# खेत को बनाया वीर भूमि: बालोद के लोकेंद्र साहू ने तैयार किया 18 शहीदों का स्मारक, 1000 प्रतिमाओं की है तैयारी

> छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक किसान ने अपनी निजी जमीन पर 18 बलिदानी सैनिकों की प्रतिमाएं स्थापित की हैं, जिसे वे भविष्य में एक हजार प्रतिमाओं के भव्य परिसर में बदलना चाहते हैं।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/kheta-ko-banaya-vira-bhumi-balod-ke-lokendra-sahu-ne-taiyara-kiya-18-shahidon-ka-smaraka-1000-pratimaon-ki-hai-taiyari-40039 · **Language:** Hindi
**Tags:** बालोद, लोकेंद्र साहू, शहीद स्मारक, छत्तीसगढ़, सूर्यकुमार यादव, कारगिल युद्ध, पुलवामा हमला, सचिन तेंदुलकर

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक किसान ने राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता जताने का अनूठा रास्ता चुना है। किसान लोकेंद्र साहू ने अपनी ही कृषि भूमि का एक हिस्सा देश के नाम समर्पित करते हुए वहां एक अनूठा शहीद स्मारक तैयार किया है। उनका मानना है कि सरहद पर जान न्योछावर करने वाले सैनिकों का कर्ज देशवासी कभी पूरी तरह नहीं चुका सकते, लेकिन अपनी जमीन पर उनकी यादें संजोकर वे एक नागरिक के तौर पर अपनी श्रद्धा व्यक्त करने की कोशिश कर रहे हैं।

## कारगिल से लेकर पुलवामा तक के अमर बलिदानियों की प्रतिमाएं
सड़क के किनारे स्थित इस खेत में स्थापित मूर्तियों में भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के विभिन्न ऐतिहासिक अभियानों में शहीद हुए जवानों को स्थान दिया गया है। इस स्मारक में वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध, 26/11 के मुंबई आतंकी हमले, विषम मौसम वाली सियाचिन ग्लेशियर की चौकी, पुलवामा आत्मघाती हमले और अन्य आतंकी मुठभेड़ों में वीरगति पाने वाले 18 शूरवीरों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं। मुख्य मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीण, राहगीर और विशेषकर युवा अक्सर यहां ठहरकर इन प्रतिमाओं को नमन करते हैं। लोकेंद्र साहू का स्पष्ट मकसद नई पीढ़ी के दिलों में देशभक्ति और सुरक्षा बलों के प्रति गहरा आदर जगाना है।

## औपचारिक अनावरण के लिए जारी हैं प्रशासनिक और खेल जगत के प्रयास
तमाम मूर्तियां पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी हैं, हालांकि स्मारक का विधिवत उद्घाटन होना अभी शेष है। लोकेंद्र साहू ने इसके अनावरण के लिए राज्य के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और केंद्रीय मंत्री से पत्राचार करने के साथ ही व्यक्तिगत तौर पर मिलकर समय मांगा था, लेकिन फिलहाल प्रशासनिक स्तर से तारीख तय नहीं हो सकी है। स्वयं पूर्व में क्रिकेट खेल चुके लोकेंद्र की इच्छा है कि इस पुनीत कार्य का उद्घाटन किसी बड़े क्रिकेटर के हाथों संपन्न हो।

इसी सिलसिले में उन्होंने वर्ष 2024 में सचिन तेंदुलकर से मुलाकात की थी। इसके बाद 14 सितंबर 2026 को वे भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव के आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने क्रिकेटर को उनकी एक आदमकद प्रतिमा भेंट की और बालोद आकर शहीद प्रतिमाओं का अनावरण करने का औपचारिक न्योता दिया।

## एक एकड़ खेत में एक हजार प्रतिमाएं लगाने का बड़ा संकल्प
लोकेंद्र साहू का यह अभियान महज 18 मूर्तियों तक रुकने वाला नहीं है। उन्होंने अपनी पूरी एक एकड़ उपजाऊ भूमि को राष्ट्र के अमर सपूतों के नाम करने की योजना बनाई है। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य इस भूखंड पर देश भर के करीब एक हजार अमर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित करने का है, ताकि यह स्थल भावी पीढ़ियों के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान की एक जीवंत प्रेरणास्थली बन सके।

## इसका आप पर असर
यह पहल दर्शाती है कि आम नागरिक अपनी निजी संपत्ति और संसाधनों का उपयोग करके सैनिकों के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय चेतना को किस तरह जमीनी स्तर पर बढ़ावा दे सकते हैं।

