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  "title": "कोरबा में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं की तस्करी का पर्दाफाश, बाजार में मांस बेचने आया आरोपी गिरफ्तार",
  "summary": "छत्तीसगढ़ के कोरबा में वन विभाग ने दुर्लभ भारतीय फ्लैपशेल कछुओं की तस्करी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ किया है। पेंड्रा-पसान क्षेत्र में साप्ताहिक बाजार से दीपांकर राय नामक आरोपी को 11 जीवित कछुओं के साथ गिरफ्तार किया गया, जिसे वह 700 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचने की फिराक में था।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में वन विभाग ने पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। विभाग की टीम ने दुर्लभ प्रजाति के कछुओं के अवैध कारोबार का भंडाफोड़ करते हुए संरक्षित भारतीय फ्लैपशेल कछुओं को तस्करों के चंगुल से बचाया है। प्रारंभिक तफ्तीश में यह सनसनीखेज बात सामने आई है कि इन दुर्लभ जीवों को स्थानीय बाजारों में लगभग 700 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से मांस के रूप में बेचने की तैयारी चल रही थी। वन विभाग ने इस मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए एक मुख्य आरोपी को धर दबोचा है और उसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कस दिया है।\n\nसाप्ताहिक बाजार में वन विभाग की छापेमारी\nपेंड्रा-पसान क्षेत्र में दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति के कछुओं की अवैध तस्करी और बिक्री की गुप्त सूचनाएं वन विभाग को लगातार मिल रही थीं। इन गंभीर सूचनाओं पर संज्ञान लेते हुए अधिकारियों ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए एक विशेष निगरानी दल का गठन किया। इस विशेष टीम ने संदिग्ध ठिकानों और बाजारों पर पैनी नजर रखनी शुरू कर दी। इसी कड़ी में 23 जुलाई को वन विभाग की टीम को पुख्ता जानकारी मिली कि ग्राम पीवी 124 के साप्ताहिक बाजार में कछुओं की अवैध खरीद-फरोख्त की जा रही है।\n\nटीम ने बिना समय गंवाए बाजार में अचानक छापेमारी की। वहां एक संदिग्ध व्यक्ति को घेराबंदी कर पकड़ा गया। पूछताछ करने पर उसने अपना नाम दीपांकर राय बताया। जब टीम ने उसकी तलाशी ली, तो उसके कब्जे से 11 जीवित भारतीय फ्लैपशेल कछुए बरामद किए गए। आरोपी इन कछुओं को ग्राहकों को मांस के रूप में बेचने के लिए वहां लेकर आया था, जिससे वह बड़ा मुनाफा कमाने की फिराक में था।\n\nमांस के लिए कछुओं का अवैध शिकार और भारी मुनाफा\nपूछताछ में यह बात सामने आई है कि तस्कर अधिक से अधिक मुनाफा कमाने के लालच में इन बेजुबान वन्यजीवों को निशाना बना रहे थे। पेंड्रा-पसान के स्थानीय बाजारों से लेकर जिला मुख्यालय तक के क्षेत्रों में इन कछुओं के मांस की मांग पैदा कर इसे ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। आरोपी ग्राहकों से इसके लिए 700 रुपये प्रति किलो तक वसूल रहा था। वन विभाग की इस कार्रवाई से अवैध शिकारियों और तस्करों के पूरे नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से क्षेत्र में कछुओं की अवैध तस्करी पर काफी हद तक लगाम लगेगी।\n\nअनुसूची-1 के तहत दर्ज हुआ गंभीर मामला\nयह बात जानना बेहद जरूरी है कि भारतीय फ्लैपशेल कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के अंतर्गत आते हैं। इस कानून के तहत अनुसूची-1 में शामिल जीवों को सर्वोच्च स्तर की सुरक्षा प्रदान की गई है। इन जीवों का शिकार करना, उन्हें अपने पास रखना, परिवहन करना या उनका व्यावसायिक व्यापार करना कानूनन एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना गया है। पकड़े गए आरोपी दीपांकर राय के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 49, 49 बी, 50 और 51 के तहत कानूनी मामला दर्ज किया गया है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, इस अधिनियम के तहत दोष साबित होने पर आरोपी को कठोर कारावास की सजा और भारी आर्थिक दंड भुगतना पड़ सकता है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह घटना देश भर में वन्यजीवों की सुरक्षा और दुर्लभ प्रजातियों के अवैध व्यापार को रोकने के लिए कड़े कानूनों और स्थानीय स्तर पर सतर्कता के महत्व को रेखांकित करती है।\n• छत्तीसगढ़ में: कोरबा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए, यह कार्रवाई अवैध शिकार और प्रतिबंधित वन्यजीवों की बिक्री को लेकर वन विभाग की सख्त निगरानी को दर्शाती है, जिससे स्थानीय जैव विविधता को बचाने में मदद मिलेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कोरबा में वन विभाग ने क्या कार्रवाई की है?\nवन विभाग ने पेंड्रा-पसान क्षेत्र के ग्राम पीवी 124 के साप्ताहिक बाजार में छापेमारी कर दुर्लभ भारतीय फ्लैपशेल कछुओं की अवैध तस्करी का भंडाफोड़ किया है और एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।\n\n2. गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम क्या है और उसके पास से क्या मिला?\nगिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम दीपांकर राय है। उसके पास से 11 जीवित भारतीय फ्लैपशेल कछुए बरामद किए गए हैं।\n\n3. ये कछुए किस दाम पर बेचे जा रहे थे?\nतस्कर इन संरक्षित कछुओं को मांस के रूप में बेचने के लिए लगभग 700 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बाजार में पेश कर रहा था।\n\n4. आरोपी के खिलाफ किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है?\nआरोपी दीपांकर राय के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 49, 49 बी, 50 और 51 के तहत मामला दर्ज किया गया है।\n\n5. भारतीय फ्लैपशेल कछुए किस श्रेणी में आते हैं और कानूनन इसके क्या मायने हैं?\nयह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल है। इस श्रेणी के जीवों का शिकार, परिवहन या व्यापार पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके उल्लंघन पर कठोर कारावास व भारी जुर्माने का प्रावधान है।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-07-25",
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    "कोरबा वन्यजीव तस्करी",
    "भारतीय फ्लैपशेल कछुआ",
    "छत्तीसगढ़ वन विभाग",
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    "कोरबा पुलिस",
    "दीपांकर राय गिरफ्तार"
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