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  "type": "article",
  "title": "रायपुर में बीमारी ठीक करने के बहाने महिला से 15 तोला सोना और नकदी ऐंठी, 3 फर्जी साधु फरार",
  "summary": "छत्तीसगढ़ के रायपुर में तीन फर्जी बाबाओं ने घरेलू व शारीरिक कष्ट दूर करने का झांसा देकर महिला से 15 तोला सोना और नकदी हड़प ली। पुलिस अब मोबाइल लोकेशन और अंतरराज्यीय कड़ियों की जांच में जुटी है।",
  "content": "छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के फाफाडीह इलाके में तंत्र-मंत्र और चमत्कारी इलाज के नाम पर एक गृहिणी से भारी ठगी का मामला सामने आया है। तीन अज्ञात जालसाजों ने साधु के वेश में महिला को झांसा देकर करीब 15 तोला सोने के जेवरात और नकदी ऐंठ ली। आरोपियों ने पीड़िता के परिवार में अनहोनी का भय दिखाकर कई महीनों तक यह खेल जारी रखा और अंततः कीमती सामान समेटकर फरार हो गए।\n\nबीमारी और पारिवारिक कष्ट मिटाने का दिया झांसा\nयह पूरा मामला मार्च के महीने में शुरू हुआ था। फाफाडीह क्षेत्र में रहने वाले जसवंत परमार के घर तीन संदिग्ध साधु पहुंचे। उनकी बोलचाल राजस्थानी शैली की थी। घर पर जसवंत परमार की पत्नी नैना मौजूद थीं। तीनों में से एक व्यक्ति ने महिला की आंखों की तकलीफ और एक पुरानी बीमारी से जुड़े कुछ बेहद निजी विवरण बताए। वह बातें पूरी तरह सटीक निकलीं, जिससे नैना को यकीन हो गया कि सामने खड़े लोग कोई चमत्कारी सिद्ध पुरुष हैं।\n\nइसी भरोसे की आड़ में तीनों ने दावा किया कि वे विशेष पूजा-अनुष्ठान करके उनकी सभी शारीरिक और पारिवारिक परेशानियां हमेशा के लिए समाप्त कर देंगे। अनुष्ठान की शुरुआत कराने के नाम पर उन्होंने सबसे पहले एक सोने की अंगूठी और 9 हजार रुपये नकद ले लिए। इसके बाद वे वहां से चले गए, लेकिन ठगी का यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ।\n\nडर और अनुष्ठान की आड़ में महीनों तक वसूले जेवरात\nशुरुआती भेंट के लगभग 10 से 15 दिनों बाद वे तीनों फिर घर पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि बाधाएं काफी गहरी हैं और इसके लिए बड़ा अनुष्ठान करना होगा, जिसके एवज में और सोने की मांग की गई। जालसाजों ने महिला को सख्त हिदायत दी कि इस पूजा के बारे में घर के किसी भी सदस्य या बाहरी व्यक्ति को नहीं बताना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस रहस्य को उजागर किया गया तो परिवार पर भारी अनर्थ टूट पड़ेगा।\n\nमार्च से लेकर सितंबर तक के छह महीनों के दौरान ये तथाकथित साधु बार-बार घर आते-जाते रहे। अनिष्ट के खौफ और विश्वास के कारण महिला ने धीरे-धीरे सोने की चेन, हार और कंगन समेत कुल 15 तोला स्वर्ण आभूषण उन्हें सौंप दिए। सितंबर माह में जब आरोपियों ने फोन पर संपर्क करके और अधिक सोने तथा पैसों की मांग शुरू कर दी, तब पीड़िता को ठगे जाने का संदेह हुआ।\n\nपति को बताई बात तो दर्ज हुई प्राथमिकी, गिरोह की तलाश जारी\nलगातार बढ़ते दबाव के बाद नैना ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने पति जसवंत परमार को दी। सच्चाई सामने आते ही परिजनों ने सीधे पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया और आरोपियों की धरपकड़ के प्रयास शुरू कर दिए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपियों द्वारा उपयोग किए जा रहे सभी मोबाइल नंबर फिलहाल बंद आ रहे हैं।\n\nपुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या यह गिरोह किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का हिस्सा है। जांच में पाया गया कि राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश तथा उज्जैन जैसे धार्मिक व अन्य स्थलों पर सक्रिय गिरोह भी लोगों की कमजोरियों और अंधविश्वास का लाभ उठाकर इसी शैली में ठगी करते हैं। पुलिस अब तकनीकी निगरानी, कॉल डिटेल और आसपास के संभावित सुरागों के माध्यम से इन फरार जालसाजों का पता लगाने में जुटी है।