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  "type": "article",
  "title": "सहजन के औषधीय लाभ और छत्तीसगढ़ में कुपोषण से निपटने की पहल",
  "summary": "सहजन आवश्यक विटामिन, आयरन और कैल्शियम से भरपूर एक पारंपरिक औषधि है, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार कुपोषण मिटाने के लिए व्यापक स्तर पर बढ़ावा दे रही है।",
  "content": "पारंपरिक खानपान में सब्जी के रूप में उपयोग होने वाली सहजन की फली और इसकी हरी पत्तियां केवल स्वाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पोषण और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। आमतौर पर मुनगा के नाम से पहचानी जाने वाली यह वनस्पति भारतीय चिकित्सा पद्धति में अपने औषधीय गुणों के लिए जानी जाती है। बिलासपुर स्थित गवर्नमेंट आयुर्वेद डिस्पेंसरी जॉनी लाइन की आयुर्वेद मेडिकल ऑफिसर डॉ आस्था मिश्रा ने इसके विभिन्न चिकित्सीय पहलुओं और शारीरिक लाभों पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार, यह प्राकृतिक आहार जरूरी खनिजों और विटामिनों का एक समृद्ध स्रोत है, जो शरीर के आंतरिक संतुलन को मजबूत बनाए रखने में सहायक होता है।\n\nसहजन में मौजूद जरूरी पोषक तत्व\nसहजन के पौधे के विभिन्न भाग पोषक तत्वों से भरे होते हैं। इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, फोलेट, कैल्शियम और मैग्नीशियम मौजूद रहते हैं। पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक, भोजन में ऐसे तत्वों की नियमित उपस्थिति शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और बुनियादी शारीरिक क्रियाओं को सुचारू रखने के लिए बेहद आवश्यक होती है। सूक्ष्म पोषक तत्वों की प्रचुरता के चलते यह दैनिक आहार का एक प्रमुख और पौष्टिक अंग बन सकता है।\n\nरक्त की कमी और हड्डियों के विकार में उपयोगिता\nआयरन और फोलेट से भरपूर होने के कारण सहजन उन व्यक्तियों के लिए उपयोगी आहार सिद्ध हो सकता है जो शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या से जूझ रहे हैं। हालांकि, डॉ आस्था मिश्रा ने यह स्पष्ट किया है कि केवल मुनगा खाने से इस बीमारी का पूर्ण निदान संभव नहीं है, बल्कि गंभीर स्थिति में सही चिकित्सकीय परीक्षण और उचित इलाज कराना अनिवार्य होता है। इसके अतिरिक्त, इसमें हड्डियों को सुदृढ़ बनाने वाले कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स भी मौजूद हैं। आयुर्वेद में अस्थि स्वास्थ्य से जुड़ी जटिलताओं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी परिस्थितियों में सहजन के प्रयोग का विशेष महत्व बताया गया है।\n\nदर्द और सूजन घटाने में सहायक गुण\nआयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुसार, सहजन को शूलहर और शोथहर गुणों वाला द्रव्य माना गया है। आयुर्वेद की शब्दावली में शूल का अर्थ दर्द तथा शोथ का आशय सूजन से होता है। जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों की जकड़न अथवा शरीर के किसी हिस्से में सूजन आने पर आयुर्वेदिक परामर्श के तहत मुनगे का उपयोग किया जा सकता है। यह शरीर की विभिन्न पीड़ाओं को कम करने में एक प्राकृतिक सहयोगी के रूप में काम करता है।\n\nपाचन क्रिया और दोषों के संतुलन पर प्रभाव\nपाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी सहजन का विशेष योगदान माना जाता है। डॉ आस्था मिश्रा के अनुसार, इसमें दीपन और पाचन के गुण पाए जाते हैं, जो जठराग्नि को प्रदीप्त कर भोजन के सही पाचन में सहायता करते हैं। जिन व्यक्तियों को अपच या पाचन संबंधी समस्याएं रहती हैं, वे इसे अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं। इसके स्वाद और तासीर की बात करें तो मुनगे का रस कटु-तिक्त यानी कड़वा-तीखा और इसका वीर्य उष्ण यानी गर्म माना जाता है। यह शरीर में वात और कफ से जुड़ी विषमताओं को संतुलित करने में प्रभावी भूमिका निभाता है।\n\nएंटीऑक्सीडेंट प्रभाव और शारीरिक सुरक्षा\nसहजन में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स इसे और अधिक गुणकारी बनाते हैं। डॉ मिश्रा ने उल्लेख किया कि ये एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण उत्पन्न होने वाले फ्री रेडिकल्स के नकारात्मक प्रभावों को घटाने का काम करते हैं। कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और समय पूर्व होने वाले शारीरिक नुकसान से बचाव के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स का नियमित सेवन जरूरी होता है, जिसमें मुनगा काफी मददगार साबित होता है।\n\nकुपोषण के खिलाफ छत्तीसगढ़ का व्यापक अभियान\nमुनगे के इन असाधारण पोषक गुणों को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य से कुपोषण और एनीमिया के उन्मूलन के उद्देश्य से ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान शुरू किया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत लोगों को मुनगा यानी सहजन के पौधे मुफ्त वितरित किए जा रहे हैं और बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। राज्य के 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लगभग 7.88 लाख परिवारों को इस जन-कल्याणकारी पहल से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है।