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  "type": "article",
  "title": "रावघाट तक दौड़ेगी ट्रेन, 1914 के सर्वे के बाद अब पूरा हुआ बस्तर का रेल सपना",
  "summary": "केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ताड़ोकी-रावघाट नई रेल लाइन का लोकार्पण करेंगे और ताड़ोकी-रायपुर पैसेंजर ट्रेन को रावघाट तक विस्तार देंगे।",
  "content": "बस्तर के रेल इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। स्वतंत्रता के 79 साल के बाद अबूझमाड़ के प्रवेश द्वार के रूप में पहचाने जाने वाले रावघाट तक अब सीधी यात्री ट्रेन की सुविधा मिलने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ताड़ोकी-रावघाट नई रेल लाइन का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही वह ताड़ोकी-रायपुर पैसेंजर ट्रेन के रावघाट तक विस्तार को हरी झंडी दिखाएंगे। इस वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान ही अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और रायपुर-कुरूद ट्रेन सेवा का भी शुभारंभ किया जाएगा।\n\nएक सदी पुराना है रेल का इतिहास\nरावघाट तक ट्रेन पहुंचाने का यह सफर काफी लंबा और संघर्षपूर्ण रहा है। इस क्षेत्र में रेल लाइन के लिए सबसे पहला सर्वे ब्रिटिश शासनकाल में वर्ष 1914 में बंगाल नागपुर रेलवे द्वारा किया गया था। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1917 से 1918 के बीच कुरूद और लिकमा के मध्य जंगलों से वनोपज की ढुलाई के लिए फॉरेस्ट ट्राम के संचालन का भी उल्लेख मिलता है। देश की स्वतंत्रता के पश्चात वर्ष 1974 में इस परियोजना का तकनीकी और आर्थिक सर्वेक्षण दोबारा शुरू हुआ। इसके बाद वर्ष 1998 से 1999 के रेल बजट में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शामिल करते हुए सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। वर्ष 2005 से 2007 के बीच रेलवे, सेल और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता संपन्न हुआ, जिसके बाद वर्ष 2008 में इसके निर्माण की जिम्मेदारी रेल विकास निगम लिमिटेड को सौंपी गई।\n\nनक्सल प्रभावित इलाके में आई थीं भारी बाधाएं\nदल्लीराजहरा से रावघाट तक लगभग 95 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन का निर्माण कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। यह पूरा क्षेत्र नक्सल प्रभावित होने के कारण निर्माण कार्य में पग-पग पर गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस दौरान हुए नक्सली हमलों में तीन सुरक्षाकर्मियों और चार मजूदरों को अपनी जान गंवानी पड़ी। कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मार्ग पर हर पांच किलोमीटर की दूरी पर विशेष सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए। सुरक्षा खतरों और क्षेत्र की संवेदनशील स्थिति के कारण प्रतिदिन केवल पांच से छह घंटे ही निर्माण कार्य संभव हो पाता था।\n\nक्षेत्रीय विकास को मिलेगी नई गति\nबस्तर क्षेत्र में रेल नेटवर्क को और अधिक सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भविष्य में धमतरी-जगदलपुर ब्रॉडगेज लाइन बिछाने की भी योजना तैयार की गई है। उपलब्ध प्रस्ताव के अनुसार, यह नया रेल मार्ग कुरूद, धमतरी, नगरी और बोरई से गुजरते हुए जगदलपुर तक पहुंचेगा, जिससे बस्तर को एक वैकल्पिक रेल मार्ग मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त कोतावालसा-किरंदुल रेल मार्ग के दोहरीकरण का काम भी तेजी से चल रहा है, जिससे लौह अयस्क और अन्य आवश्यक सामग्रियों के परिवहन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। रावघाट तक यात्री ट्रेन का परिचालन शुरू होने से स्थानीय नागरिकों का रायपुर आना-जाना सुगम हो जाएगा और यह माना जा रहा है कि इससे संपूर्ण बस्तर क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को एक नई रफ्तार प्राप्त होगी।