रायपुर में कचरा फेंकने पर ₹25,000 तक का चालान, 160 जगहों पर कैमरों की निगरानी रायपुर नगर निगम 160 प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाएगा ताकि खुले में कचरा फेंकने वालों और वाहनों से गंदगी फैलाने वालों की पहचान हो सके। उल्लंघन पर ₹200 से ₹25,000 तक का चालान लगेगा, और फुटेज को 30 दिन तक सुरक्षित रखा जाएगा। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सार्वजनिक जगहों और सड़क किनारे कचरा फेंकने वालों के खिलाफ नगर निगम ने कैमरा आधारित कार्रवाई की तैयारी कर ली है। रायपुर नगर निगम शहर के 160 अहम स्थानों पर उन्नत तकनीक वाले सीसीटीवी कैमरे लगाएगा। इनकी मदद से पैदल कचरा फेंकने वालों और दो पहिया या चार पहिया वाहनों से गंदगी फैलाने वालों की पहचान तुरंत की जाएगी। नियम तोड़ने पर जुर्माना ₹200 से लेकर ₹25,000 तक हो सकता है। 160 स्थानों पर कड़ी निगरानी कैमरे उन चौराहों और इलाकों में लगेंगे जहां लोग बार बार कचरा डंप करते हैं या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी की शिकायत रहती है। नवीन मार्केट, कालीबाड़ी चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास, पंडरी, आमापारा, मौदहापारा और शास्त्री बाजार सहित कुल 160 प्रमुख पॉइंटों को चिह्नित किया गया है। इस व्यवस्था का मकसद सिर्फ कचरा देखना नहीं, बल्कि उल्लंघन करने वाले की पहचान कर चालानी कार्रवाई को मजबूत बनाना है। फुटेज से चालान तक का सिलसिला यदि कोई व्यक्ति दो पहिया या चार पहिया वाहन से कचरा डंप करके निकल जाता है, तो कैमरा उसके नंबर को रिकॉर्ड करेगा। फिर आरटीओ से मिली जानकारी के आधार पर वाहन मालिक का पता लगाया जाएगा। फुटेज संबंधित जोन के स्वास्थ्य अधिकारी को भेजी जाएगी, जहां से चालानी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। जुर्माने की राशि अपराध की गंभीरता के अनुसार ₹200 से ₹25,000 के बीच तय होगी। बाजारों में दुकानें बंद होने के बाद नुक्कड़ों पर कचरा फेंके जाने की शिकायतें अक्सर आती हैं। पूछताछ में लोग कई बार मामला अस्वीकार कर देते हैं। अब सीसीटीवी रिकॉर्डिंग कानूनी सबूत के रूप में काम करेगी। सबूत के तौर पर रिकॉर्ड एक महीने, यानी 30 दिन, तक सुरक्षित रहेगा। इससे कार्रवाई के लिए पुख्ता सामग्री उपलब्ध रहेगी। टेंडर और कंट्रोल रूम से रखरखाव नगर निगम ने इस व्यवस्था को चलाने और उसका रखरखाव करने के लिए करीब ₹90 लाख का टेंडर निकाला है। ठेका मिलने वाली कंपनी आगामी तीन वर्षों में कैमरों का रखरखाव, तकनीकी खराबी दूर करना और डेटा रिचार्ज संभालेगी। फुटेज की लाइव निगरानी के लिए स्मार्ट सिटी के पुराने कार्यालय में एक खास कंट्रोल रूम तैयार किया जा रहा है। कैमरे बदलेंगे और काम शुरू होगा अपर आयुक्त विनोद पांडेय ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है और चुनी गई कंपनी को काम शुरू करने का आदेश मिल चुका है। अब क्षेत्र में कैमरे लगाने की कार्रवाई जल्द शुरू होगी। जिस जगह कैमरा लगने के बाद उल्लंघन रुक जाए, वहां का उपकरण शहर के किसी दूसरे समस्याग्रस्त स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। नगर निगम को उम्मीद है कि इससे शहर की स्वच्छता रैंकिंग बेहतर होगी और सफाई के बाद फिर उभरने वाले कचरा पॉइंटों से स्थायी राहत मिलेगी। इसका आप पर असर व्यवस्था लागू होने पर रायपुर में कचरा फेंकने के मामले में कैमरे का सबूत चालानी कार्रवाई को सहारा देगा। • भारत में: यह व्यवस्था रायपुर तक लागू है, इसलिए देश के अन्य शहरों में यही ₹200 से ₹25,000 का चालान लागू होगा, ऐसा नहीं माना जा सकता। वहां के स्थानीय नगर निकाय के नियम देखने होंगे। • रायपुर में: पैदल