# नक्सल मोर्चे पर कमान संभालने वाले आईपीएस संतोष कुमार सिंह बने दिल्ली मेट्रो के नए सुरक्षा प्रमुख

> छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अधिकारी डॉ. संतोष कुमार सिंह को दिल्ली मेट्रो में सीआईएसएफ का डीआईजी नियुक्त किया गया है, जो नक्सल अभियानों से लेकर अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार जीतने तक अपनी रणनीतिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/naksala-morche-para-kamana-snbhalane-vale-ips-santosh-kumar-singh-bane-delhi-metro-ke-nae-suraksha-pramukha-45803 · **Language:** Hindi
**Tags:** संतोष कुमार सिंह, दिल्ली मेट्रो, सीआईएसएफ, आईपीएस अधिकारी, पुलिसिंग, बस्तर, छत्तीसगढ़

राष्ट्रीय राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो की चौकसी अब एक ऐसे पुलिस अधिकारी के हाथों में सौंपी गई है, जिन्होंने अकादमिक दुनिया में शीर्ष मुकाम हासिल करने के साथ-साथ सुदूर नक्सल प्रभावित जंगलों में भी कानून-व्यवस्था का जिम्मा संभाला है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी डॉ. संतोष कुमार सिंह को केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल अर्थात सीआईएसएफ में दिल्ली मेट्रो का नया उप महानिरीक्षक नियुक्त किया है। हर रोज 80 लाख से अधिक मुसाफिरों की आवाजाही संभालने वाली इस विशाल मेट्रो प्रणाली में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के मोर्चे पर यह तैनाती बेहद अहम मानी जा रही है।

## छात्र जीवन में स्वर्ण पदक और अंतरराष्ट्रीय शोध
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले की मिट्टी से निकले डॉ. संतोष कुमार सिंह की पहचान प्रशासनिक गलियारों में एक 'स्कॉलर-वॉरियर' के रूप में की जाती है। वर्दी पहनने से पहले उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल की थीं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई करते हुए उन्होंने स्नातक स्तर पर सर्वोच्च स्थान पाया और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में स्वर्ण पदक जीता।

अपनी अकादमिक रुचि को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नेट-जेआरएफ परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पहले एम.फिल और फिर डॉक्टरेट की उपाधि पूरी की। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों पर उनका गहरा शोध रहा है और उन्होंने 'इंस्टिट्यूशनलाइजेशन ऑफ पीसएजुकेशन' शीर्षक से एक पुस्तक भी लिखी है। वर्ष 2010 की सिविल सेवा परीक्षा में 369वीं रैंक प्राप्त कर वे भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुने गए थे।

## बस्तर के बीहड़ों से लेकर नौ जिलों में पुलिस कप्तानी
फील्ड पोस्टिंग के दौरान डॉ. संतोष कुमार सिंह ने छत्तीसगढ़ के अत्यंत चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील अंचलों में काम किया। उन्होंने राज्य के नौ अलग-अलग जिलों में पुलिस अधीक्षक तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारियां संभालीं। इन जिलों में राजधानी रायपुर के अतिरिक्त बिलासपुर, कोरबा, राजनांदगांव और रायगढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक व प्रशासनिक केंद्र शामिल रहे हैं।

इसके अलावा उन्होंने बस्तर और सुकमा जैसे घोर वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में भी लंबे समय तक सेवाएं दीं। सुकमा और बस्तर की विषम भौगोलिक परिस्थितियों में नक्सलियों के विरुद्ध चलाए गए अभियानों के रणनीतिक संचालन ने उनकी नेतृत्व क्षमता को मजबूत आधार दिया। कठिन परिस्थितियों में शांति बहाली और त्वरित निर्णय क्षमता के कारण उन्हें जमीनी पुलिसिंग का माहिर अधिकारी माना जाता है।