- **भारत में:** यह कदम देश भर के नागरिकों को यह संदेश देता है कि सैनिकों का सम्मान केवल सरकारी स्मारकों तक सीमित नहीं होना चाहिए। सामान्य लोग भी सामुदायिक स्तर पर देशभक्ति के प्रतीकों को जीवंत रख सकते हैं।
- **बालोद और छत्तीसगढ़ में:** सड़क से गुजरने वाले स्थानीय निवासियों और युवाओं के लिए यह खेत एक प्रेरणादायक स्थल बन गया है। आने वाले समय में 1,000 प्रतिमाओं का निर्माण पूरा होने पर यह क्षेत्र राज्य के एक प्रमुख राष्ट्रभक्ति पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है।
- **आने वाली पीढ़ियों के लिए:** युवा पीढ़ी को किताबों से बाहर निकलकर प्रत्यक्ष रूप से देश के नायकों के बलिदान से जुड़ने का मौका मिलता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में राष्ट्र सेवा और सुरक्षा बलों में जाने की प्रेरणा बढ़ती है।
- **सामुदायिक भागीदारी:** किसान की यह व्यक्तिगत पहल अन्य लोगों को भी सामाजिक और राष्ट्रीय कार्यों में स्वेच्छा से योगदान देने के लिए प्रेरित करती है। बिना किसी सरकारी वित्तीय सहायता के तैयार किया गया यह मॉडल आत्मनिर्भर प्रयासों का सशक्त उदाहरण है।

## ऐसा क्यों हुआ
इस स्मारक की स्थापना के पीछे मुख्य कारण किसान की यह सोच है कि देश की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले सैनिकों के प्रति हर नागरिक का एक कर्तव्य होता है। उन्होंने इस भावना को जमीनी हकीकत में बदलने के लिए अपनी निजी कृषि भूमि का उपयोग करने का फैसला किया।

- **कृतज्ञता की भावना:** किसान लोकेंद्र साहू का मानना था कि अन्नदाता होने के नाते उन्हें सुरक्षा बलों के प्रति अपना सम्मान किसी ठोस रूप में दर्ज कराना चाहिए। इसी सोच ने उन्हें खेत में प्रतिमाएं स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
- **युवाओं में देशभक्ति की प्रेरणा:** मुख्य मार्ग से गुजरने वाले युवाओं को देश के लिए जान देने वाले शूरवीरों के इतिहास से परिचित कराना उनका एक बड़ा उद्देश्य था। उनका मानना था कि प्रतिमाएं देखकर नई पीढ़ी में आदर और राष्ट्रप्रेम की भावना मजबूत होगी।
- **अनावरण के लिए क्रिकेटरों से संपर्क:** स्वयं पूर्व में क्रिकेट खेलने के कारण लोकेंद्र की दिली तमन्ना है कि इन प्रतिमाओं का लोकार्पण किसी लोकप्रिय खिलाड़ी द्वारा हो। इसी वजह से उन्होंने मंत्रियों के साथ-साथ सचिन तेंदुलकर और सूर्यकुमार यादव से संपर्क साधा।

## सवाल-जवाब

### 1. यह शहीद स्मारक किस जिले और राज्य में बनाया गया है?
यह स्मारक छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में किसान लोकेंद्र साहू के खेत में बनाया गया है।

### 2. इस खेत में किन-किन घटनाओं के शहीदों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं?
यहां कारगिल युद्ध, 26/11 मुंबई आतंकी हमला, सियाचिन ग्लेशियर, पुलवामा हमला और अन्य आतंकी घटनाओं में शहीद हुए 18 जवानों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं।

### 3. किसान लोकेंद्र साहू का भविष्य को लेकर क्या संकल्प है?
वे भविष्य में अपनी एक एकड़ कृषि भूमि पर देश के करीब एक हजार अमर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित करना चाहते हैं।

### 4. प्रतिमाओं के अनावरण के लिए उन्होंने किस क्रिकेटर को आमंत्रित किया है?
उन्होंने 14 सितंबर 2026 को पूर्व भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव के घर जाकर उन्हें आदमकद प्रतिमा भेंट की और अनावरण का न्योता दिया, जबकि 2024 में वे सचिन तेंदुलकर से भी मिल चुके हैं।

## प्रेरणा और सबक
लोकेंद्र साहू का यह प्रयास साबित करता है कि संसाधनों की सीमाओं के बावजूद एक अकेला व्यक्ति अपने मजबूत संकल्प से समाज को राष्ट्र सेवा का बड़ा पाठ पढ़ा सकता है।

- **सैनिकों के प्रति सच्चा आदर:** अपनी निजी आजीविका का साधन यानी खेती की जमीन को शहीदों के नाम करना यह सिखाता है कि कृतज्ञता केवल शब्दों में नहीं, बल्कि ठोस कार्यों में दिखनी चाहिए।
- **बड़े लक्ष्य की दिशा में निरंतरता:** शुरुआत 18 प्रतिमाओं से करने के बाद एक एकड़ में एक हजार प्रतिमाएं लगाने का सपना दिखाता है कि नेक कार्यों के लिए सोच हमेशा दूरगामी और व्यापक होनी चाहिए।
- **व्यक्तिगत लगन और प्रयास:** बिना किसी सरकारी बजट या बाहरी मदद का इंतजार किए स्वयं मूर्तियों का निर्माण कराना और अनावरण के लिए शीर्ष हस्तियों तक पहुंचना अटूट इच्छाशक्ति का परिचायक है।

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