# जुड़ाहन के जंगलों में सुरक्षाबलों ने पकड़ा नक्सलियों का पुराना डंप, मौके पर ही बारूद किया नष्ट

> कांकेर जिले के छोटेबेठिया क्षेत्र में संयुक्त तलाशी अभियान के दौरान जवानों को नक्सलियों का पुराना हथियार और विस्फोटक डंप मिला, जिसे बीडीएस दल ने जंगल में ही निष्क्रिय कर दिया।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/jurahan-ke-jngalon-men-surakshabalon-ne-pakara-naksaliyon-ka-purana-dnpa-mauke-para-hi-baruda-kiya-nashta-53980 · **Language:** Hindi
**Tags:** कांकेर, छत्तीसगढ़, नक्सल डंप, डीआरजी, बीएसएफ, बस्तर, विस्फोटक बरामद

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में जंगलों को जोखिम मुक्त बनाने के लिए सुरक्षाबलों का सघन तलाशी अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। इसी कड़ी में छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जुड़ाहन गांव के नजदीकी जंगल में गश्त के दौरान जवानों को जमीन में छिपाकर रखा गया नक्सलियों का एक पुराना हथियार और विस्फोटक डंप ढूंढ निकालने में बड़ी कामयाबी मिली है। इलाके में सर्चिंग पर निकले सुरक्षाबलों ने संभावित खतरे को समय रहते भांप लिया और पूरे इलाके की घेराबंदी कर इस ठिकाने को बेअसर कर दिया।

## संयुक्त अभियान में बीडीएस दल ने बारूद किया निष्प्रभावी
इस तलाशी अभियान में डीआरजी, बीएसएफ और बम निरोधक दस्ता (बीडीएस) की संयुक्त टीम शामिल थी। जवानों ने जैसे ही जंगल के भीतर नक्सलियों द्वारा छिपाए गए इस पुराने डंप की पहचान की, तुरंत बीडीएस विशेषज्ञों को आगे किया गया। टीम ने बरामद सभी खतरनाक विस्फोटक पदार्थों को किसी अन्य जगह ले जाने के बजाय जंगल के सुरक्षित दायरे में ही नियंत्रित तरीके से नष्ट कर दिया। सुरक्षा एजेंसियों की इस मुस्तैदी का मुख्य मकसद घने जंगलों में छिपाकर रखे गए जानलेवा हथियारों और बारूद को समय रहते ढूंढकर समाप्त करना है, ताकि गश्त कर रहे जवानों या स्थानीय नागरिकों को भविष्य में किसी अप्रिय जनहानि का सामना न करना पड़े।

## बस्तर के जंगलों में अब भी गड़े हैं पुराने बारूदी खतरे
बस्तर संभाग के विभिन्न वनांचलों में नक्सली गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगाए जाने के बावजूद जंगलों के भीतर पहले से दबाए गए पुराने हथियारों, विस्फोटकों और प्लांट की गई आईईडी का संकट अब भी बना हुआ है। अपने सक्रिय दौर के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाने और हिंसक वारदातों को अंजाम देने के लिए दुर्गम जंगलों में ऐसे कई गुप्त डंप स्थापित किए थे। अब सुरक्षाबल चरणबद्ध तरीके से इन इलाकों को खंगाल रहे हैं ताकि जंगलों में दबे इन घातक सामानों को बाहर निकालकर पूरी तरह निष्क्रिय किया जा सके। इस व्यापक सफाई अभियान से जंगल के रास्ते आवाजाही करने वाले स्थानीय ग्रामीणों और मवेशियों की सुरक्षा भी पुख्ता हो सकेगी।

## क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित करने तक जारी रहेगी गश्त
सुरक्षाबलों ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में नक्सल प्रभावित रहे तमाम अंदरूनी इलाकों को पूरी तरह निरापद बनाने तक यह व्यापक सर्च ऑपरेशन निरंतर चलता रहेगा। जवानों की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि जंगलों के भीतर बारूद, हथियार या आईईडी का एक भी गुप्त ठिकाना बाकी न रहे। कांकेर के जुड़ाहन जंगल में की गई यह सफल कार्रवाई इसी दीर्घकालिक सुरक्षा रणनीति की एक अहम कड़ी है।