\n\nइसका आप पर असर\nअज्ञात लोगों द्वारा चमत्कारी इलाज या घरेलू संकट दूर करने के दावों पर भरोसा करना भारी वित्तीय नुकसान और सुरक्षा जोखिम का कारण बन सकता है।\n\n• नागरिकों की सतर्कता: घर के दरवाजे पर आने वाले अज्ञात साधुओं, ज्योतिषियों या तांत्रिकों के दावों पर बिल्कुल भरोसा न करें। कोई भी व्यक्ति यदि इलाज या कष्ट निवारण के नाम पर गहने या नकदी मांगे, तो तुरंत मना कर दें।\n• पारिवारिक संवाद: किसी भी बाहरी व्यक्ति द्वारा अनुष्ठान को गोपनीय रखने या अनहोनी का डर दिखाने पर तुरंत परिवार से चर्चा करें। डर के दबाव में आकर कभी भी गुप्त रूप से धन या जेवरात किसी को न सौंपें।\n• पुलिस को सूचना: ऐसे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति के आने पर स्थानीय पुलिस थाने या हेल्पलाइन पर तुरंत जानकारी दें। समय रहते सूचना देने से ऐसे अंतरराज्यीय गिरोहों को पकड़ने में मदद मिलती है।\n• रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में: फाफाडीह और अन्य कॉलोनियों के निवासियों को विशेष रूप से अनजान फेरीवालों व साधु वेशधारियों की पहचान जांचने की सलाह दी जाती है। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस चौकी को दी जानी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह ठगी अंधविश्वास, स्वास्थ्य संबंधी चिंता और अनहोनी के मनोवैज्ञानिक डर का फायदा उठाकर की गई।\n\n• कमजोरी का फायदा: आरोपियों ने पीड़िता की पुरानी बीमारी और आंखों की समस्या जैसी निजी जानकारी का चतुराई से इस्तेमाल किया। इससे पीड़िता को उनके चमत्कारी होने का झूठा विश्वास हो गया।\n• गोपनीयता और भय की रणनीति: ठगों ने महिला के मन में यह खौफ भर दिया कि पूजा की बात उजागर होने पर परिवार में बड़ा अनर्थ हो जाएगा। इस डर के कारण पीड़िता ने महीनों तक परिवार के किसी सदस्य को इसकी भनक नहीं लगने दी।\n• संगठित गिरोह की कार्यशैली: यह कोई छिटपुट वारदात नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय गिरोहों द्वारा अपनाई जाने वाली एक परखी हुई चाल है। राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उज्जैन जैसे इलाकों में भी ऐसे गिरोह धर्म और अंधविश्वास की आड़ में लोगों को शिकार बनाते रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रायपुर के फाफाडीह में महिला के साथ क्या घटना हुई?\nतीन फर्जी बाबाओं ने पुरानी बीमारी और पारिवारिक कष्ट दूर करने के बहाने महिला से करीब 15 तोला सोना और नकदी ऐंठ ली।\n\n2. महिला को उन पर भरोसा कैसे हुआ?\nआरोपियों में से एक ने महिला की आंखों की समस्या और पुरानी बीमारी से जुड़ी सटीक बातें बता दी थीं, जिससे महिला उन्हें चमत्कारी समझ बैठी।\n\n3. ठगी का यह खेल कब से कब तक चला?\nयह सिलसिला मार्च के महीने में शुरू हुआ था और सितंबर तक चला, जब आरोपियों ने लगातार फोन कर और पैसे मांगने शुरू किए।\n\n4. महिला ने अपने परिवार को पहले क्यों नहीं बताया?\nआरोपियों ने महिला को डरा दिया था कि अगर यह बात किसी को बताई तो परिवार पर बहुत बड़ा अनर्थ हो जाएगा।\n\n5. पुलिस जांच में अब तक क्या सामने आया है?\nपुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, हालांकि आरोपियों के मोबाइल फोन बंद आ रहे हैं और अंतरराज्यीय गिरोह के पैटर्न पर उनकी तलाश की जा रही है।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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    "रायपुर अपराध",
    "फर्जी बाबा ठगी",
    "फाफाडीह",
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    "छत्तीसगढ़ पुलिस",
    "अंधविश्वास ठगी"
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  "site": "TrendKia"
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