# सक्ती में घर के ड्रम से बरामद हुआ तीन माह की बच्ची का शव, नाबालिग माता-पिता हिरासत में

> सक्ती जिले में रात के समय बिस्तर से लापता बताई गई तीन महीने की मासूम का शव सुबह आंगन में रखे पानी के ड्रम में मिला। मामले में हत्या और शव छिपाने के संदेह पर पुलिस ने बच्ची के नाबालिग माता-पिता को हिरासत में ले लिया है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/sakti-men-ghara-ke-drama-se-baramada-hua-tina-maha-ki-bachchi-ka-shava-nabaliga-mata-pita-hirasata-men-41978 · **Language:** Hindi
**Tags:** सक्ती, छत्तीसगढ़ क्राइम, शिशु हत्या, नाबालिग माता पिता, बाल विवाह, सक्ती पुलिस

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाला वाकया सामने आया है, जहां तीन महीने की एक नवजात बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में जान चली गई। हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले में पुलिस ने बच्ची के अपने ही नाबालिग माता-पिता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। शुरुआती जांच पड़ताल में यह बात सामने आई है कि मासूम की हत्या करने के बाद उसके शव को ठिकाने लगाने या छिपाने की कोशिश की गई थी। इस दिल दहला देने वाली वारदात ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है।

## आधी रात को रची गई गायब होने की कहानी
यह पूरा मामला 29 सितंबर की रात का बताया जा रहा है। रोजमर्रा की तरह परिवार के सभी सदस्यों ने रात का भोजन किया और सोने चले गए थे। रात करीब 2 बजे बच्ची के पिता ने अचानक शोर मचाया और घर के बाकी परिजनों को जगाकर यह सूचना दी कि तीन महीने की नवजात अपने बिस्तर पर नहीं है और कहीं गायब हो गई है। आधी रात को बच्ची के लापता होने की बात सुनते ही पूरे घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने तुरंत घर के हर कोने, कमरों और आसपास के इलाके में मासूम की तलाश शुरू कर दी, लेकिन अंधेरे में उसका कोई पता नहीं चल सका।

## सुबह आंगन के पानी से भरे ड्रम में दिखा मासूम का शव
परिवार के लोग रात भर बच्ची को ढूंढते रहे और सुबह तक तलाश का सिलसिला चलता रहा। सुबह करीब 7 बजकर 30 मिनट पर जब बच्ची की दादी रोजमर्रा के काम के लिए घर के आंगन में रखे पानी के ड्रम के पास पहुंचीं, तो वहां का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। पानी से भरे उस ड्रम के अंदर तीन महीने की मासूम बच्ची का शव उतराता हुआ दिखाई दिया। आंगन में बच्ची का शव मिलते ही घर में चीख-पुकार मच गई और पूरे मोहल्ले में सनसनी फैल गई। परिजनों ने इसके बाद तुरंत स्थानीय पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी।

## पुलिस की कार्रवाई और नाबालिग माता-पिता से पूछताछ
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और ड्रम से शव को बाहर निकालकर पंचनामा कार्रवाई की। जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को ऐसे महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले, जो बच्ची की स्वाभाविक मौत या किसी बाहरी व्यक्ति के हाथ होने के बजाय घर के भीतर ही हत्या कर शव को ड्रम में छिपाने की ओर इशारा कर रहे थे। इसके आधार पर पुलिस ने बच्ची के दोनों नाबालिग माता-पिता को अपनी हिरासत में ले लिया। चूंकि दोनों आरोपी कानूनन नाबालिग हैं, इसलिए किशोर न्याय प्रक्रिया के नियमों के तहत उनकी पहचान गोपनीय रखी गई है। पुलिस घटनास्थल से जुटाए गए भौतिक साक्ष्यों, परिस्थितियों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की बारीकी से पड़ताल कर रही है।

## बाल विवाह, आर्थिक तंगी और लगातार बीमारी का साया
इस पूरे प्रकरण ने कम उम्र में विवाह और नासमझी में माता-पिता बनने के गंभीर सामाजिक पहलुओं को भी उजागर किया है। दोनों की शादी काफी कम उम्र में कर दी गई थी और शादी के कुछ समय बाद ही इस बच्ची का जन्म हो गया था। बताया जा रहा है कि जन्म के बाद से ही नवजात अक्सर बीमार रहती थी, जिससे परिवार मानसिक तनाव में था। इसके अलावा यह परिवार लगातार गंभीर आर्थिक तंगी और परेशानियों से भी जूझ रहा था। हालांकि बच्ची की बीमारी और परिवार की तंगहाली ने इस अपराध को अंजाम देने में कितनी भूमिका निभाई, इसकी वास्तविक पुष्टि पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो सकेगी।

