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  "type": "article",
  "title": "सत्यम द्विवेदी ने सरगुजा में किया दस हजार से ज्यादा सांपों का रेस्क्यू, अब वन्यजीवों के लिए बनाना चाहते हैं अस्पताल",
  "summary": "छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 'स्नेक मैन' के नाम से मशहूर कानून के छात्र सत्यम द्विवेदी ने पिछले 10 वर्षों में 10,000 से अधिक सांपों की जान बचाई है और वे वन्यजीवों के लिए एक आधुनिक अस्पताल बनाने का सपना देख रहे हैं।",
  "content": "छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर में रहने वाले सत्यम द्विवेदी ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अनोखी मिसाल कायम की है। स्थानीय इलाकों में लोग उन्हें प्यार से 'स्नेक मैन' कहकर पुकारते हैं। जब भी किसी के घर, आंगन, कुएं या नाले में कोई सांप दिखाई देता है, तो लोगों के दिमाग में सबसे पहला नाम सत्यम द्विवेदी का ही आता है। हाई स्कूल की पढ़ाई के दौरान शुरू हुआ सांपों को बचाने का यह सफर आज एक बड़े मुकाम पर पहुंच चुका है। बीते दस वर्षों में सत्यम ने दस हजार से भी अधिक सांपों को सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा है। अब वे अपने इस सेवा भाव को एक कदम आगे ले जाते हुए सरगुजा में वन्यजीवों के लिए एक समर्पित रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।\n\nदसवीं कक्षा के बाद शुरू हुआ वन्यजीवों के प्रति लगाव\nसत्यम कुमार द्विवेदी के जीवन में जीवों के प्रति प्रेम का अंकुर काफी कम उम्र में ही फूट गया था। अपनी शुरुआती यात्रा के बारे में बात करते हुए वे बताते हैं कि दसवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए रायपुर चले गए थे। वहां वे IIT की कोचिंग में दाखिला लेकर अपनी तैयारी कर रहे थे। रायपुर प्रवास के दौरान ही उनका वन्यजीवों और प्रकृति के प्रति झुकाव और गहरा होता चला गया। उन्होंने महसूस किया कि रिहायशी इलाकों में आने वाले बेजुबान जीवों को अक्सर इंसानी डर के कारण अपनी जान गंवानी पड़ती है। इसी सोच ने उन्हें सांपों के संरक्षण और उनके सुरक्षित रेस्क्यू की ओर प्रेरित किया। वर्तमान में सत्यम अपनी शैक्षणिक योग्यता को और सुदृढ़ कर रहे हैं। वे अभी LLB की पढ़ाई कर रहे हैं और साथ ही बार काउंसिल की परीक्षा की तैयारी में भी जुटे हैं। उनका दृढ़ संकल्प है कि वे अपनी पढ़ाई और वकालत के पेशे के साथ-साथ जीवनभर वन्यजीवों की सेवा का काम जारी रखेंगे।\n\nअनुभव और गहरे अध्ययन से बने रेस्क्यू एक्सपर्ट\nशुरुआती दिनों में सत्यम के पास सांप पकड़ने या उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का कोई औपचारिक अनुभव नहीं था। वे बताते हैं कि जब उन्होंने पहली बार किसी सांप को बचाया, तो वे सांपों के व्यवहार या उनकी प्रजातियों के बारे में बहुत ज्यादा नहीं जानते थे। उनके पास केवल एक चीज थी, और वह था जीवों को बचाने का सच्चा जुनून। लेकिन केवल जुनून के दम पर इस खतरनाक काम को लंबे समय तक सुरक्षित रूप से नहीं किया जा सकता था। इसलिए सत्यम ने खुद को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करने का फैसला किया। उन्होंने सांपों पर लिखी गई विभिन्न किताबों का बारीकी से अध्ययन किया। इसके साथ ही उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से जानकारी जुटानी शुरू की। उन्होंने जाना कि कौन सा सांप कितना जहरीला होता है और उनसे कैसे निपटना चाहिए। जैसे-जैसे समय बीतता गया, उनका व्यावहारिक अनुभव बढ़ता गया और वे सांपों के व्यवहार तथा रेस्क्यू से जुड़ी सूक्ष्म से सूक्ष्म बारीकियों को समझने वाले एक विशेषज्ञ बन गए।