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  "title": "हाथियों के लिए छतीसगढ़ के जंगल में तैयार हो रहा खास भोजन क्षेत्र, धरमजयगढ़ में रोपे गए हजारो पौधे",
  "summary": "छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में मानव और हाथियों के संघर्ष को थामने के लिए वन विभाग ने एक अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत जंगलों के भीतर ही हाथियों का मनपसंद प्राकृतिक आहार विकसित किया जा रहा है ताकि वे बस्तियों की तरफ न आएं।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में लंबे समय से चली आ रही मानव और हाथियों के बीच की भिड़ंत को थामने के लिए वन विभाग ने एक ठोस कदम उठाया है। आए दिन हाथी भोजन और पानी की तलाश में बस्तियों का रुख करते हैं, जिससे फसलों और घरों को भारी नुकसान पहुंचता है और कई बार जनहानि भी होती है। इस समस्या पर लगाम लगाने के लिए फलदार लेमरू परियोजना के अंतर्गत वनों के भीतर ही हाथियों के लिए एक विशेष भोजन क्षेत्र तैयार किया जा रहा है। इसी सिलसिले में धरमजयगढ़ वनमंडल के कापू रेंज में इस साल जुलाई के महीने में कुल बीस हेक्टेयर जमीन पर आठ हजार फलदार और बहुपयोगी पौधे रोपे गए हैं ताकि हाथियों को जंगल के दायरे में ही पर्याप्त चारा मिल सके।\n\n \n\nकम्पार्टमेंट में बांटे गए रोपण कार्य\n\nयोजना के पहले चरण के तहत चुनिंदा इलाकों में बड़े पैमाने पर पौधे लगाने का काम पूरा किया गया है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार कम्पार्टमेंट नंबर तेरह आरएफ में दस हेक्टेयर के दायरे में चार हजार पौधे लगाए गए हैं। इनमें जामुन, हर्रा, बरगद, पीपल, केकत और कचनार की प्रजातियां शामिल हैं। इसके साथ ही कम्पार्टमेंट नंबर बयालीस आरएफ में भी दस हेक्टेयर जमीन पर चार हजार पौधे रोपे गए हैं, जिनमें मुख्य रूप से जामुन, बहेरा, बरगद, पीपल और केकत के पौधे शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि आगामी दो से तीन वर्षों में जब ये पौधे विकसित होकर पेड़ बन जाएंगे, तो हाथियों को अपनी पसंद की पत्तियां, फल और छाल के लिए जंगलों से बाहर नहीं निकलना पड़ेगा।\n\n \n\nसुरक्षा और विशेषज्ञों की राय\n\nलगाए गए इन नन्हे पौधों को जंगली जानवरों या मवेशियों द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने से सुरक्षित रखने के लिए पूरे रोपित क्षेत्र के चारों तरफ सीपीटी फेंसिंग यानी गहरी खाई और बाड़बंदी की व्यवस्था की गई है। जैसे ही ये पौधे बड़े होकर मजबूत पेड़ों का रूप ले लेंगे, इस सुरक्षा घेरे को हटा लिया जाएगा और इस प्राकृतिक आहार क्षेत्र को पूरी तरह हाथियों के लिए खोल दिया जाएगा। इस पूरी पहल को लेकर रायपुर के वन्य प्राणी विशेषज्ञ डॉ राजेन्द्र मिश्रा का कहना है कि हाथियों की बुनियादी जरूरतों में पर्याप्त भोजन, पानी और एक सुरक्षित माहौल शामिल है। जंगल के भीतर ही उनके पसंदीदा पौधे लगाना एक बेहतरीन कदम है जिससे उन्हें प्राकृतिक आवास में रोके रखने में मदद मिलेगी।\n\n \n\nवर्तमान में हाथियों की स्थिति और नुकसान\n\nदूसरी तरफ धरमजयगढ़ वनमंडल में हाथियों की मौजूदगी और उनके द्वारा मचाए जा रहे उत्पाद का सिलसिला अभी थमा नहीं है। वर्तमान समय में इस पूरे वनमंडल में कुल एक सौ ग्यारह हाथी अलग-अलग झुंडों में घूम रहे हैं, जिनमें पैंतीस नर, सैंतालीस मादा और उन्तीस शावक शामिल हैं। हाल ही में बुधवार की रात को इन हाथियों ने आसपास के कई गांवों में अचानक धावा बोल दिया और सैंतालीस ग्रामीणों की लहलहाती फसलों को रौंदकर पूरी तरह तबाह कर दिया। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों के मन में भारी दहशत का माहौल बना हुआ है और वे अपनी संपत्ति व जीवन की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह पहल क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।\n\n• भारत में: वन्यजीव corridors और उनके प्राकृतिक आवास के संरक्षण को राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता मिल रही है। इससे देश के अन्य वन क्षेत्रों में भी मानव बस्तियों की सुरक्षा मजबूत होगी।\n\n• छत्तीसगढ़ में: रायगढ़ और धरमजयगढ़ के स्थानीय ग्रामीणों को आने वाले वर्षों में फसलों के नुकसान और हाथियों के हमलों के आतंक से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, वर्तमान में एक सौ ग्यारह हाथियों की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों को अभी भी अत्यधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. लेमरू परियोजना के तहत कितने पौधे लगाए गए हैं?\nइस परियोजना के तहत जुलाई महीने में कुल आठ हजार फलदार पौधे रोपे गए हैं।\n\n2. यह पौधारोपण छत्तीसगढ़ के किस जिले में किया गया है?\nयह पौधारोपण छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल के अंतर्गत कापू रेंज में किया गया है।\n\n3. कम्पार्टमेंट तेरह और बयालीस में कितने-कितने पौधे लगाए गए हैं?\nदोनों कम्पार्टमेंट्स में दस-दस हेक्टेयर क्षेत्र में चार-चार हजार पौधे रोपे गए हैं।\n\n4. धरमजयगढ़ वनमंडल में वर्तमान में कितने हाथी घूम रहे हैं?\nवर्तमान में इस वनमंडल में कुल एक सौ ग्यारह हाथी अलग-अलग दलों में विचरण कर रहे हैं।\n\n5. पौधों को जानवरों से बचाने के लिए क्या उपाय किया गया है?\nरोपित क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सीपीटी फेंसिंग का घेरा बनाया गया है।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-09-04",
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    "हाथी संघर्ष",
    "छत्तीसगढ़ वन विभाग",
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    "वन्यजीव संरक्षण"
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