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  "type": "article",
  "title": "खेतों में पानी को लेकर भड़के भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, अधिकारी को फोन पर दी चेतावनी",
  "summary": "छत्तीसगढ़ में किसानों के खेतों में पानी छोड़ने के मुद्दे पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने एक अधिकारी को फोन पर फटकार लगाई, जिस पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है।",
  "content": "छत्तीसगढ़ में सिंचाई के पानी के मुद्दे पर एक प्रशासनिक अधिकारी को फोन पर धमकाने का मामला सामने आया है। इस मामले के केंद्र में राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेता और विधायक अजय चंद्राकर हैं, जो पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के शासनकाल में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान समय में उनके पास कोई मंत्री पद नहीं है, लेकिन किसानों की समस्याओं को लेकर हुई एक बातचीत के दौरान उन्होंने फोन पर अधिकारी से बेहद सख्त और आक्रामक लहजे में बात की।\n\nकिसानों के खेतों में पानी छोड़ने को लेकर विवाद\nयह पूरा घटनाक्रम किसानों के खेतों में पानी छोड़ने की मांग से जुड़ा हुआ है। खेतों तक पानी न पहुंचने की शिकायत मिलने पर विधायक अजय चंद्राकर ने संबंधित विभाग के अधिकारी को फोन लगाया। फोन पर हुई बातचीत के दौरान विधायक ने नाराजगी जताते हुए कहा कि खेतों में पानी निकल गया है। इस पर अधिकारी ने जवाब दिया कि उन्होंने मौके पर अपना आदमी भेजा था।\n\nअधिकारी के इस जवाब से विधायक और अधिक नाराज हो गए। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा कि शर्मा जी, अगर वह दिखता तो वहीं पर गाड़ देता। उन्होंने आगे कहा कि वह जानता नहीं है कि अजय चंद्राकर कौन है। विधायक ने अधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे लोगों को बिल्कुल न भेजा करें जो पूरे प्रशासन की छवि खराब करते हों। उन्होंने यह भी तंज कसा कि वह कर्मचारी कल तो रिटायर हो ही जाएगा। किसानों की परेशानी सुनने के बाद विधायक ने पानी की आपूर्ति में लापरवाही बरतने पर अधिकारी को जमकर खरी खोटी सुनाई।\n\nकुरूद से पांच बार के विधायक हैं अजय चंद्राकर\nअजय चंद्राकर की पहचान भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेताओं में होती है। वह अब तक कुल पांच बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। रमन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार में वह कैबिनेट मंत्री रहे और उस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कामकाज संभाला था। उन्हें विधायी मामलों और संसदीय राजनीति का माहिर माना जाता है।\n\nधमतरी जिले की कुरूद विधानसभा सीट को अजय चंद्राकर का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है। छात्र राजनीति के जरिए सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले चंद्राकर ने वर्ष 1998 में पहली बार विधानसभा का चुनाव जीता था। साल 2008 के चुनाव को छोड़ दिया जाए, तो वह लगातार कुरूद सीट से जीतते रहे हैं। साल 2023 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने कुरूद से जीत हासिल की, जहां उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी तरनी नीलम चंद्राकर को मात दी थी। क्षेत्र की जनता से सीधा संपर्क और मजबूत जमीनी पकड़ ही उनकी चुनावी ताकत मानी जाती है, जिसके चलते कांग्रेस इस सीट पर कड़े प्रयासों के बावजूद लंबे समय से जीत दर्ज नहीं कर सकी है।\n\nकांग्रेस ने मानसिक संतुलन पर उठाए सवाल\nविधायक अजय चंद्राकर के इस विवादित अंदाज पर विपक्षी दल कांग्रेस ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने इस पर बयान देते हुए कहा कि मंत्रिमंडल में जगह न मिलने के कारण अजय चंद्राकर हताशा के शिकार हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि चंद्राकर को छत्तीसगढ़ स्थित एम्स जाकर अपने मानसिक स्वास्थ्य की जांच करानी चाहिए और कुछ समय आराम व विपश्यना में बिताना चाहिए।\n\nकांग्रेस नेता ने आगे कहा कि इतने वरिष्ठ नेता का मानसिक संतुलन बिगड़ना राज्य के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक लगातार अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को इस आचरण का संज्ञान लेना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना जन प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कार्यप्रणाली के टकराव को सीधे तौर पर उजागर करती है।\n\n• किसानों पर असर: सिंचाई की समस्याओं को लेकर जनप्रतिनिधियों का दबाव स्थानीय स्तर पर जल वितरण व्यवस्था को प्रभावित करता है। इससे किसानों के खेतों तक नहरों का पानी पहुंचाने में प्रशासनिक तेजी या टकराव देखने को मिल सकता है।\n• प्रशासनिक कार्यप्रणाली: फील्ड स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के मनोबल पर ऐसे कड़े बयानों का असर पड़ता है। इससे स्थानीय विभागों में राजनीतिक दबाव और जवाबदेही को लेकर खींचतान बढ़ सकती है।\n• धमतरी और कुरूद क्षेत्र में: कुरुद विधानसभा क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को लेकर निगरानी सख्त हो सकती है। स्थानीय जनता अपनी समस्याओं को लेकर सीधे विधायक कार्यालय पर सक्रियता बढ़ा सकती है।\n• राज्य की राजनीति में: सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज होने से आगामी विधानसभा सत्रों में प्रशासनिक मर्यादा का मुद्दा गरमा सकता है। इससे नेताओं के सार्वजनिक व्यवहार पर सार्वजनिक बहस शुरू हो सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विवाद किसानों के खेतों में समय पर सिंचाई का पानी न पहुंचने और प्रशासनिक सुस्ती की शिकायतों के कारण पैदा हुआ।\n\n• सिंचाई जल की कमी: खेतों में पानी न पहुंचने के कारण स्थानीय किसानों ने विधायक से अपनी परेशानी साझा की थी। जल संकट की स्थिति के चलते जनप्रतिनिधि ने सीधे संबंधित अधिकारी को तलब किया।\n• अधिकारी की कार्यशैली से असंतोष: अधिकारी द्वारा मौके पर किसी अन्य कर्मचारी को भेजने की बात कहने पर विधायक नाराज हो गए। उन्हें लगा कि अधिकारी स्थिति को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और खानापूर्ति कर रहे हैं।\n• मंत्रिमंडल विस्तार की पृष्ठभूमि: विपक्ष का आरोप है कि वरिष्ठता के बावजूद मौजूदा सरकार के मंत्रिमंडल में शामिल न किए जाने के कारण विधायक मानसिक रूप से असंतुलित और हताश महसूस कर रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अजय चंद्राकर ने किस अधिकारी से फोन पर बात की थी?\nउन्होंने खेतों में पानी छोड़ने के मुद्दे पर शर्मा जी नाम से संबोधित एक प्रशासनिक अधिकारी से फोन पर बातचीत की थी।\n\n2. विधायक अजय चंद्राकर किस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं?\nवह छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की कुरूद विधानसभा सीट से विधायक हैं।\n\n3. अजय चंद्राकर अब तक कितनी बार विधायक चुने जा चुके हैं?\nअजय चंद्राकर कुल पांच बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।\n\n4. साल 2023 के चुनाव में अजय चंद्राकर ने किसे हराया था?\nसाल 2023 के चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की प्रत्याशी तरनी नीलम चंद्राकर को हराया था।\n\n5. कांग्रेस पार्टी ने इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी है?\nकांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि वह मंत्रिमंडल से बाहर रहने के कारण हताश हैं और उन्हें एम्स में मानसिक स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-10-03",
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