सड़कों पर खतरनाक स्टंट और आधी रात जन्मदिन के हुड़दंग पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने का आदेश छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों पर स्टंटबाजी और जन्मदिन मनाने के नाम पर हुड़दंग मचाने वालों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार को ठोस गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया है। बिलासपुर में बीते 13 महीनों के दौरान ऐसे 26 से अधिक मामले दर्ज किए गए और 47 वाहन जब्त किए जा चुके हैं। सार्वजनिक रास्तों पर तेज रफ्तार में जानलेवा स्टंटबाजी करने और बीच सड़क पर केक काटकर उपद्रव मचाने की बढ़ती हरकतों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य शासन को निर्देश जारी किया है कि इस तरह के उपद्रव और उपद्रवियों से निपटने के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार किया जाए। अदालत ने दो टूक शब्दों में रेखांकित किया कि सिर्फ मौखिक हिदायतें या सामान्य आदेश जारी कर देने भर से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती। जब तक एक स्पष्ट और लिखित नियमावली मौजूद नहीं होगी, तब तक मैदानी पुलिस और प्रशासनिक अमले के सामने कार्रवाई के दौरान उलझन बनी रहेगी। स्पष्ट नियमों के अभाव में कार्रवाई पर पड़ता है असर अदालत का मानना है कि जब तक नियम और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी नहीं होंगी, तब तक सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर उपद्रव मचाने वाले तत्वों पर सटीक कानूनी शिकंजा कसना संभव नहीं है। प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस कर्मियों को मौके पर सख्त कदम उठाने के लिए पूर्ण अधिकार और स्पष्ट प्रक्रिया की जरूरत होती है। एक सुव्यवस्थित गाइडलाइन लागू होने के बाद पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था लागू करने वाले अमले को यह साफ पता रहेगा कि ऐसे मामलों में क्या धाराएं लगानी हैं, जब्ती कैसे होगी और आरोपियों पर किस तरह का वैधानिक शिकंजा कसा जाना चाहिए। बिलासपुर में 13 महीनों का चौंकाने वाला लेखा-जोखा अदालत के समक्ष प्रस्तुत जनहित याचिका में बिलासपुर शहर के गंभीर आंकड़े रखे गए। बिलासपुर में पिछले 13 महीनों के अंतराल में इस तरह के 26 से ज्यादा मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन आंकड़ों के बारीक विश्लेषण से पता चलता है कि इनमें से 19 मामले सड़कों पर जानलेवा स्टंटबाजी और खतरनाक ड्राइविंग से जुड़े हुए थे। वहीं दूसरी तरफ, रात में या व्यस्त रास्तों पर गाड़ियों की बोनट पर केक काटकर जन्मदिन मनाने और हुड़दंग करने से जुड़े 8 मामले सामने आए हैं। दर्जनों गाड़ियां जब्त और 80 से अधिक लोगों पर कानूनी शिकंजा सड़क पर उत्पात मचाने वालों के खिलाफ पुलिस ने अभियान चलाकर कार्रवाई भी की है। बिलासपुर में दर्ज मामलों के तहत अब तक 47 वाहनों को जब्त किया गया है। इसके अलावा 80 से ज्यादा आरोपी पुलिस की कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं। यह कार्रवाई यह साबित करती है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस समस्या की गंभीरता को समझ रही है, लेकिन अदालत का जोर इस बात पर है कि यह सख्ती केवल एक शहर तक सीमित न रहे बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में एक समान, पारदर्शी और निरंतर व्यवस्था के रूप में लागू हो। यातायात बाधित होने और हादसों के खतरे पर अदालत की चिंता सार्वजनिक मार्ग पर स्टंटबाजी करना या बीच सड़क पर गाड़ियों का काफिला रोककर जश्न मनाना न केवल सामान्य आवाजाही को बुरी तरह ठप करता है, बल्कि अन्य राहगीरों की जान को भी भारी खतरे में डाल देता है। ऐसे गैर-जिम्मेदाराना कारनामों के चलते कई बार भीषण सड़क दुर्घटनाएं घटित हो जाती हैं, जिससे बेकसूर नागरिक अपनी जान गंवा बैठते हैं। इसी गंभीर स्थिति को भांपते हुए अदालत ने शासन को नीतिगत स्तर पर दखल देने का फरमान सुनाया है। अब राज्य सरकार को नई गाइडलाइन बनाकर यह तय करना होगा कि पुलिस को क्या विशेष अधिकार मिलेंगे और ऐसे हुड़दंगियों पर किस तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसका आप पर असर सार्वजनिक मार्गों पर स्टंटबाजी और जश्न के नाम पर रास्ते जाम करने वालों पर अब कानूनी शिकंजा काफी कड़ा होने वाला है। • भारत में: सार्वजनिक सड़कों पर जानलेवा स्टंट और हुड़दंग को रोकने के लिए न्यायिक सख्ती अन्य राज्यों के लिए भी नजीर बनेगी। सामान्य वाहन चालकों और