## इसका आप पर असर
यह घटना कम उम्र में विवाह और आर्थिक तंगी के चलते बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सामाजिक सतर्कता की मांग करती है।

- **भारत में:** बाल विवाह रोकथाम कानून के प्रति सख्ती और सामाजिक निगरानी की आवश्यकता को यह मामला रेखांकित करता है। प्रशासन द्वारा नाबालिगों की शादी रोकने और किशोर उम्र के माता-पिता की काउंसिलिंग के तंत्र को मजबूत करने की जरूरत है।
- **सक्ती में:** स्थानीय प्रशासन और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर और कम उम्र में ब्याहे गए जोड़ों की निगरानी बढ़ाई जा सकती है। आसपास के निवासियों को किसी भी संदिग्ध घरेलू परिस्थिति या बीमार नवजात की उपेक्षा पर तुरंत हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
- **परिवारों के लिए:** नवजात बच्चों के इलाज और पालन-पोषण में आने वाली आर्थिक दिक्कतों के लिए सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों से मदद ली जानी चाहिए। किसी भी मानसिक तनाव या अवसाद की स्थिति में नजदीकी स्वास्थ्य परामर्श केंद्र से संपर्क करना बेहद जरूरी है।
- **कानूनी पहलू:** दोनों आरोपियों के नाबालिग होने के कारण यह मामला किशोर न्याय बोर्ड के तहत चलेगा। इसमें वयस्क अदालतों की तुलना में सुधार और पुनर्वास से जुड़े कानूनी प्रावधान लागू होंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
यह दुखद घटना पारिवारिक तंगी, नवजात की लगातार बीमारी और बेहद कम उम्र में आए मातृत्व-पितृत्व के दबाव से जुड़ी परिस्थितियों के बीच हुई है। हालांकि पुलिस इस मामले में हत्या और साक्ष्य छिपाने के कानूनी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

- **सीधा कारण:** रात करीब 2 बजे बिस्तर से बच्ची के लापता होने की बात कही गई, लेकिन सुबह उसका शव आंगन के पानी से भरे ड्रम में मिला। पुलिस को ऐसे सुराग मिले हैं जो यह दर्शाते हैं कि मासूम की हत्या कर शव को छिपाया गया था।
- **गंभीर परिस्थितियां:** माता-पिता दोनों नाबालिग थे और उनकी शादी काफी कम उम्र में करा दी गई थी। शादी के तुरंत बाद बच्ची हुई, जो जन्म के बाद से अक्सर बीमार रहती थी, जबकि परिवार पहले से ही तंगहाली से जूझ रहा था।
- **जांच और आगे की कार्रवाई:** पुलिस ने दोनों नाबालिग माता-पिता को हिरासत में लेकर किशोर न्याय कानून के तहत जांच शुरू की है। घटना के पीछे बीमारी और आर्थिक तंगी की क्या भूमिका थी, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अंतिम विवेचना के बाद ही स्पष्ट होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. यह घटना कहां और किस तारीख को हुई?
यह घटना छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में 29 सितंबर की रात को घटित हुई थी।

### 2. बच्ची का शव कहां से बरामद किया गया?
तीन महीने की बच्ची का शव अगली सुबह करीब 7:30 बजे घर के आंगन में रखे पानी से भरे ड्रम से बरामद हुआ।

### 3. पुलिस ने इस मामले में किसे पकड़ा है?
पुलिस ने बच्ची की हत्या और शव छिपाने के संदेह में उसके नाबालिग माता-पिता को हिरासत में लिया है।

### 4. पुलिस ने आरोपियों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए हैं?
दोनों आरोपियों के नाबालिग होने के कारण किशोर न्याय प्रक्रिया के नियमों के तहत उनकी पहचान उजागर नहीं की गई है।

### 5. परिवार किन समस्याओं का सामना कर रहा था?
परिवार गंभीर आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था और तीन महीने की नवजात जन्म के बाद से ही अक्सर बीमार रहती थी।

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