\n\nलॉकडाउन से पहले दोस्त के घर से हुई थी पहली शुरुआत\nअपने पहले रेस्क्यू ऑपरेशन की रोमांचक कहानी को साझा करते हुए सत्यम बताते हैं कि यह घटना लॉकडाउन लगने से ठीक पहले की है। उनके एक दोस्त के घर में अचानक एक सांप निकल आया था। चूंकि सत्यम के दोस्तों और परिवार के सदस्यों को पहले से पता था कि उन्हें जीव-जंतुओं से बेहद लगाव है, इसलिए दोस्त ने मदद के लिए सीधे सत्यम से ही संपर्क किया। उस समय सत्यम की उम्र बहुत कम थी और उनके चेहरे पर दाढ़ी-मूंछ भी नहीं आई थी। एक किशोर के रूप में उनके मन में सांप को लेकर स्वाभाविक डर तो था, लेकिन उस बेजुबान जीव की जान बचाने की इच्छा उस डर पर भारी पड़ गई। उन्होंने अपनी पूरी हिम्मत जुटाई और सूझबूझ से काम लेते हुए सांप को सुरक्षित पकड़ लिया। इसके बाद उन्होंने उसे ले जाकर उसके प्राकृतिक परिवेश में सुरक्षित छोड़ दिया। इस पहले सफल प्रयास ने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास जगाया, जिसके बाद उनके पास रेस्क्यू के लिए लगातार फोन आने लगे।\n\nकोबरा, रसेल वाइपर और दुर्लभ एल्बिनो करैत का सुरक्षित रेस्क्यू\nसरगुजा संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए सत्यम ने अब तक कई प्रकार की खतरनाक और दुर्लभ प्रजातियों के सांपों का रेस्क्यू किया है। इनमें स्पेक्टेकल्ड कोबरा, कॉमन करैत और रसेल वाइपर जैसी अत्यंत विषैली प्रजातियां शामिल हैं। अपनी सबसे अनोखी और चुनौतीपूर्ण यादों में से एक का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि उन्होंने एक अत्यंत दुर्लभ एल्बिनो कॉमन करैत का भी रेस्क्यू किया था। सामान्य कॉमन करैत के विपरीत, इस सांप का रंग पूरी तरह से अलग और चमकदार सफेद था। इस दुर्लभ सांप को बचाने के लिए सत्यम को जयनगर इलाके में स्थित एक गहरे कुएं के अंदर उतरना पड़ा था। कुएं के ठंडे और संकरे माहौल में उतरकर इस दुर्लभ जीव को सुरक्षित बाहर निकालना उनके जीवन के सबसे साहसिक अभियानों में से एक रहा है।\n\nसुरक्षा उपकरणों का महत्व और वन विभाग का समन्वय\nअपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए सत्यम स्वीकार करते हैं कि पहले वे बिना किसी विशेष उपकरण या सुरक्षा किट के ही सांपों को पकड़ने चले जाते थे। लेकिन समय, प्रशिक्षण और व्यावहारिक अनुभव ने उन्हें सुरक्षा का असली पाठ सिखाया। अब वे हर रेस्क्यू के दौरान आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करते हैं। उनका मानना है कि रेस्क्यू ऐसा होना चाहिए जिससे न तो सांप को कोई चोट पहुंचे और न ही रेस्क्यू करने वाले की जान खतरे में पड़े। वे कहते हैं कि हर परिस्थिति में एक ही उपकरण का उपयोग नहीं किया जा सकता; कुएं, नाली, पेड़ या घर की छतों पर रेस्क्यू के लिए अलग-अलग तकनीकों और औजारों की आवश्यकता होती है। इसके अलावा वे लोगों को सख्त हिदायत देते हैं कि सांपों को पकड़ना कोई खेल या सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने का जरिया नहीं होना चाहिए। वन्यजीव संरक्षण के कड़े कानून हैं और वन विभाग से समन्वय स्थापित किए बिना तथा उचित प्रशिक्षण के बिना ऐसा करना गैरकानूनी और जानलेवा साबित हो सकता है। सत्यम ने बताया कि उनके एक करीबी साथी की सर्पदंश के कारण मौत हो गई थी, जिसके बाद से वे सुरक्षा को लेकर और अधिक गंभीर और सतर्क हो गए हैं।