# ओमान से लाए गए सौरभ चंद्राकर की सीबीआई को मिली दो दिन की ट्रांजिट रिमांड, रायपुर कोर्ट में होगी पेशी

> महादेव सट्टेबाजी ऐप के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को दिल्ली अदालत ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेजा है, जहां से जांच एजेंसी उसे रायपुर की विशेष अदालत ले जाएगी.

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/omana-se-lae-gae-saurabh-chandrakar-ki-cbi-ko-mili-do-dina-ki-tranjita-rimanda-raipur-court-men-hogi-peshi-55157 · **Language:** Hindi
**Tags:** सौरभ चंद्राकर, महादेव सट्टेबाजी ऐप, सीबीआई, राउज एवेन्यू कोर्ट, ट्रांजिट रिमांड, रायपुर

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में जांच एजेंसी को मुख्य कर्ताधर्ता सौरभ चंद्राकर की दो दिनों की ट्रांजिट रिमांड मिल गई है. ओमान से प्रत्यर्पण और निर्वासन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत पहुंचते ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने आरोपी को नई दिल्ली स्थित राउज एवेन्यू अदालत में प्रस्तुत किया था. सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश निखिल चोपड़ा ने मामले की सुनवाई करते हुए 2 नवंबर 2026 को यह आदेश पारित किया.

## दिल्ली अदालत का आदेश और रायपुर ले जाने की तैयारी
जांच एजेंसी ने न्यायिक प्रक्रिया के तहत आरोपी को छत्तीसगढ़ ले जाने के लिए अदालत से दो दिन की ट्रांजिट रिमांड की गुहार लगाई थी. राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की इस अर्जी को स्वीकार कर लिया. अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि आरोपी को 4 नवंबर 2026 तक या उससे पहले रायपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत के समक्ष पेश किया जाए, ताकि मामले की विस्तृत कानूनी जांच आगे बढ़ सके.

## फर्जी दस्तावेजों से ओमान में प्रवेश और गिरफ्तारी का घटनाक्रम
छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित सेक्टर-8 का रहने वाला सौरभ चंद्राकर लंबे समय से कानूनी एजेंसियों की नजरों से बच रहा था. ओमान में फर्जी यात्रा दस्तावेजों के जरिए गैरकानूनी तरीके से घुसने के आरोप में वहां के अधिकारियों ने उसे पकड़ा था. ओमान सरकार की तरफ से भारत को सौंपे जाने के बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने 1 नवंबर 2026 को शाम 7:35 बजे उसे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया. रायपुर की विशेष अदालत ने पहले ही 9 सितंबर 2026 को आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया हुआ था.

## दुबई स्थित मुख्यालय से संचालित होता था अवैध नेटवर्क
जांच के विवरण के मुताबिक सौरभ चंद्राकर ने अपने सहयोगी रवि उप्पल के साथ मिलकर महादेव बुक ऐप का नेटवर्क खड़ा किया और उसका प्रचार-प्रसार किया. इस अवैध सिंडिकेट के तहत इंटरनेट पर ऑनलाइन सट्टेबाजी के अनेक प्लेटफॉर्म तैयार किए गए थे. इस पूरे गिरोह का मुख्य कार्यालय दुबई में स्थापित किया गया था, जहां से विभिन्न गतिविधियों का प्रबंधन होता था. गैरकानूनी सट्टे से अर्जित भारी रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों के जरिए घुमाकर संयुक्त अरब अमीरात भेजा जाता था.

## अदालत में वकीलों की दलीलें और क्षेत्राधिकार पर स्थिति साफ
सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर के वकीलों ने ट्रांजिट रिमांड का विरोध करते हुए प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 21 का हवाला दिया. बचाव पक्ष का तर्क था कि ओमान की अदालत ने प्रत्यर्पण की अनुमति प्रवर्तन निदेशालय से संबंधित प्रकरण के तहत दी थी, न कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के मामले में. इसके जवाब में जांच एजेंसी के वरिष्ठ सरकारी वकील ने दलील दी कि यह कार्यवाही मात्र ट्रांजिट रिमांड के लिए है, क्योंकि गिरफ्तारी के चौबीस घंटे के भीतर आरोपी को संबंधित क्षेत्राधिकार वाली अदालत में पहुंचाना संवैधानिक व कानूनी अनिवार्यता है. जज निखिल चोपड़ा ने स्पष्ट किया कि वर्तमान अदालत का दायरा सिर्फ ट्रांजिट रिमांड तक सीमित है और पूरे मामले के गुण-दोष व अन्य विधिक बिंदुओं पर निर्णय लेने का अधिकार रायपुर की विशेष अदालत के पास ही है.

