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  "type": "article",
  "title": "कोरबा में रील्स देखते समय नेटवर्क जाने से उपजे गुस्से में महिला ने गटका जहर, अंधविश्वास के चक्कर में गई जान",
  "summary": "छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मोबाइल का नेटवर्क बंद होने से नाराज 52 वर्षीय महिला ने जहरीला पदार्थ पी लिया। परिजनों द्वारा अस्पताल ले जाने में हुई देरी और अंधविश्वास के चलते महिला की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में सोशल मीडिया की लत और घरेलू उपचार से जुड़ी अंधविश्वासी सोच के कारण एक दुखद घटना सामने आई है। करतला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले केराकछार गांव निवासी 52 वर्षीय मंगलो बाई शनिवार दोपहर अपने मोबाइल फोन पर रील्स देख रही थीं। इसी दौरान अचानक मोबाइल का नेटवर्क गायब हो गया। वीडियो में आई रुकावट से महिला इस कदर आक्रोशित हो गई कि उसने गुस्से में अपना हैंडसेट जमीन पर जोर से पटक दिया, जिससे फोन पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इसके बाद भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने कमरे में जाकर खौफनाक कदम उठा लिया।\n\nकमरे में बंद होकर पीया जहरीला कीटनाशक\nमोबाइल फोन तोड़ने के तुरंत बाद मंगलो बाई सीधे अपने कमरे में चली गईं और अंदर से कुंडी लगा ली। आवेश में आकर उन्होंने घर में रखी कीटनाशक की शीशी निकाली और उसे पी लिया। घटना के समय घर पर उनकी छोटी बेटी ही मौजूद थी। कमरे के अंदर से जब लगातार उल्टी करने और छटपटाने की आवाजें आने लगीं, तब बेटी को अनहोनी का अहसास हुआ। परिजनों ने दरवाजा खोलकर देखा तो कमरे के फर्श पर जहरीले कीटनाशक की खाली शीशी पड़ी हुई थी, जिसे देखकर पूरे परिवार में अफरा-तफरी मच गई।\n\nअंधविश्वास के कारण अस्पताल ले जाने में देरी\nघटना उजागर होने के तुरंत बाद परिजनों को महिला को किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा करने के बजाय खुद ही घरेलू नुस्खों का सहारा लेना शुरू कर दिया। अंधविश्वास के फेर में आकर महिला के पति ने जहर का असर बेअसर करने के लिए उसे गोबर मिला हुआ पानी पिला दिया। इस पूरी अव्यवहारिक प्रक्रिया में काफी महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो गया। जब मंगलो बाई की हालत बिगड़ने लगी और सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी, तब परिजनों ने डायल-112 पर संपर्क किया और एम्बुलेंस की मदद से उन्हें करतला स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।\n\nअस्पताल में इलाज के दौरान हुई मृत्यु\nकरतला स्वास्थ्य केंद्र में प्राथमिक उपचार देने के बाद महिला की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। डॉक्टरों की गहन चिकित्सा और लगातार प्रयासों के बावजूद रविवार रात इलाज के दौरान मंगलो बाई ने दम तोड़ दिया। शनिवार दोपहर घटी इस घटना की पूरी जानकारी मंगलवार को सार्वजनिक रूप से सामने आई, जब पुलिस जांच और चिकित्सीय प्रक्रियाओं के बाद मामले का विवरण सामने आया।\n\nडिजिटल लत पर मनोवैज्ञानिक की चेतावनी\nइस दुखद हादसे के संदर्भ में मनोवैज्ञानिक डॉ कमलेश रात्रे ने लगातार शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट और रील्स देखने के मानसिक दुष्प्रभावों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब कोई व्यक्ति लगातार इस तरह का वीडियो कंटेंट देखता है, तो दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम अत्यधिक उत्तेजित हो जाता है। इसमें डोपामाइन नामक न्यूरोट्रांसमीटर की प्रमुख भूमिका होती है। ऐसे में जब नेटवर्क जाने या किसी अन्य कारण से इस प्रक्रिया में अचानक रुकावट आती है, तो व्यक्ति में तीव्र चिड़चिड़ापन, अत्यधिक गुस्सा, घबराहट और बेकाबू बेचैनी जैसे लक्षण उभर आते हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार, इस तरह के हादसों से बचने के लिए सोशल मीडिया के उपयोग की सख्त समय-सीमा तय करनी चाहिए। विशेष रूप से खाना खाते समय और सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nयह दुखद घटना अत्यधिक डिजिटल लत से उत्पन्न मानसिक तनाव और आपातकालीन स्थिति में अंधविश्वास के कारण होने वाली स्वास्थ्य संबंधी हानियों को उजागर करती है।