# कांकेर के भंडारडीगी में तीन परिवारों के 18 सदस्यों ने की मूल धर्म में वापसी, नवाखाई पर्व के साथ हुआ पारंपरिक स्वागत

> छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भंडारडीगी गांव में धर्म परिवर्तन विवाद के बाद तीन परिवारों के 18 सदस्यों ने मूल धर्म में वापसी की, जिसके बाद ग्रामीणों ने नवाखाई पर्व के साथ उत्सव मनाया।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/kanker-ke-bhandardigi-men-tina-parivaron-ke-18-sadasyon-ne-ki-mula-dharma-men-vapasi-navakhai-parva-ke-satha-hua-parnparika-svagat-36188 · **Language:** Hindi
**Tags:** कांकेर, भंडारडीगी, छत्तीसगढ़, घर वापसी, नवाखाई पर्व, आदिवासी समाज, धर्म परिवर्तन विवाद

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में स्थित भंडारडीगी गांव में हाल ही में बने तनावपूर्ण माहौल के बीच एक महत्वपूर्ण सामाजिक घटनाक्रम सामने आया है। गांव में धर्म परिवर्तन को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार विवाद की स्थिति बनी हुई थी। इस गतिरोध के बीच तीन परिवारों के 18 सदस्यों ने स्वेच्छा से अपने मूल धर्म में लौटने का निर्णय लिया। इस निर्णय के बाद गांव के लोगों ने एकजुट होकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका स्वागत किया और पूरे गांव में सौहार्दपूर्ण वातावरण देखने को मिला।

## पारंपरिक विधि-विधान से संपन्न हुआ घर वापसी का कार्यक्रम
भंडारडीगी गांव में दोनों पक्षों और समाज के प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में एक विशेष सामाजिक सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में आदिवासी समाज के वरिष्ठजनों और ग्रामीणों की मौजूदगी में तय धार्मिक व सामाजिक मान्यताओं का पूरी तरह पालन किया गया। रीति-रिवाजों के अनुसार शुद्धिकरण और स्वागत की औपचारिकताएं पूरी कराई गईं, जिसके बाद इन 18 सदस्यों को समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल कर लिया गया। इस पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और पारंपरिक मर्यादाओं का विशेष ध्यान रखा गया।

## नवाखाई पर्व और ढोल-मांदर की थाप पर झूमे ग्रामीण
घर वापसी की इस प्रक्रिया के साथ ही गांव में आदिवासी समुदाय का प्रमुख लोकपर्व नवाखाई भी पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। नवाखाई पर्व नई फसल के आगमन और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक बेहद पावन अवसर होता है। मूल धर्म में लौटे परिवारों के सदस्य भी इस उत्सव में पूरे उत्साह के साथ सम्मिलित हुए। गांव के चौराहे और चौपालों पर मांदर और ढोल की थाप गूंज उठी, जहां ग्रामीणों ने पारंपरिक लोकगीत गाते हुए सामूहिक नृत्य किया और एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी।

## संस्कृति के संरक्षण और मामले की जांच पर ग्रामीणों की नजर
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नवाखाई जैसे पारंपरिक पर्व समुदाय की सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक पहचान को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे सामूहिक आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को भी अपनी प्राचीन विरासत, मूल्यों और सामाजिक परंपराओं से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है। दूसरी ओर, धर्म परिवर्तन को लेकर गांव में पहले उपजे विवाद और उससे जुड़े विभिन्न आरोपों के संदर्भ में अलग-अलग स्तरों पर जांच की प्रक्रिया जारी है, ताकि स्थिति की पूरी वास्तविकता स्पष्ट हो सके।

## इसका आप पर असर
इस घटनाक्रम से क्षेत्र में सामाजिक समरसता की बहाली और सांस्कृतिक एकजुटता पर सीधा असर पड़ा है।

- **भारत में:** देश भर के विभिन्न राज्यों में धर्मांतरण और घर वापसी से जुड़े सामाजिक विषयों पर कानूनी व सामाजिक बहस लगातार तेज हो रही है। ग्रामीण और जनजातीय अंचलों में सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए ऐसी घटनाओं पर राष्ट्रीय स्तर पर नजर रखी जाती है।
- **कांकेर और छत्तीसगढ़ में:** बस्तर संभाग के कांकेर जिले में उपजे इस विवाद के शांत होने से स्थानीय ग्रामीणों को आपसी सौहार्द बहाल करने में मदद मिलेगी। गांव में शांति व्यवस्था बनी रहे इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर स्थिति की जांच और निगरानी की जा रही है।
- **आदिवासी समाज के लिए:** समुदाय के पारंपरिक पर्व नवाखाई के जरिए आपसी एकजुटता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूती मिली है। ऐसे आयोजनों से समाज के भीतर संवाद बना रहता है और विवादों का स्थानीय स्तर पर समाधान निकलता है।
- **संबंधित परिवारों के लिए:** मूल धर्म में लौटने वाले 18 सदस्यों को फिर से सामाजिक कार्यक्रमों और सामुदायिक परंपराओं में भागीदारी का अवसर मिला है। इससे उनके पारिवारिक जीवन में सामाजिक स्वीकार्यता और सुरक्षा की भावना मजबूत होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
कांकेर के भंडारडीगी गांव में धर्मांतरण के मुद्दे को लेकर ग्रामीणों के बीच उत्पन्न तनाव और मतभेदों के चलते यह स्थिति पैदा हुई।

- **धर्म परिवर्तन को लेकर विवाद:** गांव में पिछले कुछ समय से धर्म परिवर्तन को लेकर असंतोष और मतभेद बने हुए थे, जिससे सामाजिक ताने-बाने पर असर पड़ रहा था। इसी पृष्ठभूमि में तीन परिवारों ने स्वेच्छा से अपने पुराने समाज में लौटने की इच्छा जाहिर की।
- **पारंपरिक पर्व का अवसर:** आदिवासी समाज का पारंपरिक पर्व नवाखाई नजदीक था, जो प्रकृति और नई फसल के प्रति आभार का प्रतीक है। इस पावन अवसर को समाज ने विवादों को भुलाकर मेल-मिलाप करने के लिए एक उपयुक्त समय माना।
- **जांच प्रक्रिया जारी:** धर्म परिवर्तन से जुड़े विवाद के मूल कारणों और आरोपों की पूरी सच्चाई अभी सामने नहीं आई है। स्थानीय स्तर पर इस पूरे मामले की जांच चल रही है ताकि सभी तथ्यों की निष्पक्ष पुष्टि हो सके।

## सवाल-जवाब

### 1. कांकेर के भंडारडीगी गांव में कुल कितने लोगों ने मूल धर्म में वापसी की?
भंडारडीगी गांव में तीन परिवारों के कुल 18 सदस्यों ने अपने मूल धर्म में वापसी की है।

### 2. गांव में घर वापसी का कार्यक्रम किस प्रकार आयोजित किया गया?
यह कार्यक्रम ग्रामीणों और समाज के वरिष्ठजनों की मौजूदगी में पारंपरिक धार्मिक और सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए आयोजित किया गया।

### 3. घर वापसी के दौरान कौन सा पारंपरिक पर्व मनाया गया?
इस अवसर पर आदिवासी समुदाय का पारंपरिक नवाखाई पर्व मनाया गया, जिसमें नई फसल और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है।

### 4. धर्म परिवर्तन विवाद को लेकर वर्तमान स्थिति क्या है?
धर्म परिवर्तन को लेकर उपजे विवाद और संबंधित आरोपों की विभिन्न स्तरों पर जांच जारी है।

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