## इसका आप पर असर
अवैध सट्टेबाजी ऐप सिंडिकेट के प्रमुख संचालक की गिरफ्तारी से देश भर में चल रहे वित्तीय अपराधों की जांच में तेजी आएगी.

- **भारत में:** गैरकानूनी ऑनलाइन गेमिंग और अवैध धन भेजने वाले विदेशी नेटवर्कों पर सुरक्षा एजेंसियों का शिकंजा और कड़ा होगा. आम नागरिकों को बिना नियामक अनुमति वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर वित्तीय जोखिम उठाने से सतर्क रहने की सीख मिलती है.
- **छत्तीसगढ़ में:** भिलाई निवासी मुख्य आरोपी को रायपुर की विशेष अदालत में लाए जाने से राज्य से जुड़े स्थानीय संपर्कों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में नए तथ्य सामने आएंगे. स्थानीय स्तर पर इस ऐप नेटवर्क से प्रभावित हुए मामलों में कानूनी कार्रवाई में तेजी आएगी.
- **वित्तीय सुरक्षा:** अनधिकृत पोर्टल्स के जरिए संचालित बैंकिंग चैनलों पर जांच का दायरा बढ़ेगा. उपयोगकर्ता संदिग्ध गेमिंग लेन-देन के लिए इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों की पहचान के प्रति अधिक सतर्क रहेंगे.
- **न्यायिक समयसीमा:** अदालत ने जांच एजेंसी को 4 नवंबर 2026 तक रायपुर कोर्ट में आरोपी को प्रस्तुत करने का स्पष्ट आदेश दिया है. इससे यह तय हो गया है कि मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया स्थानीय क्षेत्राधिकार वाली अदालत में तुरंत शुरू होगी.

## ऐसा क्यों हुआ
सौरभ चंद्राकर को ओमान में गैरकानूनी प्रवेश करने के चलते हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद भारत सरकार को सौंपे जाने पर यह न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई.

- **दस्तावेजों में गड़बड़ी:** सौरभ चंद्राकर ने फर्जी यात्रा दस्तावेजों के सहारे ओमान की सीमा में प्रवेश किया था. वहां की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उसे गैरकानूनी रूप से रहने के आरोप में पकड़ लिया.
- **गैर-जमानती वारंट:** रायपुर की विशेष अदालत ने 9 सितंबर 2026 को आरोपी के खिलाफ खुला गैर-जमानती वारंट जारी कर रखा था. इसके चलते भारतीय एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी धरपकड़ के प्रयास में थीं.
- **वैधानिक अनिवार्यता:** 1 नवंबर 2026 को गिरफ्तारी के बाद कानूनन 24 घंटे में अदालत में पेश करना और संबंधित राज्य तक ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड मांगना जरूरी था. इसी विधिक प्रावधान के तहत दिल्ली की अदालत में यह अर्जी दाखिल की गई.

## सवाल-जवाब

### 1. सौरभ चंद्राकर को किस अदालत ने ट्रांजिट रिमांड पर भेजा है?
नई दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत के विशेष जज निखिल चोपड़ा ने सौरभ चंद्राकर को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर भेजा है.

### 2. सीबीआई को आरोपी को कब तक रायपुर कोर्ट में पेश करना है?
अदालत के निर्देशानुसार सीबीआई को आरोपी को 4 नवंबर 2026 तक या उससे पहले रायपुर की विशेष अदालत में पेश करना होगा.

### 3. सौरभ चंद्राकर को विदेश में किस वजह से पकड़ा गया था?
उसे फर्जी यात्रा दस्तावेजों के जरिए ओमान में गैरकानूनी रूप से प्रवेश करने के आरोप में वहां की एजेंसियों ने पकड़ा था.

### 4. महादेव ऐप का सिंडिकेट कहां से चलाया जाता था?
सीबीआई के अनुसार सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल इस अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट का मुख्य कार्यालय दुबई में बनाकर इसे संचालित करते थे.

### 5. बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में क्या दलील दी थी?
वकीलों ने प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 21 का हवाला देते हुए कहा कि ओमान से प्रत्यर्पण की मंजूरी केवल प्रवर्तन निदेशालय के मामले के लिए थी.

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