रायगढ़ में जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र पर अवैध कॉलोनियों का निर्माण, 120 कब्जाधारियों को नोटिस छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में कोकड़ी तराई जलाशय की अधिग्रहित जमीन पर अवैध प्लॉटिंग कर मकान खड़े कर दिए गए हैं, जिस पर प्रशासन ने 120 से अधिक लोगों को नोटिस जारी किए हैं। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में जल संरक्षण के लिए अधिग्रहित की गई सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जे और अनधिकृत निर्माण का गंभीर मामला सामने आया है। कोकड़ी तराई जलाशय के डूब और कैचमेंट क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां विकसित कर दी गई हैं। करीब 48 साल पहले किसानों से ली गई इस सरकारी भूमि पर भू-माफियाओं ने अवैध प्लॉटिंग का दायरा तेजी से बढ़ाया है, जिसके चलते वर्तमान में 10 एकड़ से अधिक रकबे पर पक्के मकान और भव्य इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। 1978 में 108 किसानों से हुआ था 72.455 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण इस पूरे मामले की जड़ें दशकों पुराने भूमि रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों से जुड़ी हैं। वर्ष 1978 में सरकार ने कोकड़ी तराई जलाशय के निर्माण और जल संचयन के उद्देश्य से चार गांवों कोकड़ीतराई, चिराईपानी, उच्चभिट्ठी और परसदा के कुल 108 किसानों से 72.455 हेक्टेयर भूमि का विधिवत अधिग्रहण किया था। विडंबना यह रही कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कई खसरों को आधिकारिक तौर पर जल संसाधन विभाग के नाम दर्ज नहीं कराया गया। सरकारी तंत्र की इसी लापरवाही और राजस्व रिकॉर्ड में मौजूद कमियों का फायदा उठाकर भू-माफियाओं ने इस अधिग्रहित जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े कर अवैध खरीद-फरोख्त शुरू कर दी। 2 लाख रुपये डिसमिल तक बिके प्लॉट और धड़ल्ले से हुआ निर्माण मौके पर स्थिति यह है कि जलाशय के डूब क्षेत्र को व्यवस्थित रूप से आवासी प्लॉटों में बांट दिया गया है। कई हिस्सों में निर्माण कार्य तेजी से जारी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग मकान बनाकर वहां पहले ही बस चुके हैं। स्थानीय स्तर पर जमीन की मांग का फायदा उठाते हुए भू-माफियाओं ने एक डिसमिल जमीन के लिए 2 लाख रुपये तक की कीमत वसूली है। छोटे-छोटे भूखंडों के रूप में इस जमीन को बेचकर एक पूरी अनधिकृत बस्ती बसा दी गई है, जिससे जलाशय का प्राकृतिक जल भराव क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दर्जनों गांवों की सिंचाई पर मंडराया संकट कोकड़ी तराई जलाशय आज भी इलाके की कृषि व्यवस्था का एक अहम आधार है। इस जलाशय से उच्चभिट्ठी, कीरीतमल, चारभाठा, पंडरीपानी और आसपास के दर्जनों गांवों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचता है। बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद विशेष रूप से गर्मियों के दौरान किसान अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पूरी तरह इसी जलाशय पर आश्रित रहते हैं। कैचमेंट एरिया में हो रहे अंधाधुंध कंक्रीट निर्माण की वजह से जलाशय की जल धारण क्षमता पर विपरीत असर पड़ने लगा है, जिससे स्थानीय किसानों में गहरी चिंता व्याप्त है। जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के बाद 120 लोगों को जारी हुए कड़े नोटिस मामले के तूल पकड़ने पर प्रशासनिक स्तर पर हलचल शुरू हुई है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी होमेश नायक ने स्पष्ट किया कि जलाशय की भूमि पर हुए अतिक्रमण और अनधिकृत प्लॉटिंग की पूरी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंप दी गई है। इस अवैध गतिविधि में लिप्त और जमीन पर काबिज 120 से ज्यादा लोगों को कड़े नोटिस जारी किए गए हैं। वर्तमान में यह प्रकरण तहसील स्तर पर विचाराधीन है, जहां दस्तावेजों की पड़ताल और सुनवाई के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसका आप पर असर जलाशय के डूब क्षेत्र में अनधिकृत जमीन खरीदने वाले लोगों पर बेदखली और कानूनी कार्रवाई की