रायगढ़ में फॉर्च्यून मैदा और जैन चुस्की चाय के खास बैच असुरक्षित घोषित, बिक्री पर लगी पाबंदी छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने लैब जांच में कीटनाशक के तय मानकों से अधिक अवशेष मिलने के बाद फॉर्च्यून मैदा और जैन चुस्की चाय के संबंधित बैच की बिक्री रोककर बाजार से स्टॉक वापस मंगाने का फरमान जारी किया है। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने फॉर्च्यून मैदा और जैन चुस्की चाय के विशिष्ट बैच को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित करार देते हुए उनकी बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रयोगशाला परीक्षण के दौरान इन दोनों खाद्य पदार्थों में कीटनाशक के अवशेष स्वीकार्य सीमा से कहीं अधिक पाए गए, जिसके चलते जनस्वास्थ्य के मद्देनजर यह कड़ा कदम उठाया गया है। विभाग ने व्यापारियों और वितरकों को प्रभावित माल की बिक्री फौरन रोकने और पूरे स्टॉक को अलग करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। बाजार से सारा प्रभावित स्टॉक वापस खींचने के निर्देश प्रशासन ने आपूर्ति श्रृंखला में शामिल सभी खुदरा और थोक व्यापारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित दोनों उत्पादों को अपनी दुकानों के रैक से तत्काल हटा दें। खाद्य विभाग के निर्देशों के तहत बाजार में पहुंच चुके इस पूरे माल को वापस मंगवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिन विशिष्ट लॉट पर यह कार्रवाई की गई है, उनमें फॉर्च्यून मैदा का बैच नंबर FAMD55O059A और जैन चुस्की चाय का बैच नंबर CH 653 175 शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह संदेहास्पद माल पूरी तरह बाजार से हट नहीं जाता, तब तक निगरानी दल सक्रिय रहेगा। फॉर्च्यून मैदा में निर्धारित सीमा से ज्यादा मिला क्लोरपाइरीफॉस जांच के दायरे में आए फॉर्च्यून मैदा का उत्पादन मेसर्स अनिरुद्ध फूड लिमिटेड द्वारा किया गया है, जिसकी निर्माण इकाई उत्तर प्रदेश में चंदौली तहसील के करवत गांव, पोस्ट दांडी में स्थित है। इस उत्पाद का बैच नंबर FAMD55O059A दर्ज है, जिसके निर्माण की तारीख 28 फरवरी 2026 और इस्तेमाल की अंतिम तारीख 27 अगस्त 2026 निर्धारित थी। भोपाल स्थित काली-लैब्स प्राइवेट लिमिटेड की 24 जुलाई 2026 की परीक्षण रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला उजागर हुआ। प्रयोगशाला विश्लेषण में पाया गया कि इस बैच में क्लोरपाइरीफॉस की मात्रा 0.014 पीपीएम थी, जबकि खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत इसकी अधिकतम अनुमेय सीमा 0.01 पीपीएम तय है। मानक से अधिक कीटनाशक अवशेष मिलने के आधार पर इस खेप को नियमों के तहत असुरक्षित श्रेणी में डाला गया। जैन चुस्की चाय में तय सीमा से अठारह गुना पाया गया एसीटामिप्रिड कार्रवाई का दूसरा बड़ा मामला जैन चुस्की चाय से जुड़ा है, जिसके बैच नंबर CH 653 175 के नमूनों में खतरनाक स्तर पर रासायनिक कीटनाशक पाया गया। इस उत्पाद का निर्माण और विपणन रायपुर के अमलीडीह स्थित आकृति विहार की फर्म मेसर्स जैन ट्रेडर्स द्वारा किया जाता है। कोलकाता की एक प्रयोगशाला द्वारा 30 जुलाई 2026 को जारी की गई जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक इस चाय में एसीटामिप्रिड की सांद्रता 0.18 पीपीएम दर्ज की गई, जबकि खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत इसकी तय सीमा केवल 0.01 पीपीएम है। इस तरह उत्पाद में इस कीटनाशक की मात्रा निर्धारित सीमा से 18 गुना अधिक पाई गई, जिसके बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इसे तत्काल प्रभाव से असुरक्षित घोषित कर दिया। इसका आप पर असर खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा दो प्रमुख रोजमर्रा के उत्पादों के विशिष्ट बैच को असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद उपभोक्ताओं और व्यापारियों दोनों पर सीधा असर पड़ा है। • भारत में: देशभर के उपभोक्ता अपने घरों में रखे फॉर्च्यून मैदा और संबंधित ब्रांड्स के पैकेट पर छपे बैच नंबर की जांच कर सकते हैं। यदि आपके पास तय बैच का उत्पाद है, तो उसके इस्तेमाल से बचें और संबंधित विक्रेता से संपर्क करें। • रायगढ़ में: रायगढ़ जिले और आसपास के किराना व्यापारियों को अपनी दुकानों से बैच नंबर FAMD55O059A का मैदा और बैच CH 653 175 की चाय तुरंत हटानी होगी। स्थानीय खरीदार इन दोनों उत्पादों के नए पैकेट लेते समय बैच नंबर अवश्य जांचें ताकि प्रभावित माल न खरीदें। • आपूर्ति श्रृंखला पर असर: खुदरा दुकानों से लेकर थोक डीलरों तक को यह असुरक्षित स्टॉक अलग रखकर निर्माता को वापस भेजना होगा। इससे संबंधित कंपनियों को बाजार से पूरा लॉट वापस मंगवाने की जटिल प्रक्रिया तुरंत पूरी करनी होगी। • स्वास्थ्य संबंधी एहतियात: जिन परिवारों ने हाल ही में यह चाय या मैदा खरीदा है, उन्हें पैकेट के विवरण का मिलान करना चाहिए। तय सीमा से अधिक कीटनाशक वाले खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह सख्त प्रशासनिक कदम प्रयोगशाला जांच में दोनों खाद्य उत्पादों के नमूनों में कीटनाशक रसायनों की मात्रा निर्धारित सुरक्षा मानकों से अधिक पाए जाने के बाद उठाया गया है। • मानक से अधिक क्लोरपाइरीफॉस की मौजूदगी: भोपाल की प्रयोगशाला जांच में फॉर्च्यून मैदा के नमूने में क्लोरपाइरीफॉस का स्तर 0.014 पीपीएम मिला, जबकि इसकी वैधानिक सीमा 0.01 पीपीएम तय है। नियमों से ज्यादा रासायनिक अवशेष पाए जाने के कारण इस बैच को सुरक्षित नहीं माना गया। • चाय में तय सीमा से अठारह गुना रसायन: कोलकाता की लैब रिपोर्ट में सामने आया कि रायपुर की जैन चुस्की चाय में एसीटामिप्रिड का स्तर 0.18 पीपीएम था। यह निर्धारित सीमा 0.01 पीपीएम से 18 गुना अधिक होने की वजह से सीधे तौर पर असुरक्षित श्रेणी में दर्ज हुआ। • असुरक्षित घोषित करने की कानूनी प्रक्रिया: खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने दोनों परीक्षण रिपोर्टों के आधार पर जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए इन विशिष्ट लॉट की बिक्री बंद कर बाजार से माल वापस बुलाने का आदेश दिया। सवाल-जवाब 1. रायगढ़ में किन दो उत्पादों के बैच पर पाबंदी लगाई गई है? प्रशासन ने फॉर्च्यून मैदा के बैच नंबर FAMD55O059A और जैन चुस्की चाय के बैच नंबर CH 653 175 की बिक्री पर रोक लगाई है। 2. फॉर्च्यून मैदा के किस घटक में गड़बड़ी पाई गई? भोपाल की लैब रिपोर्ट के अनुसार इसमें क्लोरपाइरीफॉस की मात्रा 0.014 पीपीएम मिली, जो तय सीमा 0.01 पीपीएम से अधिक है। 3. जैन चुस्की चाय में कौन सा रसायन अत्यधिक मात्रा में मिला? कोलकाता लैब की जांच में चाय में एसीटामिप्रिड 0.18 पीपीएम मिला, जो अनुमेय सीमा 0.01 पीपीएम की तुलना में 18 गुना ज्यादा है। 4. फॉर्च्यून मैदा के इस बैच का निर्माण किसने और कहां किया था? इसका निर्माण उत्तर प्रदेश के चंदौली स्थित करवत गांव में मेसर्स अनिरुद्ध फूड लिमिटेड द्वारा किया गया था। 5. जैन चुस्की चाय की निर्माता और विक्रेता फर्म कौन सी है? इस उत्पाद की निर्माण और बिक्री करने वाली फर्म रायपुर के अमलीडीह स्थित मेसर्स जैन ट्रेडर्स है। 6. खाद्य विभाग ने व्यापारियों को क्या निर्देश दिए हैं? खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने दोनों उत्पादों की बिक्री फौरन रोकने और प्रभावित स्टॉक को बाजार से तुरंत वापस मंगाने का आदेश दिया है। https://trendkia.com/chhattisgarh/raigarh-men-fortune-maida-aura-jain-chuski-tea-ke-khasa-baicha-asurakshita-ghoshita-bikri-para-lagi-pabndi-40414 TrendKia — Har trend, sabse pehle.