## 'निजात' अभियान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
दंडात्मक कार्रवाई के साथ मानवीय दृष्टिकोण को जोड़ने की कार्यशैली ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया। नशीले पदार्थों, गांजा और अवैध शराब के बढ़ते जाल को खत्म करने के लिए उन्होंने 'निजात' नामक एक व्यापक जन अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत नशे के कारोबारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ भटके हुए युवाओं की काउंसलिंग और उनके पुनर्वास पर विशेष ध्यान दिया गया।

महासमुंद जिले में पदस्थापना के दौरान बच्चों के लिए भयमुक्त और बाल-हितैषी वातावरण तैयार करने वाली उनकी पुलिसिंग पहलों को वैश्विक स्तर पर सराहना मिली। वर्ष 2021 में अमेरिका स्थित अंतरराष्ट्रीय पुलिस प्रमुखों के संगठन इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ्स ऑफ पुलिस ने उन्हें वैश्विक स्तर के '40 अंडर 40' सम्मान से नवाजा। यह प्रतिष्ठित वैश्विक पुरस्कार प्राप्त करने वाले वे चुनिंदा भारतीय अधिकारियों में शामिल रहे हैं।

## औद्योगिक परिसंपत्तियों की रक्षा से मेट्रो नेटवर्क तक
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आने के बाद डॉ. सिंह को हैदराबाद में सीआईएसएफ दक्षिण जोन-2 का प्रभार सौंपा गया था। वहां डीआईजी के पद पर रहते हुए उन्होंने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के प्रमुख बंदरगाहों, हवाई अड्डों और भारी रणनीतिक संयंत्रों की सुरक्षा संरचना का प्रबंधन देखा। हाल के समय में राजधानी दिल्ली में होने वाले विभिन्न नागरिक आंदोलनों और राजनीतिक जमावड़ों के दौरान मेट्रो स्टेशनों पर दबाव काफी बढ़ जाता है। ऐसे संवेदनशील माहौल में सीआईएसएफ के मेट्रो सुरक्षा प्रभाग का नेतृत्व एक कड़े प्रशासक को सौंपा गया है ताकि 80 लाख यात्रियों का सुरक्षित सफर सुनिश्चित रह सके।

## इसका आप पर असर
दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा कमान बदलने का सीधा प्रभाव राष्ट्रीय राजधानी में सफर करने वाले लाखों दैनिक यात्रियों की संरक्षा और स्टेशन प्रबंधन पर पड़ेगा।

- **दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए:** मेट्रो स्टेशनों पर अत्यधिक भीड़ और किसी अप्रिय प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था अधिक चुस्त नजर आएगी। नक्सल क्षेत्रों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों के सुरक्षा विशेषज्ञ के नेतृत्व से आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र अधिक प्रभावी बनेगा।
- **सुरक्षा प्रोटोकॉल के स्तर पर:** स्टेशनों पर संदिग्ध गतिविधियों और भीड़ नियंत्रण के लिए तकनीक आधारित निगरानी को बढ़ावा मिल सकता है। दैनिक मुसाफिरों को चेकिंग और प्रवेश द्वारों पर व्यवस्थित संचालन का लाभ मिलेगा।
- **जन-संवेदनशील पुलिसिंग:** नए नेतृत्व के पूर्व अनुभव को देखते हुए महिलाओं और बच्चों के अनुकूल वातावरण बनाने पर जोर रहेगा। स्टेशन परिसरों में यात्री सहायता और शिकायत निवारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।
- **सार्वजनिक व्यवस्था के मोर्चे पर:** राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान मेट्रो सेवाएं प्रभावित होने की आशंकाओं को कम करने में मदद मिलेगी। सीआईएसएफ और स्थानीय पुलिस के बीच बेहतर समन्वय से आवागमन बाधित होने की घटनाएं घटेंगी।

## ऐसा क्यों हुआ
दिल्ली मेट्रो में सीआईएसएफ के उप महानिरीक्षक पद पर यह नियुक्ति राजधानी के लगातार बढ़ते यात्री दबाव और सुरक्षा संवेदनशीलता के कारण की गई है।