## इसका आप पर असर
जंगल के भीतर छिपाकर रखे गए पुराने विस्फोटक डंप के खात्मे से स्थानीय आबादी और सुरक्षाबलों के लिए आवागमन अधिक सुरक्षित हुआ है।

- **कांकेर और बस्तर क्षेत्र में:** अंदरूनी जंगली रास्तों से गुजरने वाले ग्रामीणों, पशुपालकों और वनोपज संग्राहकों पर अचानक बारूदी धमाके का खतरा कम हुआ है। पहले से दबे पुराने विस्फोटकों के निष्क्रिय होने से ग्रामीण बिना किसी डर के अपनी दैनिक गतिविधियों को जारी रख सकेंगे।
- **सुरक्षाबलों की गश्त पर:** इलाके में नियमित पेट्रोलिंग करने वाले सुरक्षा दस्तों के लिए बारूदी जाल में फंसने का जोखिम घटा है। संयुक्त अभियान की सफलता से सुरक्षाबलों का खोजी दायरा और अधिक मजबूत होगा।
- **पूरे छत्तीसगढ़ में:** नक्सल प्रभाव वाले पूर्व इलाकों के सैनिटाइजेशन से शांति बहाली की प्रक्रिया को मजबूती मिली है। लगातार सर्चिंग अभियानों के कारण उपद्रवी तत्वों के पुराने संसाधनों का नेटवर्क ध्वस्त हो रहा है।
- **स्थानीय प्रशासन के लिए:** जंगल क्षेत्रों में छिपे घातक हथियारों के नष्ट होने से विकास और सड़क निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकारी दल अधिक सुरक्षित माहौल में अंदरूनी गांवों तक अपनी पहुंच बना सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बरामदगी सुरक्षाबलों द्वारा पहले से नक्सल प्रभावित रहे जंगलों में पुराने गोला-बारूद और विस्फोटक ठिकानों को ढूंढने के लिए चलाए जा रहे सघन तलाशी अभियान के चलते संभव हुई।

- **नक्सलियों की पुरानी रणनीति:** अपने सक्रिय प्रभाव के दौरान नक्सली सुरक्षाबलों पर हमलों के लिए जंगलों के दुर्गम हिस्सों में हथियारों और बारूद के गुप्त ठिकाने बनाते थे। यही पुराने डंप कई इलाकों में बिना इस्तेमाल के जमीन में गड़े रह गए हैं।
- **सर्चिंग अभियान की निरंतरता:** भले ही बस्तर में नक्सल हिंसा पर काफी अंकुश लगा है, लेकिन जंगलों में छोड़ी गई आईईडी और बारूद को पूरी तरह साफ करने के लिए डीआरजी, बीएसएफ और बीडीएस द्वारा संयुक्त गश्त की जा रही है।
- **मौके पर नियंत्रित विस्फोट:** पुराने और सड़ रहे विस्फोटकों को हिलाना या ले जाना खतरनाक होता है, इसलिए बीडीएस दस्ते ने दुर्घटना टालने के लिए जंगल के भीतर ही उन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट किया।

## सवाल-जवाब

### 1. कांकेर में सुरक्षाबलों ने किस जगह हथियारों का डंप बरामद किया?
यह डंप छोटेबेठिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत जुड़ाहन गांव के जंगल में सुरक्षाबलों की संयुक्त तलाशी के दौरान मिला।

### 2. इस कार्रवाई में सुरक्षाबलों की कौन-कौन सी इकाइयां शामिल थीं?
इस संयुक्त अभियान में डीआरजी, बीएसएफ और बम निरोधक दस्ता (बीडीएस) के जवान शामिल थे।

### 3. बरामद की गई विस्फोटक सामग्री का जवानों ने क्या किया?
बीडीएस टीम ने सभी खतरनाक विस्फोटकों को किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए जंगल में ही सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दिया।

### 4. नक्सली गतिविधियों में कमी आने के बाद भी जंगलों में क्या खतरा बना हुआ है?
नक्सलियों द्वारा पहले से छिपाए गए पुराने हथियार, विस्फोटक और जमीन में प्लांट की गई आईईडी अब भी जंगलों में खतरा बनी हुई हैं।

### 5. सुरक्षाबलों द्वारा इस सर्चिंग अभियान को लगातार चलाने का क्या उद्देश्य है?
इसका उद्देश्य जंगलों में छिपे सभी हथियारों और विस्फोटकों को ढूंढकर निष्क्रिय करना है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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