\n\nसरगुजा के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग प्रजातियों का बसेरा\nसत्यम के गहन अवलोकन के अनुसार, सरगुजा संभाग के भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर सांपों की प्रजातियों का वितरण भी अलग-अलग देखने को मिलता है। उदाहरण के लिए, डिगमा, सकालो और लटोरी जैसे इलाकों में स्पेक्टेकल्ड कोबरा की संख्या काफी अधिक पाई जाती है। वहीं दूसरी ओर, गंगापुर से लेकर चंद्रा क्षेत्र की तरफ जाने पर कॉमन करैत सांपों की मौजूदगी बहुत ज्यादा देखने को मिलती है। सत्यम इन क्षेत्रों के अनुसार ही अपनी तैयारी और रेस्क्यू की रणनीति तैयार करते हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में त्वरित और सुरक्षित कदम उठाया जा सके।\n\nशहरीकरण और वनों की कटाई से रिहायशी इलाकों की ओर पलायन\nरिहायशी इलाकों में सांपों के निकलने की बढ़ती घटनाओं पर सत्यम एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चिंता व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि लगातार सिकुड़ते जंगलों, जमीनों के तेजी से हो रहे बंटवारे, व्यावसायिक प्लॉटिंग और JCB मशीनों से हो रही अंधाधुंध खुदाई के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास पूरी तरह तबाह हो रहा है। जब सांपों और अन्य जीवों के रहने की जगह और उनके भोजन का प्राकृतिक स्रोत समाप्त हो जाता है, तो वे आश्रय और भोजन की तलाश में भटकते हुए इंसानी बस्तियों और घरों की तरफ रुख करने पर मजबूर हो जाते हैं। यही मुख्य कारण है कि आजकल शहरों और गांवों के रिहायशी इलाकों में सांपों के दिखाई देने के मामले पहले की तुलना में काफी बढ़ गए हैं।\n\nसरगुजा में वन्यजीवों के लिए 24 घंटे चलने वाले अस्पताल का सपना\nसत्यम द्विवेदी का अंतिम लक्ष्य केवल सांपों का रेस्क्यू करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे सरगुजा संभाग में बेजुबान वन्यजीवों की भलाई के लिए एक बड़ा और आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करना चाहते हैं। उनका सबसे बड़ा सपना एक अत्याधुनिक रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित करना है। वे कहते हैं कि जिस तरह इंसानों के इलाज के लिए शहरों में 24 घंटे अस्पताल और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होती हैं, उसी तरह घायल और बीमार वन्यजीवों व मूक पशुओं के लिए भी चौबीसों घंटे चालू रहने वाला एक चिकित्सा केंद्र होना चाहिए। इस केंद्र में घायल जीवों को तुरंत प्राथमिक उपचार, आश्रय और उनके पुनर्वास के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं मिल सकेंगी। सत्यम का संकल्प है कि वे जीवन के आखिरी क्षण तक वन्यजीवों के संरक्षण और उनकी सेवा के इस पुनीत कार्य में समर्पित रहेंगे।\n\nइसका आप पर असर\nयह समाचार रिहायशी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए वन्यजीवों के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व बनाए रखने के व्यावहारिक तरीकों को समझने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।\n\n• छत्तीसगढ़ में: सरगुजा और इसके आसपास के जिलों में रहने वाले लोग सांप दिखने पर स्थानीय हेल्पलाइन या प्रशिक्षित रेस्क्यूअर से संपर्क कर सकते हैं, जिससे मानवीय हादसों और बेजुबान जीवों की मौत, दोनों को रोका जा सकेगा।