# पर्याप्त प्रमाण न मिलने पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रार्थना विवाद वाली याचिका ठुकराई

> छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्कूलों में मंत्रोच्चार को अनिवार्य बनाने वाले 12 जून के सरकारी आदेश के खिलाफ दायर याचिका को सबूत के अभाव में खारिज कर दिया, लेकिन भविष्य में ठोस सबूत मिलने पर नई याचिका का रास्ता खुला रखा है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-07-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/paryapta-pramana-na-milane-para-chhattisgarh-haikorta-ne-prarthana-vivada-vali-yachika-thukarai-4225 · **Language:** Hindi
**Tags:** छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, मंत्रोच्चार याचिका, स्कूल प्रार्थना आदेश, आर्टिकल 28, अब्दुल सलमान रिजवी, 12 जून आदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य के सरकारी स्कूलों में मंत्रों और प्रार्थनाओं के अनिवार्य पाठ के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि स्कूलों में मंत्रोच्चार को लेकर अभी तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है।

## अदालत ने क्या तर्क दिया
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने साफ किया कि याचिकाकर्ता ठोस प्रमाण पेश नहीं कर पाए, इसलिए मामले में हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं बनती। हालांकि अदालत ने यह रास्ता खुला रखा कि अगर आने वाले समय में किसी स्कूल में मंत्रोच्चार से जुड़े वीडियो, दस्तावेज या कोई अन्य ठोस सबूत मिलते हैं, या फिर ऐसी गतिविधियां वाकई होती दिखती हैं, तो पीड़ित पक्ष नई याचिका लेकर दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

## किसने और क्यों दायर की थी याचिका
यह याचिका पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिजवी ने दायर की थी। उनकी तरफ से अधिवक्ता डॉ. आमिर खान ने अदालत में पक्ष रखा। याचिका में छत्तीसगढ़ सरकार के आदेश को संविधान के खिलाफ बताया गया और उसे रद्द करने की मांग की गई थी। दलील दी गई कि संविधान का आर्टिकल 28 हर व्यक्ति को यह आजादी देता है कि वह राज्य द्वारा पोषित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा में हिस्सा लेने से इनकार कर सके। याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार का आदेश इसी संविधानिक अधिकार का उल्लंघन करता है।

## 12 जून को सरकार ने जारी किया था क्या आदेश
छत्तीसगढ़ सरकार ने 12 जून को एक आदेश जारी किया था, जिसमें स्कूलों में दिन में तीन बार कुछ गतिविधियां अनिवार्य रूप से कराने की बात कही गई थी। आदेश के मुताबिक सुबह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र के साथ-साथ महान हस्तियों की जीवनी का पाठ कराया जाना था। दोपहर में लंच के वक्त छात्रों को मिलकर भोजन मंत्र का पाठ करना था, जबकि शाम को स्कूल की छुट्टी के समय राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र पढ़ने का प्रावधान रखा गया था।

## सरकार बोली, अभी लागू ही नहीं हुई व्यवस्था
राज्य सरकार ने अदालत में दलील दी कि 12 जून का सर्कुलर जारी जरूर हुआ, लेकिन प्रदेश में यह व्यवस्था अभी तक जमीन पर लागू नहीं हुई है। सरकार के मुताबिक किसी भी सरकारी स्कूल में अब तक मंत्रोच्चार या प्रार्थना को अनिवार्य रूप से शुरू नहीं किया गया है। सरकार के इसी जवाब और ठोस सबूत के अभाव को आधार बनाकर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करने का फैसला सुनाया, हालांकि भविष्य में सबूत मिलने पर नई याचिका का रास्ता खुला छोड़ दिया।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह मामला दिखाता है कि सरकारी स्कूलों में धार्मिक गतिविधियों को लेकर आर्टिकल 28 के तहत मिले अधिकार का दावा कोर्ट में तभी टिकता है जब ठोस सबूत मौजूद हों, सिर्फ आदेश जारी होना काफी नहीं माना जाता।
- **छत्तीसगढ़ में:** राज्य के सरकारी स्कूलों में फिलहाल मंत्रोच्चार या प्रार्थना अनिवार्य नहीं की गई है, इसलिए छात्रों और अभिभावकों पर अभी कोई तत्काल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन भविष्य में लागू होने पर दोबारा कानूनी चुनौती दी जा सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिका क्यों खारिज की?
क्योंकि याचिकाकर्ता स्कूलों में मंत्रोच्चार वाकई हो रहा है, इसका कोई ठोस सबूत अदालत में पेश नहीं कर सके।

### 2. याचिका किसने दायर की थी?
पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल सलमान रिजवी ने, जिनकी ओर से अधिवक्ता डॉ. आमिर खान ने अदालत में पक्ष रखा।

### 3. 12 जून के आदेश में स्कूलों के लिए क्या कहा गया था?
सुबह की प्रार्थना में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और महान हस्तियों की जीवनी पढ़ने, लंच में भोजन मंत्र, और शाम को स्कूल छुट्टी के वक्त राज्य गीत, गायत्री मंत्र व शांति मंत्र पढ़ने की बात कही गई थी।

### 4. क्या यह आदेश अभी स्कूलों में लागू है?
नहीं, राज्य सरकार ने कोर्ट में बताया कि सर्कुलर जारी होने के बावजूद अभी किसी भी सरकारी स्कूल में यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है।

### 5. याचिका में कौन सा संविधानिक अधिकार बताया गया था?
आर्टिकल 28, जो राज्य द्वारा पोषित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा में भाग न लेने की आजादी देता है।

### 6. क्या इस मामले पर भविष्य में दोबारा याचिका दायर हो सकती है?
हां, हाईकोर्ट ने कहा है कि ठोस सबूत जैसे वीडियो या दस्तावेज मिलने पर नई याचिका दायर की जा सकती है।

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