# सरगुजा के जंगलों से थाली तक शारू साग का सफर, जानिए सदियों पुरानी सुकटी बनाने का तरीका

> छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में ग्रामीण जंगलों से प्राकृतिक शारू साग लाकर धूप में सुखाकर सुकटी तैयार करते हैं। चावल के पसिया और टमाटर के साथ पकने वाला यह पारंपरिक व्यंजन आज भी ग्रामीण खानपान की पहचान बना हुआ है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/surguja-ke-jngalon-se-thali-taka-sharu-saga-ka-saphara-janie-sadiyon-purani-sukti-banane-ka-tarika-42055 · **Language:** Hindi
**Tags:** सरगुजा, शारू साग, शारू सुकटी, छत्तीसगढ़ खानपान, पारंपरिक व्यंजन, पसिया

छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल के वनाच्छादित ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संपदा से जुड़ा पारंपरिक खानपान आज भी पूरी मजबूती से कायम है। जंगलों में कुदरती तौर पर उगने वाली वनस्पतियों को भोजन का अहम हिस्सा बनाने की परंपरा यहां पीढ़ियों से चली आ रही है। इसी कड़ी में शारू साग का नाम प्रमुखता से लिया जाता है, जिसे ग्रामीण जंगलों से जुटाकर अपनी दैनिक थाली का विशेष व्यंजन बनाते हैं।

## पारंपरिक संरक्षण और सुकटी बनाने की प्रक्रिया
असकरा निवासी रामनाथ किंडो के अनुसार, शारू साग वनों में स्वतः उगता है, जिसे ग्रामीण ढूंढकर लाते हैं। ताजे साग को धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है, जिसके बाद इसे स्थानीय भाषा में सुकटी कहा जाता है। पूरी तरह सूखने पर इसे गुड़ा यानी पीसकर सुरक्षित रख लिया जाता है, जिससे इसे भविष्य में जब चाहें तब पकाया जा सके। यह कोई नया प्रचलन नहीं है, बल्कि ग्रामीण इसे अपने पुरखों के जमाने से खाते आ रहे हैं। आसपास के गांवों के लोग भी इस वनस्पति की पहचान रखते हैं और विभिन्न मौसमों में अपनी जरूरत के हिसाब से इसका उपयोग करते हैं।

## पकाने का अनूठा तरीका और पसिया का प्रयोग
शारू सुकटी को खास स्वाद देने के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों का इस्तेमाल होता है। इसे साधारणतया तेल, लहसुन, मिर्च और टमाटर के साथ तैयार किया जाता है। ग्रामीण महिला सुखमनी ने पकाने की विधि साझा करते हुए बताया कि शारू साग को तेल में लहसुन और मिर्च के तड़के के साथ भूनते हैं और फिर उसमें टमाटर मिलाते हैं। इसके उपरांत आवश्यकतानुसार पानी और चावल का पसिया डाला जाता है। यदि टमाटर मौजूद न हो, तो भी पसिया डालकर सब्जी बनाई जाती है। ग्रामीणों का स्पष्ट मानना है कि चावल का पसिया इस व्यंजन को गाढ़ापन प्रदान करने के साथ-साथ इसका स्वाद भी काफी बढ़ा देता है।

## ग्रीष्मकाल में उपलब्धता और बाहरी लोगों में आकर्षण
सुखाकर रखी गई शारू सुकटी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे भीषण गर्मी के दिनों में भी आसानी से बनाया जा सकता है, जब हरी सब्जियों की किल्लत रहती है। सरगुजा के गांवों में जब भी अन्य शहरों से बाहरी लोग पहुंचते हैं, तो वे इस अनूठे व्यंजन के विषय में खासी उत्सुकता दिखाते हैं। ग्रामीण उन्हें इसकी खासियत बताते हैं और कई आगंतुक इसका स्वाद चखकर इसे खूब सराहते हैं। जंगल की यह सौगात आज भी सरगुजा के ग्रामीण जीवन और भोजन संस्कृति का गौरव बनी हुई है।

## इसका आप पर असर
पारंपरिक वनस्पति आधारित व्यंजनों और खानपान की पुरानी तकनीकों को समझने के लिहाज से यह जानकारी उपयोगी है।

- **सरगुजा में:** ग्रामीण परिवारों के लिए यह साग गर्मियों के समय खाद्य सुरक्षा और पौष्टिकता का सहज विकल्प मुहैया कराता है। ग्रामीण बिना किसी अतिरिक्त खर्च के जंगलों से पोषण प्राप्त करते हैं।
- **भारत में:** देश भर के खाद्य प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए यह पारंपरिक फूड प्रिजर्वेशन का शानदार उदाहरण है। यह दर्शाता है कि बिना कृत्रिम साधनों के भी भोजन को महीनों सुरक्षित रखा जा सकता है।
- **रसोई में इस्तेमाल:** सब्जी में गाढ़ापन और स्वाद बढ़ाने के लिए पके चावल के पानी यानी पसिया का उपयोग एक बेहतरीन घरेलू उपाय है। इससे भोजन की पौष्टिकता भी बढ़ती है।
- **पर्यटकों के लिए:** छत्तीसगढ़ या सरगुजा भ्रमण पर जाने वाले लोग स्थानीय देहाती खानपान का प्रामाणिक स्वाद ले सकते हैं। स्थानीय संस्कृति को करीब से जानने का यह अनोखा माध्यम है।

## ऐसा क्यों हुआ
सरगुजा के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाले शारू साग को सुखाकर सुकटी बनाने की यह परंपरा कई ऐतिहासिक और मौसमी कारणों से विकसित हुई है।

- **मौसमी उपलब्धता की कमी:** गर्मियों के दिनों में वनांचल में ताजी हरी सब्जियों की भारी कमी हो जाती थी। इस समस्या से निपटने के लिए पूर्वजों ने साग को सुखाकर सुकटी बनाकर रखने की व्यवस्था बनाई।
- **पारंपरिक ज्ञान का संचरण:** पीढ़ियों से पूर्वजों द्वारा इस वनस्पति की पहचान और संरक्षण का ज्ञान अगली पीढ़ी को सौंपा जाता रहा है। यही वजह है कि आज भी ग्रामीण इसे पहचानकर संजोते हैं।
- **सीमित संसाधनों में स्वाद:** दूरदराज के क्षेत्रों में हर समय बाजार की सामग्री उपलब्ध नहीं होती थी। इसलिए टमाटर न होने पर चावल के पसिया का उपयोग स्वाद और गाढ़ेपन के विकल्प के रूप में किया जाने लगा।

## सवाल-जवाब

### 1. शारू साग कहां पाया जाता है?
शारू साग सरगुजा के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है, जिसे ग्रामीण खोजकर लाते हैं।

### 2. शारू सुकटी कैसे तैयार की जाती है?
ताजे शारू साग को धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है और सूखने के बाद इसे पीसकर या गुड़ा बनाकर सुरक्षित रखा जाता है।

### 3. शारू सुकटी को पकाने में किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
इसे तेल, लहसुन, मिर्च, टमाटर, पानी और चावल के पसिया के साथ पकाया जाता है।

### 4. सब्जी में पसिया का क्या काम होता है?
पसिया सब्जी को गाढ़ापन देता है और टमाटर न होने पर भी स्वाद को बढ़ा देता है।

### 5. क्या शारू सुकटी को गर्मियों में भी खाया जा सकता है?
हां, पहले से सुखाकर रखी गई सुकटी से गर्मी के मौसम में भी आसानी से सब्जी बनाई जा सकती है।

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