\n• पूरे भारत में: यह रिपोर्ट देश के सभी नागरिकों को यह सीख देती है कि बिना उचित प्रशिक्षण और वन विभाग की अनुमति के सांपों को पकड़ने का प्रयास न करें, क्योंकि शौकिया तौर पर या सोशल मीडिया के लिए ऐसा करना वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत गंभीर अपराध है और जानलेवा भी हो सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nरिहायशी इलाकों में सांपों के प्रवेश और इंसानों के साथ उनके बढ़ते टकराव के पीछे गंभीर पर्यावरणीय कारण और मानवीय गतिविधियां जिम्मेदार हैं।\n\n• आवास का विनाश: तेजी से हो रही वनों की कटाई, जमीनों के व्यावसायिक प्लाटिंग और निर्माण कार्यों के कारण सांपों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो गया है, जिससे वे सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।\n• JCB की खुदाई: बड़े पैमाने पर JCB मशीनों से भूमि की खुदाई किए जाने के कारण जमीन के नीचे छिपे सांपों के बिल और ठिकाने पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, जिससे वे बाहर निकलने पर मजबूर होते हैं।\n• भोजन की कमी: प्राकृतिक जंगलों और झाड़ियों के साफ होने से सांपों के भोजन के मुख्य स्रोत भी इंसानी बस्तियों के कचरे के पास आ जाते हैं, जिससे सांप भी उनके पीछे-पीछे वहां पहुंच जाते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सत्यम द्विवेदी को किस नाम से जाना जाता है?\nउन्हें छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में लोग प्यार से 'स्नेक मैन' के नाम से जानते हैं।\n\n2. उन्होंने अब तक कितने सांपों का रेस्क्यू किया है?\nसत्यम ने बीते 10 वर्षों में 10,000 से अधिक सांपों को सुरक्षित बचाया है।\n\n3. सत्यम वर्तमान में कौन सी पढ़ाई कर रहे हैं?\nवे वर्तमान में एलएलबी (LLB) की पढ़ाई कर रहे हैं और बार काउंसिल परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।\n\n4. उन्होंने अपने पहले रेस्क्यू की शुरुआत कब की थी?\nउन्होंने लॉकडाउन से ठीक पहले अपने एक दोस्त के घर में निकले सांप का सुरक्षित रेस्क्यू किया था।\n\n5. सत्यम का भविष्य का सबसे बड़ा सपना क्या है?\nउनका सपना सरगुजा में वन्यजीवों के लिए 24 घंटे चलने वाला एक आधुनिक रेस्क्यू और रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित करना है।\n\nप्रेरणा और सबक\nसत्यम द्विवेदी की असाधारण यात्रा युवाओं को समाज सेवा और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित होने की प्रेरणा देती है।\n\n• जुनून और शिक्षा का संतुलन: सत्यम ने अपनी वकालत (LLB) की पढ़ाई और बार काउंसिल की तैयारी के साथ-साथ वन्यजीव सेवा के अपने जुनून को बखूबी संभाला है, जो सिखाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से सब संभव है।\n• निरंतर सीखते रहना: बिना किसी शुरुआती ज्ञान के शुरुआत करने वाले सत्यम ने किताबों और ऑनलाइन माध्यमों से स्व-अध्ययन किया और खुद को एक विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया।\n• सुरक्षा को प्राथमिकता: शुरुआती गलतियों और एक साथी के साथ हुई दुर्घटना से सीख लेते हुए सत्यम ने सुरक्षा उपकरणों के महत्व को समझा और हमेशा सुरक्षा को पहली प्राथमिकता देने की सीख दी।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-09-12",
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