- **विशाल यात्री संख्या का प्रबंधन:** दिल्ली मेट्रो में प्रतिदिन 80 लाख से अधिक यात्री सफर करते हैं, जिससे स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ऐसे विशाल नेटवर्क की निगरानी के लिए व्यापक प्रशासनिक और फील्ड अनुभव वाले नेतृत्व की आवश्यकता थी।
- **नागरिक और राजनीतिक प्रदर्शनों का प्रभाव:** राष्ट्रीय राजधानी में विभिन्न मुद्दों पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई बार मेट्रो स्टेशनों पर भारी दबाव बनता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है। नक्सल मोर्चों पर शांति बहाल करने के अनुभव वाले अधिकारी को लाकर व्यवस्था को अभेद्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
- **रणनीतिक सुरक्षा का अनुभव:** डॉ. संतोष कुमार सिंह ने इससे पहले दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण बंदरगाहों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का नेतृत्व किया है। उनकी इस विशेषज्ञता को देश की सबसे महत्वपूर्ण शहरी परिवहन जीवनरेखा की सुरक्षा को सशक्त बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. डॉ. संतोष कुमार सिंह को कौन सी नई जिम्मेदारी दी गई है?
उन्हें दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए सीआईएसएफ में डीआईजी (उप महानिरीक्षक) के पद पर तैनात किया गया है।

### 2. डॉ. संतोष कुमार सिंह किस कैडर और बैच के आईपीएस अधिकारी हैं?
वे वर्ष 2011 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी हैं।

### 3. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या रही है?
उन्होंने बीएचयू से राजनीति विज्ञान में एमए कर गोल्ड मेडल जीता और जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एम.फिल व पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।

### 4. उन्हें कौन सा प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है?
इनोवेटिव और बाल-हितैषी पुलिसिंग के लिए उन्हें 2021 में अमेरिका के इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ चीफ्स ऑफ पुलिस (आईएसीपी) द्वारा '40 अंडर 40' पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

### 5. उन्होंने नशे के खिलाफ कौन सा विशेष अभियान चलाया था?
उन्होंने नशीले पदार्थों और अवैध शराब के खिलाफ 'निजात' नामक जनजागरूकता, कड़ी कार्रवाई और पुनर्वास अभियान चलाया था।

### 6. दिल्ली मेट्रो में आने से पहले वे किस पद पर कार्यरत थे?
वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैदराबाद में सीआईएसएफ दक्षिण जोन-2 के डीआईजी पद पर तैनात थे, जहां उन्होंने कई राज्यों के बंदरगाहों और औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा देखी।

## प्रेरणा और सबक
डॉ. संतोष कुमार सिंह का सफर यह साबित करता है कि उच्च अकादमिक उपलब्धियां और कठिन प्रशासनिक दायित्व एक साथ पूरी निष्ठा से निभाए जा सकते हैं।

- **सफलता का सबक:** ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर बीएचयू में गोल्ड मेडल और जेएनयू से पीएचडी हासिल करना यह सिखाता है कि शिक्षा के प्रति गहरी लगन ही प्रशासनिक क्षेत्र में भी सशक्त आधार तैयार करती है।
- **संतुलित कार्यशैली:** कठिन नक्सल क्षेत्रों में सख्त कानून व्यवस्था लागू करते हुए भी 'निजात' जैसे नशामुक्ति अभियानों के जरिए मानवीय संवेदना बनाए रखना एक सच्चे नेतृत्व का प्रतीक है।
- **वैश्विक पहचान:** स्थानीय स्तर पर किए गए बाल-हितैषी और नवोन्मेषी पुलिसिंग कार्यों से अंतरराष्ट्रीय मंच पर आईएसीपी पुरस्कार पाना यह दर्शाता है कि नेक नीयत से किया गया जमीनी काम हमेशा वैश्विक मान्यता दिलाता है।

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