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  "title": "रायपुर में 54,180 छात्रों की अपार आईडी अधर में, शिक्षा विभाग ने दी स्कूलों की मान्यता रद्द करने की चेतावनी",
  "summary": "रायपुर में 54,180 बच्चों की डिजिटल अपार आईडी न बनने पर स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी स्कूलों को तीन दिन की अंतिम मोहलत दी है। तय समय में काम पूरा न करने वाले निजी स्कूलों की मान्यता खत्म करने और चालू सत्र को शून्य वर्ष घोषित करने की चेतावनी दी गई है।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में स्कूली बच्चों के डिजिटल शैक्षणिक रिकॉर्ड तैयार करने की सरकारी मुहिम भारी रुकावटों का सामना कर रही है। जिले भर में लगातार जारी किए गए प्रशासनिक निर्देशों के बाद भी 54,180 छात्र-छात्राओं की अपार (APAAR) आईडी बनाने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। स्कूली स्तर पर बरती जा रही इस सुस्ती पर स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने एक समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान गहरी नाराजगी व्यक्त की। राज्य स्तर से मिले कड़े संकेतों के फौरन बाद रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं और उन्होंने रायपुर के सभी शासकीय, अनुदान प्राप्त, निजी तथा मदरसा संस्थानों के प्राचार्यों और प्रबंधकों के लिए तीन दिन का कड़ा अल्टीमेटम तय कर दिया है।\n\nप्रशासन का कड़ा रुख और मान्यता समाप्ति की चेतावनी\nजिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक फरमान में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित तीन दिनों के भीतर शत-प्रतिशत नामांकित विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जाए। इसके साथ ही संस्था प्रमुखों को कार्य पूर्णता का औपचारिक प्रमाण पत्र जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा में संतोषजनक प्रगति नहीं दिखी, तो लापरवाह शैक्षणिक संस्थानों के लिए वर्तमान शैक्षणिक सत्र को 'शून्य वर्ष' घोषित करने का प्रस्ताव उच्च स्तर पर भेजा जाएगा। इसके अलावा नियम न मानने वाले निजी विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने जैसी कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।\n\nजिले के आंकड़े और निजी शिक्षण संस्थानों का भारी बैकलॉग\nशिक्षा विभाग के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो रायपुर जिले में कुल 5,40,869 छात्र नामांकित हैं। इस कुल संख्या में से 3,18,604 विद्यार्थी निजी स्कूलों और मदरसों में शिक्षा ले रहे हैं, जबकि 2,22,265 छात्र सरकारी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों में दर्ज हैं। संपूर्ण जिले में अब तक 93 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की डिजिटल आईडी तैयार की जा चुकी है, लेकिन बची हुई पेंडेंसी में सबसे बड़ा हिस्सा निजी स्कूलों की लापरवाही के कारण अटका हुआ है। औसत के लिहाज से जिले के लगभग प्रत्येक 10 में से 1 विद्यार्थी का रिकॉर्ड अब भी अधूरा पड़ा है।\n\nशहरी इलाके की चुनौती, आधार मिसमैच और सहमति पत्र की समस्या\nरायपुर के शहरी क्षेत्र में यह पेंडेंसी सबसे अधिक गंभीर रूप में सामने आई है। शहर के कुल 2,34,828 नामांकित बच्चों में से 1.73 लाख से अधिक छात्र निजी और मदरसा संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं। इस देरी पर अपना पक्ष रखते हुए निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि आधार कार्ड और स्कूल के दाखिला रजिस्टर के विवरणों में भिन्नता होना सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। छात्रों के नाम की स्पेलिंग, जन्म तिथि या अन्य विवरणों के न मिलने यानी आधार मिसमैच के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर प्रक्रिया अटक जाती है। इसके अतिरिक्त कई पालकों द्वारा समय पर अनिवार्य सहमति पत्र जमा न कराए जाने से भी आईडी बनाने की रफ्तार सुस्त पड़ी है।