सीधी मार पड़ सकती है, जबकि आसपास के किसानों के लिए सिंचाई का संकट बढ़ गया है। • भारत में: जल संरक्षण के लिए अधिग्रहित जमीनों के राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त न होने से देश भर में सरकारी जलस्रोतों पर अतिक्रमण का खतरा गहरा रहा है। आम खरीदारों को बिना पुख्ता राजस्व जांच के खरीदी गई संपत्तियों पर गाज गिरने का जोखिम हमेशा बना रहता है। • रायगढ़ में: कोकड़ी तराई बांध क्षेत्र में मकान बनाने वाले 120 से अधिक परिवारों पर तहसील स्तर से ध्वस्तीकरण या बेदखली की कार्रवाई हो सकती है। उच्चभिट्ठी, कीरीतमल, चारभाठा और पंडरीपानी के किसानों को आने वाले गर्मी के मौसम में खेतों की सिंचाई के लिए पानी की गंभीर किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। • जमीन खरीदारों के लिए: 2 लाख रुपये प्रति डिसमिल की दर से अनधिकृत प्लॉट खरीदने वालों की गाढ़ी कमाई कानूनी फेर में फंस चुकी है। तहसील न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण इस विवादित क्षेत्र में नई रजिस्ट्री और निर्माण पर पूरी तरह रोक लग सकती है। • कृषि व्यवस्था पर असर: जलाशय के कैचमेंट एरिया में कंक्रीट का फैलाव जल भंडारण क्षमता को लगातार घटा रहा है। इससे क्षेत्र के दर्जनों गांवों की कृषि उपज और भूजल स्तर दोनों पर दीर्घकालिक नकारात्मक असर पड़ेगा। ऐसा क्यों हुआ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा 48 वर्ष पुराने भूमि अधिग्रहण के बाद भी राजस्व रिकॉर्ड में विभाग का नाम दर्ज न कराने की चूक के चलते यह स्थिति बनी। • राजस्व रिकॉर्ड में सुधार की विफलता: वर्ष 1978 में 108 किसानों से 72.455 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित करने के बाद भी कई खसरे जल संसाधन विभाग के नाम दर्ज नहीं किए गए। राजस्व अभिलेखों में सरकारी विभाग का नाम न होने के कारण जमीन के स्वामित्व में कानूनी अस्पष्टता बनी रही। • भू-माफियाओं द्वारा दस्तावेजी खामियों का दुरुपयोग: रिकॉर्ड की इस कमी का फायदा उठाकर संपत्ति डीलरों ने जलाशय की डूब भूमि को निजी संपत्ति की तरह छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित किया। उन्होंने आकर्षक दामों पर आम नागरिकों को बिना वैध अनुमति के अवैध प्लॉट बेच दिए। • निगरानी तंत्र की दीर्घकालिक सुस्ती: कैचमेंट क्षेत्र में 10 एकड़ से अधिक जमीन पर पक्के निर्माण होते रहे, लेकिन प्रारंभिक चरण में निर्माण रोकने के लिए कोई त्वरित कदम नहीं उठाया गया। जब तक जल संसाधन विभाग ने सक्रियता दिखाई, तब तक वहां एक पूरी आवासीय बस्ती बस चुकी थी। सवाल-जवाब 1. यह मामला किस जलाशय और किस जिले से संबंधित है? यह मामला छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्थित कोकड़ी तराई जलाशय के डूब और कैचमेंट क्षेत्र से संबंधित है। 2. जलाशय के कितने हिस्से पर अवैध निर्माण हुआ है? वर्तमान में जलाशय के 10 एकड़ से भी अधिक अधिग्रहित क्षेत्र पर अवैध मकान और प्लॉट बनाए गए हैं। 3. जलाशय के लिए जमीन का अधिग्रहण कब और कितने किसानों से किया गया था? वर्ष 1978 में कोकड़ीतराई, चिराईपानी, उच्चभिट्ठी और परसदा गांव के 108 किसानों से कुल 72.455 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी। 4. जलाशय क्षेत्र में भू-माफिया किस दर पर प्लॉट बेच रहे थे? भू-माफियाओं द्वारा एक डिसमिल जमीन 2 लाख रुपये तक की दर से बेची जा रही थी। 5. इस जलाशय से किन गांवों की खेतों में सिंचाई होती है? इस जलाशय के पानी से उच्चभिट्ठी, कीरीतमल, चारभाठा, पंडरीपानी और आसपास के दर्जनों गांवों के खेतों की सिंचाई की जाती है। 6. प्रशासन ने अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की है? जल संसाधन विभाग ने विस्तृत जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपकर 120 से ज्यादा कब्जाधारियों को कड़े नोटिस जारी किए हैं, और मामला तहसील स्तर पर विचाराधीन है। https://trendkia.com/chhattisgarh/raigarh-men-kokritarai-reservoir-ke-kaichamenta-kshetra-para-avaidha-koloniyon-ka-nirmana-120-kabjadhariyon-ko-notisa-40891 TrendKia — Har trend, sabse pehle.