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  "type": "article",
  "title": "मुंगेली में पंचायत चुनाव की पुरानी रंजिश में मर्डर, सुपारी देकर कराई गई थी तुलसी साहू की हत्या",
  "summary": "छत्तीसगढ़ के मुंगेली में सरपंच चुनाव में मामूली अंतर से मिली हार का बदला लेने के लिए तुलसी साहू की सुपारी देकर हत्या कर दी गई, पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत 5 लोगों को दबोचा।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में एक सनसनीखेज अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाते हुए पुलिस ने चुनावी रंजिश में की गई हत्या का पर्दाफाश किया है। पंचायत चुनाव में महज आठ से नौ वोटों से मिली हार की खुन्नस में एक पराजित प्रत्याशी ने युवक के अपहरण और कत्ल की पूरी साजिश रची थी। सुपारी देकर वारदात को अंजाम दिलाने के बाद युवक के शव को बिजली के तार से बांधकर झाड़ियों में फेंक दिया गया था। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस की कड़ियां सीधे पूर्व प्रत्याशी तक पहुंचीं, जिसके बाद मुख्य षड्यंत्रकारी सहित पांच आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।\n\nलापता होने से शव मिलने तक का घटनाक्रम\nयह पूरा मामला सरगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पेंड्री गांव से जुड़ा हुआ है। मृतक की पहचान गांव के ही निवासी तुलसी साहू के तौर पर की गई है। बीते 26 अक्टूबर को तुलसी साहू अचानक रहस्यमय परिस्थितियों में गायब हो गया था, जिसके बाद उसके चिंतित परिजनों ने सरगांव थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सूचना मिलते ही पुलिस ने लापता युवक की खोजबीन शुरू कर दी थी।\n\nतलाशी अभियान के दौरान ग्राम पेण्ड्री ‘स’ स्थित जय भोलेनाथ राइस मिल के पास सबसे पहले तुलसी साहू की लावारिस मोटरसाइकिल बरामद हुई। इसके बाद इलाके में गहन छानबीन की गई तो गणेश मिनरल्स के समीप सड़क किनारे कीचड़ और घनी कंटीली झाड़ियों के बीच उसका शव बरामद किया गया। पुलिस ने तत्काल शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और मर्ग कायम करते हुए पोस्टमार्टम व फोरेंसिक जांच कराई। मेडिकल और तकनीकी जांच में यह साफ हो गया कि तुलसी साहू की गला घोंटकर हत्या की गई थी, उसके दोनों पैरों को बिजली के मजबूत तारों से बांधा गया था और साक्ष्य मिटाने के इरादे से शव को छिपा दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 166/2026 दर्ज करते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 और 238 के तहत जांच आगे बढ़ाई।\n\nचुनावी रंजिश और शक की वजह\nपुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल के अनुसार, पुलिस टीम ने घटनास्थल की बारीकी से पड़ताल की और मृतक की पृष्ठभूमि, संदिग्ध लोगों तथा इलाके की गतिविधियों से जुड़े इनपुट जुटाए। मुखबिर तंत्र से मिली जानकारी और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर पुलिस को पंचायत चुनाव से जुड़ी रंजिश का सुराग मिला। जब संदिग्धों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई, तो पूरे हत्याकांड की परतें खुलती चली गईं।\n\nपूछताछ के दौरान मुख्य षड्यंत्रकारी धनीराम साहू (उम्र 40 वर्ष) ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि साल 2025 में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में वह सरपंच पद का प्रत्याशी था, लेकिन वह केवल 8-9 वोटों के बेहद मामूली अंतर से चुनाव हार गया था। उस चुनाव में झुलुराम वर्मा ने जीत हासिल की थी और वे सरपंच बने थे। मतगणना के दौरान तुलसी साहू मतगणना अभिकर्ता यानी काउंटिंग एजेंट के रूप में तैनात था। धनीराम के मन में यह पक्का शक बैठ गया था कि तुलसी ने जान-बूझकर उसके पक्ष के कुछ वैध मतों को निरस्त करवा दिया था, जिसकी वजह से उसकी पराजय हुई थी। हार का यही मलाल धीरे-धीरे गहरी दुश्मनी में बदल गया।\n\nसवा लाख में सुपारी और पंप हाउस में कत्ल\nइस रंजिश का बदला लेने के लिए धनीराम साहू ने अपने साले भुवन साहू के साथ मिलकर तुलसी को रास्ते से हटाने की खौफनाक योजना बनाई। इस साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्होंने ओमनारायण राजपूत से संपर्क साधा। ओमनारायण के माध्यम से बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले कोटा क्षेत्र के निवासी सुरेंद्र जोशी से डील तय की गई। तुलसी साहू के अपहरण और कत्ल के लिए कुल 1.2 लाख रुपये की सुपारी तय हुई थी, जिसमें से 70 हजार रुपये बतौर एडवांस पहले ही अदा कर दिए गए थे।\n\nतय योजना के मुताबिक, 25 अक्टूबर को तुलसी साहू जब अपनी बाइक लेकर घर से निकला, तो घात लगाए आरोपी उसके पीछे लग गए। राइस मिल के पास सुनसान रास्ते पर मौका पाते ही आरोपियों ने तुलसी को अगवा कर लिया। इसके बाद वे उसे गांव के ही एक ट्यूबवेल स्थित पंप हाउस में ले गए। पंप हाउस के भीतर धनीराम और उसके अन्य साथियों ने तुलसी के दोनों पैरों को बिजली के तारों से जकड़ दिया। इसके बाद गमछे से उसका गला घोंटकर बेरहमी से जान ले ली गई।