\n\nइसका आप पर असर\nरायपुर के 54 हजार से अधिक विद्यार्थियों की अपार आईडी समय पर न बनने से उनकी अगली कक्षाओं के डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित निजी स्कूलों की सरकारी मान्यता पर सीधा संकट खड़ा हो गया है।\n\n• रायपुर में: रायपुर के सरकारी और निजी स्कूलों को तीन दिनों के भीतर लंबित 54,180 विद्यार्थियों का कार्य पूरा करना होगा। ऐसा न करने पर लापरवाह निजी स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है और सत्र को शून्य वर्ष घोषित किया जा सकता है।\n• अभिभावकों पर असर: जिन पालकों ने सहमति पत्र जमा नहीं किया है उन्हें तुरंत स्कूल में फॉर्म देना होगा। इसके अलावा बच्चे के आधार और स्कूल रिकॉर्ड में नाम या जन्म तिथि का अंतर होने पर उसे फौरन सुधरवाना पड़ेगा।\n• विद्यार्थियों के रिकॉर्ड पर असर: आईडी पूरी न होने पर छात्रों का शैक्षणिक डेटा राष्ट्रीय डिजिटल पोर्टल से नहीं जुड़ पाएगा। इसका असर छात्रवृत्ति, स्थानांतरण और भविष्य के डिजिटल प्रमाण पत्रों की पुष्टि पर पड़ सकता है।\n• स्कूल प्रबंधन पर जिम्मेदारी: स्कूलों को शत-प्रतिशत काम पूरा कर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। तय समय में सत्यापन न देने पर स्कूल प्रशासन को सीधी विभागीय कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nरायपुर में 54 हजार से अधिक छात्रों की अपार आईडी अधर में लटकने के पीछे स्कूलों की धीमी गति के साथ-साथ आधार डेटा के मिलान में आ रही तकनीकी दिक्कतें प्रमुख कारण हैं।\n\n• आधार रिकॉर्ड में विसंगति: छात्र के आधार कार्ड और विद्यालय के आधिकारिक दाखिला रजिस्टर में दर्ज नाम या जन्म तिथि की स्पेलिंग अलग होने के कारण पोर्टल पर डेटा सत्यापित नहीं हो पा रहा है। इस तकनीकी अड़चन के कारण हजारों आवेदन बीच में ही अटक गए हैं।\n• पालकों की ओर से सहमति पत्र में देरी: डिजिटल आईडी तैयार करने के लिए अभिभावकों का लिखित सहमति पत्र अनिवार्य होता है। कई अभिभावकों द्वारा समय पर फॉर्म जमा न करने से प्रक्रिया अधूरी रह गई।\n• प्रशासनिक समीक्षा में ढिलाई उजागर: स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने जब उच्च स्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रगति की समीक्षा की, तब रायपुर जिले का यह बड़ा बैकलॉग सामने आया। इसके बाद डीईओ ने कठोर समयसीमा तय करते हुए कार्रवाई की चेतावनी जारी की।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रायपुर में कितने छात्रों की अपार आईडी का काम अटका हुआ है?\nरायपुर जिले में कुल 54,180 विद्यार्थियों की अपार आईडी अब तक नहीं बन सकी है।\n\n2. शिक्षा विभाग ने स्कूलों को कार्य पूरा करने के लिए कितनी मोहलत दी है?\nजिला शिक्षा अधिकारी ने सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 3 दिनों का अंतिम अल्टीमेटम दिया है।\n\n3. तय समय में आईडी न बनने पर स्कूलों पर क्या कार्रवाई होगी?\nलापरवाह निजी स्कूलों की मान्यता समाप्त की जा सकती है और चालू शैक्षणिक सत्र को शून्य वर्ष घोषित करने की सिफारिश की जाएगी।\n\n4. आईडी बनाने की प्रक्रिया में सबसे बड़ी तकनीकी बाधा क्या आ रही है?\nछात्रों के आधार कार्ड और स्कूल रिकॉर्ड के विवरणों में अंतर यानी आधार मिसमैच और पालकों के सहमति पत्र न मिलना मुख्य कारण हैं।\n\n5. रायपुर जिले में कुल कितने छात्र नामांकित हैं और कितने प्रतिशत काम पूरा हुआ है?\nजिले में कुल 5,40,869 छात्र दर्ज हैं और 93 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की अपार आईडी बन चुकी है।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-10-07",
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