# घाटकवाली में नयाखानी के बाद गेड़ी देव अनुष्ठान, बीमारियों से बचाव के लिए अनूठी पूजा

> बस्तर के घाटकवाली में नई फसल के स्वागत पर्व नयाखानी के तुरंत बाद गेड़ी देव की विशेष पूजा की गई, जिसका मकसद गांव को निरोगी रखना और सुख-शांति लाना है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/ghatkawali-men-nayakhani-ke-bada-gedi-dev-anushthana-bimariyon-se-bachava-ke-lie-anuthi-puja-33561 · **Language:** Hindi
**Tags:** बस्तर, घाटकवाली, गेड़ी देव, नयाखानी, घाट जात्रा, छत्तीसगढ़ संस्कृति, जनजातीय परंपरा

बस्तर अंचल में नई फसल के आगमन पर मनाए जाने वाले उत्सवों का अपना अलग धार्मिक और सामाजिक महत्व है। जिले के घाटकवाली क्षेत्र में नई धान की बालियां तैयार होने के बाद नयाखानी पर्व का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने कुदरत का आभार व्यक्त किया और खुशहाल जीवन की कामना की। इस पूरे उत्सव चक्र में सबसे पहले घाट जात्रा आयोजित की जाती है, जिसके पूर्ण होने पर नयाखानी का अनुष्ठान संपन्न होता है। नयाखानी के तत्काल बाद घाटकवाली के बाशिंदों ने अपनी पारंपरिक रस्म के तहत गेड़ी देव की विशेष सेवा-अर्जी की।

## गांव की सेहत और समृद्धि के लिए सेवा-अर्जी
घाटकवाली में गेड़ी देव की यह रस्म सदियों से गांव की खुशहाली, अमन-चैन और लोगों को तमाम व्याधियों से महफूज रखने की नीयत से निभाई जाती है। इस अनुष्ठान के जरिए समूचा ग्रामीण समाज एक साथ मिलकर यह प्रार्थना करता है कि बस्ती में किसी भी तरह की संक्रामक या गंभीर बीमारी का साया न पड़े। समुदाय के लोगों का मानना है कि सामूहिक प्रार्थना और पूर्वजों की यह रीत पूरे इलाके को विपदाओं से बचाती है।

## चावल, मक्का और अंडे अर्पित कर की गई विशेष पूजा
इस अनुष्ठान के दौरान गेड़ी को बेहद आदर और सलीके के साथ स्थापित किया जाता है। पूजा की शुरुआत सबसे पहले परंपरा अनुसार पुजारी द्वारा विधि-विधान से सेवा-अर्जी देकर की जाती है। ग्रामीण अपने-अपने घरों से गेड़ी लेकर पूजा स्थल पर जमा होते हैं। गांव के पटेल लच्छू कश्यप के मुताबिक, यह विधान खासतौर पर गांव को खुजली समेत अन्य चर्म और मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रखने के लिए आयोजित किया जाता है। अनुष्ठान के क्रम में लोग गेड़ी समर्पित करते हैं और उसके समक्ष चावल, मक्का, अंडा तथा पैसे चढ़ाकर गांव के निरोगी रहने की गुहार लगाते हैं। पूजा की सारी रस्में पूरी होने के बाद सभी ग्रामीण एक साथ पारंपरिक नृत्य में हिस्सा लेते हैं।

## पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ा रही नई पीढ़ी
स्थानीय निवासी श्याम सुंदर ने इस विधान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि गेड़ी देव अनुष्ठान की शुरुआत उनके बुजुर्गों और पूर्वजों के दौर में हुई थी। मौजूदा पीढ़ी अब उसी विरासत को पूरी आस्था के साथ आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि वे बिना किसी चूक के पूरे धार्मिक नियमों और विधि-विधान से यह पूजा संपन्न करते हैं, जिससे गांव हमेशा रोगों से मुक्त रहे और हर परिवार में खुशहाली बनी रहे।

