# ओडिशा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद इंद्रावती नदी उफान पर, धान के खेत डूबे और डूबा किसानों का कर्ज

> कालाहांडी बांध के फाटक खुलने से इंद्रावती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे कई एकड़ धान की फसल जलमग्न हो गई और गांवों का संपर्क टूट गया।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/odisha-bandha-se-pani-chhore-jane-ke-bada-indravati-nadi-uphana-para-dhana-ke-kheta-dube-aura-duba-kisanon-ka-karja-44738 · **Language:** Hindi
**Tags:** इन्द्रावती नदी, कालाहांडी बांध, धान की फसल, बाढ़ संकट, किसान कर्ज, कृषि नुकसान

ओडिशा के कालाहांडी स्थित बांध से पानी छोड़े जाने के बाद इंद्रावती नदी में अचानक उफान आ गया है। बारिश थमने के बावजूद बांध के गेट खोले जाने की वजह से नदी का पानी तटवर्ती इलाकों के खेतों में भर गया, जिसके चलते किसानों की तैयार धान की फसलें पूरी तरह डूब गई हैं। कई गांवों के खेतों में पिछले दो से तीन दिनों से लगातार पानी जमा है, जिससे धान के पौधों के पूरी तरह सड़ने और नष्ट होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।

## कर्ज में डूबे किसानों पर फसल बर्बादी का दोहरा संकट
इस अप्रत्याशित बाढ़ ने उन किसानों की कमर तोड़ दी है जिन्होंने बैंकों और सहकारी संस्थाओं से कर्ज लेकर खेती की तैयारी की थी। काश्तकारों का कहना है कि यदि खेतों में जमा यह पानी अगले एक या दो दिन और नहीं उतरा, तो खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। कुछ किसानों के मुताबिक उनकी मेहनत पहले ही पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। अब उन्हें बैंक और लैम्प्स से लिए गए कर्जे की अदायगी की गहरी चिंता सता रही है, क्योंकि कमाई का पूरा दारोमदार इसी धान की उपज पर टिका हुआ था।

## प्रभावित किसानों की जुबानी नुकसान का ब्योरा
नुकसान झेल रहे किसान चैत सिंह कश्यप ने बताया कि उन्होंने लगभग पांच एकड़ जमीन पर रोपा धान बोया था, जो अब इंद्रावती नदी के सैलाब में समा चुका है। उन्होंने अपनी इस खेती के लिए बैंक से तकरीबन एक लाख रुपये का कर्ज उठाया था। इसी तरह घाटकवाली गांव के किसान जयराम की करीब साढ़े तीन एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूब चुकी है। जयराम ने इस खेती में लगभग एक लाख रुपये की लागत लगाई थी और लैम्प्स समिति से करीब 45 हजार रुपये का ऋण लिया था। एक अन्य किसान सुनील कुमार नाग ने बताया कि उन्होंने खेती और खाद की व्यवस्था जुटाने के लिए लगभग दो लाख रुपये का कर्ज लिया था, मगर अब उनके खेत का आधा हिस्सा जलमग्न हो चुका है।

## सड़कें कटीं, जिला मुख्यालय से कई गांवों का संपर्क बाधित
नदी के तेज बहाव और लगातार जलभराव का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर भी पड़ा है। कई प्रमुख सड़कें और संपर्क मार्ग पानी में डूबने अथवा क्षतिग्रस्त होने से अनेक गांवों का सीधा संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया है। इस रुकावट के चलते ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन, जरूरी सामान की आपूर्ति और आपातकालीन यात्राओं में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

## इसका आप पर असर
बांध से अचानक पानी छोड़े जाने और खेतों में जलभराव होने से किसानों की आजीविका और ग्रामीण आवागमन पर सीधा असर पड़ा है।

- **भारत में:** देश भर के उपभोक्ताओं पर प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में स्थानीय फसल नुकसान के कारण आपूर्ति और अनाज की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है। किसानों के लिए बाढ़ और अप्रत्याशित जल निकासी के समय फसल बीमा और ऋण राहत नियमों की समय पर उपलब्धता आवश्यक हो जाती है।
- **कालाहांडी और इंद्रावती बेसिन में:** जिन किसानों के खेतों में दो से तीन दिनों से पानी जमा है, उन्हें तुरंत अपने स्थानीय लैम्प्स या बैंक शाखा में फसल क्षति की सूचना देनी चाहिए ताकि राहत प्रक्रिया शुरू हो सके। कई गांवों की सड़कें जिला मुख्यालय से कट जाने के कारण स्थानीय निवासियों को जलस्तर कम होने तक वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करना होगा और आपातकालीन यात्राओं में सावधानी बरतनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह संकट स्थानीय बारिश रुकने के बावजूद ओडिशा के कालाहांडी में स्थित बांध के गेट खोले जाने और भारी मात्रा में अतिरिक्त पानी इंद्रावती नदी में छोड़े जाने के कारण उत्पन्न हुआ।

- **सीधा कारण:** कालाहांडी स्थित जलाशय के फाटक अचानक खोल दिए गए, जिससे इंद्रावती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और नदी का पानी तटवर्ती खेतों में प्रवेश कर गया।
- **खेतों में जलभराव की स्थिति:** जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने और लगातार अतिरिक्त पानी आने के कारण दो से तीन दिनों तक पानी खेतों में ही रुका रहा, जिसने पौधों को डुबो दिया।
- **सड़क संपर्कों का टूटना:** निचले इलाकों से गुजरने वाले ग्रामीण मार्गों पर नदी का उफान चढ़ जाने से संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए और आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई।

## सवाल-जवाब

### 1. बारिश रुकने के बाद भी इंद्रावती नदी में पानी क्यों बढ़ गया?
ओडिशा के कालाहांडी में बने बांध के गेट खोले जाने की वजह से इंद्रावती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया।

### 2. खेतों में कितने दिनों से पानी भरा हुआ है?
किसानों के खेतों में पिछले दो से तीन दिनों से लगातार पानी भरा हुआ है।

### 3. किसान चैत सिंह कश्यप को कितना नुकसान हुआ है?
चैत सिंह कश्यप की करीब पांच एकड़ में लगी रोपा धान की फसल डूब गई है, जिसके लिए उन्होंने बैंक से लगभग एक लाख रुपये का कर्ज लिया था।

### 4. घाटकवाली के किसान जयराम ने कितना कर्ज लिया था?
किसान जयराम ने लैम्प्स से करीब 45 हजार रुपये का कर्ज लिया था और खेती में लगभग एक लाख रुपये खर्च किए थे।

### 5. किसान सुनील कुमार नाग की कितनी फसल प्रभावित हुई है?
सुनील कुमार नाग ने खेती और खाद के लिए लगभग दो लाख रुपये का कर्ज लिया था और अब उनके खेत का आधा हिस्सा जलमग्न हो चुका है।

### 6. बाढ़ और जलभराव का ग्रामीण इलाकों पर क्या असर पड़ा है?
कई प्रमुख रास्ते प्रभावित होने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क कट गया है, जिससे आवागमन ठप हो गया है।

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