन रंगोलियों में खेल से जुड़ी विभिन्न थीम को उकेरा गया है। पहली नजर में ही यह सजावट किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। गांधी स्टेडियम के इस बास्केटबॉल कोर्ट में दीपावली के अवसर पर रंगोली सजाने की यह परंपरा वर्ष 2013 से लगातार चली आ रही है और हर साल इसका दायरा और उत्साह बढ़ता ही जा रहा है।\n\nमैदान को घर मानकर होती है सजावट\nदीपावली के आगमन से ठीक पहले बास्केटबॉल खिलाड़ी अपने खेल मैदान की विशेष रूप से साफ-सफाई करते हैं और फिर उसे पारंपरिक रंगोली तथा दीपों से भव्य रूप से सजाकर त्योहार का आनंद लेते हैं। जिस प्रकार आम लोग अपने घरों को साफ-सुथरा कर दीपों से रोशन करते हैं, ठीक उसी भावना के साथ यहां के खिलाड़ी इस खेल मैदान को अपना दूसरा घर मानते हैं। इस आयोजन की सबसे खास विशेषता यह है कि खिलाड़ी केवल रंगोली बनाकर ही इतिश्री नहीं करते, बल्कि छोटी दीपावली और बड़ी दीपावली के अवसर पर शाम के समय सभी खिलाड़ी एक साथ एकत्र होते हैं और पूरे बास्केटबॉल ग्राउंड में सैकड़ों दीये प्रज्वलित करते हैं, जिससे पूरा परिसर जगमगा उठता है।\n\nनई पीढ़ी आगे बढ़ा रही है पुरानी परंपरा\nइस अनूठी परंपरा के बारे में बास्केटबॉल खिलाड़ी इलिसिबा ने जानकारी दी कि उनके कोच राजेश प्रताप सिंह हर कदम पर उनका मार्गदर्शन करते हैं। खिलाड़ियों के लिए यह मैदान महज एक कंक्रीट का कोर्ट नहीं बल्कि उनका अपना घर है। जिस तरह हर कोई अपने निवास को पर्व पर सजाता है, उसी तरह सभी खिलाड़ी मिलकर इस परिसर को नया रूप देते हैं। उन्होंने बताया कि यह परंपरा बीते कई वर्षों से निरंतर आगे बढ़ रही है। पहले सीनियर खिलाड़ी इस जिम्मेदारी को निभाती थीं और अब नई पीढ़ी के युवा खिलाड़ी इस सांस्कृतिक सिलसिले को आगे बढ़ा रहे हैं। सभी का एक साथ मिलकर रंगोली तैयार करना और उत्सव मनाना बेहद आनंददायक अनुभव होता है।\n\nएक अन्य बास्केटबॉल खिलाड़ी अनामिका चौबे ने बताया कि वह साल 2022 से इस मैदान से जुड़ी हुई हैं और उनके आने से बहुत पहले से ही यहां दीपावली पर रंगोली बनाने का सिलसिला चला आ रहा है। हर साल लड़के और लड़कियां मिलकर दीपावली की सुबह विभिन्न कलात्मक थीम पर आधारित रंगोलियां जमीन पर उतारते हैं। उन्होंने कहा कि बास्केटबॉल के अभ्यास के साथ-साथ यह सभी खिलाड़ी हर राष्ट्रीय और धार्मिक पर्व को एक संयुक्त परिवार की तरह सेलिब्रेट करते हैं। छोटी दीपावली और बड़ी दीपावली के दिन सभी खिलाड़ी मैदान पर पहुंचते हैं, दीप जलाते हैं और खुशियां साझा करते हैं। उनके लिए यह स्थान केवल खेलकूद का केंद्र न होकर एक आत्मीय माहौल देने वाला ठिकाना है।