## इसका आप पर असर
यह पारंपरिक आयोजन बस्तर के ग्रामीण जनजीवन और सांस्कृतिक एकजुटता को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

- **सामुदायिक स्वास्थ्य पर असर:** यह अनुष्ठान बीमारियों और संक्रमण से सुरक्षा की सामूहिक भावना को मजबूत करता है। गांव के लोग एक साथ मिलकर सार्वजनिक स्वच्छता और बेहतर स्वास्थ्य की साझा प्रतिबद्धता दोहराते हैं।
- **पारंपरिक विरासत का संरक्षण:** नई पीढ़ी अपने पूर्वजों द्वारा स्थापित कृषि आधारित धार्मिक नियमों से जुड़ती है। इससे स्थानीय बोलचाल, रीति-रिवाजों और लोककलाओं को जीवित रखने में मदद मिलती है।
- **कृषि अर्थव्यवस्था में उल्लास:** नई फसल के स्वागत से किसानों और खेतिहर परिवारों में नई ऊर्जा का संचार होता है। साल भर की मेहनत के बाद पूरा समुदाय मिलकर राहत और उत्सव का माहौल बनाता है।
- **सामाजिक ताने-बाने की मजबूती:** पूजा के बाद सामूहिक नृत्य और भोज से आपसी संबंध प्रगाढ़ होते हैं। त्योहारों के मौके पर गांव के विवादों और मनमुटाव को भुलाकर एकजुटता बढ़ती है।

## ऐसा क्यों हुआ
घाटकवाली में नयाखानी और गेड़ी देव अनुष्ठान नई फसल के आगमन और मौसमी बीमारियों से बचाव की धार्मिक मान्यता के तहत आयोजित किया जाता है।

- **फसल चक्र का आभार:** खेतों में नई धान की बालियां आने के बाद किसान कुदरत को धन्यवाद देना अपना प्राथमिक कर्तव्य मानते हैं। इसी क्रम में पहले घाट जात्रा और फिर नयाखानी पर्व का आयोजन अनिवार्य माना जाता है।
- **बीमारियों से सुरक्षा का विश्वास:** ग्रामीण मान्यता के अनुसार बदलते मौसम में खुजली और अन्य संक्रामक रोग फैलने का अंदेशा रहता है। समुदाय का अटूट विश्वास है कि गेड़ी देव की सेवा-अर्जी करने से गांव के लोग इन रोगों से महफूज रहते हैं।
- **पूर्वजों की परंपरा की निरंतरता:** स्थानीय निवासियों के पूर्वजों ने सुख-शांति और निरोगी काया के लिए इस विधान की शुरुआत की थी। वर्तमान पीढ़ी बिना किसी फेरबदल के उसी पारंपरिक विधि-विधान का पालन कर रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. गेड़ी देव अनुष्ठान बस्तर के किस गांव में आयोजित किया जाता है?
यह विशेष अनुष्ठान बस्तर जिले के घाटकवाली गांव में आयोजित किया जाता है।

### 2. यह पूजा किस अवसर पर और किस पर्व के बाद की जाती है?
यह पूजा नई धान की बालियां आने पर मनाए जाने वाले नयाखानी पर्व के तुरंत बाद की जाती है।

### 3. नयाखानी से पहले कौन सा आयोजन संपन्न होता है?
नयाखानी पर्व मनाने से पहले घाट जात्रा का आयोजन किया जाता है।

### 4. गेड़ी देव की सेवा-अर्जी में क्या-क्या सामग्री अर्पित की जाती है?
इस पूजा में गेड़ी के समक्ष चावल, मक्का, अंडा और पैसे अर्पित किए जाते हैं।

### 5. ग्रामीणों के अनुसार इस रस्म का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य गांव में सुख-शांति बनाए रखना और लोगों को खुजली जैसी बीमारियों से दूर रखना है।

### 6. पूजा की शुरुआत किसके द्वारा की जाती है?
गेड़ी देव की पूजा में सबसे पहले सेवा-अर्जी गांव के पुजारी द्वारा विधि-विधान से की जाती है।

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