कचरा फेंकने या वाहन से गंदगी फैलाने पर ₹200 से ₹25,000 तक का जुर्माना लग सकता है। राशि उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार तय होगी। • वाहन चालकों के लिए: दो पहिया या चार पहिया वाहन से कचरा डंप करने पर कैमरा नंबर कैद करेगा। आरटीओ की जानकारी से मालिक की पहचान हो सकती है। • सबूत की मुद़त: रिकॉर्डिंग 30 दिन तक सुरक्षित रखी जाएगी। इसे चालानी कार्रवाई में कानूनी सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। • दुकानों और बाजारों के लिए: शाम को दुकानें बंद होने के बाद कचरा फेंकने की शिकायतों पर अब रिकॉर्डिंग सबूत होगी। दुकानदारों और स्थानीय लोगों को सार्वजनिक स्थान साफ रखने होंगे। ऐसा क्यों हुआ यह कार्रवाई सीधे तौर पर रायपुर में सार्वजनिक जगहों और सड़क किनारे कचरा फेंकने की लगातार शिकायतों से जुड़ी है। नगर निगम के सामने चुनौती केवल कचरा हटाने की नहीं, बल्कि वहीं स्थानों पर गंदगी फिर से जमा होने और लोगों के पूछताछ में इनकार कर देने की भी है। इसी कारण कैमरों को रोकथाम और सबूत, दोनों के लिए लगाने की योजना है। • दोहराव वाली समस्या: शहर के बड़े नुक्कड़ और ऐसे इलाके जहां कचरा बार बार डंप होता है, योजना के केंद्र में हैं। इसी लिए 160 प्रमुख पॉइंटों को अलग से चिह्नित किया गया है। • शाम की शिकायतें: बाजारों में दुकानें बंद होने के बाद नुक्कड़ों पर कचरा फेंके जाने की शिकायतें अक्सर मिलती हैं। लोग पूछताछ में कई बार इनकार कर देते हैं, इसलिए रिकॉर्डिंग को सबूत की जरूरत मानी गई है। • पहचान की कड़ी: वाहन से कचरा फेंककर निकल जाने पर नंबर कैद हो जाता है। आरटीओ की जानकारी और फुटेज को मिलाकर मालिक तक कार्रवाई पहुंचाई जा सकती है। • सबूत की उपलब्धता: रिकॉर्डिंग 30 दिन तक सुरक्षित रखने से चालान प्रक्रिया के लिए समय मिलता है। इस अवधि में घटना का पुख्ता रिकॉर्ड उपलब्ध रहता है। • अगला चरण: टेंडर पूरा होने और काम का आदेश मिलने के बाद कैमरे लगाने का काम जल्द शुरू होगा। जिस जगह उल्लंघन बंद होगा, वहां का कैमरा दूसरी समस्याग्रस्त जगह पर शिफ्ट किया जाएगा। सवाल-जवाब 1. रायपुर में सीसीटीवी कैमरे कहां लगेंगे? नगर निगम ने 160 प्रमुख स्थान चुने हैं। शास्त्री बाजार, मौदहापारा, आमापारा, पंडरी, रेलवे स्टेशन के आसपास, कालीबाड़ी चौक और नवीन मार्केट शामिल हैं। 2. कचरा फेंकने पर कितना जुर्माना लगेगा? उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार ₹200 से ₹25,000 तक का जुर्माना लगेगा। 3. वाहन से कचरा फेंकने वाले की पहचान कैसे होगी? कैमरा गाड़ी का नंबर रिकॉर्ड करेगा और आरटीओ की जानकारी से मालिक का पता लगाया जाएगा। 4. फुटेज कितने समय तक सुरक्षित रहेगी? रिकॉर्डिंग एक महीने, यानी 30 दिन, तक सुरक्षित रखी जाएगी। 5. चालानी कार्रवाई कौन आगे बढ़ाएगा? संबंधित जोन के स्वास्थ्य अधिकारी को फुटेज भेजी जाएगी और वहीं से कार्रवाई होगी। 6. इस परियोजना के लिए कितना खर्च और कितनी अवधि तय है? नगर निगम ने करीब ₹90 लाख का टेंडर जारी किया है। ठेका पाने वाली कंपनी अगले तीन वर्षों तक रखरखाव संभालेगी। 7. कैमरे लगने के बाद क्या होगा? टेंडर प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है और चुनी गई कंपनी को काम का आदेश मिल चुका है। कैमरे जल्द लगाए जाएंगे। 8. यदि किसी जगह कचरा फेंकना बंद हो जाए तो? वहां का कैमरा शहर के किसी दूसरे समस्याग्रस्त स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। https://trendkia.com/chhattisgarh/raipur-men-kachara-phenkane-para-25-000-taka-ka-chalana-160-jagahon-para-kaimaron-ki-nigarani-33175 TrendKia — Har trend, sabse pehle.