\n\nसाक्ष्य मिटाने की कोशिश और गिरफ्तारियां\nहत्या को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए सड़क किनारे कीचड़ में फेंका और ऊपर से कंटीली झाड़ियां डालकर उसे छिपा दिया। वारदात के सबूत नष्ट करने के लिए उन्होंने हत्या में इस्तेमाल किए गए गमछे को आग के हवाले कर दिया। इसके अलावा मृतक के जूते, जैकेट, मोबाइल फोन और चार्जर को अलग-अलग सुनसान जगहों पर छिपा दिया गया था ताकि पुलिस को कोई सीधा सुराग न मिल सके।\n\nपुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी धनीराम साहू सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि इस हत्याकांड की साजिश में कुछ अन्य लोगों के भी शामिल होने की जानकारी मिली है, जिनकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।\n\nइसका आप पर असर\nइस सनसनीखेज हत्याकांड के खुलासे ने ग्रामीण राजनीति और व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़े गंभीर पहलुओं को उजागर किया है।\n\n• भारत में: स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों में वोटिंग या काउंटिंग एजेंट बनने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर यह मामला चिंताएं पैदा करता है। प्रशासन को चुनावी विवादों से जुड़े संभावित टकरावों पर समय रहते सतर्कता बरतने की जरूरत रेखांकित होती है।\n• मुंगेली में: पेंड्री और सरगांव क्षेत्र के स्थानीय निवासियों में चुनावी प्रतिद्वंद्विता के चलते खौफ का माहौल बना है। पुलिस ने पांच आरोपियों को जेल भेजकर स्थिति को नियंत्रित किया है, जिससे इलाके में कानून-व्यवस्था पर जनता का भरोसा बहाल करने में मदद मिलेगी।\n• पंचायत प्रतिनिधियों के लिए: चुनावी हार-जीत को लेकर पुरानी रंजिश पालने वाले आपराधिक तत्वों पर पुलिस की सख्त नजर रहेगी। किसी भी तरह की धमकी या विवाद की स्थिति में तुरंत स्थानीय थाने में सूचना दर्ज कराना अनिवार्य है।\n• अदालती कार्रवाई: गिरफ्तार किए गए सभी पांचों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की हत्या और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में कठोर कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई है। त्वरित सुनवाई से पीड़ितों को न्याय मिलने और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे अपराधों पर रोक लगने की उम्मीद है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह जघन्य वारदात पंचायत चुनाव में मिली मामूली पराजय और मतगणना के दौरान हुई कथित गड़बड़ी के गहरे शक का नतीजा थी।\n\n• सीधा कारण: मुख्य आरोपी धनीराम साहू साल 2025 के सरपंच चुनाव में मात्र 8-9 वोटों से हार गया था, और उसने मृतक तुलसी साहू पर जान-बूझकर वोट निरस्त करवाने का शक पाल रखा था।\n• साजिश की परिस्थितियां: धनीराम ने हार के बाद अपने साले भुवन साहू और बिचौलिए ओमनारायण राजपूत के साथ मिलकर बिलासपुर के शूटर सुरेंद्र जोशी को 1.2 लाख रुपये की सुपारी देकर अपहरण और हत्या की योजना तैयार की।\n• मौके का फायदा: 25 अक्टूबर को जब तुलसी साहू अपनी बाइक पर अकेले सुनसान रास्ते से निकला, तो आरोपियों ने उसका पीछा कर उसे अगवा कर लिया और पंप हाउस ले जाकर हत्या कर दी।\n• कानूनी जांच: पुलिस ने गुमशुदगी और मर्ग जांच के बाद फोरेंसिक सबूत जुटाए तथा कॉल डिटेल व मुखबिरों की मदद से इस पूरे आपराधिक गठजोड़ को बेनकाब किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मुंगेली में तुलसी साहू की हत्या क्यों की गई?\nसाल 2025 के सरपंच चुनाव में 8-9 वोटों से हारे धनीराम साहू को शक था कि मतगणना अभिकर्ता तुलसी साहू ने जान-बूझकर उसके वोट निरस्त करवाए थे।\n\n2. तुलसी साहू का शव कहां और किस हालत में मिला था?\nउनका शव गणेश मिनरल्स के पास कीचड़ और झाड़ियों में मिला था, जिसके दोनों पैर बिजली के तार से बंधे थे और गला घोंटकर हत्या की गई थी।\n\n3. इस हत्या के लिए कितने रुपये की सुपारी तय की गई थी?\nतुलसी साहू के अपहरण और हत्या के लिए 1.2 लाख रुपये की सुपारी तय हुई थी, जिसमें से 70 हजार रुपये बतौर एडवांस दिए गए थे।\n\n4. पुलिस ने इस मामले में किन धाराओं के तहत केस दर्ज किया है?\nपुलिस ने अपराध क्रमांक 166/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 और 238 में मामला दर्ज किया है।\n\n5. अब तक इस मामले में कितने लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है?\nपुलिस ने मुख्य आरोपी धनीराम साहू समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत के जरिए जेल भेज दिया है।",
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