\n\n• भारत में: पूरे देश में लगातार रील्स और शॉर्ट वीडियो देखने से दिमाग का न्यूरोकेमिकल संतुलन प्रभावित होता है। स्क्रीन टाइम सीमित करने और नियमित डिजिटल डिटॉक्स की आदत अपनाकर ऐसी अचानक उत्तेजना से बचा जा सकता है।\n• छत्तीसगढ़ और कोरबा में: किसी भी चिकित्सीय आपात स्थिति में तुरंत अस्पताल जाना अनिवार्य है। जहरीले पदार्थ के सेवन पर मरीज को गोबर का पानी पिलाने जैसे घरेलू टोटकों के बजाय सीधे एम्बुलेंस सेवा से संपर्क करना चाहिए।\n• परिवारों के लिए: परिजनों में सोशल मीडिया के कारण उपजने वाले अत्यधिक गुस्से या चिड़चिड़ेपन के लक्षणों को पहचानना जरूरी है। ऐसे मामलों में समय रहते मनोचिकित्सक से परामर्श लेकर किसी बड़े हादसे को टाला जा सकता है।\n• मोबाइल उपयोग के नियम: भोजन करते समय और रात में सोने से एक घंटा पहले मोबाइल का प्रयोग पूरी तरह बंद करने की आदत डालनी चाहिए। इससे मानसिक तनाव कम होता है और तंत्रिका तंत्र को उचित विश्राम मिलता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह हादसा अचानक मोबाइल कनेक्शन कटने से उपजे भावनात्मक आवेग और जहर सेवन के बाद अप्रमाणित घरेलू नुस्खे अपनाने के कारण हुए विलंब का संयुक्त परिणाम था।\n\n• अचानक नेटवर्क बंद होना: रील्स देखते समय इंटरनेट बंद होने से महिला में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। इस अचानक आई रुकावट ने उन्हें इतना उत्तेजित कर दिया कि उन्होंने फोन तोड़ दिया और कीटनाशक पी लिया।\n• डोपामाइन का प्रभाव: मनोवैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार लगातार शॉर्ट वीडियो देखने से मस्तिष्क का रिवॉर्ड सिस्टम अत्यधिक सक्रिय हो जाता है। इस चक्र में रुकावट आने पर अत्यधिक गुस्सा और घबराहट पैदा होती है।\n• अस्पताल पहुंचाने में देरी: कीटनाशक सेवन के बाद परिजनों ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाने के बजाय गोबर मिला पानी पिलाकर इलाज की कोशिश की, जिससे कीमती समय बर्बाद हुआ और स्थिति बेकाबू हो गई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यह घटना कहां और किस समय घटी?\nयह घटना शनिवार दोपहर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में करतला थाना क्षेत्र के अंतर्गत केराकछार गांव में घटी।\n\n2. मृतक महिला की पहचान क्या है?\nमृतक महिला की पहचान 52 वर्षीय मंगलो बाई के रूप में हुई है।\n\n3. महिला को अस्पताल ले जाने में क्यों देरी हुई?\nपरिजनों ने तुरंत डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय अंधविश्वास में गोबर का पानी पिलाकर जहर निकालने की कोशिश की, जिससे कीमती समय बर्बाद हुआ।\n\n4. रील्स की लत का दिमाग पर क्या असर पड़ता है?\nविशेषज्ञों के अनुसार लगातार रील्स देखने से दिमाग का रिवॉर्ड सिस्टम और डोपामाइन सक्रिय होता है, जिसके रुकने पर गुस्सा और बेचैनी बढ़ जाती है।\n\n5. मनोवैज्ञानिकों ने मोबाइल इस्तेमाल को लेकर क्या सलाह दी है?\nविशेषज्ञों ने स्क्रीन टाइम सीमित करने, भोजन के दौरान और सोने से 1 घंटे पहले मोबाइल का प्रयोग पूरी तरह बंद रखने की सलाह दी है।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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    "कोरबा समाचार",
    "छत्तीसगढ़ खबरें",
    "रील्स की लत",
    "अंधविश्वास",
    "स्वास्थ्य और मानसिक तनाव",
    "डोपामाइन प्रभाव"
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