\n\nइसका आप पर असर\nरावघाट तक यात्री ट्रेन शुरू होने से बस्तर और रायपुर के बीच का सफर आसान होगा और स्थानीय निवासियों को राजधानी आने-जाने में बड़ी सुविधा मिलेगी।\n\n• छत्तीसगढ़ में: ताड़ोकी-रावघाट नई रेल लाइन के लोकार्पण और ताड़ोकी-रायपुर पैसेंजर ट्रेन के विस्तार से बस्तर क्षेत्र के लोगों को तेज और सुगम परिवहन का साधन मिलेगा। इससे क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।\n• यात्रियों के लिए: अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और रायपुर-कुरूद ट्रेन सेवा के शुरू होने से दैनिक यात्रियों और व्यापारियों को आवागमन में राहत मिलेगी। इससे इस रूट पर यात्रा करने वाले लोगों का समय बचेगा और परिवहन के विकल्प बढ़ेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबस्तर क्षेत्र में रावघाट तक रेल पहुंचाने की यह परियोजना भौगोलिक कठिनाइयों और सुरक्षा संबंधी गंभीर चुनौतियों के कारण दशकों तक लंबी प्रक्रिया से गुजरी।\n\n• ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: इस रेल लाइन के लिए पहला सर्वे अंग्रेजों के दौर में वर्ष 1914 में बंगाल नागपुर रेलवे द्वारा किया गया था, जिसके बाद आजादी के बाद कई दशकों तक इसके तकनीकी और आर्थिक सर्वेक्षण का काम चला।\n• नक्सल प्रभाव: दल्लीराजहरा से रावघाट तक करीब 95 किलोमीटर लंबी इस लाइन का निर्माण इलाका नक्सल प्रभावित होने के कारण बेहद कठिन रहा, जहां सुरक्षा खतरों के चलते रोजाना सिर्फ पांच से छह घंटे ही काम हो पाता था।\n• सुरक्षा के कड़े इंतजाम: कर्मचारियों की हिफाजत के लिए मार्ग पर हर पांच किलोमीटर पर सुरक्षा कैंप बनाए गए, क्योंकि निर्माण के दौरान हुए हमलों में सुरक्षाकर्मियों और मजदूरों की जान चली गई थी।\n• समझौते और मंजूरी: वर्ष 1998-99 के रेल बजट में इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद 2005 से 2007 के बीच रेलवे, सेल और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच समझौता हुआ और 2008 में रेल विकास निगम लिमिटेड को काम सौंपा गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रावघाट तक रेल लाइन के लोकार्पण कार्यक्रम का नेतृत्व कौन करेगा?\nकेंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ताड़ोकी-रावघाट नई रेल लाइन का लोकार्पण करेंगे।\n\n2. रावघाट के लिए पहला रेल सर्वे कब हुआ था?\nरावघाट रेल लाइन के लिए पहला सर्वे साल 1914 में अंग्रेजों के दौर में बंगाल नागपुर रेलवे ने किया था।\n\n3. दल्लीराजहरा से रावघाट तक की नई रेल लाइन की लंबाई कितनी है?\nदल्लीराजहरा से रावघाट तक की नई रेल लाइन करीब 95 किलोमीटर लंबी है।\n\n4. इस रेल परियोजना के निर्माण में मुख्य बाधा क्या थी?\nयह इलाका नक्सल प्रभावित था, जिसके कारण सुरक्षा कारणों से रोजाना सिर्फ पांच से छह घंटे ही काम हो पाता था।\n\n5. निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए?\nकर्मचारियों की हिफाजत के लिए मार्ग पर हर पांच किलोमीटर पर सुरक्षा कैंप बनाए गए थे।\n\n6. इस परियोजना के निर्माण की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई थी?\nवर्ष 2008 में इस रेल लाइन के निर्माण का जिम्मा रेल विकास निगम लिमिटेड को सौंपा गया था।\n\n7. कार्यक्रम के दौरान और कौन सी नई रेल सेवाएं शुरू हो रही हैं?\nइसी कार्यक्रम में अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन और रायपुर-कुरूद ट्रेन सर्विस की भी शुरुआत की जा रही है।\n\n8. बस्तर में भविष्य के लिए कौन सी रेल योजना प्रस्तावित है?\nबस्तर में रेल सुविधा बढ़ाने के लिए कुरूद, धमतरी, नगरी और बोरई होते हुए जगदलपुर तक धमतरी-जगदलपुर ब्रॉडगेज लाइन की योजना है।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-10-20",
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    "भारतीय रेलवे",
    "बस्तर विकास",
    "अबूझमाड़",
    "रावघाट रेल लाइन",
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    "अश्विनी वैष्णव"
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