राहगीरों के लिए सड़कों पर आवागमन सुरक्षित होगा तथा गैर-जिम्मेदाराना उपद्रवियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई संभव होगी। • छत्तीसगढ़ में: राज्य सरकार जल्द ही पुलिस को अतिरिक्त अधिकारों के साथ एक लिखित और स्पष्ट कानूनी गाइडलाइन सौंपेगी। यदि कोई भी व्यक्ति सड़क पर गाड़ी दौड़ाकर स्टंटबाजी या केक काटने का उपद्रव करेगा, तो उसकी गाड़ी तुरंत जब्त होगी और उस पर सीधे आपराधिक कार्रवाई होगी। • बिलासपुर में: शहर की सड़कों पर पुलिस की निगरानी और गश्त पहले से अधिक सख्त कर दी जाएगी। बीते 13 महीनों में 47 गाड़ियां जब्त और 80 से अधिक लोगों पर हुई कार्रवाई के बाद अब सार्वजनिक स्थानों पर हुड़दंग करने वालों पर किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। • युवाओं और अभिभावकों के लिए: दोपहिया या चारपहिया वाहनों से खतरनाक करतब दिखाने पर गाड़ियां स्थायी रूप से जब्त हो सकती हैं और कानूनी पचड़े में फंसने का खतरा रहेगा। अभिभावकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके नाबालिग या युवा बच्चे सड़कों पर उपद्रव का हिस्सा न बनें। ऐसा क्यों हुआ सड़कों पर खतरनाक ड्राइविंग और बीच रास्ते में जन्मदिन मनाने के नाम पर कानून व्यवस्था को चुनौती देने की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा था। ऐसी हरकतों से आम जनता की जान जोखिम में पड़ने और बिलासपुर जैसे शहरों से दर्जनों मामले सामने आने के बाद यह मामला न्यायिक जांच के दायरे में पहुंचा। • सीधा कारण: बिलासपुर सहित विभिन्न इलाकों में सड़क पर तेज रफ्तार स्टंटबाजी और बीच रास्ते पर गाड़ियां खड़ी करके केक काटने की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में जनता की सुरक्षा और कानून के उल्लंघन का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया गया था। • कानूनी स्पष्टता की कमी: पुलिस के पास ऐसे मामलों से सख्ती से निपटने के लिए कोई राज्यव्यापी एकीकृत और स्पष्ट गाइडलाइन नहीं थी, जिससे कार्रवाई के दौरान कानूनी उलझनें पैदा होती थीं। सामान्य मौखिक निर्देशों के भरोसे चलने की वजह से उपद्रवियों में कानून का पर्याप्त खौफ नहीं बन पा रहा था। • बिलासपुर के गंभीर आंकड़े: याचिका की सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि केवल 13 महीनों के भीतर बिलासपुर में 26 से ज्यादा ऐसे मामले दर्ज हुए, 47 गाड़ियां पकड़ी गईं और 80 से अधिक लोग आरोपी बने। इन आंकड़ों ने साबित कर दिया कि यह किसी एक दिन की घटना नहीं बल्कि लगातार पनप रही खतरनाक प्रवृत्ति है। • हादसों की आशंका: मुख्य सड़कों पर स्टंट करने और ट्रैफिक रोकने की वजह से सामान्य यातायात बाधित होता था और गंभीर सड़क दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती थी। कोर्ट ने माना कि बेकसूर राहगीरों की जान की रक्षा के लिए सरकार को तत्काल नियम तय करने होंगे। सवाल-जवाब 1. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को क्या आदेश दिया है? हाईकोर्ट ने सरकार को सड़कों पर खतरनाक स्टंट और हुड़दंग से निपटने के लिए एक स्पष्ट और लिखित गाइडलाइन तैयार करने का निर्देश दिया है। 2. हाईकोर्ट ने मौखिक निर्देशों को लेकर क्या टिप्पणी की? अदालत ने कहा कि केवल सामान्य या मौखिक निर्देश देने से काम नहीं चलेगा, क्योंकि नियमों की स्पष्टता के बिना पुलिस कार्रवाई में उलझन बनी रहती है। 3. बिलासपुर में 13 महीनों के भीतर कितने मामले सामने आए? जनहित याचिका के अनुसार, बिलासपुर में पिछले 13 महीनों में 26 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। 4. बिलासपुर में दर्ज मामलों में स्टंट और जन्मदिन के कितने केस शामिल हैं? कुल मामलों में से 19 मामले सड़क पर स्टंटबाजी के और 8 मामले सड़क पर जन्मदिन मनाने और हुड़दंग करने के हैं। 5. पुलिस ने बिलासपुर में इन मामलों में अब तक क्या कार्रवाई की है? पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 47 वाहन जब्त किए हैं और 80 से अधिक आरोपियों को कानूनी दायरे में लिया है। 6. सड़क पर स्टंट और जन्मदिन मनाने से क्या नुकसान होता है? इससे सामान्य यातायात बाधित होता है और राहगीरों की जान को गंभीर खतरा पैदा होकर बड़े हादसों की आशंका बनी रहती है। https://trendkia.com/chhattisgarh/sarakon-para-khataranaka-stnta-aura-adhi-rata-janmadina-ke-huradnga-para-chhattisgarh-high-court-sakhta-sarakara-ko-spashta-disha--40459 TrendKia — Har trend, sabse pehle.