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  "title": "राजनांदगांव में विजय शर्मा बोले, हिड़मा को रोल मॉडल बताने वाले नेता पहले माफी मांगें",
  "summary": "छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राजनांदगांव दौरे पर झीरम घाटी फैसले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा और रायपुर की पुलिस कमिश्नर प्रणाली को कारगर बताया.",
  "content": "छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा अपने एक दिवसीय दौरे पर राजनांदगांव पहुंचे, जहां उन्होंने शहर के पुष्प वाटिका परिसर में आयोजित सेवा संकल्प अभियान कार्यशाला में हिस्सा लिया और इसके बाद सर्किट हाउस में पत्रकारों से झीरम घाटी मामले के फैसले, रायपुर की पुलिस कमिश्नर प्रणाली और कई अन्य मुद्दों पर खुलकर बात की.\n\nसेवा संकल्प अभियान कार्यशाला में जुटे भाजपा कार्यकर्ता\nपुष्प वाटिका परिसर में आयोजित इस कार्यशाला में उपमुख्यमंत्री के अलावा भाजपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे. इसके बाद विजय शर्मा सर्किट हाउस पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उनसे मुलाकात की. इसी मुलाकात के दौरान पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के जन्मदिवस से लेकर अब तक पार्टी ने कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं और इसी सेवा संकल्प अभियान के तहत अलग अलग विषयों पर लगातार चर्चा की जा रही है और आगे भी कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं.\n\nहिड़मा वाले बयान पर कांग्रेस से मांगी माफी\nझीरम घाटी मामले में आए फैसले पर सवाल पूछे जाने पर उपमुख्यमंत्री ने सीधे कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जिन लोगों के रोल मॉडल हिड़मा हों, वे इस मुद्दे पर बोलने का हक ही नहीं रखते. उनकी मांग थी कि कांग्रेस का जो नेता यह कह चुका है कि हिड़मा हमारा रोल मॉडल है, वह पहले अपना बयान वापस ले. विजय शर्मा के मुताबिक इस तरह के बयानों से छत्तीसगढ़ का नुकसान हुआ है. उन्होंने यह भी बताया कि झीरम कांड को लेकर एनआईए की जांच लगातार चलती रही है, इस दौरान कई चार्जशीट अदालत में पेश की गई हैं और इनमें से एक चार्जशीट पर अब अदालत का फैसला आया है.\n\nसबूत एनआईए को सौंपने की चुनौती\nउपमुख्यमंत्री ने कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनके पास झीरम मामले से जुड़ा कोई सबूत है तो उसे एनआईए को सौंपा जाना चाहिए, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं करेगी क्योंकि वह सिर्फ झीरम के नाम पर राजनीति करना जानती है. उन्होंने दावा किया कि इस मामले में असल काम भाजपा सरकार ने ही किया है और कांग्रेस केवल आरोप लगाने तक सीमित रही है.\n\nरायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को बताया कारगर\nपत्रकारों के एक सवाल के जवाब में विजय शर्मा ने रायपुर में लागू पुलिस कमिश्नर प्रणाली पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने बताया कि रायपुर में यह व्यवस्था लागू हुए करीब 6 महीने पूरे हो चुके हैं और इन 6 महीनों में ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया जिसकी जांच न हुई हो. उनके अनुसार पुलिस कमिश्नर प्रणाली का सीधा फायदा राजधानी रायपुर क्षेत्र को मिला है और इससे कानून व्यवस्था बेहतर हुई है.\n\nइसका आप पर असर\nयह बयान सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ की राजनीति और पुलिसिंग व्यवस्था से जुड़ा है.\n\n• भारत में: झीरम घाटी जैसे बड़े नक्सल हमले की जांच पर सियासी बहस से यह संदेश जाता है कि आतंक और नक्सलवाद से जुड़े बयानों पर राजनीतिक दलों को अब भी जवाबदेह ठहराया जा रहा है. इससे देशभर में नक्सल प्रभावित इलाकों की सुरक्षा नीति पर चर्चा तेज हो सकती है.\n• छत्तीसगढ़ में: झीरम मामले की एक चार्जशीट पर आए फैसले से पीड़ित परिवारों और आम जनता को उम्मीद बंधती है कि लंबित चार्जशीट पर भी जल्द फैसले आएंगे. एनआईए को सबूत सौंपने की मांग से जांच में तेजी आने का दबाव बढ़ सकता है.\n• रायपुर में: पुलिस कमिश्नर प्रणाली के 6 महीने पूरे होने और हर मामले की जांच होने के दावे से रायपुर के नागरिकों को भरोसा मिलता है कि उनकी शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई हो रही है.\n• राजनांदगांव में: सेवा संकल्प अभियान की कार्यशाला से जिले में आगे भी सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्यक्रम आयोजित होने की संभावना बनती है, जिससे स्थानीय कार्यकर्ताओं और नागरिकों को सीधे जुड़ने का मौका मिल सकता है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. विजय शर्मा राजनांदगांव क्यों पहुंचे थे?\nवे एक दिवसीय दौरे पर सेवा संकल्प अभियान कार्यशाला में शामिल होने और भाजपा कार्यकर्ताओं से मिलने राजनांदगांव पहुंचे थे.\n\n2. विजय शर्मा ने झीरम घाटी मामले पर क्या कहा?\nउन्होंने कहा कि जिनका रोल मॉडल हिड़मा है उन्हें इस मुद्दे पर बोलने का हक नहीं है और संबंधित कांग्रेस नेता को अपना बयान वापस लेना चाहिए.\n\n3. झीरम घाटी मामले में एनआईए जांच की क्या स्थिति है?\nएनआईए की जांच में कई चार्जशीट अदालत में पेश की जा चुकी हैं और उनमें से एक पर अब फैसला आया है.\n\n4. विजय शर्मा ने कांग्रेस को क्या चुनौती दी?\nउन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अगर झीरम मामले से जुड़ा कोई सबूत है तो उसे एनआईए को सौंपा जाना चाहिए.\n\n5. रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली कब लागू हुई?\nविजय शर्मा के मुताबिक यह प्रणाली रायपुर में करीब 6 महीने पहले लागू हुई थी.\n\n6. पुलिस कमिश्नर प्रणाली से रायपुर को क्या फायदा हुआ है?\nउपमुख्यमंत्री के अनुसार बीते 6 महीनों में कोई भी मामला बिना जांच के नहीं रहा और इसका सीधा लाभ राजधानी क्षेत्र को मिला है.",
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  "publishedAt": "2026-09-06",
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