\n\nरंगों के जरिए झलकता है खेल का जज्बा\nबास्केटबॉल कोच राजेश प्रताप सिंह ने बताया कि साल 2013 में इस ग्राउंड की स्थापना हुई थी और तभी से दीपावली के मौके पर खिलाड़ी रंगोली से मैदान को संवारते आ रहे हैं। इस रचनात्मक कार्य में लड़कियां अपने छोटे-छोटे समूह बनाती हैं और अपनी कल्पना तथा खेल भावना के आधार पर मनमोहक रंगोली तैयार करती हैं। प्रत्येक समूह में पांच से छह खिलाड़ी शामिल होते हैं। उन्होंने आगे बताया कि कुछ रंगोलियों में बास्केटबॉल खेल की प्रत्यक्ष झलक देखने को मिलती है, तो कहीं खिलाड़ी अपनी मेहनत के दम पर आसमान छूने और पदक जीतने के सपने को रंगों के माध्यम से कैनवास पर उतारते नजर आते हैं। इसके अलावा कुछ विशेष रंगोलियों में खेल के दौरान अपनाए जाने वाले डिफेंस और ऑफेंस की बारीकियों को भी बहुत ही सुंदर ढंग से दर्शाया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अंबिकापुर के किस स्थान पर बास्केटबॉल खिलाड़ियों ने दीपावली की सजावट की है?\nखिलाड़ियों ने सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर स्थित गांधी स्टेडियम के बास्केटबॉल ग्राउंड में सजावट की है।\n\n2. बास्केटबॉल कोर्ट को रंगोली और दीपों से सजाने की परंपरा कब शुरू हुई थी?\nगांधी स्टेडियम के बास्केटबॉल कोर्ट में दीपावली पर रंगोली बनाने की यह परंपरा साल 2013 से निरंतर चली आ रही है।\n\n3. इस मैदान पर खिलाड़ियों का मार्गदर्शन कौन करते हैं?\nखिलाड़ियों का मार्गदर्शन कोच राजेश प्रताप सिंह करते हैं।\n\n4. रंगोली तैयार करने वाले प्रत्येक समूह में कितने खिलाड़ी होते हैं?\nप्रत्येक समूह में पांच से छह खिलाड़ी शामिल होते हैं जो अपनी कल्पना के अनुसार रंगोली तैयार करते हैं।\n\n5. खिलाड़ी रंगोली में किस तरह के विषयों को दर्शाते हैं?\nखिलाड़ी रंगोली के माध्यम से बास्केटबॉल की झलक, मेडल जीतने के सपने और खेल के डिफेंस व ऑफेंस की थीम को दर्शाते हैं।\n\n6. अनामिका चौबे किस वर्ष से इस बास्केटबॉल ग्राउंड में खेल रही हैं?\nअनामिका चौबे साल 2022 से इस ग्राउंड में खेल रही हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nअंबिकापुर के गांधी स्टेडियम के खिलाड़ियों की यह अनूठी पहल सामुदायिक सहभागिता, टीम वर्क और परंपरा के संरक्षण का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है। इस प्रेरणादायक आयोजन से कई महत्वपूर्ण सबक सीखे जा सकते हैं:\n\n• सामूहिकता और एकजुटता: खेल मैदान को अपना घर मानकर सभी खिलाड़ियों का मिलकर सजावट करना आपसी भाईचारे और टीम भावना को मजबूत करता है। यह सिखाता है कि किसी भी साझा स्थान को अपने परिश्रम से खूबसूरत बनाया जा सकता है।\n• परंपरा का निरंतर प्रवाह: सीनियर खिलाड़ियों द्वारा शुरू की गई इस पहल को नई पीढ़ी के युवाओं द्वारा आगे बढ़ाना यह दर्शाता है कि अच्छी संस्कृति और रीति-रिवाजों को सहेजकर रखना कितना जरूरी है।\n• खेल भावना का कलात्मक प्रदर्शन: रंगोली के माध्यम से खेल की थीम, डिफेंस, ऑफेंस और पदक जीतने के सपनों को दर्शाना यह बताता है कि कला और खेल को रचनात्मक रूप से जोड़ा जा सकता है।\n• पर्वों का सामूहिक उल्लास: केवल मैदान पर अभ्यास करने के बजाय हर त्योहार को परिवार की तरह मनाना यह संदेश देता है कि आपसी मेलजोल जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।",
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