\n\nइस अभियान का मुख्य जोर महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करने पर है, जिसके लिए हर आंगनबाड़ी क्षेत्र में पौधे लगाए जा रहे हैं। इसी क्रम में रायपुर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर मात्र एक ही दिन में 50000 मुनगा पौधे लगाने का बड़ा अभियान आयोजित किया गया। लगाए गए पौधों की सुरक्षा, उचित देखरेख और विकास पर नजर रखने के लिए एक विशेष डिजिटल डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है।\n\nइसका आप पर असर\nसहजन को दैनिक आहार में शामिल करके पोषण की कमियों को दूर किया जा सकता है और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया जा सकता है।\n\n• भारत में: आम लोग अपने दैनिक भोजन में सहजन की फली और पत्तियों को शामिल करके कैल्शियम, आयरन और विटामिन की कमी पूरी कर सकते हैं। इसके नियमित उपभोग से पाचन बेहतर रहता है और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है।\n• छत्तीसगढ़ में: राज्य के लगभग 7.88 लाख परिवार स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए सहजन के पौधे मुफ्त प्राप्त कर सकते हैं। महिलाएं और बच्चे अपने घर के आंगन में यह पौधा लगाकर ताजी पत्तियों और फलियों से कुपोषण का समाधान कर सकते हैं।\n• कम बजट का पोषण: महंगे सप्लीमेंट्स के विकल्प के रूप में सहजन का इस्तेमाल एक सस्ता और प्रभावी घरेलू उपाय बनता है। मौसमी सब्जियों के साथ इसकी दाल या सूप बनाकर पूरा परिवार इसका लाभ उठा सकता है।\n• चिकित्सकीय सावधानी: एनीमिया या ऑस्टियोपोरोसिस के मरीजों को केवल आहार पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच भी करानी चाहिए। सही चिकित्सीय परामर्श के साथ मुनगा खाने से रिकवरी तेज हो सकती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में कुपोषण और एनीमिया की व्यापकता को समाप्त करने तथा घरेलू पोषण को सुलभ बनाने के लिए सहजन के औषधीय गुणों को आधार बनाया गया है।\n\n• पारंपरिक औषधीय मान्यता: आयुर्वेद में मुनगे को वात-कफ शामक, दर्द निवारक और सुपाच्य आहार के रूप में मान्यता प्राप्त है। आधुनिक पोषण विज्ञान भी इसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स की भरपूर मात्रा की पुष्टि करता है।\n• सुलभ पोषण की आवश्यकता: कई परिवारों में महंगे पोषक आहार की पहुंच सीमित होती है, जिससे महिलाओं और बच्चों में खून की कमी की समस्या बढ़ जाती है। सहजन का पौधा तेजी से बढ़ता है और बेहद कम देखभाल में प्रचुर मात्रा में पोषक पत्तियां और फलियां देता है।\n• प्रशासनिक पहल: राज्य सरकार ने कुपोषण पर नियंत्रण पाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण का निर्णय लिया ताकि हर घर में पोषक भोजन उपलब्ध हो सके। रायपुर में 50000 पौधे एक ही दिन में लगाने और डिजिटल निगरानी शुरू करने के पीछे दीर्घकालिक पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सहजन में कौन-कौन से मुख्य पोषक तत्व पाए जाते हैं?\nसहजन में प्रचुर मात्रा में विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन, फोलेट, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं।\n\n2. आयुर्वेद के अनुसार सहजन का रस और वीर्य कैसा होता है?\nआयुर्वेदिक दृष्टि से सहजन का रस कटु-तिक्त यानी कड़वा और तीखा होता है, जबकि इसका वीर्य उष्ण यानी गर्म माना गया है।\n\n3. क्या सहजन खाने से एनीमिया का पूर्ण इलाज हो सकता है?\nसहजन आयरन और फोलेट का अच्छा स्रोत है जो आहार को बेहतर बनाता है, लेकिन एनीमिया के पूर्ण उपचार के लिए डॉक्टर की जांच और दवाएं आवश्यक हैं।\n\n4. हड्डियों और जोड़ों के लिए सहजन कैसे फायदेमंद है?\nइसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम होने से यह हड्डियों को मजबूत करता है, साथ ही इसके शूलहर और शोथहर गुण दर्द और सूजन को कम करने में सहायक होते हैं।\n\n5. छत्तीसगढ़ सरकार के 'हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा' अभियान का क्या लक्ष्य है?\nइस अभियान का मुख्य लक्ष्य प्रदेश के 52,553 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से करीब 7.88 लाख परिवारों को मुफ्त पौधे देकर कुपोषण और एनीमिया को घटाना है।\n\n6. रायपुर जिले में पौधारोपण को लेकर क्या विशेष उपलब्धि दर्ज की गई?\nमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर रायपुर जिले में एक ही दिन के भीतर 50000 मुनगा पौधे लगाने का महाअभियान चलाया गया।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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