# नक्सली दंपती राजे कांगे और प्रभाकर को कांकेर की अदालत ने सुनाई 7-7 साल जेल की सजा

> छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले की अदालत ने खूंखार नक्सली प्रभाकर और उसकी पत्नी राजे कांगे को 7-7 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है, जबकि तीन अन्य नक्सलियों को 5-5 साल जेल हुई है। यह फैसला 2015 के एक मुठभेड़ मामले से जुड़ा है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/naksali-dnpati-raje-kange-aura-prabhakar-ko-kanker-ki-adalata-ne-sunai-7-7-sala-jela-ki-saja-29553 · **Language:** Hindi
**Tags:** कांकेर कोर्ट, नक्सली प्रभाकर, राजे कांगे, बस्तर नक्सलवाद, UAPA मामला, छत्तीसगढ़ नक्सली सजा

छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में अदालत ने एक बड़ा मोड़ ला दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने खूंखार नक्सली प्रभाकर और उसकी पत्नी राजे कांगे को 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, जबकि इसी मामले से जुड़े तीन अन्य नक्सलियों को 5-5 साल जेल भेजा गया है। बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद की समाप्ति के बाद इसे किसी बड़े नक्सली लीडर पर आया पहला बड़ा अदालती फैसला बताया जा रहा है।

यह पूरा घटनाक्रम दस साल पुरानी उस मुठभेड़ से जुड़ा है, जिसने आगे चलकर एक लंबी कानूनी लड़ाई की नींव रखी।

## मामले की जड़ 2015 के मुठभेड़ में
यह पूरा मामला 2015 का है, जब ग्राम बेसगांव के पहाड़ी इलाके में पुलिस और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई थी। इस घटना के तुरंत बाद कोरर थाने में अपराध क्रमांक 108/2015 दर्ज किया गया था। पुलिस ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की धाराओं, धारा 307 और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की थी। करीब एक दशक तक चली इस लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब जाकर अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।

## चार दशक से नक्सल नेटवर्क में सक्रिय था प्रभाकर
एसपी निखिल राखेचा के मुताबिक, दोषी ठहराया गया नक्सली प्रभाकर बीते चार दशक से ज्यादा समय से पूरे बस्तर इलाके में नक्सलवाद का एक बड़ा चेहरा रहा है। वह नक्सली संगठन में SGCM और DKSZC रैंक का खूंखार कैडर है और अलग-अलग थानों में उसके खिलाफ 60 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने उस पर 25 लाख रुपये का इनाम रखा हुआ था, जो उसके संगठन में कद और खतरनाक गतिविधियों की गवाही देता है।

## पत्नी राजे कांगे भी संगठन में बड़े ओहदे पर
प्रभाकर की पत्नी राजे कांगे भी नक्सली संगठन में DVCM रैंक की बड़ी नेता मानी जाती थी। वह रावघाट इलाके और नक्सलियों की सप्लाई टीम में सक्रिय भूमिका निभाती थी, जो संगठन के लिए हथियार और साजोसामान पहुंचाने के काम में अहम मानी जाती है। उसके खिलाफ भी 30 से ज्यादा मामले दर्ज हैं और उस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

## जांच और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों ने पलटी बाजी
पुलिस के लिए यह फैसला एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इस मामले की जांच बेहद बारीकी से की गई थी। विवेचक ने मजबूत चार्जशीट तैयार कर अदालत में पेश की, जिसमें नक्सलियों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का भी इस्तेमाल किया गया। पुलिस और अभियोजन पक्ष की मजबूत पैरवी के चलते ही अदालत ने कुल पांच आरोपियों को सजा सुनाई, जिसे बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान की एक बड़ी कानूनी जीत के तौर पर देखा जा रहा है।

## इसका आप पर असर
इस फैसले का सीधा असर बस्तर इलाके की सुरक्षा और नक्सल विरोधी न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ेगा।

- **भारत में:** यह फैसला दिखाता है कि पुरानी नक्सल हिंसा से जुड़े मामलों में भी सख्त कानूनी कार्रवाई संभव है। इससे देशभर की जांच एजेंसियों को लंबित मामलों में मजबूत चार्जशीट और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाने का हौसला मिलेगा।
- **छत्तीसगढ़ के बस्तर में:** प्रभाकर जैसे चार दशक पुराने बड़े कैडर की सजा से इलाके के नक्सली नेटवर्क में डर बैठेगा। स्थानीय ग्रामीणों और सुरक्षाबलों को इससे सुरक्षा को लेकर भरोसा बढ़ेगा।
- **जांच एजेंसियों के लिए मिसाल:** मजबूत चार्जशीट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के इस्तेमाल का यह तरीका आगे के नक्सल मामलों में जांच एजेंसियों के लिए एक मॉडल बन सकता है।
- **न्याय प्रक्रिया पर भरोसा:** दस साल पुराने मामले में सजा मिलने से आम जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि नक्सल हिंसा के मामलों में देर हो सकती है, लेकिन कार्रवाई जरूर होती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह सजा अचानक नहीं आई, बल्कि 2015 की मुठभेड़ के बाद शुरू हुई एक लंबी जांच प्रक्रिया और मजबूत पैरवी का नतीजा है।

- **2015 की मुठभेड़ बनी शुरुआत:** ग्राम बेसगांव के पहाड़ी इलाके में हुई मुठभेड़ के बाद ही कोरर थाने में मामला दर्ज हुआ था, जिसने आगे चलकर पूरे केस की बुनियाद रखी।
- **सख्त धाराओं में केस दर्ज होना:** UAPA, धारा 307 और आर्म्स एक्ट जैसी सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज होने से पुलिस को शुरू से ही मजबूत कानूनी आधार मिल गया था।
- **बारीक जांच और चार्जशीट:** विवेचक ने बेहद बारीकी से जांच कर मजबूत चार्जशीट पेश की, जिसमें नक्सलियों के खिलाफ इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का भी सहारा लिया गया।
- **प्रभावी पैरवी:** पुलिस और अभियोजन पक्ष की अच्छी पैरवी की वजह से अदालत में सबूत टिक पाए, जिसके चलते पांचों आरोपियों को सजा मिल सकी।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रभाकर और राजे कांगे को कितनी सजा मिली है?
दोनों को अदालत ने 7-7 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

### 2. बाकी तीन नक्सलियों को क्या सजा हुई?
इसी मामले से जुड़े तीन अन्य नक्सलियों को 5-5 साल जेल की सजा दी गई है।

### 3. यह मामला किस साल का है?
यह मामला 2015 का है, जब ग्राम बेसगांव के पहाड़ी इलाके में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई थी।

### 4. प्रभाकर और राजे कांगे पर कितना इनाम था?
प्रभाकर पर 25 लाख रुपये और उसकी पत्नी राजे कांगे पर 8 लाख रुपये का इनाम था।

### 5. मामला किन धाराओं में दर्ज हुआ था?
यह मामला UAPA, धारा 307 और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।

### 6. प्रभाकर और राजे कांगे नक्सली संगठन में किस रैंक पर थे?
प्रभाकर SGCM और DKSZC रैंक का था, जबकि राजे कांगे DVCM रैंक की नेता थी।

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